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                <title>विचार मित्र - Tarun Mitra</title>
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                <title>बिहार में पत्नी को क्या कहते हैं लोग?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बिहार  : 'कोस-कोस पर बदले पानी, चार कोस पर वाणी'; इस लाइन को तो आपने कई बार सुना ही होगा। यह लाइन यह बताता है कि भारत जैसे देश में जो विविधताओं से भरा है, वहां आपको हर कोस पर पानी का स्वाद बदला हुआ मिल जाएगा तो वहीं चार कोस पर आपको वाणी यानी लोगों के बात करने का तरीका, उनकी बोली और भाषा बदली हुई मिल जाएगी। आज इस आर्टिकल में हम वाणी पर बात करेंगे। आपने नोटिस किया होगा कि हर राज्य में अलग भाषा है और हर एक राज्य में भी कई बोलियां देखने को मिल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/home/thought-friends/what-do-people-call-wife-in-bihar/article-151828"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/patni.jpeg" alt=""></a><br /><p>बिहार  : 'कोस-कोस पर बदले पानी, चार कोस पर वाणी'; इस लाइन को तो आपने कई बार सुना ही होगा। यह लाइन यह बताता है कि भारत जैसे देश में जो विविधताओं से भरा है, वहां आपको हर कोस पर पानी का स्वाद बदला हुआ मिल जाएगा तो वहीं चार कोस पर आपको वाणी यानी लोगों के बात करने का तरीका, उनकी बोली और भाषा बदली हुई मिल जाएगी। आज इस आर्टिकल में हम वाणी पर बात करेंगे। आपने नोटिस किया होगा कि हर राज्य में अलग भाषा है और हर एक राज्य में भी कई बोलियां देखने को मिल जाती हैं। ऐसे में अलग-अलग जगहों या राज्यों में एक ही रिश्ते के अलग-अलग नाम भी देखने को मिल जाते हैं। आज हम आपको यह बताएंगे कि बिहार राज्य में पत्नी को लोग क्या कहकर बुलाते हैं।</p>
<p>बिहार में पत्नी को क्या कहते हैं लोग?<br />पत्नी एक बहुत ही कॉमन शब्द है मगर अलग-अलग जगहों पर इसी रिश्ते के अलग-अलग नाम भी है। कहीं पत्नी को बायको कहा जाता है तो कहीं पर जोरू या फिर लुगाई कहा जाता है मगर इस आर्टिकल में हम आपको यह बताएंगे कि बिहार में पत्नी को क्या कहकर बुलाया जाता है। आपको बता दें कि बिहार में पत्नी को पत्नी नहीं बल्कि "मेहरारू" कहकर बुलाया जाता है। बिहार के साथ ही उत्तर प्रदेश में भी कुछ जगहों पर आपको यही शब्द सुनने को मिल सकता है। इसका मतलब यह है कि बिहार राज्य में और यूपी के कुछ जगहों पर पत्नी को लोग मेहरारू कहकर बुलाते हैं। इसके अलावा घर की बहू के लिए 'कनिया' शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।</p>
<p>अन्य राज्य में पत्नी को क्या कहते हैं?<br />अब आपने यह जान लिया है कि बिहार में पत्नी को क्या कहा जाता है। इसके साथ ही आप शायद आप भी यह जानना चाहते होंगे कि बिहार के अलावा दूसरे राज्यों में पत्नी को क्या कहकर बुलाया जाता है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक हरियाणा में पत्नी को 'लुगाई' कहकर बुलाया जाता है। इसके अलावा पंजाब में पत्नी को लोग 'वोट्टी' कहकर पुकारते हैं तो वहीं बंगाल और त्रिपुरा में पत्नी को 'बोउ' कहा जाता है। इसके अलावा महाराष्ट्र में मराठी में पत्नी को 'बायको' कहकर पुकारते हैं। वहीं कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक केरल में पत्नी को 'भार्या' कहकर बुलाया जाता है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार मित्र</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 06:42:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
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                <title>व्यंग्य: जुगाड़ के अस्तबल में रेशमी गधे</title>
                                    <description><![CDATA[<p><em><strong>डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त'</strong></em></p>
<p>वह जो नुक्कड़ वाले शर्मा जी हैं न, उनके चेहरे पर कल सुबह से एक अजीब सी रूहानी चमक तैर रही है। कल ही उनके सुपुत्र को शहर के सबसे नामी कॉलेज में 'सहानुभूति कोटे' से दाखिला मिला है। दाखिला तो खैर क्या मिला, विधाता ने उनकी सात पीढ़ियों के पाप एक झटके में धो दिए। शर्मा जी लाठी टेककर गली-गली इस तरह इठलाते घूम रहे हैं जैसे उन्होंने मुग़ल सल्तनत का आखिरी किला फतह कर लिया हो। उनका सीना छप्पन इंच से बढ़कर सीधे कुतुब मीनार की ऊंचाई को छूने लगा है। समाज का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/home/thought-friends/silky-donkeys-in-the-stables-of-satire-jugaad/article-151705"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/gadha.jpg" alt=""></a><br /><p><em><strong>डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त'</strong></em></p>
<p>वह जो नुक्कड़ वाले शर्मा जी हैं न, उनके चेहरे पर कल सुबह से एक अजीब सी रूहानी चमक तैर रही है। कल ही उनके सुपुत्र को शहर के सबसे नामी कॉलेज में 'सहानुभूति कोटे' से दाखिला मिला है। दाखिला तो खैर क्या मिला, विधाता ने उनकी सात पीढ़ियों के पाप एक झटके में धो दिए। शर्मा जी लाठी टेककर गली-गली इस तरह इठलाते घूम रहे हैं जैसे उन्होंने मुग़ल सल्तनत का आखिरी किला फतह कर लिया हो। उनका सीना छप्पन इंच से बढ़कर सीधे कुतुब मीनार की ऊंचाई को छूने लगा है। समाज का दस्तूर भी बड़ा कातिल है हुजूर, जब तक जेब में सिक्का खनकता नहीं, तब तक लोग आपकी खंकार को भी बदतमीजी मान लेते हैं। मगर आज वही शर्मा जी जब सरेराह पान की पीक थूकते हैं, तो मोहल्ले के बुद्धिजीवी उसमें भी कलात्मकता और आधुनिक विद्रोही चेतना की तलाश करने लगते हैं। यह नए जमाने का नया शास्त्र है, जहां असफलता को यदि चाशनी में डुबोकर बेचा जाए, तो लोग उसे ईश्वरीय प्रसाद मानकर माथे से लगा लेते हैं।</p>
<p>हमारे देश में तरक्की का पैमाना अब अक्ल से नहीं, बल्कि इस बात से तय होता है कि आप अपनी बेअक्ली को कितने ऊंचे सुर में गा सकते हैं। जिस लड़के ने जीवन भर सिर्फ मोबाइल की स्क्रीन पर अंगूठे घिसे हों, वह अचानक ज्ञान का ऐसा कल्पवृक्ष बन जाता है कि बड़े-बड़े धुरंधर उसके सामने पानी भरने लगते हैं। डिग्रियों के इस थोक बाजार में मेधावी बच्चे दीवारों पर सिर पटक रहे हैं और जुगाड़ू लोग मलाई काट रहे हैं। कुम्हार का गधा भी अगर रेशमी झूल ओढ़ ले, तो लोग उसे अस्तबल का सबसे शरीफ घोड़ा मानने को मजबूर हो जाते हैं। व्यवस्था की मेज पर बैठे हुक्मरान ऐसी फाइलें तैयार करते हैं जिनमें भुखमरी का इलाज केवल विज्ञापनों की रंगीन तस्वीरों में ढूंढ लिया जाता है। असलियत यह है कि जब तक आम आदमी की रीढ़ की हड्डी को तोड़कर उसे सीधा खड़ा होने का हुनर सिखाया जाएगा, तब तक ऐसी ही चमत्कारिक सफलताएं चौराहों पर नाचती रहेंगी।</p>
<p>चाय की टपरी पर बैठे मुंशी जी कल कह रहे थे कि कलयुग में सच बोलना वैसा ही है जैसे जलती भट्टी में नंगे बदन कूद जाना। उनकी बात में जो कड़वाहट थी, वह दरअसल उनके अपने अनुभवों की सड़ी हुई फसल थी। आज के दौर में ईमानदारी एक ऐसा पुराना सिक्का बन चुकी है जिसे भिखारी भी लेने से मना कर देता है। अगर आपको इस रंगमंच पर टिकना है, तो अपने जमीर को किसी कबाड़ी की दुकान पर गिरवी रखना ही होगा। जो जितना बड़ा बगुला भगत है, उसकी कद्र उतनी ही ज्यादा है। गंगा नहाने से पाप धुलते हैं या नहीं, यह तो विधाता जाने, पर हां, सफेद कुर्ते-पाजामे की क्रीज अगर दुरुस्त हो, तो समाज आपके हर काले कारनामे को शिष्टाचार का नाम दे देता है। लोग भेड़चाल के इस कदर आदी हो चुके हैं कि अगर आगे वाला कुएं में कूदेगा, तो पीछे वाले अपनी बारी के लिए बकायदा कतार में खड़े होकर कूपन कटवाएंगे।</p>
<p>बचपन में पढ़ा था कि मेहनत का फल मीठा होता है, पर बड़े होकर मालूम हुआ कि वह फल दरअसल सिर्फ उन्हीं को मिलता है जो पेड़ की रखवाली करने वालों की चमचागिरी में माहिर होते हैं। आज का युवा किताबों के पन्ने नहीं पलटता, वह तो बस रील की दुनिया में अपने वजूद के चीथड़े उड़ा रहा है। अंगूठे के एक स्वाइप से जिंदगी की दिशा तय हो रही है। देश की सबसे बड़ी अदालतें और दफ्तर चाहे जो कहें, पर असली फैसले तो अब सोशल मीडिया की उन संकरी गलियों में होते हैं जहां नफरत मुफ्त में बंटती है और समझदारी पर टैक्स लगा दिया जाता है। कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूंढे बन माहि वाली हालत इस पूरे तंत्र की हो चुकी है। हम बाहर की चकाचौंध में उस अंधेरे को भूल चुके हैं जो धीरे-धीरे हमारी अगली नस्लों के भीतर घर करता जा रहा है।</p>
