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                <title>होम  - Tarun Mitra</title>
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                            <item>
                <title>मुस्लिम प्रिंसिपल को हटाने के लिए पानी की टंकी में मिलाया जहर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>कर्नाटक में दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ बेलगावी में कुछ लोगों ने स्कूल के मुस्लिम प्रिंसिपल को पद से हटाने के लिए पानी की टंकी में जहर मिला दिया। इस पानी को पीने  से करीब 12 स्कूली बच्चों की तबियत बिगड़ गयी। </p>
<p>यह घटना बेलगावी के सवादत्ती तालुक के हुलिकट्टी गांव की है, जहां चार लोगों ने मिलकर मुस्लिम प्रिंसिपल को पद से हटाने के लिए इस पूरी घटना को अंजाम दे डाला। इस मामले को लेकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे ' आतंकी कृत्य' बताया। उन्होंने अपने सोशल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/national/11-children-climbed-to-remove-muslim-principal-from-post/article-99575"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2025-08/chatgpt-image-aug-4,-2025,-01_59_28-pm.png" alt=""></a><br /><p>कर्नाटक में दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ बेलगावी में कुछ लोगों ने स्कूल के मुस्लिम प्रिंसिपल को पद से हटाने के लिए पानी की टंकी में जहर मिला दिया। इस पानी को पीने  से करीब 12 स्कूली बच्चों की तबियत बिगड़ गयी। </p>
<p>यह घटना बेलगावी के सवादत्ती तालुक के हुलिकट्टी गांव की है, जहां चार लोगों ने मिलकर मुस्लिम प्रिंसिपल को पद से हटाने के लिए इस पूरी घटना को अंजाम दे डाला। इस मामले को लेकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे ' आतंकी कृत्य' बताया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर रसोई कर्मचारियों की सरहाना करते हुए कहा कि रसोई कर्मचारियों की समय पर सजगता के कारण एक बड़ा हादसा टल गया है। इसके लिए उन्होंने विद्यालय के रसोई कर्मचारियों को धन्यवाद दिया।  </p>
<p>बता दें कि स्थानीय पुलिस ने इस घटना के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।इस घटना का मुख्य आरोपी <em>श्री राम सेना</em> के तालुक अध्यक्ष <em>सागर पाटिल</em>  है। जिसने कथित तौर पर यह साजिश रची और जहर मुहैया कराया। उसने कथित तौर पर कबूल किया है कि यह कृत्य स्कूल के एक मुस्लिम हेडमास्‍टर के प्रति नाराजगी के कारण किया गया था। </p>
<p>पुलिस की जांच में सामने आया है कि कृष्णा मदार ने पांचवी कक्षा के एक छात्र को जहरीली बोतल थमाई थी और उसे पानी की टंकी में मिलाने के लिए उकसाया था। जांच अधिकारियों का मानना है कि आरोपियों ने स्कूल के मुस्लिम हेडमास्टर को बदनाम करने और तबादला करवाने के लिए जानबूझकर बच्चों के पानी में जहर मिलाया था। इसके जरिए वे क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव फैलाना चाहते थे।</p>
<p>गौरतलब है कि यह घटना यह घटना 14 जुलाई 2025 की है, जहां 13 सालों से सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल सुलेमान गोरीनायक को पद से हटाने के लिए यह साजिश रची गयी थी।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>होम </category>
                                            <category>वेब स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Aug 2025 14:03:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nupendra Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘कांवड़ लेने मत जाना, तुम ज्ञान का दीप जलाना’ बयान पर यूपी में विवाद </title>
