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                <title>उत्तराखंड - Tarun Mitra</title>
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                <description>उत्तराखंड RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे पर हुए बड़े-बड़े गड्ढे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे : दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे पर उद्घाटन के दो महीने बाद ही बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। सड़क का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें देखा जा सकता है कि सड़क के बीचो-बीच कई गड्ढे बने हुए हैं। पास से ही तेज स्पीड में वाहन निकल रहे हैं। ऐसे में बड़ा हादसा होने का खतरा बना हुआ है। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने अपने वाहन को हुए नुकसान के बारे में भी बताया है। पीड़ित व्यक्ति की वैन का रिम गड्ढे में आने से मुड़ गया था।</p>
<p>अहम बात यह है कि दिल्ली और उत्तराखंड में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/uttarakhand/big-potholes-on-delhi-dehradun-expressway/article-150777"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/kmjnhg1.jpg" alt=""></a><br /><p>दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे : दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे पर उद्घाटन के दो महीने बाद ही बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। सड़क का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें देखा जा सकता है कि सड़क के बीचो-बीच कई गड्ढे बने हुए हैं। पास से ही तेज स्पीड में वाहन निकल रहे हैं। ऐसे में बड़ा हादसा होने का खतरा बना हुआ है। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने अपने वाहन को हुए नुकसान के बारे में भी बताया है। पीड़ित व्यक्ति की वैन का रिम गड्ढे में आने से मुड़ गया था।</p>
<p>अहम बात यह है कि दिल्ली और उत्तराखंड में अभी मानसून ने दस्तक दी है। इस साल बारिश कम होने के आसार है। इसके बावजूद बारिश से पहले ही एक्सप्रेसवे की हालत खराब हो गई है। अगर यही आलम रहा तो चार महीने की बारिश के बाद एक्सप्रेसवे की हालत और बदतर हो सकती है। ऐसे में हादसों की संख्या बढ़ने की आशंका है।</p>
<p>12 हजार करोड़ रुपये में बना हाईवे<br />दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे करीब 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से बना है। हालांकि, मानसून की पहली बारिश के बाद ही सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><br />वाहनों को हो रहा नुकसान<br />वाहन चालकों का कहना है कि सड़क पर बने गड्ढों के कारण दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है और वाहनों को भी नुकसान पहुंच रहा है। लोगों का आरोप है कि इतनी बड़ी लागत से बने एक्सप्रेसवे पर महज कुछ महीनों में इस तरह की स्थिति निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। गौरतलब है कि 14 अप्रैल 2026 को दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हुआ था। उद्घाटन के लगभग दो महीने बाद ही सड़क के कई हिस्सों में गड्ढे दिखाई देने के बाद निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, संबंधित एजेंसियों की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 07:13:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वास्थ्य सेवा को दिया बड़ा उपहार, स्वामी चिदानन्द ने फ्री पेशेंट बस सेवा को दिखाई हरी झंडी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>ऋषिकेश। </strong>परमार्थ पीठाधीश्वर,स्वामी चिदानन्द सरस्वती के पावन सान्निध्य में निःशुल्क रोगी बस सेवा का शुभारम्भ हुआ। स्वामी ने हरी झंड़ी दिखाकर ऋषिकेश से देहरादून तक फ्री पेशेंट बस सेवा का आज उद्घाटन किया। ग्राफिक एरा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल, देहरादून द्वारा निःशुल्क रोगी बस सेवा का शुभारम्भ किया गया। इस ऐतिहासिक जनकल्याणकारी पहल का आज शुभारम्भ हुआ। वीरभद्र महादेव मंदिर, बैराज ऋषिकेश से चिकित्सा जगत, सामाजिक संगठनों, संत, स्वयंसेवकों तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थित में हुआ।</p>
<p>वर्तमान समय में उत्तराखंड़ में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, परन्तु अनेक गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/uttarakhand/swami-chidananda-gives-big-gift-to-health-care-gives-green/article-150758"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/hkkk.png" alt=""></a><br /><p><strong>ऋषिकेश। </strong>परमार्थ पीठाधीश्वर,स्वामी चिदानन्द सरस्वती के पावन सान्निध्य में निःशुल्क रोगी बस सेवा का शुभारम्भ हुआ। स्वामी ने हरी झंड़ी दिखाकर ऋषिकेश से देहरादून तक फ्री पेशेंट बस सेवा का आज उद्घाटन किया। ग्राफिक एरा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल, देहरादून द्वारा निःशुल्क रोगी बस सेवा का शुभारम्भ किया गया। इस ऐतिहासिक जनकल्याणकारी पहल का आज शुभारम्भ हुआ। वीरभद्र महादेव मंदिर, बैराज ऋषिकेश से चिकित्सा जगत, सामाजिक संगठनों, संत, स्वयंसेवकों तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थित में हुआ।</p>
<p>वर्तमान समय में उत्तराखंड़ में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, परन्तु अनेक गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के लिए अस्पताल तक पहुँचना भी एक बड़ी चुनौती है। अनेक मरीजों को लंबी प्रतीक्षा और परिवहन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में यह निःशुल्क रोगी बस सेवा पीड़ित मानवता के प्रति संवेदनशील समाज की सामूहिक प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है।</p>
<p>यह सेवा ऋषिकेश से ग्राफिक एरा हॉस्पिटल, देहरादून तक उन मरीजों और उनके परिजनों को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं निःशुल्क परिवहन उपलब्ध कराएगी, जिन्हें गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं तक पहुँचने में कठिनाई होती है। इससे विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को राहत मिलेगी और समय पर उपचार प्राप्त करने में सहायता होगी।</p>
<p>इस अवसर पर अपने संदेश में स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में सेवा सबसे बड़ी साधना है। रोगी की सेवा केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि ईश्वर की प्रत्यक्ष आराधना है। जब किसी पीड़ित के जीवन में आशा का दीप जलता है, तभी मानवता का वास्तविक उत्सव प्रारम्भ होता है।</p>