<p>बाजार ने हमारे रिश्तों की ऐसी बोलियां लगाई हैं कि अब सगे भाई भी एक-दूसरे से मिलने का समय बकायदा डायरी देखकर तय करते हैं। संवेदनाएं अब केवल शोक संदेशों के व्हाट्सएप स्टेटस तक सिमट कर रह गई हैं। रोने के लिए भी अब रुदालियों की जरूरत नहीं पड़ती, बस एक दुखद इमोजी भेजिए और अपनी सामाजिक जिम्मेदारी से मुक्त हो जाइए। कफन बेचने वाले भी अब लाश की लंबाई देखकर कफन का कपड़ा तय करते हैं कि कहीं मुनाफा कम न रह जाए। इस अंधी दौड़ में जो पीछे छूट गया, वह सिर्फ एक संख्या बनकर रह जाता है, जिसे सरकारी आंकड़ों की फाइलों में बहुत करीने से दफन कर दिया जाता है। जब तक इंसानियत का तकाजा पैसे की खनक से तौला जाएगा, तब तक कोई भी कबीर या तुलसी इस समाज की सूखी चेतना को दोबारा हरा नहीं पाएगा।</p>
<p>नेताओं की रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ को देखकर अक्सर सोचता हूं कि क्या वाकई इन लोगों को देश की चिंता है? पर जब करीब जाकर देखो, तो मालूम पड़ता है कि वहां तो सिर्फ पचास रुपये और एक पैकेट पूड़ी-सब्जी का खेल चल रहा था। भूखे पेट को देश की संप्रभुता से ज्यादा रोटी के गोल आकार में दिलचस्पी होती है। सिंहासन पर बैठे लोग जानते हैं कि जब तक जनता को बुनियादी जरूरतों के जाल में उलझाए रखोगे, तब तक वे कभी बड़े सवाल पूछने की जुर्रत नहीं करेंगे। भेड़ें कभी अपने चरवाहे से यह नहीं पूछतीं कि उन्हें कसाईखाने क्यों ले जाया जा रहा है, वे तो बस इस बात से खुश रहती हैं कि रास्ते में थोड़ी हरी घास चबाने को मिल गई। प्रजातंत्र का यह तमाशा हर पांच साल बाद सजता है, जहां मदारी बदल जाते हैं पर बंदरों का नाच वही पुराना रहता है।</p>
<p>एक दफ्तर के बाबू से जब मैंने पूछा कि भाई साहब, मेरी फाइल आगे क्यों नहीं खिसक रही, तो उन्होंने चश्मे के ऊपर से देखते हुए बड़े दार्शनिक अंदाज में कहा कि हुजूर, फाइलों के भी पैर होते हैं, इन्हें जब तक लक्ष्मी का स्पर्श नहीं मिलता, ये एक इंच आगे नहीं बढ़तीं। उनकी इस बात ने मुझे भीतर तक झकझोर दिया। भ्रष्टाचार अब कोई बुराई नहीं, बल्कि हमारे प्रशासनिक तंत्र का अनिवार्य लुब्रिकेंट बन चुका है। इसके बिना पहिए जाम हो जाते हैं। ईमानदारी की दुहाई देने वाले लोग अक्सर एकांत में बैठकर अपनी रेट लिस्ट तय कर रहे होते हैं। चौपायों की इस बस्ती में अगर आप दो पैरों पर सीधे चलने की जिद करेंगे, तो लोग आपको चिड़ियाघर का कोई अजूबा समझकर आपकी लाचारी पर हंसेंगे और तालियां बजाएंगे।</p>
<p>हम सब इस बहती गंगा में हाथ धोने के इतने आदी हो चुके हैं कि अब हमें पानी का मटमैलापन ही उसका असली रंग लगने लगा है। जमीर की अदालत में जब गवाह ही मुकर जाएं, तो जज भी क्या फैसला सुनाए। शर्मा जी का बेटा अब एक बड़ी कंपनी में अफसर बन चुका है और मुंशी जी की चाय की दुकान कर्ज के बोझ तले बंद हो चुकी है। यही इस युग का सबसे बड़ा सत्य है। इस सड़ी हुई व्यवस्था के मलबे पर बैठकर जो लोग आज भी क्रांतियों के गीत गा रहे हैं, वे दरअसल खुद को तसल्ली देने के अलावा और कुछ नहीं कर रहे। जब तक हम इस पाखंड की चादर को फाड़कर फेंक नहीं देते, तब तक हिंदी साहित्य क्या, साक्षात सरस्वती भी आकर हमारा उद्धार नहीं कर सकतीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार मित्र</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 14:03:57 +0530</pubDate>
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                <title>पेट्रोल में एथनाल : आख़िर ये माजरा क्या है ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>निर्मल रानी</strong><br />भारत में इन दिनों पेट्रोल में  20 प्रतिशत एथनाल का मिश्रण किये जाने यानी ई 20 पेट्रोल के इस्तेमाल से होने वाले नुक़्सान को लेकर बहस छिड़ गयी है। इसके प्रयोग से देश भर से वाहनों के इंजन ख़राब होने की ख़बरें मीडिया में आने लगी हैं। ई20 उपभोक्ता अब न केवल इसकी शिकायतें करने लगे हैं बल्कि जगह जगह इसे लेकर धरना प्रदर्शन भी होने लगे हैं। गत दिनों तो दिल्ली के जंतर मंतर पर भी  ई 20 मिश्रित पेट्रोल के विरोध में प्रदर्शन किया गया।और इससे वाहनों को होने वाले नुक़्सान को लेकर सरकार को अवगत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/home/thought-friends/what-is-the-matter-of-ethanol-in-petrol/article-151692"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/ethenol1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>निर्मल रानी</strong><br />भारत में इन दिनों पेट्रोल में  20 प्रतिशत एथनाल का मिश्रण किये जाने यानी ई 20 पेट्रोल के इस्तेमाल से होने वाले नुक़्सान को लेकर बहस छिड़ गयी है। इसके प्रयोग से देश भर से वाहनों के इंजन ख़राब होने की ख़बरें मीडिया में आने लगी हैं। ई20 उपभोक्ता अब न केवल इसकी शिकायतें करने लगे हैं बल्कि जगह जगह इसे लेकर धरना प्रदर्शन भी होने लगे हैं। गत दिनों तो दिल्ली के जंतर मंतर पर भी  ई 20 मिश्रित पेट्रोल के विरोध में प्रदर्शन किया गया।और इससे वाहनों को होने वाले नुक़्सान को लेकर सरकार को अवगत कराया गया। भारत में हो रहे इसके विरोध व इसके इस्तेमाल से आ रही परेशानियों व वाहनों को हो रहे कथित नुक़्सान की ख़बरों के बीच पड़ोसी देश भूटान ने भी भारतीय तेल कंपनियों से एथनाल मिश्रित ई 20 पेट्रोल वहां न भेजने व केवल पूर्व में भेजा जा रहा केवल शुद्ध XP100 जैसे पेट्रोल की आपूर्ति करने को कहा है।  भूटान द्वारा इसका कारण यह बताया गया है कि पेट्रोल पंपों पर भण्डारण के पुराने भूमिगत फ़्यूल टैंक में ई 20 पेट्रोल के भण्डारण की वजह से पानी के रिसाव का जोखिम है जिससे एथनाल मिश्रित ईंधन ख़राब हो सकता है। क्योंकि इथेनॉल की  प्रवृति नमी को आकर्षित करने वाली होती है और वातावरण से नमी लेने पर ईंधन की गुणवत्ता घट सकती है और इंजन में अनेक प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा पहाड़ी इलाक़े में स्टोरेज और सप्लाई श्रृंखला को आधुनिक करना भी आवश्यक होगा, जिसमें तत्काल परिवर्तन करना जोखिमपूर्ण माना गया। भूटान द्वारा अपनी आपत्ति में पहाड़ी रास्तों में वाहन के परफ़ार्मेंस पर भी फ़र्क़ पड़ने का संदेह व्यक्त किया गया है।</p>
<p>भारत में भी देश भर से गाड़ियों के ख़राब होने,गाड़ियों की पेट्रोल टंकी के गलने व ज़ंग लगने,माइलेज कम होने व इंजन के ख़राब होने तक की शिकायतें आने लगी हैं। और उधर इसी ई 20 पेट्रोल की आपूर्ति व खपत की आड़ में शुद्ध पेट्रोल यानी XP100 का मूल्य 167 रूपये प्रति लीटर तक हो गया है। एथनाल के उपयोग से केवल गाड़ियां ही ख़राब नहीं हो रही हैं बल्कि इसके उत्पादन में भी पानी का भी बेतहशा दुरूपयोग किया जा रहा है जिससे भविष्य में यह जलसंकट का कारण भी बन सकता है। ग़ौरतलब है कि एथनॉल  का उत्पादन चावल ,मक्का और गन्ना आदि की फ़सलों से होता है। और इन सभी  फ़सलों की पैदावार में बेतहाशा पानी का इस्तेमाल होता है। इसके बाद जब इसी फ़सल से एथनॉल बनाया जाता है तो इसमें और भी ज़्यादा पानी ख़र्च होता है। मिसाल के तौर पर चावल से 1 लीटर एथनॉल बनाने में लगभग 10790 लीटर पानी ख़र्च होता है जबकि मक्का से 1 लीटर एथनॉल बनाने में क़रीब 4670 लीटर पानी की खपत होती है इसी तरह गन्ने से  मात्र 1 लीटर एथनाल बनाने में तक़रीबन 3630 लीटर पानी लगता है। गोया पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण की नीति देश के जल बचाने के अभियान के ठीक विरुद्ध जलसंकट खड़ा करने में भी सहायक हो सकती है।  ज़रा सोचिये कि जब E20 पेट्रोल की आपूर्ति में जल का इतना इस्तेमाल होता है तो यदि भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी की इच्छानुसार पेट्रोल में 85 प्रतिशत मिश्रण कर E85 की आपूर्ति की योजना पर अमल किया गया तो भारत जैसे उस देश में पानी के अकाल को कैसे टाला जा सकेगा जहां के कई इलाक़ों में पहले ही पीने का पानी लोगों को मयस्सर नहीं है ? हालांकि अब ख़बर यह भी आ रही है कि भारी विरोध के बीच केंद्र सरकार अब E25 पेट्रोल को लागू करने की योजना को फिलहाल टाल सकती है। सरकारी सूत्रों के अनुसार सरकार अब इस ई25 बदलाव को जल्दबाज़ी में लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीक़े से आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है।</p>
<p>देश में पेट्रोल में एथनाल के मिश्रण को लेकर कुछ ज़िम्मेदार लोगों के विरोधाभासी बयान भी सुनाई दे रहे हैं। इसकी वजह से आम लोगों में एथनाल के मिश्रण के प्रति अविश्वास व भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। मिसाल के तौर पर टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड और एग्ज़ीक्युटिव वाईस प्रेसिडेंट विक्रम गुलाटी ने अपने एक इंटरव्यू में पहले तो यह स्वीकार किया था कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से "बेशक फ़्यूल एफ़िशिएंसी में कुछ कमी आती है। " परन्तु बाद में उन्होंने ही प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इसे परफ़ॉर्मेंस के मामले में 'बेहतरीन ईंधन' भी बता डाला। इसी तरह भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के बायोफ़्यूलस के एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर अनुराग सरावगी ने भी स्वीकार किया था कि एथनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल करने से गाड़ियों की माइलेज में 30 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इतना ही नहीं बल्कि भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने गत 30 जून को सर्वोच्च न्यायलय में एक सुनवाई के दौरान अदालत को यह भी बताया कि E-20 पेट्रोल का इस्तेमाल फ़िलहाल एक प्रयोग के तौर पर किया जा रहा है। इस बात के सार्वजनिक होने के बाद तो लोगों में और भी आक्रोश फैल गया कि आख़िर प्रयोग के तौर पर उन्हें 'गिनी पिग' अर्थात प्रयोग किये जाने वाला जीव क्यों बनाया जा रहा है। उसके बाद  सरकार की तरफ़ से यह स्पष्टीकरण जारी किया गया कि अटॉर्नी जनरल के हवाले से कही जा रही बातें ग़लत हैं।</p>
<p>कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी एक तरह से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी की बातों का समर्थन करते हुए इस बात पर नाराज़गी जताई कि '3.6 करोड़ भारतीय कार मालिकों पर इसतरह के प्रयोग क्यों किए जा रहे हैं ? उन्होंने कहा कि अभी भारत में 10 में से 9 गाड़ियां E20 के अनुकूल नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह नीति आम सहमति के बिना और इसके  होने वाले परिणामों को समझे बग़ैर लागू कर दी गई है । खड़गे ने यह भी कहा, "हमारी गाड़ियों में इसे ज़बरदस्ती डालने के बाद आप राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन बदलने की इस प्रक्रिया को 'प्रयोग' नहीं कह सकते। उन्होंने कहा कि जब सरकार का अपना डेटा ही अभी तक तैयार नहीं है, तो नागरिकों को नुक़्सान साबित करने की चुनौती नहीं दी जा सकती । आम लोग 'गिनी पिग' नहीं हैं न ही  हमारी सड़कें टेस्ट ट्रैक हैं और देश के उपभोक्ताओं की जेबें सरकार के ट्रायल का बजट नहीं हैं। खड़गे ने E20 को वापस लेने मांग करते हुये कहा कि सरकार पहले इसे प्रयोग के योग्य,स्वीकार्य व प्रमाणित ईंधन साबित करे, फिर इसे प्रयोग करने की नीति लागू करें।"  निश्चित रूप से पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनाल मिश्रण देश के वाहन धारकों के लिये फ़िलहाल एक समस्या बन गया है और सरकार द्वारा इसके पक्ष में दिए जा रहे तर्कों व विशेषज्ञों व इस नीति के आलोचकों द्वारा उठाये जा रहे बिंदुओं के बीच देश समझ ही नहीं पा रहा है की आख़िर ये माजरा क्या है ? <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार मित्र</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:21:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Tarunmitra]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title> स्वप्न शास्त्र से जानिये  मृत परिजन देखना आने वाली खुशी का इशारा है या चेतावनी?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मृत परिजन : सपनों की दुनिया रहस्यमयी होती है। कई बार कुछ ऐसे सपने दिखते हैं जो नींद खुलने के बाद भी लंबे समय तक याद रहते हैं। खासकर जब कोई व्यक्ति सपने में खुद को रोते हुए या किसी दिवंगत परिजन के साथ रोते हुए देखता है। स्वप्न शास्त्र में ऐसे सपनों के अलग-अलग अर्थ बताए हैं, जो जीवन में आने वाले बदलाव, भावनात्मक स्थिति और भविष्य के संकेतों से जुड़े माने जाते हैं। चलिए जानते हैं सपने में खुद को रोते हुए देखना शुभ संकेत है या अशुभ। </p>
<p>मृत परिजन के साथ रोना</p>
<p>अगर सपने में आप किसी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/home/thought-friends/6a4daa5263a28/article-151661"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/kjnhbgfdsa.jpg" alt=""></a><br /><p>मृत परिजन : सपनों की दुनिया रहस्यमयी होती है। कई बार कुछ ऐसे सपने दिखते हैं जो नींद खुलने के बाद भी लंबे समय तक याद रहते हैं। खासकर जब कोई व्यक्ति सपने में खुद को रोते हुए या किसी दिवंगत परिजन के साथ रोते हुए देखता है। स्वप्न शास्त्र में ऐसे सपनों के अलग-अलग अर्थ बताए हैं, जो जीवन में आने वाले बदलाव, भावनात्मक स्थिति और भविष्य के संकेतों से जुड़े माने जाते हैं। चलिए जानते हैं सपने में खुद को रोते हुए देखना शुभ संकेत है या अशुभ। </p>
<p>मृत परिजन के साथ रोना</p>
<p>अगर सपने में आप किसी दिवंगत रिश्तेदार या परिवार के सदस्य के साथ रोते हुए दिखाई देते हैं, तो स्वप्न शास्त्र इसे सतर्क रहने का संकेत मानता है। ऐसा सपना आने वाले समय में मानसिक तनाव, पारिवारिक उलझनों या कुछ चुनौतियों की ओर इशारा करता है। कुछ लोग इसे पूर्वजों से जुड़े संकेत के रूप में भी देखते हैं। </p>
<p>बदनामी पर रोना</p>
<p>अगर सपने में आप अपने अपमान, आलोचना या बदनामी के कारण रो रहे हैं, तो यह सुनने में भले ही नकारात्मक लगे, लेकिन स्वप्न शास्त्र में इसे शुभ माना गया है। यह सपना प्रतिष्ठा, सम्मान और लोकप्रियता बढ़ने का संकेत देता है। आपको अपने कार्यक्षेत्र में पहचान और सराहना मिल सकती है।</p>
<p>अकेले रोना किस बात का संकेत</p>
<p>सपने में खुद को अकेले बैठकर या जोर-जोर से रोते हुए देखना भी सकारात्मक संकेत माना जाता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यह मान-सम्मान में बढ़ोतरी, अटके कामों में प्रगति और जीवन में किसी अच्छे बदलाव का इशारा हो सकता है। इसे सफलता के नए अवसर मिलने की संभावनाओं से भी जोड़ा गया है।</p>
<p>किसी के साथ रोना</p>
<p>अगर आप सपने में किसी दोस्त, रिश्तेदार या परिचित व्यक्ति के साथ रोते दिखाई देते हैं, तो इसे आर्थिक दृष्टि से शुभ बताया गया है। यह सपना धन लाभ, नए अवसर मिलने या आर्थिक स्थिति में सुधार का संकेत देता है। साथ ही यह रिश्तों में मजबूती और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ने की ओर भी इशारा कर सकता है।</p>
<p>मनोविज्ञान की नजर में</p>
<p>मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, सपने में रोना अक्सर व्यक्ति की भावनाओं से जुड़ा होता है। दिनभर का तनाव, दबाव, चिंता या मन की अनकही बातें सपनों के रूप में सामने आ सकती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे सपने कई बार मानसिक बोझ कम करने का माध्यम बनते हैं, जिससे व्यक्ति को भावनात्मक राहत महसूस होती है।</p>
<p>हालांकि, अगर कोई सपना बार-बार दिख रहा है, तो घबराने के बजाय अपनी मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर ध्यान दें</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार मित्र</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 07:17:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इस श्राप के कारण हजारों वर्षों तक कोयल बनकर रहीं माता सती</title>
                                    <description><![CDATA[<p>माता सती : क्या आपने कोकिला व्रत के बारे में सुना है, जो माता पार्वती के कोकिला रूप को समर्पित है। ये व्रत 28 जुलाई 2026 को रखा जाएगा। मान्यता है इस व्रत को रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इतना ही नहीं ये व्रत कुंवारी कन्याओं के लिए भी वरदान माना जाता है। कोकिला व्रत माता सती के उस कठिन तप की याद दिलाता है जब देवी सती हजारों वर्षों तक कोयल बनकर रही थीं। इसी कारण से इस व्रत में मिट्टी से बनाई गई कोयल की मूर्ति की पूजा जरूरी की जाती है। कहते</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/home/thought-friends/%E0%A4%87%E0%A4%B8-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AA-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%B9%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%AF%E0%A4%B2-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%80/article-151474"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/sati.jpg" alt=""></a><br /><p>माता सती : क्या आपने कोकिला व्रत के बारे में सुना है, जो माता पार्वती के कोकिला रूप को समर्पित है। ये व्रत 28 जुलाई 2026 को रखा जाएगा। मान्यता है इस व्रत को रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इतना ही नहीं ये व्रत कुंवारी कन्याओं के लिए भी वरदान माना जाता है। कोकिला व्रत माता सती के उस कठिन तप की याद दिलाता है जब देवी सती हजारों वर्षों तक कोयल बनकर रही थीं। इसी कारण से इस व्रत में मिट्टी से बनाई गई कोयल की मूर्ति की पूजा जरूरी की जाती है। कहते हैं माता सती को कोकिला यानी कोयल का रूप भगवान शिव द्वारा दिए गए श्राप के कारण मिला था। जानिए किस भूल के कारण भगवान शिव ने अपनी अर्धांगिनी को ये भयंकर श्राप दिया था। क्या है माता सती के कोकिला रूप का रहस्य?</p>
<p><br />माता सती की एक भूल<br />माता सती के कोयल बनने की कथा उस समय से जुड़ी है जब देवी सती के पिता दक्ष ने अपने यहां यज्ञ का आयोजन किया था। इस यज्ञ में उन्होंने समस्त देवी देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन भगवान शिव और अपनी बेटी सती को नहीं बुलाया। जब देवी सती को इस बात का पता चला तो वो महादेव से यज्ञ में शामिल होने की जिद्द करने लगीं। भगवान शिव ने सती को बहुत समझाया कि बिना बुलाए इस यज्ञ में जाना ठीक नहीं, लेकिन माता सती नहीं मानीं और वो यज्ञ में शामिल होने के लिए चली गईं।</p>