<p>स्वामी ने कहा कि आज आवश्यकता आधुनिक अस्पतालों के साथ साथ ऐसी संवेदनशील व्यवस्थाओं की भी है जो गरीब से गरीब व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करें। अनेक बार बीमारी से अधिक पीड़ा अस्पताल तक पहुँचने की असुविधा देती है। ऐसे में यह निःशुल्क रोगी बस सेवा उन परिवारों के लिए वरदान सिद्ध होगी, जो आर्थिक अभाव के कारण गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा से वंचित रह जाते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा भारतीय जीवन दर्शन का शाश्वत संदेश है। सेवा का वास्तविक स्वरूप यही है, जिसमें किसी अपेक्षा का स्थान न हो।  स्वामी ने ग्राफिक एरा हॉस्पिटल और ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ कमल घनशाला जी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा केवल अस्पताल की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि वह प्रत्येक गाँव, प्रत्येक परिवार और प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि समाज के सक्षम संस्थानों का दायित्व केवल उत्कृष्ट सुविधाएँ उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन सुविधाओं को समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति तक पहुँचाना भी है। यही राष्ट्रधर्म, मानवधर्म और सनातन धर्म का वास्तविक स्वरूप है।</p>
<p>ग्राफिक एरा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल के प्रतिनिधियों ने बताया कि यह सेवा पूर्णतः जनहित को समर्पित है तथा इसका उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को समय पर, सुरक्षित एवं निःशुल्क परिवहन उपलब्ध कराना है। भविष्य में इस सेवा का विस्तार उत्तराखण्ड के अन्य क्षेत्रों तक करने की भी योजना है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जब संतों का आशीर्वाद और समाज का सहयोग एक साथ जुड़ता है, तब कई लोगों के जीवन में नई आशा, नया विश्वास और नया भविष्य जन्म लेता है। इस उत्कृष्ट पहल के लिये ग्राफिक एरा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल का अभिनन्दन।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 21:04:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Harshit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मॉकड्रिल देखने जा रहे किशोर की नदी में डूबकर मौत, एसडीआरएफ भी नहीं बचा सकी जान</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नैनीताल। </strong>बेतालघाट क्षेत्र में आयोजित आपदा प्रबंधन की मॉकड्रिल के दौरान एक दुखद दुर्घटना में 17 वर्षीय किशोर की कोसी नदी में डूबने से मृत्यु हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्घटना उस समय हुई जब किशोर मॉकड्रिल देखने के लिए नदी पार कर रहा था, लेकिन वह संतुलन बिगड़ने से नदी में गिर कर बह गया।</p>
<p style="text-align:justify;">मौके पर मौजूद एसडीआरएफ की टीम ने तत्काल खोज एवं बचाव अभियान चलाया, और किशोर को बरामद कर चिकित्सालय ले गये, लेकिन चिकित्सालय पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।<br /><br />प्राप्त जानकारी के अनुसार बेतालघाट विकासखंड के शहीद बलवंत सिंह भुजान-बर्धो मोटर मार्ग स्थित काली</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/uttarakhand/teenager-going-to-see-mock-drill-dies-by-drowning-in/article-150679"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/c4ca4238a0b923820dcc509a6f75849b_452004058.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नैनीताल। </strong>बेतालघाट क्षेत्र में आयोजित आपदा प्रबंधन की मॉकड्रिल के दौरान एक दुखद दुर्घटना में 17 वर्षीय किशोर की कोसी नदी में डूबने से मृत्यु हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्घटना उस समय हुई जब किशोर मॉकड्रिल देखने के लिए नदी पार कर रहा था, लेकिन वह संतुलन बिगड़ने से नदी में गिर कर बह गया।</p>
<p style="text-align:justify;">मौके पर मौजूद एसडीआरएफ की टीम ने तत्काल खोज एवं बचाव अभियान चलाया, और किशोर को बरामद कर चिकित्सालय ले गये, लेकिन चिकित्सालय पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।<br /><br />प्राप्त जानकारी के अनुसार बेतालघाट विकासखंड के शहीद बलवंत सिंह भुजान-बर्धो मोटर मार्ग स्थित काली पहाड़ी क्षेत्र में पुलिस, प्रशासन, एसडीआरएफ तथा अन्य विभागों द्वारा आपदा प्रबंधन संबंधी मॉकड्रिल आयोजित की जा रही थी। राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया जा रहा था तथा घायलों के उपचार के लिए अस्थायी राहत केंद्र भी बनाया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान कोसी नदी के पार स्थित सिमलखा गांव निवासी 17 वर्षीय विशाल सिंह, पुत्र आनंद सिंह, मॉकड्रिल देखने के लिए कार्यक्रम स्थल की ओर जा रहा था। बताया जाता है कि नदी पार करते समय उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नदी के तेज बहाव में बह गया।<br /><br />घटना को देखकर आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाया, जिसके बाद मॉकड्रिल वास्तविक बचाव अभियान में बदल गई। मौके पर मौजूद एसडीआरएफ के जवान तत्काल नदी में उतरे और खोज अभियान शुरू की।</p>
<p style="text-align:justify;">काफी प्रयासों के बाद लगभग 800 मीटर नीचे बहकर पहुंचे किशोर को नदी से बाहर निकाला गया और तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गरमपानी ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण अस्पताल पहुंच गए। किशोर की असामयिक मृत्यु से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है।<br /><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रही वर्षा के कारण कोसी नदी का जलस्तर और बहाव काफी बढ़ गया है, जिससे नदी पार करना अत्यंत जोखिमपूर्ण हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने प्रशासन से संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी संकेतक और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से मानसून के दौरान नदी, गधेरों और अन्य जलधाराओं को पार करने से बचने की अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने विशेष रूप से अभिभावकों से किशोरों और युवाओं को तेज बहाव वाले क्षेत्रों में जाने से रोकने तथा मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने का आग्रह किया है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 16:23:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mahi Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उत्तराखंड में झमाझम बारिश, बदरीनाथ हाइवे व केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग बंद</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">देहरादून। उत्तराखंड में बारिश लगातार जारी है। मोसम विज्ञान केंद्र ने आज देहरादून, नैनीताल, पौड़ी, बागेश्वर व टिहरी जिले में बारिश का आरेंज अलर्ट जारी किया है। बारिश से बदरीनाथ हाइवे गुलाबकोटि के पास और केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग सोनप्रयाग-मुनकटिया के पास पत्थर गिरने से बंद हो गया है। इसके अलावा बागेश्वर व अल्मोड़ा जिले में आज स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों में एक दिन का अवकाश घोषित किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के विज्ञानी रोहित थपलियाल ने बताया कि अगले दो से तीन दिनों के दौरान मानसून उत्तराखंड के शेष हिस्सों सहित उत्तर-पश्चिम भारत के अन्य राज्यों में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/uttarakhand/heavy-rain-in-uttarakhand-badrinath-highway-and-kedarnath-hiking-trail/article-150669"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/2july3123456.