<p>मिला कोयल बनने का श्राप<br />माता सती जैसे ही अपने पिता दक्ष के यज्ञ में पहुंची तो उनके पिता ने उनका और उनके पति यानी भगवान शिव का अनादर किया। अपने पति का अपमान माता सती सहन नहीं कर पाईं और उन्होंने क्रोध में यज्ञ की अग्नि में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए। जब भगवान शिव को इस बात का पता चला तो उन्होंने दक्ष को तो दंडित किया ही, साथ ही देवी सती को भी उनकी आज्ञा का पालन न करने के लिए हजारों वर्षों तक कोयल बनकर रहने का श्राप दे दिया। कहते हैं इसी श्राप के कारण देवी सती कई हजारों साल तक नंदन वन में कोयल बनकर घूमती रहीं। फिर जाकर उन्होंने देवी पार्वती के रूप में जन्म लिया और भगवान शिव को प्राप्त किया। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार मित्र</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 06:01:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हे राम! 13 साल की नाबालिग बच्ची चार होटल और 30 दरिंदे! </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मनोज कुमार अग्रवाल</strong><br />राजस्थान के श्रीगंगानगर में उस समय बेटी पढ़ाओ और बेटी बचाओ अभियान व नारी सशक्तिकरण के तमाम नारे धूल धुसरित हो गए जब एक तेरह साल की नाबालिग बच्ची को चार होटलों में ले जाकर तीस से अधिक नर पिचाश दरिंदों ने बेरहमी से दरिंदगी की। जहां एक शर्मनाक और खौफनाक वारदात ने इंसानियत और कानून व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. महज 13 साल की एक बच्ची के साथ ऐसी हैवानियत की गई, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया. इस घिनौनी वारदात के सामने आने के बाद पूरे जिले में गुस्सा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/home/thought-friends/hey-ram-13-year-old-minor-girl-four-hotels-and/article-151357"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2024-01/rape_382.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मनोज कुमार अग्रवाल</strong><br />राजस्थान के श्रीगंगानगर में उस समय बेटी पढ़ाओ और बेटी बचाओ अभियान व नारी सशक्तिकरण के तमाम नारे धूल धुसरित हो गए जब एक तेरह साल की नाबालिग बच्ची को चार होटलों में ले जाकर तीस से अधिक नर पिचाश दरिंदों ने बेरहमी से दरिंदगी की। जहां एक शर्मनाक और खौफनाक वारदात ने इंसानियत और कानून व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. महज 13 साल की एक बच्ची के साथ ऐसी हैवानियत की गई, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया. इस घिनौनी वारदात के सामने आने के बाद पूरे जिले में गुस्सा फूट पड़ा और लोग सड़कों पर उतर आए हैं. पुलिस प्रशासन, संगठित अपराधियों और अवैध होटलों के नेटवर्क को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं. मगर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उस मासूम को इंसाफ मिल पाएगा?</p>
<p>आपको बता दें 18 जून 2026 के दिन  जब इस खौफनाक कहानी की शुरुआत हुई. पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, 13 साल की पीड़ित बच्ची अपनी एक सहेली से मिलने श्रीविजयनगर गई थी. परिवार को उम्मीद थी कि वह जल्द घर लौट आएगी, लेकिन अचानक घरवालों से उसका संपर्क टूट गया. और वो लौटकर घर नहीं आई. उसे तलाश किया गया,  लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला. उसकी कोई खबर ना मिलने से घरवालों की चिंता बढ़ती गई और कुछ ही घंटों में यह मामला एक रहस्यमय गुमशुदगी में बदल गया.घरवाले पुलिस के पास पहुंचे. मदद की गुहार लगाई. तहरीर लेने के बाद पुलिस हरकत में आ गई. पुलिस जांच के मुताबिक, उसी रात बच्ची श्रीगंगानगर पहुंची थी और घर जाने के लिए एक ई-रिक्शा में बैठी. शैतान की एंट्री - आरोप है कि उसी दौरान रामबाबू नाम का एक ई-रिक्शा चालक उसे मिल गया. उसने बच्ची को बातों ही बातों में विश्वास में ले लिया और उसे घर छोड़ने का भरोसा दिया. लड़की उसके साथ ई रिक्शा में बैठ गई. उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि अगले कुछ मिनटों में उसके साथ क्या होने वाला है. रामबाबू उसे घर पहुंचाने के बजाय एक होटल में ले गया. जहां उसने लड़की को होटल संचालक के हवाले कर दिया. बताया जा रहा है कि इसके बदले उसे अच्छे खासे पैसे मिले. अब वो मासूम बच्ची ऐसे जाल में फंस चुकी थी, जहां से निकलना उसके लिए नामुमकिन सा हो गया था.इस मामले की तफ्तीश में जुटी पुलिस बताती है कि जांच में सामने आया कि बच्ची को सबसे पहले 'होटल जॉय इन' ले जाया गया था. इसके बाद अगले कई दिनों तक उसे एक होटल से दूसरे होटल में ले जाया जाता रहा. शुरुआती जांच में तीन होटलों की जानकारी पुलिस को मिली थी, लेकिन बाद में बीरबल चौक के पास मौजूद 'ड्रीम' नाम के चौथे होटल का भी पता चला. पुलिस के अनुसार, एक बाद एक इन सभी होटलों में बच्ची को छिपाकर रखा गया था. और वहीं उसकी आबरू लूटी गई.</p>
<p>जिस्म का धंधा - आरोप है कि होटल मालिकों और मैनेजरों ने पांच दिनों के भीतर उस मासूम बच्ची को 30 से ज्यादा लोगों के सामने परोसा किया. आरोपों के मुताबिक, दिन के समय भी कई कई लोग उसके साथ रेप करते थे. कहा जाए तो उसके साथ लगातार गैंग रेप किया गया. दरिदों ने मौका मिलते ही उसके साथ दरिंदगी की. मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब दरिंदगी के दौरान वो बच्ची दर्द से तड़पती थी, तब उसे शांत करने और सुलाने के लिए जबरन उसे शराब पिलाई जाती थी. और फिर उसकी इज्जत को तार तार किया जाता था. बताया जा रहा है कि होटल मालिकों ने एक एक दिन में कई लोगों को बच्ची के साथ दरिंदगी करने की छूट दी थी. इस पूरी कहानी ने प्रदेश को ही नहीं देश को झकझोर दिया है.वहशीपन की ये कहानी यहीं खत्म नहीं हो जाती. इस मामले में एक और सनसनीखेज आरोप तब सामने आया, जब जांच एजेंसियों को पता चला कि एक होटल मैनेजर ने उस बच्ची की तस्वीरें खींचकर सोशल मीडिया पर भेजी थीं. इसी के बाद दरिंदगी का वो शर्मनाक खेल शुरू हुआ, जिसके चलते कई लोगों ने उस बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया. इसी तरह से कई अन्य लोग भी इस गुनाह की कड़ी से जुड़ते चले गए. ये वही लोग थे, जो बच्ची की आबरू का सौदा करने के लिए बारी-बारी से होटल पहुंचे थे. </p>
<p>पुलिस का शिकंजा - पुलिस के अनुसार, बच्ची की उन्हीं तस्वीरों के जरिए कई अहम सुराग जांच करने वाली टीम के हाथ लगे.उधर, बच्ची के लापता होने के बाद परिवार ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. पुलिस ने जांच शुरू की और 22 जून को 'होटल जॉय इन' से बच्ची को बरामद कर लिया गया. इसके बाद मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं. जांच आगे बढ़ी तो यह मामला कथित तौर पर संगठित अपराध और मानव तस्करी के एंगल तक पहुंच गया.पुलिस ने इस मामले में अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए लोगों में ई-रिक्शा चालक रामबाबू, होटल मालिक मयंक सैन, होटल मैनेजर हरदीप नाथ और सचिन सहित कई अन्य आरोपी शामिल हैं. इसके अलावा दीपक और तरुण नामक दो अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है. पुलिस का कहना है कि कुछ आरोपियों ने सीधे अपराध किया, जबकि कुछ ने इस गुनाह में सहयोग किया है।<br />बुलडोजर एक्शन - होटलों पर चला बुलडोजर जिला प्रशासन ने उन होटलों को चिन्हित किया जहां इस वारदात को अंजाम दिया गया था और जो अवैध रूप से निर्मित थे। इनमें होटल जॉय इन , होटल सफायर और होटल ड्रीम लैंड शामिल हैं, जिन्हें पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया।</p>
<p>सवाल सिर्फ एक नाबालिग बालिका के साथ दरिंदगी का नहीं है सवाल उस घिनौनी मानसिकता का है जो तेरह साल की एक मासूम बच्ची के अपरिपक्व और अविकसित शरीर को भूखे गिद्धों के झुंड की तरह नौंचने में पुलिस कानून सजा अदालत अथवा समाज और ईश्वर किसी का भी भय नहीं मानती है। क्या ईरिकशा वाले की करतूत से यह जाहिर नहीं होता है कि वह पहले भी इसी तरह मासूम लड़कियों को फंसा कर बहला फुसला कर इन होटल वालों के हाथों बेचता रहा होगा? एक शहर में होटल से होटल मासूम नाबालिग लड़की के जिस्म को दरिंदे नोचते रहे और पुलिस को भनक तक नहीं लगी? दरअसल पुलिस ऐसे धंधेबाजो से बंधी रकम माहवार वसूल कर इनके कारनामों से आंखें बंद कर लेती है इसी का नतीजा है कि इस तरह होटल वाले एक मासूम लडकी के जिस्म को भेड़ियों को परोसते रहे। ऐसे घृणित और समाज विरोधी अपराध के लिए सख्त से सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।</p>
<p>(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 39 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं) <br />सम्पर्क 9219179431 <br />journalistmanoj453@gmail.com</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार मित्र</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 15:29:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Tarunmitra]]></dc:creator>
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                <title>जब प्रश्न रामभक्तों की श्रद्धा का हो, तब मौन नहीं पारदर्शिता चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[सुरेश गांधी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/home/thought-friends/when-the-question-is-about-the-devotion-of-ram-devotees/article-151335"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2025-06/ram-mandir.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अयोध्या केवल एक नगर नहीं, भारतीय सभ्यता की आत्मा का वह प्रकाश-स्तंभ है, जिसके लिए पाँच शताब्दियों तक संघर्ष हुआ, हजारों लोगों ने बलिदान दिया और करोड़ों रामभक्तों ने अपनी आस्था का दीप जलाए रखा। इसलिए यदि श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े किसी भी प्रबंधन, व्यवस्था या वित्तीय मामले पर प्रश्न उठते हैं, तो उनका प्रभाव किसी संस्था या व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास को भी स्पर्श करता है। ऐसे समय में सबसे बड़ी आवश्यकता आरोपों और प्रत्यारोपों की नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की होती है। काशी के संत स्वामी जितेन्द्रानन्द सरस्वती का भी यही मत है कि श्रीराम का नाम स्वयं सत्य, मर्यादा और धर्म का पर्याय है। इसलिए राम के नाम पर चलने वाली हर व्यवस्था को भी उसी कसौटी पर खरा उतरना होगा। उनका मानना है कि समाज का विश्वास ही अयोध्या, काशी और मथुरा जैसे राष्ट्रीय आस्था के केंद्रों की सबसे बड़ी शक्ति है। यदि विश्वास अक्षुण्ण रहेगा तो सनातन की यात्रा और सशक्त होगी; और यदि शंकाएँ हैं तो उनका समाधान भी तथ्यों, पारदर्शिता और न्यायपूर्ण प्रक्रिया से होना चाहिए। यही श्रीराम की मर्यादा है और यही भारतीय संस्कृति का शाश्वत संदेश भी।</p>
<p style="text-align:justify;">राम केवल देवता नहीं, भारतीय जीवन-दर्शन हैं. मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भारतीय संस्कृति में केवल पूजा के विषय नहीं हैं। वे सत्य, त्याग, न्याय, करुणा और उत्तरदायित्व के सर्वोच्च आदर्श हैं। उन्होंने अपने जीवन में कभी सत्य से समझौता नहीं किया। वनवास स्वीकार किया, राजसुख छोड़ा, लेकिन लोकविश्वास को टूटने नहीं दिया। इसीलिए जब श्रीराम के नाम पर बने विश्व के सबसे बड़े आस्था केंद्र से जुड़ा कोई प्रश्न उठता है, तब समाज की अपेक्षा भी उसी मर्यादा के अनुरूप होती है। श्रद्धालु केवल मंदिर की भव्यता नहीं देखते, वे उसके पीछे खड़ी नैतिकता और विश्वसनीयता को भी उतना ही महत्व देते हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">राम मंदिर निर्माण के लिए देश के कोने-कोने से लोगों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार सहयोग दिया। किसी ने करोड़ों रुपये दिए, तो किसी गरीब ने अपनी गुल्लक तोड़ दी। किसी वृद्धा ने जीवन भर की जमा पूंजी समर्पित कर दी, तो बच्चों ने अपनी जेब खर्च रामलला के चरणों में अर्पित कर दी। इसलिए यह केवल आर्थिक योगदान नहीं था। यह करोड़ों लोगों के विश्वास का संकल्प था। यदि ऐसे दान के उपयोग को लेकर कोई प्रश्न उठते हैं, तो उनका उत्तर भी उसी गंभीरता और पारदर्शिता से दिया जाना चाहिए। स्वामी जितेन्द्रानन्द सरस्वती का कहना है कि समाज की हर शंका का समाधान होना चाहिए। उनका मानना है कि सत्य से किसी को भय नहीं होना चाहिए। यदि कोई आरोप है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि कोई दोषी है तो उसे दंड मिले और यदि आरोप असत्य हैं तो निर्दोष की प्रतिष्ठा पहले से अधिक सम्मान के साथ स्थापित हो। उनके अनुसार, "विश्वास ही सनातन की सबसे बड़ी पूंजी है। यदि विश्वास सुरक्षित रहेगा तो काशी और मथुरा का मार्ग भी और अधिक सशक्त होगा।"</p>
<h2 style="text-align:justify;">श्रीराम का संदेश क्या कहता है?</h2>
<p style="text-align:justify;">वाल्मीकि रामायण में श्रीराम का एक अत्यंत प्रेरक वचन मिलता है— "न भीतो मरणादस्मि केवलं दूषितो यशः।" अर्थात— "मुझे मृत्यु का भय नहीं है, मुझे केवल अपयश का भय है।" यही भारतीय संस्कृति का मूल दर्शन है। व्यक्ति चला जाता है। पद बदल जाते हैं। समय बदल जाता है। लेकिन चरित्र और विश्वास इतिहास में अमर रहते हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">विश्वास बचा रहेगा तो विरोध स्वतः समाप्त होगा</h2>
<p style="text-align:justify;">भारत का इतिहास बताता है कि जब-जब सनातन मजबूत हुआ, तब-तब उसके विरोधी भी सक्रिय हुए। कभी मंदिरों पर आक्रमण हुए। कभी आस्था पर प्रश्न उठे। कभी इतिहास बदलने का प्रयास हुआ। लेकिन हर बार सत्य की विजय हुई। आज भी आवश्यकता किसी से संघर्ष करने की नहीं, बल्कि अपने आचरण से विश्वास को और मजबूत करने की है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">गंगा की तरह निर्मल हो व्यवस्था</h2>
<p style="text-align:justify;">स्वामी जितेन्द्रानन्द सरस्वती अक्सर कहते हैं कि गंगा केवल नदी नहीं, भारतीय संस्कृति की आत्मा है। जिस प्रकार गंगा की निर्मलता भारत की पहचान है, उसी प्रकार राम मंदिर जैसी संस्थाओं की पारदर्शिता भी करोड़ों लोगों के विश्वास की पहचान होनी चाहिए। यदि व्यवस्था निर्मल होगी तो किसी विरोधी के पास प्रश्न उठाने का अवसर ही नहीं बचेगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">काशी और मथुरा का मार्ग विश्वास से होकर जाता है</h2>
<p style="text-align:justify;">अयोध्या, काशी और मथुरा तीनों केवल धार्मिक नगर नहीं हैं। ये भारतीय अस्मिता के प्रतीक हैं। यदि अयोध्या की व्यवस्था पर समाज का विश्वास अटूट रहेगा तो भविष्य में काशी और मथुरा से जुड़े सामाजिक विमर्श भी अधिक विश्वास के साथ आगे बढ़ेंगे। इसलिए आज सबसे बड़ा दायित्व विश्वास की रक्षा का है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">राजनीति नहीं, राष्ट्रनीति की आवश्यकता</h2>
<p style="text-align:justify;">धार्मिक विषयों को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय राष्ट्रीय दृष्टि से देखने की आवश्यकता है। राम किसी दल के नहीं हैं। गंगा किसी विचारधारा की नहीं है। सनातन किसी एक संगठन की संपत्ति नहीं है। यह सम्पूर्ण भारत की सांस्कृतिक चेतना है। इसलिए इस विषय पर निर्णय भी सत्य, न्याय और पारदर्शिता के आधार पर होने चाहिए। अयोध्या का प्रश्न किसी व्यक्ति विशेष का नहीं है। यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रश्न है। यदि प्रश्न उठे हैं तो उनका उत्तर भी उतना ही स्पष्ट, पारदर्शी और निष्पक्ष होना चाहिए। न जांच से डरने की आवश्यकता है, न सत्य से। क्योंकि श्रीराम का जीवन स्वयं सिखाता है कि मर्यादा का सबसे बड़ा आधार सत्य है और समाज का सबसे बड़ा धन विश्वास। यदि विश्वास अक्षुण्ण रहा, तो अयोध्या केवल मंदिर नहीं रहेगी, बल्कि आने वाली सदियों तक भारतीय संस्कृति की सबसे उज्ज्वल प्रेरणा बनी रहेगी। और यदि पारदर्शिता, उत्तरदायित्व तथा न्याय को सर्वोच्च स्थान दिया गया, तो यही विश्वास काशी, मथुरा और समूचे सनातन समाज की शक्ति को और अधिक सुदृढ़ करेगा। "राम का मार्ग केवल विजय का नहीं, सत्य और मर्यादा का मार्ग है; इसलिए राम के नाम पर उठे हर प्रश्न का उत्तर भी राम की मर्यादा के अनुरूप ही दिया जाना चाहिए।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार मित्र</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 10:33:43 +0530</pubDate>
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                <title>व्यंग्य रचना &quot; बेईमानों की इमानदारी &quot; </title>
                                    <description><![CDATA[<p>साधो, इस संसार में ईमानदारों की कोई कमी नहीं है। बस उन्हें पहचानने की दृष्टि चाहिए। लोग व्यर्थ कहते हैं कि ईमानदारी खत्म हो गई। सच तो यह है कि वह पहले से कहीं अधिक व्यवस्थित, प्रशिक्षित और प्रोफेशनल हो चुकी है। फर्क बस इतना है कि उसने अपना पता बदल लिया है। अब वह मंदिरों, दफ्तरों और उपदेशों में नहीं, सीधे बेईमानों की गोद में बैठती है।</p>