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देहरादून। उत्तराखंड में बारिश लगातार जारी है। मोसम विज्ञान केंद्र ने आज देहरादून, नैनीताल, पौड़ी, बागेश्वर व टिहरी जिले में बारिश का आरेंज अलर्ट जारी किया है। बारिश से बदरीनाथ हाइवे गुलाबकोटि के पास और केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग सोनप्रयाग-मुनकटिया के पास पत्थर गिरने से बंद हो गया है। इसके अलावा बागेश्वर व अल्मोड़ा जिले में आज स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों में एक दिन का अवकाश घोषित किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के विज्ञानी रोहित थपलियाल ने बताया कि अगले दो से तीन दिनों के दौरान मानसून उत्तराखंड के शेष हिस्सों सहित उत्तर-पश्चिम भारत के अन्य राज्यों में भी पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा। राज्य आपदा प्राधिकरण ने जिलों को सतर्क रहने और चारधाम यात्रियों से अपील की है कि मौसम को देखते हुए यात्रा करें। लोगों से नदी नालों से दूर रहने की अपील की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर सोनप्रयाग-मुनकटिया के बीच आज सुबह पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण अवरुद्ध हो गया, जिससे पैदल आवाजाही एहतियातन अस्थायी रूप से रोक दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">जिला प्रशासन के अनुसार, सुबह 9:44 बजे सेक्टर अधिकारी सोनप्रयाग ने मुनकटिया क्षेत्र में पत्थर गिरने की सूचना दी। यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल मार्ग पर आवाजाही रोक दी।</p>
<p style="text-align:justify;">जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि मार्ग को शीघ्र सुचारु करने के लिए संबंधित विभाग की टीमें जेसीबी मशीनों के साथ मलबा और बड़े पत्थर हटाने के कार्य में युद्धस्तर पर जुटी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि मार्ग पूरी तरह सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही यातायात बहाल किया जाएगा। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें तथा मार्ग खुलने की आधिकारिक सूचना मिलने तक प्रतीक्षा करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                    

                <link>https://www.tarunmitra.in/state/uttarakhand/heavy-rain-in-uttarakhand-badrinath-highway-and-kedarnath-hiking-trail/article-150669</link>
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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 12:53:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shishir Patel]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परमार्थ निकेतन में हरित संदेश, मानसून की पहली वर्षा पर स्वामी चिदानन्द ने किया पौधारोपण</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर सभी चिकित्सकों को परमार्थ निकेतन से हार्दिक शुभकामनाएँ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/uttarakhand/green-message-in-parmarth-niketan-swami-chidanand-planted-saplings-on/article-150589"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/जतोलू.png" alt=""></a><br /><p><strong>ऋषिकेश।</strong> मानसून की प्रथम वर्षा के समय आज परमार्थ पीठाधीश्वर,स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने ऋषिकुमारों के साथ पौधारोपण कर भारत के हरित भविष्य, प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व और राष्ट्रधर्म के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का बीजारोपण किया। भारत की आत्मा उसकी संस्कृति, नदियों, वनों और हरित धरती में बसती है। यदि इनके संरक्षण से हमारा पर्यावरण सुरक्षित होगा, हमारी सभ्यता, हमारी संस्कृति और हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी अक्षुण्ण रहेगा।</p>
<p>इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण आज केवल पर्यावरणीय विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रधर्म का सर्वाेच्च स्वरूप है। जो समाज अपने जल, जंगल, जमीन और जैव विविधता की रक्षा नहीं कर सकता, वह अपनी सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय अस्मिता को भी लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रख सकता।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति ने सदैव प्रकृति को देवत्व प्रदान किया है। हमारे यहाँ नदियाँ जीवनदायिनी हैं, पर्वत देव तुल्य हैं, वृक्ष पूजनीय हैं और पृथ्वी स्वयं माता है। भारतीय जीवनदृष्टि उपभोग, यूज एंड थ्रो नहीं, बल्कि सहअस्तित्व, संरक्षण और संवर्धन का संदेश देती है। आधुनिक विकास तभी सार्थक है जब वह प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर आगे बढ़े।स्वामी ने कहा कि आज आवश्यकता केवल पौधे लगाने की नहीं, बल्कि पौधों के साथ अपना रिश्ता पुनः स्थापित करने की है। जब तक प्रत्येक नागरिक पौधों को परिवार के सदस्य की तरह अपनाकर उसका पालन-पोषण नहीं करेगा, तब तक हरियाली का स्वप्न अधूरा रहेगा। पौधारोपण जीवनभर निभाया जाने वाला संकल्प है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जंगल केवल लकड़ी का स्रोत नहीं, बल्कि शुद्ध वायु, जल संरक्षण, जैव विविधता और जलवायु संतुलन के आधार हैं। नदियाँ केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, कृषि, संस्कृति और जीवन की धड़कन हैं। भूमि केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों का तप, त्याग और आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर है। यदि हम इनका सम्मान नहीं करेंगे तो विकास का कोई भी मॉडल स्थायी नहीं रह सकता।</p>
<p>स्वामी ने विशेष रूप से युवाओं और बच्चों का आह्वान करते हुए कहा कि भारत का भविष्य केवल तकनीक और अर्थव्यवस्था से नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ हमारे संबंध से तय होगा। यदि नई पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली बना लेती है तो भारत विश्व को पुनः संतुलित, टिकाऊ और आध्यात्मिक विकास का मार्ग दिखा सकता है। उन्होंने कहा कि आज प्रत्येक परिवार, प्रत्येक विद्यालय, प्रत्येक आश्रम और प्रत्येक संस्था को हर वर्ष पौधारोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण का संकल्प भी लेना होगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मानसून प्रकृति का उत्सव है। यह हमें याद दिलाता है कि जीवन का प्रत्येक नया आरंभ धरती के प्रति कृतज्ञता से होना चाहिए। वर्षा की प्रत्येक बूंद हमें यह संदेश देती है कि यदि हम प्रकृति का सम्मान करेंगे तो प्रकृति हमें अन्न, जल, स्वास्थ्य और समृद्धि के रूप में अनेक गुना लौटाएगी।</p>