<p>बेईमान आदमी अपने धंधे के प्रति अद्भुत निष्ठावान होता है। जो करेगा, खुलकर करेगा। उसे अपने चरित्र को लेकर कोई भ्रम नहीं होता। वह जानता है कि वह क्या है, क्यों है</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/home/thought-friends/satire-honesty-of-dishonest-people/article-151152"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/chanda.jpg" alt=""></a><br /><p>साधो, इस संसार में ईमानदारों की कोई कमी नहीं है। बस उन्हें पहचानने की दृष्टि चाहिए। लोग व्यर्थ कहते हैं कि ईमानदारी खत्म हो गई। सच तो यह है कि वह पहले से कहीं अधिक व्यवस्थित, प्रशिक्षित और प्रोफेशनल हो चुकी है। फर्क बस इतना है कि उसने अपना पता बदल लिया है। अब वह मंदिरों, दफ्तरों और उपदेशों में नहीं, सीधे बेईमानों की गोद में बैठती है।</p>
<p>बेईमान आदमी अपने धंधे के प्रति अद्भुत निष्ठावान होता है। जो करेगा, खुलकर करेगा। उसे अपने चरित्र को लेकर कोई भ्रम नहीं होता। वह जानता है कि वह क्या है, क्यों है और किस दर पर उपलब्ध है। ऊपर वाले का भी पूरा ध्यान रखता है,एक परमात्मा और दूसरे वे, जो फाइलों के ऊपर बैठे हैं। चढ़ावे समय पर चढ़ते हैं, हिस्से नियम से पहुँचते हैं और साझेदारी इतनी पारदर्शी होती है कि किसी बेईमान को आज तक यह शिकायत लेकर थाने जाते नहीं सुना गया,“साहब, मेरे साथी ने मेरे हिस्से की बेईमानी में भी बेईमानी कर दी।”</p>
<p>रिश्वत भी पूरे सम्मान से लेते हैं। आपके  चाय-नाश्ते की कद्र करते हैं, क्योंकि वह आपकी जेब से निकला होता है। फाइल दबानी हो तो तय प्रक्रिया से दबाते हैं, निकालनी हो तो निर्धारित दर पर निकालते हैं। उनके हाथी के दाँत दिखाने और चबाने के अलग-अलग नहीं होते। जो हैं, सो सामने हैं। </p>
<p>अब ज़रा स्वयंभू ईमानदारों पर भी दृष्टि डालिए। चेहरे पर अकड़, व्यवहार में उपदेश और हर तीसरे वाक्य में घोषणा,“मैंने आज तक एक पैसा नहीं खाया।” अनुभव बताता है कि ऐसे लोगों में से कई या तो कामचोर निकलते हैं या अवसर-वंचित बेईमान। जिन्हें बड़ा मौका नहीं मिला, वे छोटी बेईमानी को अपने स्तर से नीचे समझते हैं। उनकी आत्मा फुटकर में नहीं बिकती; वह थोक मंडी खुलने की प्रतीक्षा करती है।</p>
<p>हाँ, दफ्तरों में आपका भी कभी न कभी उन अकड़ू ईमानदारों से पाला पड़ा होगा। मैं तो कहता हूँ, वे बिल्ली के उस अवशिष्ट की तरह हैं-न लीपने के, न पोतने के। जनता की कमर तोड़ देंगे, लेकिन फाइल नहीं चलने देंगे। कहते हैं-"काम नियम से होगा।" और उनके यहाँ नियम का सीधा-सा अर्थ होता है-काम नहीं होगा। रिश्वत नहीं लेते, यह उनका गुण है; लेकिन काम भी नहीं करते, यह उनकी मौलिकता है। ऐसे ईमानदारों से तो वह बेईमान लाख गुना अच्छा, जो कम-से-कम काम तो कर देता है।</p>
<p>बेईमान इस मामले में भी ज्यादा लोकतांत्रिक है। वह छोटी-बड़ी बेईमानी में भेदभाव नहीं करता। अवसर मिले तो उसका अपमान नहीं करता। सुबह से शाम तक जुटा रहता है। जनता को घुमाता है, फाइल को नचाता है, नियमों को मोड़ता है, लेकिन काम को काम समझता है, बोझ नहीं। उसकी ऊर्जा, उसकी तत्परता और उसका नेटवर्क देखकर कई कॉर्पोरेट विभाग भी शरमा जाएँ।</p>
<p>राजनीति ने तो ईमानदारी को और भी आधुनिक अर्थ दे दिया है। यहाँ नेता पूरी ईमानदारी से पार्टी बदलता है, पूरी ईमानदारी से बयान बदलता है, पूरी ईमानदारी से जनता को भूलता है और चुनाव आते ही पूरी ईमानदारी से उसे याद कर लेता है। कल तक जिसे राष्ट्र-विरोधी बता रहा था, आज उसी को राष्ट्र-निर्माण का अनिवार्य स्तंभ घोषित कर देता है। यह वैचारिक लचीलापन नहीं, नई किस्म की ईमानदारी है,अवसरवादिता  के प्रति ईमानदारी।<br />आजकल ईमानदारी निभाई कम, दिखाई ज्यादा जाती है। टोपी, बैनर, पोस्टर, प्रेस-कॉन्फ्रेंस, रील और इंटरव्यू,हर जगह ईमानदारी सजधज कर बैठी मिल जाएगी। कोई ऑटोवाला खाली पर्स लौटा दे, तो अगले दिन अखबारों में खबर बन जाती है। बाद में पता चलता है कि पर्स में आधार कार्ड, दो एटीएम रसीदें और तीन ईएमआई की पर्चियाँ थीं। फिर भी उसने लौटाया,यह ऐतिहासिक घटना है। इतने कठिन समय में आदमी खाली पर्स भी लौटा दे, तो समाज उसे नैतिकता का स्तंभ मानने लगता है।</p>
<p>साधो, मैंने भी बहुत दिन ईमानदारी खोजी। मंदिर गया, दफ्तर गया, मंचों पर गया, घोषणापत्र पढ़े, भाषण सुने। अंत में एक अनुभवी ज्ञानी ने कान में कहा,“गलत जगह तलाश रहे हो। ईमानदारी बेईमानों के भीतर खोजो।” बात सीधी लगी। उनकी बेईमानी में लक्ष्य स्पष्ट है, प्रक्रिया तय है, दरें निश्चित हैं और हिस्सेदारी पारदर्शी।<br />असली संकट उन ईमानदारों से है, जो अपनी अकड़ में व्यवस्था रोक देते हैं। बेईमान कम-से-कम व्यवस्था को चलाते तो हैं। इसीलिए लगता है कि इस युग की सबसे प्रामाणिक ईमानदारी वही है, जो बेईमान अपनी बेईमानी के प्रति निभाते हैं।</p>
<p><strong>रचनाकार –डॉ मुकेश असीमित </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार मित्र</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 10:27:33 +0530</pubDate>
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                <title>अलविदा ख़ामनेई: मर के जीना सिखा दिया तूने</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>तनवीर जाफ़री                         </strong><br />ईरान के सर्वोच्च नेता शहीद सैयद अली ख़ामनेई के बहुप्रतीक्षित अंतिम संस्कार की रस्म इन दिनों ईरान- इराक़ में अदा की जा रही है। विश्व के अब तक के सबसे बड़े अंतिम संस्कार के इस राजकीय शोक में भारत, पाकिस्तान, रूस, चीन,सऊदी अरब,अफ़ग़ानिस्तान सहित लगभग 100 देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। ग़ौरतलब है कि गत 28 फ़रवरी को पवित्र रमज़ान माह में अमेरिका व इस्राईल द्वारा किये गये कायराना हवाई हमले में सैयद अली ख़ामनेई ,उनकी बेटी बुशरा हुसैनी ख़ामेनेई व दामाद मिस्बाह अल-हुदा बाक़री उनकी 14 महीने की पोती ज़हरा मोहम्मदी गुल पायगानी  तथा ख़ामनेई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/home/thought-friends/goodbye-khamenei-you-taught-us-how-to-live-after-dying/article-151151"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/khameneifuneral2.webp" alt=""></a><br /><p><strong>तनवीर जाफ़री                         </strong><br />ईरान के सर्वोच्च नेता शहीद सैयद अली ख़ामनेई के बहुप्रतीक्षित अंतिम संस्कार की रस्म इन दिनों ईरान- इराक़ में अदा की जा रही है। विश्व के अब तक के सबसे बड़े अंतिम संस्कार के इस राजकीय शोक में भारत, पाकिस्तान, रूस, चीन,सऊदी अरब,अफ़ग़ानिस्तान सहित लगभग 100 देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। ग़ौरतलब है कि गत 28 फ़रवरी को पवित्र रमज़ान माह में अमेरिका व इस्राईल द्वारा किये गये कायराना हवाई हमले में सैयद अली ख़ामनेई ,उनकी बेटी बुशरा हुसैनी ख़ामेनेई व दामाद मिस्बाह अल-हुदा बाक़री उनकी 14 महीने की पोती ज़हरा मोहम्मदी गुल पायगानी  तथा ख़ामनेई के बेटे व वर्तमान सुप्रीम लीडर मुज्तबा ख़ामनेई की पत्नी सभी एक साथ शहीद हो गये थे। ईरान पर अमेरिका व इस्राईल द्वारा थोपे गये युद्ध में उलझे होने के कारण ख़ामनेई के अंतिम संस्कार की रस्म अब तक अदा नहीं की जा सकी थी। अब निर्धारित कार्यक्रमों के अनुसार संस्कार की रस्म की शुरुआत 3 जुलाई से हो चुकी है। 3 जुलाई को ईरान के उप गृह मंत्री ब्रिगेडियर जनरल अली अकबरपूर जमशीदियान द्वारा विदेशी गणमान्य लोगों के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। इसके बाद तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला मस्जिद में 4 व 5 जुलाई का दो दिन का शोक समारोह आयोजित किया गया।  इसके बाद  5 जुलाई को मुख्य जनाज़े की नमाज़ अदा की गयी। 6 जुलाई को तेहरान में जनाज़े की अंतिम यात्रा निर्धारित समयानुसार सुबह 6 बजे शुरू होगी। अगले दिन यानी 7 जुलाई को ईरान के प्रमुख धार्मिक शहर क़ुम में भी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी और यहाँ की प्रसिद्ध पवित्र जमकरान मस्जिद में नमाज़- ए-जनाज़ा अदा की जाएगी।                      </p>
<p>इसी तरह 8 जुलाई को इराक़ के नजफ़ और कर्बला में भी अंतिम यात्रा निकाली जायेगी। निर्धारित योजनानुसार इराक़ में 7 जुलाई की शाम शहीद ख़ामनेई का जनाज़ा नजफ़ पहुंचेगा। 8 जुलाई को सुबह 6 बजे नजफ़ और शाम 4 बजे कर्बला में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद पार्थिव शरीर को वापस ईरान ले जाया जाएगा। याद रहे कि मक्का और मदीना के बाद नजफ़ और कर्बला को शिया इस्लाम के सबसे ऐतिहासिक व पवित्र शहरों के रूप में मान्यता हासिल है। इसतरह अंतिम दिन यानी 9 जुलाई को अली ख़ामेनेई के जनाज़े को मशहद में शिया समुदाय के आठवें इमाम, इमाम रज़ा के मक़बरे में सुपुर्द-ए-ख़ाक़ किया जाएगा। अंतिम विदाई के बाद भी चालीस दिनों तक विभिन्न प्रांतों में धार्मिक सभाएं, प्रार्थनाएं आदि आयोजित की जाएंगी और अगले साल तक भी कार्यक्रम और सम्मेलन आयोजित किए जाते रहेंगे। अनुमान लगाया जा रहा है कि अंतिम संस्कार के इस आयोजन में ईरान-इराक़ सहित पूरे विश्व के क़रीब ढाई से तीन करोड़ तक लोग शरीक होंगे। अंतिम विदाई के इन समारोहों को ईरान केवल एक धार्मिक रस्म के रूप में ही नहीं बल्कि पिछले दिनों हुये युद्ध के बाद उभरी ईरान की राजनीतिक और कूटनीतिक ताक़त के बड़े प्रदर्शन के तौर पर भी देख रहा है।                       </p>