<p>स्वामी ने कहा कि अपने जीवन में कम से कम एक से पांच पौधों को पूर्ण समर्पण के साथ विकसित करे, जल का संरक्षण करे, नदियों को प्रदूषण से मुक्त रखने का प्रयास करे और प्रकृति के प्रति संवेदनशील जीवनशैली अपनाए। यही सच्चा राष्ट्रप्रेम है, यही सनातन संस्कृति का संदेश है और यही आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी है।</p>
<p>मानसून की पहली वर्षा में परमार्थ निकेतन से हरित चेतना का आह्वान करते हुये पर्यावरण संरक्षण को राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ से जोड़ने हेतु स्वामी जी ने युवाओं को प्रेरित किया। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर सभी चिकित्सकों को परमार्थ निकेतन से हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुये कहा कि मानव सेवा ही माधव सेवा है, ईश्वर सेवा है और इस पावन साधना के सच्चे अग्रदूत हमारे चिकित्सक हैं। </p>
<p>चिकित्सकों का समर्पण, करुणा और सेवा-भाव अनगिनत जीवन में आशा, विश्वास और नवजीवन का संचार करते हैं। चिकित्सक केवल रोगों का उपचार नहीं करते, बल्कि मानवता की रक्षा और जीवन की गरिमा को भी संबल प्रदान करते हैं. उन सभी चिकित्सकों का जीवन सदैव मानव कल्याण का प्रेरक और पथप्रदर्शक बना रहे. आज की परमार्थ गंगा आरती सभी चिकित्सकों के स्वस्थ व दीर्घायुस्य हेतु समर्पित की गयी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                    

                <link>https://www.tarunmitra.in/state/uttarakhand/green-message-in-parmarth-niketan-swami-chidanand-planted-saplings-on/article-150589</link>
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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 20:34:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Harshit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुरु हरगोबिंद साहिब जी के प्रकाश पर्व पर परमार्थ निकेतन से दी गई शुभकामनाएँ</title>
                                    <description><![CDATA[आध्यात्मिक शक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व साथ-साथ चलें तो समाज में विलक्षण परिवर्तन सम्भव: चिदानन्द सरस्वती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/uttarakhand/best-wishes-from-parmarth-niketan-on-the-prakash-parv-of/article-150424"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/ेै2.png" alt=""></a><br /><p><strong>ऋषिकेश।</strong> सिख पंथ के छठे गुरु, ‘मीरी-पीरी’ के दिव्य सिद्धांत के प्रवर्तक, धर्मरक्षक एवं महान ‘सैन्य-संत’ गुरु हरगोबिंद साहिब महाराज के पावन प्रकाश पर्व के अवसर पर परमार्थ निकेतन परिवार से हार्दिक शुभकामनाएँ। इस पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, परमार्थ पीठाधीश्वर, स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि गुरु हरगोबिंद साहिब महाराज का जीवन धर्म, अध्यात्म, साहस, करुणा, आत्मसम्मान और राष्ट्रसेवा का अद्भुत संगम है। उन्होंने यह संदेश दिया कि जब धर्म, सत्य और मानवता पर संकट आए, तब केवल आध्यात्मिक चेतना ही नहीं, साहस एवं संकल्प भी उतना ही आवश्यक है। उनका जीवन प्रेरणा देता है कि आध्यात्मिक शक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व साथ-साथ चलें तो समाज में विलक्षण परिवर्तन सम्भव है।</p>
<p>गुरु हरगोबिंद साहिब ने ‘मीरी-पीरी’ की महान परंपरा स्थापित कर यह स्पष्ट किया कि आध्यात्मिक सत्ता (पीरी) और लौकिक उत्तरदायित्व (मीरी) परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने दो तलवारें धारण कर यह संदेश दिया कि जीवन में शास्त्र का ज्ञान और शस्त्र का साहस, दोनों का संतुलन आवश्यक है। शास्त्र हमें सत्य, करुणा, विवेक और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाते हैं, जबकि शस्त्र धर्म, न्याय और निर्दाेषों की रक्षा का संकल्प प्रदान करते हैं। यह संतुलित दृष्टिकोण आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उस युग में था।</p>
<p>स्वामी ने कहा कि गुरु साहिब का संपूर्ण जीवन हमें अन्याय, अत्याचार और भय के विरुद्ध निर्भीक होकर खड़े होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने समाज में आत्मबल, संगठन, अनुशासन और सेवा की भावना को जागृत किया। उनके आदर्श यह संदेश देते है कि वास्तविक शक्ति आत्मबल, सत्यनिष्ठा, नैतिकता और ईश्वर में अटूट विश्वास में निहित होती है।</p>
<p>आज जब विश्व अनेक प्रकार की चुनौतियों, हिंसा, असहिष्णुता, सामाजिक विभाजन, नैतिक मूल्यों के क्षरण तथा पर्यावरणीय संकट का सामना कर रहा है, तब गुरु श्री हरगोबिंद साहिब जी की शिक्षाएँ और अधिक प्रासंगिक हो जाती हैं। उनका जीवन हमें यह संदेश देता है कि धर्म का वास्तविक स्वरूप मानवता की रक्षा, सभी के सम्मान, न्याय की स्थापना और प्रेमपूर्ण सहअस्तित्व में निहित है। यदि समाज गुरु साहिब के आदर्शों को आत्मसात करे तो एक अधिक न्यायपूर्ण, शांतिपूर्ण और समरस विश्व की स्थापना संभव है।</p>
<p>स्वामी ने कहा कि भारत की महान आध्यात्मिक परंपरा सदैव विविधता में एकता, परस्पर सम्मान और सभी धर्मों के प्रति आदर की भावना को पोषित करती रही है। गुरु हरगोबिंद साहिब जी का जीवन इस सनातन भारतीय चेतना का उज्ज्वल उदाहरण है, जहाँ आध्यात्मिकता केवल व्यक्तिगत साधना तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज, राष्ट्र और संपूर्ण मानवता के कल्याण का माध्यम बनती है। उनकी शिक्षाएँ हमें यह स्मरण कराती हैं कि धर्म का सर्वाेच्च स्वरूप सेवा, करुणा, न्याय और लोकमंगल है।</p>
<p>स्वामी जी ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे हमारे पूज्य संतों व महापुरूषों के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने चरित्र का निर्माण करें, सत्य एवं नैतिक मूल्यों को जीवन का आधार बनाएँ, राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें तथा सेवा, सद्भाव और मानवता के मार्ग पर अग्रसर रहें। स्वयं अनुशासित हो, समाज के लिए समर्पित हो और प्रत्येक परिस्थिति में सत्य एवं न्याय का साथ दे। प्रकाश पर्व के इस पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन से सभी श्रद्धालुओं अनंत शुभकामनायें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                    

                <link>https://www.tarunmitra.in/state/uttarakhand/best-wishes-from-parmarth-niketan-on-the-prakash-parv-of/article-150424</link>
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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 21:14:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Harshit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> राजधानी में हुई झमाझम बारिश, मौसम का बदला पैटर्न</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देहरादून : राजधानी देहरादून में आज तेज बारिश हो रही है। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार अगले दो दिन में प्रदेश के कुछ हिस्सों में मानसून सक्रिय हो सकता है, लेकिन तब तक लोगों को गर्मी और उमस से जूझना पड़ेगा।<br />राजधानी देहरादून सहित प्रदेश के कई जिलों में आज भारी बारिश का सिलिसिला जारी है। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार पौड़ी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। जबकि अन्य जिलों में भी बिजली चमकने और तेज दौर की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/uttarakhand/%C2%A0%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%88-%E0%A4%9D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%9D%E0%A4%AE-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B6--%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%B8%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%88%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A8/article-150350"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/swdrfgth.jpg" alt=""></a><br /><p>देहरादून : राजधानी देहरादून में आज तेज बारिश हो रही है। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार अगले दो दिन में प्रदेश के कुछ हिस्सों में मानसून सक्रिय हो सकता है, लेकिन तब तक लोगों को गर्मी और उमस से जूझना पड़ेगा।<br />राजधानी देहरादून सहित प्रदेश के कई जिलों में आज भारी बारिश का सिलिसिला जारी है। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार पौड़ी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। जबकि अन्य जिलों में भी बिजली चमकने और तेज दौर की बारिश की संभावना है।</p>
<p><br />हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिले के कुछ इलाकों में भी बिजली चमकने और 40 किलाेमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है। मौसम के बदले पैटर्न और जलवायु परिवर्तन के चलते इस साल भी गर्मी का असर बीते साल की तरह कम रहा। कुछ एक दिनों को छोड़ दें तो मैदानी इलाकों का अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास ही दर्ज किया गया। जिसके चलते भले गर्मी ने कम परेशान किया हो लेकिन इस बार गर्मी ज्यादा दिन तक रहेगी। इसकी मुख्य वजह मानसून में देरी है।<br />विज्ञापन</p>
<p>उमस भरी गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ाई<br />मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि उत्तराखंड में करीब पांच साल बाद मानसून सप्ताह भर की देरी से आएगा। जिससे गर्मी व उमस का असर और लंबे समय तक बना रहेगा। मानसून की धीमी रफ्तार के चलते प्रदेश में तापमान में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। दिन के साथ-साथ रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है। उमस भरी गर्मी ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। हालांकि इस बीच हो रही हल्की बारिश राहत दिला रही है लेकिन बारिश के रुकते ही उमस परेशान कर रही है।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 16:53:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सड़क अवसंरचना के लिए उत्तराखंड को सात हजार करोड़ रूपये देगी केंद्र सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ एक बैठक कर उत्तराखण्ड से संबंधित सड़क एवं अवसंरचना विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया। इस बैठक में केंद्र सरकार ने उत्तराखंड की सड़क अवसंरचना के लिए सात हजार करोड़ रूपये देने पर सहमति जताई है।</p>
<p>केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, सीमांत क्षेत्रों की सामरिक व रणनीतिक महत्ता, तीर्थाटन, पर्यटन व आपदा प्रबंधन की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए राज्य में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/uttarakhand/central-government-will-give-seven-thousand-crore-rupees-to-uttarakhand/article-150348"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/30jun51234.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ एक बैठक कर उत्तराखण्ड से संबंधित सड़क एवं अवसंरचना विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया। इस बैठक में केंद्र सरकार ने उत्तराखंड की सड़क अवसंरचना के लिए सात हजार करोड़ रूपये देने पर सहमति जताई है।</p>
<p>केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, सीमांत क्षेत्रों की सामरिक व रणनीतिक महत्ता, तीर्थाटन, पर्यटन व आपदा प्रबंधन की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए राज्य में सुदृढ़ और आधुनिक सड़क नेटवर्क के विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राज्य के लंबित प्रस्तावों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय का अनुरोध किया।</p>
<p>सोशल मीडिया मंच फेसबुक पर एक पोस्ट कर मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि केंद्रीय सड़क अवसंरचना निधि के अंतर्गत वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार को लगभग 750 करोड़ लागत की परियोजनाओं की स्वीकृति पर सहमति दे दी है। इसके साथ ही एनओएच के अंतर्गत पांच प्रमुख परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई, जिनकी कुल अनुमानित लागत लगभग रूपये 2966 करोड़ है। इनमें श्रीनगर बाईपास का पीएमसी, पुरकाजी–लक्सर–हरिद्वार मार्ग की चार-लेनिंग, लोहाघाट व पिथौरागढ़ बाईपास एलाइनमेंट, मझोला से खटीमा के आबादी भाग में चार-लेन विस्तार व रामनगर–रानीखेत (मोहन) मार्ग का सुदृढ़ीकरण प्रमुख रूप से शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2025-26 तक की रूपये 530.11 करोड़ की लंबित प्रतिपूर्ति राशि शीघ्र अवमुक्त किए जाने तथा का भी अनुरोध किया।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने आगामी अर्धकुंभ मेला 2027 के दृष्टिगत हरिद्वार बाईपास परियोजना को समयबद्ध रूप से पूर्ण किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इससे यातायात दबाव में कमी आएगी तथा श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को सुगम आवागमन की सुविधा प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री ने कोटद्वार बाईपास परियोजना के कार्यों में भी तेजी लाने का अनुरोध किया, जिससे क्षेत्रीय यातायात व्यवस्था सुगम हो सके तथा स्थानीय जनता को जाम की समस्या से राहत मिले। दोनों ही प्रस्तावों को सहमति दी गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि नेशनल हाईवे के माध्यम से अन्य मार्गों के संयोजन के लिए कुछ परियोजनाओं के लिए लगभग 3 हजार करोड़ की सैद्धांतिक सहमति देने का अनुरोध किया, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने सकारात्मक सहमति व्यक्त की। इसके अतिरिक्त अल्मोड़ा सिकुड़ा बैंड से एनएच-309 तक टनल सहित मोटर मार्ग निर्माण के लिए लगभग रूपये 300 करोड़ की परियोजना पर चर्चा और सैद्धान्तिक सहमति बन गई।</p>