<p>इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे भी होते हैं, जिनकी पहचान केवल पद, सत्ता या प्रसिद्धि से नहीं होती, बल्कि उनके चरित्र, जीवन-शैली,सादगी,समर्पण और सेवा-भाव से बनती है। आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई का जीवन भी उन्हीं व्यक्तित्वों में प्रमुख था जिसे सादगी, अनुशासन, आत्म-नियंत्रण और समर्पण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। हालांकि उन्होंने ईरान में सर्वोच्च नेता के रूप में 47 वर्ष बिताए, जिसमें लगभग 40 वर्ष ईरान के रक्षा मंत्री , प्रेसिडेंट और सुप्रीम लीडर के तौर पर शामिल हैं। इसके बावजूद उनका सादा जीवन इस बात का संदेश देता है कि महानता केवल भव्यता के प्रदर्शन में नहीं, बल्कि अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने में होती है। ख़ामेनेई ने बचपन से ही शिक्षा, क़ुरआन और दीनी सेवा को अपने जीवन के केंद्र में रखा। उन्होंने पढ़ाई, तालीम, तफ़सीर, और राजनीतिक-सामाजिक गतिविधियों को एक साथ आगे बढ़ाया, और बार-बार गिरफ़्तारी व  निर्वासन के बावजूद अपना काम ताउम्र जारी रखा। वे अपने निजी जीवन में भी साधारण रहन-सहन पसंद करते थे। उनका पूरा परिवार भी बेहद साधारण जीवन जीता था। उन्होंने कभी सरकारी वेतन नहीं लिया। ख़ामनेई निजी लाभ, दिखावे और सत्ता की सुविधाओं से हमेशा दूर रहते थे। इसीलिये उनके जीवन को एक आदर्श,ईमानदारी व ज़िम्मेदारी की मिसाल के रूप में पेश किया जाता है। उनका पारिवारिक वातावरण धार्मिक, संयमी और सरल था। बचपन से ही उन्होंने कठिनाइयों, सीमित साधनों और संघर्षों के बीच शिक्षा प्राप्त की। ऐसे वातावरण में पले-बढ़े व्यक्ति के भीतर ही जीवन की सच्ची क़ीमत समझने की क्षमता विकसित होती है। शायद इसी कारण उनके व्यक्तित्व में दिखावे से अधिक गंभीरता, और आराम से अधिक कर्तव्य दिखाई देता है।            </p>
<p>जब कोई व्यक्ति सत्ता की शक्ति के शिखर पर होते हुए भी सामान्य जीवन मूल्यों से जुड़ा रहता है, तो वह केवल प्रशंसा का पात्र ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिये प्रेरणास्रोत भी बन जाता है। उन्होंने अपने निजी जीवन में भी हमेशा विलासिता से दूरी बनाए रखी और सादगी को ही अपनी आदत, अपनी शैली और अपने स्वभाव का हिस्सा बनाया। यह सादगी केवल बाहरी नहीं थी, बल्कि उनके विचारों और प्राथमिकताओं में भी नज़र आती थी। वे दिखावे के बजाय दायित्व को महत्व देते थे  और निजी सुविधा की जगह सार्वजनिक ज़िम्मेदारी को। मानवता का मूल भी यही है कि शक्ति व सुविधा का उपयोग अपने अहंकार के लिए नहीं बल्कि दूसरों की भलाई के लिए होना चाहिये। इसी लिये शहादत से ठीक पहले कहे गये उनके वह शब्द इतिहास में दर्ज हो चुके हैं कि जब उनसे उनके सलाहकारों द्वारा अमेरिकी-इस्राईली हमलों से बचने के लिये सुरक्षित स्थान पर जाने के लिये कहा गया तो उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए किसी बंकर या सुरक्षित स्थान पर जाने से यह कहकर मना किया कि 'पहले राजधानी तेहरान के सभी नागरिकों के लिए सुरक्षित जगह की व्यवस्था हो तभी मैं भी अपना घर छोड़ूंगा'। और इसी के कुछ क्षणों बाद ही वे भीषण हवाई हमले में शहीद हो गये।             </p>
<p>निःसंदेह उनके इसी समर्पण,सादगी व शिक्षा को सर्वाधिक महत्व देने के साथ करबला से प्रेरणा लेने का ही परिणाम था कि उन्होंने न केवल अपने जीते जी अमेरिका के स्वयं को विश्व का सर्वशक्तिमान समझने का घमंड चकनाचूर कर दिया बल्कि अपनी शहादत के बाद भी एक ऐसा ईरान खड़ा कर गये जो क्या अमेरिका तो क्या इस्राईल किसी के भी वर्चस्व या शक्ति को स्वीकार करने से इंकार कर रहा है। उनकी शहादत पूरी दुनिया के लोगों ख़ासकर सत्ताधीशों के लिये उदाहरण पेश करती है। शहीद सैयद अली ख़ामनेई को अलविदा कहते हुये कुंवर महेंद्र सिंह बेदी 'सहर' के शब्दों में यही कहूंगा कि 'जी के मरना तो सब को आता है। मर के जीना सिखा दिया तूने।। संपर्क:9896219228                                                                        </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार मित्र</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 10:17:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Tarunmitra]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कुंडली में पितृदोष बन सकता है पारिवारिक कलह और रुकावटों का कारण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पितृ दोष  : कुंडली में पितृदोष होने से व्यक्ति के जीवन में परेशानियां आ सकती हैं। खासकर पारिवारिक जीवन में लड़ाई-झगड़े और करियर के क्षेत्र में रुकावटों का कारण पितृदोष हो सकता है। इसलिए पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए इससे जुड़े उपाय अवश्य करने चाहिए। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि कुंडली में पितृदोष बनता कैसे है और इसके बुरे प्रभावों से बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए। </p>
<p>पितृदोष कैसे बनता है? <br />कुंडली में सूर्य को पिता और पूर्वजों का कारक माना जाता है। अगर सूर्य की युति राहु-केतु या शनि के साथ हो रही है तो</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/home/thought-friends/pitradosh-in-the-horoscope-can-become-the-cause-of-family/article-151120"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/lkkj.jpg" alt=""></a><br /><p>पितृ दोष  : कुंडली में पितृदोष होने से व्यक्ति के जीवन में परेशानियां आ सकती हैं। खासकर पारिवारिक जीवन में लड़ाई-झगड़े और करियर के क्षेत्र में रुकावटों का कारण पितृदोष हो सकता है। इसलिए पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए इससे जुड़े उपाय अवश्य करने चाहिए। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि कुंडली में पितृदोष बनता कैसे है और इसके बुरे प्रभावों से बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए। </p>
<p>पितृदोष कैसे बनता है? <br />कुंडली में सूर्य को पिता और पूर्वजों का कारक माना जाता है। अगर सूर्य की युति राहु-केतु या शनि के साथ हो रही है तो इसे पितृदोष माना जाता है। <br />पंचम और नवम भाव में राहु या केतु और सूर्य की युति हो तो पितृदोष अधिक गंभीर होता है। <br />नवम भाव कमजोर हो यानि नीच हो या 6,8, 12 भाव में हो तब भी पितृदोष कुंडली में मौजूद रहता है। <br />पांचवें भाव में यदि पाप ग्रह जैसे-शनि, राहु, केतु, मंगल विराजमान हों तो पितृदोष कुंडली में रहता है। <br />पितृदोष से मुक्ति के उपाय<br />पितृ दोष को दूर करने के लिए पीपल के वृक्ष की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है क्योंकि पीपल के वृक्ष में पितरों का वास माना जाता है। पीपल को जल चढ़ाना, पीपल के पास दीपक जलाने से पितृ दोष से आपको मुक्ति मिल सकती है। <br />हर पितृपक्ष के दौरान पितरों की पूजा करने से, पितरों के निमित्त तर्पण, दान आदि करने से पितृ दोष से मुक्ति आपको मिल सकती है। <br />कौए को रोटी खिलाने, चीटियों को दान डालने, गाय की सेवा करने से भी पितृ दोष से आपको मुक्ति मिल सकती है। <br />पितरों की कृपा प्राप्ति के लिए 'ॐ श्री सर्व पितृ देवताभ्यो नमो नमः' का जप आपको करना चाहिए। इस मंत्र का जप करने से पितृ दोष भी दूर होता है। <br />भगवान विष्णु और महादेव की पूजा करने से पितृ दोष से आप मुक्ति पा सकते हैं। <br />ब्रह्माणों को भोजन और जरूरदमंदों को अन्न, वस्त्र दान करने से भी पितृ दोष से आपको मुक्ति मिलती है। <br />अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त दान और तर्पण करना भी बेहद शुभ माना जाता है।<br />अगर आप घर के बड़े-बुजुर्गों का आदर करते हैं और उनकी सेवा करते हैं तो आपको पितृ दोष के बुरे प्रभाव देखने को नहीं मिलते। <br />पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए गया जाकर भी आप पितृ पूजन कर सकते हैं। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार मित्र</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 05:44:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कपल ने 1,454 फुट ऊंची इमारत पर चढ़कर किया प्यार कर इजहार </title>
                                    <description><![CDATA[<p>  न्यूयॉर्क: प्यार में दीवाने क्या-क्या नहीं करते! लेकिन रूसी कपल एंजेला निकोलाउ (33) और इवान बर्कस (32) ने तो नया रिकॉर्ड ही बना दिया। न्यूयॉर्क की मशहूर एम्पायर स्टेट बिल्डिंग की 1,454 फुट (443 मीटर) ऊंची एंटीना स्पायर पर चढ़कर उन्होंने न सिर्फ दुनिया को प्यार का संदेश दिया, बल्कि प्रपोज भी कर डाला। स्टंट के कुछ ही मिनट बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन उनका वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। बता दें कि, कपल को दुनिया भर में गगनचुंबी इमारतों और अन्य ऊंची संरचनाओं पर चढ़ने के लिए जाना जाता है।</p>