<p>इसके अलावा राज्य में आपदा प्रबन्धन के दृष्टिगत मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड लैंडस्लाइड मिटिगेशन मैनेजमेंट सेंटर के माध्यम से भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में उपचारात्मक कार्यों के लिए डीपीआर तैयार किए जाने के लिए अनुबंध करने का अनुरोध किया, जिससे संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी एवं वैज्ञानिक समाधान सुनिश्चित हो सके। मंत्रालय द्वारा इसे स्वीकृत किया गया है ।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने सीमा सड़क संगठन से संबंधित लंबित मामलों, विशेषकर ऋषिकेश–गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के हिना–तेखला–नेताला–गरमपानी खंड की डीपीआर तथा जोशीमठ बाईपास मार्ग के संशोधित प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान किए जाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्यंत कम दरों पर प्राप्त निविदाओं के मामलों में अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी की वर्तमान व्यवस्था में आवश्यक संशोधन किया जाए, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण एवं स्लोप ट्रीटमेंट कार्य समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से संपन्न हो सकें।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं केंद्र सरकार के सहयोग से इन सभी परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन से उत्तराखण्ड में सड़क संपर्क एवं आधारभूत संरचना को नई मजबूती मिलेगी। इससे सीमांत क्षेत्रों का विकास, पर्यटन को बढ़ावा, आपदा प्रबंधन क्षमता में वृद्धि तथा राज्य की आर्थिक प्रगति को गति प्राप्त होगी।</p>
<p>बैठक में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा, सचिव लोक निर्माण विभाग डॉ. पंकज कुमार पांडेय, सचिव सड़क परिवहन बृजेश कुमार संत, स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा आदि मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 16:36:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shishir Patel]]></dc:creator>
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                <title>परमार्थ निकेतन में संत शिरोमणि कबीर दास की 628वीं जयंती पर दी गई श्रद्धांजलि </title>
                                    <description><![CDATA[परिवार, संस्कार, प्रेम, विश्वास और आध्यात्मिक मूल्यों का जीवंत विद्यालय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/uttarakhand/tribute-paid-to-saint-shiromani-kabir-das-on-628th-birth/article-150265"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/whatsapp-image-2026-06-29-at-17.41.12.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>ऋषिकेश।</strong> परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, परमार्थ पीठाधीश्वर, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आज वट पूर्णिमा के पावन अवसर पर मातृ शक्ति को शुभकामनायें देते हुये कहा कि वट पूर्णिमा का पावन पर्व भारतीय संस्कृति की उस महान परंपरा का उत्सव है, जो परिवार को समाज की सबसे मजबूत इकाई मानती है। यह केवल अखंड सौभाग्य का व्रत नहीं, बल्कि जीवन में निष्ठा, समर्पण, विश्वास, धैर्य और सनातन मूल्यों को स्थापित करने का दिव्य अवसर है।</p>
<p>मानवता के महान उपासक, संत शिरोमणि कबीर दास जी की 628वीं जयंती पर परमार्थ निकेतन से उन्हें भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुये कहा कि कबीरदास जी सत्य, समरसता और सामाजिक चेतना के क्रांतिकारी स्वर थे। उन्होंने जाति-पांति, धार्मिक आडंबर, पाखंड और ऊँच-नीच की संकीर्ण सोच को निर्भीकता से चुनौती देते हुए प्रेम, करुणा, समानता और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाया। उनके दोहे आज भी समाज को आत्ममंथन, सदाचार और मानवता की प्रेरणा देते हैं। आइए, उनके विचारों को जीवन में अपनाकर सामाजिक सद्भाव, नैतिक मूल्यों और मानव सेवा ही माधव सेवा की भावना को सशक्त बनाने का संकल्प लें।</p>
<p>वट पूर्णिमा के पावन अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि वट सावित्री व्रत सत्य, संकल्प, आत्मबल और धर्मनिष्ठा की विजय का पर्व है। सावित्री ने अपने अटूट विश्वास, तप और समर्पण से यह सिद्ध किया कि जब जीवन में संस्कार, श्रद्धा और धर्म का आधार होता है, तब असंभव भी संभव हो जाता है।</p>
<p>स्वामी जी ने कहा कि पूर्णिमा का आध्यात्मिक संदेश है कि जिस प्रकार चन्द्रमा स्वयं प्रकाशमान नहीं होता, बल्कि सूर्य का प्रकाश ग्रहण कर संपूर्ण जगत को शीतलता और प्रकाश प्रदान करता है, उसी प्रकार हम भी परमात्मा की दिव्य चेतना को अपने जीवन में धारण कर समाज को प्रेम, करुणा, सेवा और सदाचार का प्रकाश दे सकते हैं। यही भारतीय जीवन-दर्शन का सार है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आज का समय भौतिक प्रगति का है, लेकिन साथ ही पारिवारिक विघटन, अकेलापन, तनाव और संस्कारों के क्षरण की चुनौती भी हमारे सामने है। आधुनिकता का स्वागत अवश्य होना चाहिए, किंतु अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों की कीमत पर नहीं। यदि परिवारों में संवाद समाप्त हो जाए, यदि पीढ़ियों के बीच आत्मीयता कम हो जाए और यदि बच्चों तक संस्कारों की धारा न पहुँचे, तो समाज की नींव कमजोर होने लगती है।</p>
<p>वट वृक्ष भारतीय संस्कृति में दीर्घायु, स्थिरता और संरक्षण का प्रतीक है। उसकी विशाल जड़ें और विस्तृत शाखाएँ हमें यह प्रेरणा देती हैं कि परिवार भी ऐसा ही हो, जहाँ प्रत्येक सदस्य को सुरक्षा, स्नेह, सम्मान और अपनापन मिले। संयुक्त परिवार की परंपरा इसी भावना का जीवंत स्वरूप रही है। यहाँ केवल एक साथ रहना ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहभागी बनना, अनुभवों का आदान-प्रदान करना और जीवन मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाना भी जीवन का स्वाभाविक अंग है।<br />आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने परिवारों में पुनः संस्कारों का रोपण करें। बच्चों को केवल आधुनिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि सत्य बोलना, बड़ों का सम्मान करना, प्रकृति से प्रेम करना, सेवा करना, कृतज्ञता व्यक्त करना, प्रार्थना करना और भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव का भाव भी सिखाएँ। संस्कार किसी पुस्तक से नहीं, बल्कि परिवार के वातावरण से जन्म लेते हैं। माता-पिता और दादा-दादी स्वयं अपने आचरण से जो उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, वही बच्चों के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पाठशाला बन जाता है।</p>
<p>स्वामी ने कहा कि भोजन की मेज पर केवल भोजन न हो, बल्कि संवाद भी हो। घर में केवल आधुनिक उपकरण न हों, बल्कि प्रतिदिन कुछ समय प्रार्थना, भजन, सत्संग, स्वाध्याय और आत्मीय चर्चा के लिए भी निकाला जाए। यही छोटे-छोटे प्रयास परिवार को संस्कारों का तीर्थ बना सकते हैं।</p>
<p>वट पूर्णिमा हमें यह भी प्रेरणा देती है कि हम केवल अपने परिवार तक सीमित न रहें, बल्कि संपूर्ण समाज को अपना परिवार मानें। वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना भारतीय संस्कृति का वैश्विक संदेश है। जब प्रत्येक परिवार प्रेम, सेवा, सहयोग और नैतिक मूल्यों का केंद्र बनेगा, तभी राष्ट्र सशक्त होगा और विश्व में शांति एवं सद्भाव का वातावरण स्थापित होगा।</p>
<p>आइए, इस वट पूर्णिमा पर हम सभी यह संकल्प लें कि अपने घरों में प्रेम, विश्वास, संवाद, सेवा, करुणा और सनातन मूल्यों का वटवृक्ष रोपित करे। परिवारों में एकता, समर्पण और संस्कारों की ज्योति प्रज्वलित करे तथा आने वाली पीढ़ियों को ऐसा जीवन-दर्शन दें, जो उन्हें केवल सफल ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, जिम्मेदार और चरित्रवान भी बनाए। प्रत्येक परिवार में सुख, शांति, समृद्धि, अखंड सौभाग्य एवं सनातन संस्कारों की अखंड ज्योति सदैव प्रज्वलित रहे। यही वट पूर्णिमा का संदेश और हमारी सांस्कृतिक विरासत का शाश्वत आह्वान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 21:20:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Harshit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अल्मोड़ा: गहरी खाई में गिरी अनियंत्रित कार, कांग्रेस जिला सचिव समेत चार लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अल्माेड़ा।</strong> थाना लमगड़ा क्षेत्र के ग्राम बलिया-बैगनिया रोड पर एक अल्टो कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई, वाहन में कुल छह व्यक्ति सवार थे। हादसे में चार लाेगाें की माैत हाे गई जबकि दाे लाेग घायल हाे गए। मृतकों में कांग्रेस जिला सचिव भी शामिल हैं ।<br /><br />दोपहर बाद यह घटना हुई सूचना मिलने थानाध्यक्ष लमगड़ा प्रमोद पाठक पुलिस टीम के साथ तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से सभी घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, लमगड़ा पहुंचाया गया।</p>
<p>चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों घायलों गोपाल सिंह पुत्र</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/uttarakhand/almora-car-falls-into-ditch-four-people-including-congress-district/article-150205"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/55cfe8224f5e46460c590e02c67edf43_1596481381.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अल्माेड़ा।</strong> थाना लमगड़ा क्षेत्र के ग्राम बलिया-बैगनिया रोड पर एक अल्टो कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई, वाहन में कुल छह व्यक्ति सवार थे। हादसे में चार लाेगाें की माैत हाे गई जबकि दाे लाेग घायल हाे गए। मृतकों में कांग्रेस जिला सचिव भी शामिल हैं ।<br /><br />दोपहर बाद यह घटना हुई सूचना मिलने थानाध्यक्ष लमगड़ा प्रमोद पाठक पुलिस टीम के साथ तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से सभी घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, लमगड़ा पहुंचाया गया।</p>
<p>चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों घायलों गोपाल सिंह पुत्र खीम सिंह तथा सचिन पुत्र राजेंद्र को बेहतर उपचार हेतु हायर सेंटर रेफर किया गया जबकि चार लोगों को मृत घोषित कर दिया।</p>
<p>प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वाहन में सवार सभी व्यक्ति ग्राम विशौद बैगनिया से अपने गांव बलिया लौट रहे थे। दुर्घटना में चार व्यक्तियों की दुखद मृत्यु हो गई, जबकि दो व्यक्ति घायल हुए हैं।<br /><br />मृतकों की शिनाख्त कांग्रेस जिला सचिव राजेन्द्र सिंह बिलवाल पुत्र नारायण सिंह, निवासी ग्राम बलिया, थाना लमगड़ा, जिला अल्मोड़ा (उम्र 40 वर्ष), जगदीश सिंह पुत्र लछम सिंह, निवासी ग्राम बलिया, थाना लमगड़ा, जिला अल्मोड़ा (उम्र 35 वर्ष),लछम सिंह पुत्र प्रताप सिंह.</p>
<p>निवासी ग्राम बलिया, थाना लमगड़ा, जिला अल्मोड़ा (उम्र 56 वर्ष) तथा पान सिंह पुत्र विशन सिंह, निवासी ग्राम बलिया, थाना लमगड़ा, जिला अल्मोड़ा (उम्र 55 वर्ष), पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, मृतकों के शवों पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                    

                <link>https://www.tarunmitra.in/state/uttarakhand/almora-car-falls-into-ditch-four-people-including-congress-district/article-150205</link>
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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 17:42:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mahi Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> प्लास्टिक कचरा और गंदगी से प्रदूषित तुंगनाथ घाटी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>रुद्रप्रयाग : उत्तराखंड के प्रसिद्ध तुंगनाथ-चोपता क्षेत्र की प्राकृतिक खूबसूरती पर प्रदूषण का साया गहराने लगा है। बढ़ती पर्यटक संख्या के साथ प्लास्टिक कचरा और गंदगी बुग्यालों को प्रदूषित कर रहे हैं, जिससे हिमालयी पारिस्थितिकी और वन्यजीवों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।</p>
<p>गढ़वाल में स्थित तुंगनाथ मंदिर का पवित्र इलाका जिसे तृतीय केदार कहा जाता है और चोपता की खूबसूरत घाटियां हर साल हज़ारों श्रद्धालुओं, ट्रेकर्स और प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर खींचती हैं। जहां कुछ सैलानी हिमालय के नजारे और बर्फ की चादर देखने आते हैं, वहीं कुछ लोग बाबा तुंगनाथ के मंदिर में आशीर्वाद पाने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/uttarakhand/%C2%A0%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A4%9A%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%97%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%98%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A5%80%C2%A0/article-150178"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/kijuhyg.jpeg" alt=""></a><br /><p>रुद्रप्रयाग : उत्तराखंड के प्रसिद्ध तुंगनाथ-चोपता क्षेत्र की प्राकृतिक खूबसूरती पर प्रदूषण का साया गहराने लगा है। बढ़ती पर्यटक संख्या के साथ प्लास्टिक कचरा और गंदगी बुग्यालों को प्रदूषित कर रहे हैं, जिससे हिमालयी पारिस्थितिकी और वन्यजीवों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।</p>
<p>गढ़वाल में स्थित तुंगनाथ मंदिर का पवित्र इलाका जिसे तृतीय केदार कहा जाता है और चोपता की खूबसूरत घाटियां हर साल हज़ारों श्रद्धालुओं, ट्रेकर्स और प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर खींचती हैं। जहां कुछ सैलानी हिमालय के नजारे और बर्फ की चादर देखने आते हैं, वहीं कुछ लोग बाबा तुंगनाथ के मंदिर में आशीर्वाद पाने के लिए मुश्किल ट्रेकिंग करते हैं। लेकिन अब इस इलाके की प्राकृतिक सुंदरता फीकी पड़ रही है। इसकी वजह है इधर-उधर बिखरा प्लास्टिक कचरा और गंदगी।</p>