<p><br />40 लाख</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/home/thought-friends/couple-expressed-their-love-by-climbing-1454-feet-high-building/article-150972"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/lkmjh1.jpg" alt=""></a><br /><p> न्यूयॉर्क: प्यार में दीवाने क्या-क्या नहीं करते! लेकिन रूसी कपल एंजेला निकोलाउ (33) और इवान बर्कस (32) ने तो नया रिकॉर्ड ही बना दिया। न्यूयॉर्क की मशहूर एम्पायर स्टेट बिल्डिंग की 1,454 फुट (443 मीटर) ऊंची एंटीना स्पायर पर चढ़कर उन्होंने न सिर्फ दुनिया को प्यार का संदेश दिया, बल्कि प्रपोज भी कर डाला। स्टंट के कुछ ही मिनट बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन उनका वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। बता दें कि, कपल को दुनिया भर में गगनचुंबी इमारतों और अन्य ऊंची संरचनाओं पर चढ़ने के लिए जाना जाता है।</p>
<p><br />40 लाख से ज्यादा लोगों ने लाइक की पोस्ट <br />इस पोस्ट को इंस्टाग्राम पर @angela_nikolau नामक हैंडल से शेयर किया गया है। खबरों के मुताबिक, दंपति 1 जुलाई को दोपहर करीब 12 बजे एम्पायर स्टेट बिल्डिंग के एंटीना के बिल्कुल शीर्ष पर चढ़ गए। पूरी तरह से काले कपड़े पहने और मास्क लगाए हुए, उन्होंने कथित तौर पर गगनचुंबी इमारत के शीर्ष पर जाने से पहले एक प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया। वीडियो में दोनों को संकरे शिखर पर बैठे हुए दिखाया गया है, जहां उन्होंने एक बड़ा बैनर फहराया जिस पर लिखा था, 'जब प्रेम की शक्ति सत्ता के प्रेम पर विजय प्राप्त करती है, तो दुनिया में शांति आती है।' इसके तुरंत बाद, इवान ने घुटने टेककर एंजेला को अंगूठी पहनाकर शादी का प्रस्ताव दिया। बताया जाता है कि वे नीचे उतरने से पहले लगभग 10 मिनट तक इमारत की छत पर रहे। जमीन पर पहुंचते ही न्यूयॉर्क पुलिस विभाग की आपातकालीन सेवा इकाई के अधिकारियों ने दोनों को हिरासत में ले लिया। गौरतलब है कि, पोस्ट को अब तक 40 लाख से ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं।  </p>
<p><br />गिरफ्तारी के बाद वायरल हो गए दोनों <br />बताया जा रहा है कि, उनकी गिरफ्तारी के बाद दंपति पर कई अपराधों का आरोप लगाया गया जिनमें गंभीर चोरी, लापरवाही से जान जोखिम में डालना, आपराधिक अतिक्रमण, आपराधिक छेड़छाड़ और अव्यवस्थित आचरण शामिल हैं। इस नाटकीय प्रस्ताव को दुनिया भर से अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली है, कई लोगों ने इस क्षण को अद्वितीय बताया है, जबकि कई लोगों ने इसे एक अविस्मरणीय और सिनेमाई क्षण के रूप में वर्णित किया है।</p>
<p>यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया <br />इस पोस्ट को पढ़ने के बाद इस पर कई यूजर्स ने प्रतिक्रिया दी है। एक यूजर ने लिखा कि, 'गजब की सनक है लोगों में।'<br />दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'शैम्पेन कहां है? यह अब तक के सबसे शानदार प्रपोज़ल के रूप में इतिहास में दर्ज हो जाएगा!'</p>
<p>तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'उस सगाई को कोई भी आदमी कभी मात नहीं दे सकता, बस!'</p>
<p>चौथे यूजर ने लिखा कि, 'कितना भावपूर्ण प्रस्ताव और दुनिया के लिए इतना सशक्त संदेश! आशा है आप जल्द ही मुक्त हो जाएंगे। शुभकामनाएं।'</p>
<p>पांचवें यूजर ने लिखा कि, 'दुनिया का सबसे बेहतरीन प्रस्ताव। वाह... सबसे अच्छे प्रस्तावों में से एक। कभी-कभी, गैरकानूनी चीजें भी बेहद खूबसूरत होती हैं।'</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार मित्र</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 07:39:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ओजोन प्रदूषण दिल और फेफड़ों को पहुंचा रहा है नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ओजोन प्रदूषण : हर साल दिल्ली एनसीआर में रहने वाले लोग वायु प्रदूषण से परेशान रहते हैं। दिवाली के बाद से प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। लेकिन मार्च अप्रैल आते ही इसका असर कम होने लगता है। लोग ये सोचकर खुश हो जाते हैं कि प्रदूषण से थोड़ी राहत मिल चुकी है। लेकिन अब गर्मी में ओजोन प्रदूषण अपने खतरनाक स्तर पर पहुंचने लगा है। ये प्रदूषण भले ही धुंध के रूप में दिखाई न देता हो, लेकिन फेफड़ों पर इसका घातक असर होता है। बहुत सारे लोग इस प्रदूषण और उससे जुड़े खतरे के बार में जानते</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/home/thought-friends/ozone-pollution-is-harming-heart-and-lungs/article-150834"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/mnjhk.jpg" alt=""></a><br /><p>ओजोन प्रदूषण : हर साल दिल्ली एनसीआर में रहने वाले लोग वायु प्रदूषण से परेशान रहते हैं। दिवाली के बाद से प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। लेकिन मार्च अप्रैल आते ही इसका असर कम होने लगता है। लोग ये सोचकर खुश हो जाते हैं कि प्रदूषण से थोड़ी राहत मिल चुकी है। लेकिन अब गर्मी में ओजोन प्रदूषण अपने खतरनाक स्तर पर पहुंचने लगा है। ये प्रदूषण भले ही धुंध के रूप में दिखाई न देता हो, लेकिन फेफड़ों पर इसका घातक असर होता है। बहुत सारे लोग इस प्रदूषण और उससे जुड़े खतरे के बार में जानते भी नहीं हैं। आइये जानते हैं ओजोन प्रदूषण कितना खतरनाक है और इससे किन बीमारियों का खतरा बढ़ता है।</p>
<p><br />हाल ही में सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की एक रिपोर्ट आई है, जिसके नतीजे चौंकाने वाले हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली-एनसीआर ओजोन प्रदूषण का सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र है। ओजोन प्रदूषण सेहत के अलावा खेती और फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। </p>
<p>क्या है ओजोन प्रदूषण<br />डॉक्टर हेमंत गोयल (सीनियर डायरेक्टर, पल्मोनोलॉजी, एलर्जी और स्लीप मेडिसिन, यथार्थ हॉस्पिटल, फरीदाबाद) ने बताया कि ओजोन प्रदूषण बेहद खतरनाक वायु प्रदूषण है, लेकिन ये किसी धुए, फैक्ट्री या वाहन से नहीं निकलता, बल्कि हवा में मौजूद नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) के तेज धूप के संपर्क में आने और ज्यादा तापमान होने पर बनने वाली गैस है। जब गर्मी में दिल्ली-एनसीआर का तापमान बढ़ता है, तेज धूप होती है तो वाहनों से निकलने वाले प्रदूषक ओजोन के लेवल को तेजी से बढ़ाते हैं। जिसके कारण गर्मी में ओजोन प्रदूषण एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन जाता है।</p>
<p>ओजोन प्रदूषण से क्या है खतरा<br />ओजोन प्रदूषण हमारे श्वसन तंत्र यानि फेफड़ों के लिए सबसे घातक है। इतना ही नहीं इससे आंखों में जलन, गले में खराश, लंबी खांसी, सांस लेने में परेशानी और सीने में जकड़न जैसी महसूस हो सकती हैं। ओजोन प्रदूषण अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) के रोगियों के लिए गंभीर हो सकता है। इसका असर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों पर ज्यादा हो सकता है। इन लोगों को अधिक गर्मी के दिनों में घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। खुले में काम करने वाले लोगों को इसका खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे लोगों के फेफड़े प्रदूषित हवा के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं।</p>
<p>फेफड़ों और दिल के लिए है खतरनाक<br />लंबे समय तक ओजोन प्रदूषण के संपर्क में रहने से फेफड़ों की कार्यक्षमता कम होने लगती है। इससे सांस से जुड़े इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। कुछ रिसर्च में कहा गया है कि लगातार बढ़े हुए ओजोन प्रदूषण में रहने से दिल की बीमारियों का जोखिम भी काफी बढ़ सकता है। </p>
<p>इस समय रहता है सबसे ज्यादा खतरा<br />विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच, जब ओजोन का स्तर सबसे अधिक होता है, तब बिना जरूरत के घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। पर्याप्त पानी पीना, मास्क पहनना, भारी व्यायाम खुले में न करें और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) पर नजर रखना भी जरूरी है। पर्सनल वाहनों का कम उपयोग, सार्वजनिक परिवहन अपनाएं और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों को कम करना ओजोन प्रदूषण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार मित्र</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 14:31:32 +0530</pubDate>
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