<p>क्षेत्र में बढ़ते पर्यटन और जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय के सुंदर बुग्याल (घास के मैदान) सिमट रहे हैं। इससे राज्य पक्षी हिमालयन मोनाल सहित कई प्रजातियां भी संकट में हैं। इलाके में हिमालयन मोनाल तो नहीं दिखते, लेकिन पर्यटकों के लिए बने अस्थायी शौचालयों की गंदगी, हर तरफ बिखरे प्लास्टिक रैपर और घास के मैदान की ढलान से बहता गंदा पानी ज़रूर दिखा।</p>
<p>हर साल करीब पांच से छह लाख लोग तुंगनाथ का दौरा हैं करते<br />चोपता घाटी हिमालयन मोनाल, थार और रेड फॉक्स जैसी प्रजातियों से समृद्ध है। इसे वन्यजीव अभयारण्य का दर्जा प्राप्त है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पर्यटकों की भारी भीड़ ने इन प्रजातियों के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है। स्थानीय लोगों और मंदिर के पुजारियों ने प्राकृतिक जैव-विविधता के नुकसान पर चिंता जताई है।<br />विज्ञापनतीर्थ पुरोहित रेवाधर मैथानी ने बताया कि पर्यटक निर्देशों की अनदेखी करते हैं। वे पक्के रास्तों पर चलने के बजाय घास के मैदानों पर चलते हैं। इससे मुलायम घास खराब होती है और मिट्टी का कटाव बढ़ता है। हर साल करीब पांच से छह लाख लोग तुंगनाथ का दौरा करते हैं। पर्यटन का चरम दौर पक्षियों के प्रजनन काल से मेल खाता है। पर्यटक फूल तोड़ते हैं और घास कुचलते हैं, ऐसी हरकतें इस इलाके के पेड़-पौधों और जानवरों के प्राकृतिक पनपने के चक्र को बिगाड़ती हैं।<br />पर्यावरणीय चुनौतियां</p>
<p>चाय की दुकानों के पास कचरा बिखरा दिखाई देता है। नीले टेंट वाले शौचालयों का गंदा पानी बुग्याल में रिसता है। इससे प्राकृतिक जल स्रोत दूषित हो गए हैं। पिछले 10 वर्षों  में घास के मैदान और जंगल बहुत खराब हुए हैं। पूरे साल चोपता इलाके में कैंपिंग गतिविधियों का प्रचार भी जलवायु परिवर्तन की बर्बादी को बढ़ावा दे रहा है। ज़्यादा पर्यटन से प्लास्टिक कचरा भी बढ़ रहा है। हालांकि कई जगहों पर डस्टबिन लगाए गए हैं फिर भी पर्यटक कचरा इधर-उधर फेंक देते हैं। घास के मैदानों में तेज़ हवा चलने के कारण प्लास्टिक से निकलने वाला रिसाव मिट्टी के पोषक तत्वों को बदल देता है, जिससे वहां उगने वाले पौधों पर भी असर पड़ता है। हिमालय में ग्लेशियरों के पीछे हटने की वजह से, घास के मैदान ऊंचाई की ओर बढ़ रहे हैं और इसी तरह घास और पेड़ों की सीमाएं भी ऊपर खिसक रही हैं।</p>
<p>वन्यजीवों पर प्रभाव<br />इसके अलावा ''बीयर बॉटल पर्यटन'' ने जानवरों और पक्षियों की आवाजाही रोक दी है। कचरा फेंकने वाली जगहों के पास अब हिरण और एंटिलोप के झुंड दिखते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदर मोनाल और दूसरे तीतर-जैसे पक्षियों के घोंसले नष्ट कर रहे हैं। हाल के वर्षों में बंदरों की आबादी बढ़ी है। पहले इस इलाके में लंगूर पाए जाते थे बंदर नहीं। नेचर व बर्ड फोटोग्राफर राजू पुसोला ने भी पर्यटकों की भीड़ और हेलीकॉप्टरों के शोर से मोनाल के खाना खोजने और प्रजनन व्यवहार में बदलाव देखा है। उन्होंने बताया कि एक बार बारिश के दौरान मोनाल को वहां पड़े पैकेट से कुरकुरे खाते देखा था। इन खाने का असर उनकी प्रजनन क्षमता पर पड़ना स्वाभाविक है।</p>
<p>हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर आनंद कुमार और राजीव लोचन ने तुंगनाथ और मदमहेश्वर में मोनाल पर शोर के असर का अध्ययन किया है। उन्होंने बताया कि चोपता घाटी में गाड़ियों व पर्यटकों के शोर और हेलिकॉप्टरों की आवाजाही की वजह से पक्षियों के आवाज के ज़रिए होने वाले कम्युनिकेशन में रुकावट आती है। मोनाल साथी को आकर्षित करने के लिए अपनी आवाज को और तेज़ करने की कोशिश करता है। इससे उसकी सेहत और क्षमता पर असर पड़ता है, जिसका प्रभाव प्रजनन पर भी होता है। शोर की वजह से उनके अंडे देने और सेने (इनक्यूबेशन) का समय गड़बड़ा जाता है, जिससे चूजों के जिंदा रहने पर खतरा मंडराता है। भविष्य में यह बदलाव प्रजाति के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 15:35:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
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                <title> मेजर भूपेन्द्र कण्डारी का बलिदान राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता रहेगा: गणेश जोशी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देहरादून। उत्तराखंड सरकार के सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने अमर बलिदानी मेजर भूपेन्द्र कण्डारी (सेना मेडल) की 23वीं पुण्यतिथि पर सोमवार को उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस माैके पर उन्हाेंने कहा कि उनका सर्वोच्च बलिदान देशवासियों को सदैव राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा।</p>
<p>सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी आज हाथीबड़कला स्थित शहीद द्वार पर पहुंचकर बलिदानी मेजर कण्डारी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके अदम्य साहस, शौर्य और राष्ट्र के प्रति सर्वोच्च बलिदान को नमन किया। मंत्री ने कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीर सैनिकों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/uttarakhand/ganesh-joshi-major-bhupendra-kandaris-sacrifice-will-continue-to-inspire/article-150153"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/29un4123.jpg" alt=""></a><br /><p>देहरादून। उत्तराखंड सरकार के सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने अमर बलिदानी मेजर भूपेन्द्र कण्डारी (सेना मेडल) की 23वीं पुण्यतिथि पर सोमवार को उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस माैके पर उन्हाेंने कहा कि उनका सर्वोच्च बलिदान देशवासियों को सदैव राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा।</p>
<p>सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी आज हाथीबड़कला स्थित शहीद द्वार पर पहुंचकर बलिदानी मेजर कण्डारी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके अदम्य साहस, शौर्य और राष्ट्र के प्रति सर्वोच्च बलिदान को नमन किया। मंत्री ने कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीर सैनिकों का राष्ट्र सदैव ऋणी रहेगा। उनका त्याग और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड वीरों की भूमि है और यहां के सैनिकों ने देश की सुरक्षा एवं अखण्डता के लिए हमेशा अद्वितीय साहस का परिचय दिया है। राज्य सरकार शहीदों के सम्मान और उनके परिजनों के कल्याण के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।</p>
<p>श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने भी बलिदानी मेजर भूपेन्द्र कण्डारी को श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर बलीदानी के पिता गजेन्द्र सिंह कण्डारी, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल ओ.पी. फरस्वाण (सेनि.), अशोक गुप्ता, मुकेश अग्रवाल, सी.एस. नेगी सहित अनेक लोग उपस्थित थे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 12:15:53 +0530</pubDate>
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