                                    <description><![CDATA[<div>बरेली जिले के बहेड़ी में 'महात्मा गांधी मेमोरियल इंटरकॉलेज' के शिक्षक डॉ. रजनीश गंगवार की एक कविता ने यूपी की सियासी गलियारों में बखेड़ा खड़ा कर दिया है। दरअसल, कुछ दिनों पहले शिक्षक रजनीश ने इंटरकॉलेज में प्रार्थना सभा के दौरान बच्चों को "कांवड़ लेने मत जाना, तुम ज्ञान के दीप जलाना" कविता सुनाई थी. जिसके बाद डॉ. रजनीश गंगवार खिलाफ FIR हो गयी। इसी मामले को लेकर अब विपक्ष उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर हमलावर।   </div>
<div>  </div>
<div><strong>शिक्षक  डॉ. रजनीश गंगवार पर हुआ मुकदमा </strong></div>
<div>शिक्षक डॉ. रजनीश गंगवार की कविता सुनाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/do-not-go-to-take-kanvad-you-read-the-fir/article-96935"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2025-07/new-project-(70).jpg" alt=""></a><br /><div>बरेली जिले के बहेड़ी में 'महात्मा गांधी मेमोरियल इंटरकॉलेज' के शिक्षक डॉ. रजनीश गंगवार की एक कविता ने यूपी की सियासी गलियारों में बखेड़ा खड़ा कर दिया है। दरअसल, कुछ दिनों पहले शिक्षक रजनीश ने इंटरकॉलेज में प्रार्थना सभा के दौरान बच्चों को "कांवड़ लेने मत जाना, तुम ज्ञान के दीप जलाना" कविता सुनाई थी. जिसके बाद डॉ. रजनीश गंगवार खिलाफ FIR हो गयी। इसी मामले को लेकर अब विपक्ष उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर हमलावर।   </div>
<div> </div>
<div><strong>शिक्षक  डॉ. रजनीश गंगवार पर हुआ मुकदमा </strong></div>
<div>शिक्षक डॉ. रजनीश गंगवार की कविता सुनाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद एक एक धार्मिक संगठन ने उनपर FIR करवाई है। यह मामला BNS की धारा 353-2 के तहत दर्ज हुआ है। इस धारा के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति ऐसा काम करता है जिससे अलग-अलग समूहों के बीच दुश्मनी या नफरत फैल सकती है, तो उस पर कार्रवाई हो सकती है।</div>
<div> </div>
<div><strong>महाकाल सेवा समिति के अध्यक्ष ने कराया मुकदमा </strong></div>
<div>महाकाल सेवा समिति के अध्यक्ष शक्ति गुप्ता ने आरोप लगाया कि अध्यापक ने सनातन धर्म की आस्था को ठेंस पहुंचाने वाली कविता सुनाई. इससे लोगों की भावनाएं आहत हुईं हैं. उन्होंने पुलिस को तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया। शिक्षक पर मुकदमा होने के बाद से यह मामला अब तूल पकड़ते हुए नजर आ रहा है। </div>
<div> </div>
<div><strong>अखिलेश यादव ने शिक्षक का किया समर्थन  </strong></div>
<div>उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने खुद इस मामले में दखल देते हुए डॉ. गंगवार का समर्थन किया है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर डॉ. रजनीश का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि जो मानवता के मार्ग पर ले जाए वही सबसे बड़ा धर्म है।   </div>
<div>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/yadavakhilesh/status/1945089225289765004">https://twitter.com/yadavakhilesh/status/1945089225289765004</a></blockquote>

</div>
<div> </div>
<div><strong>नगीना सांसद ने शिक्षक के समर्थन में किया ट्वीट</strong></div>
<div>नगीना सांसद व भीम आर्मी चीफ और आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर ने भी बरेली के शिक्षक डॉ. रजनीश गंगवार का समर्थन करते हुए अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट अपलोड की है। चंद्रशेखर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उत्तर प्रदेश के तथाकथित रामराज्य में अब शिक्षा के पक्ष में बोलना भी अपराध बना दिया गया है। "अगर एक शिक्षक यह कहे कि 'ज्ञान का दीप जलाओ' और 'कांवड़ से एसपी-डीएम नहीं बनते', तो उस पर मुख्यमंत्री योगी जी की पुलिस FIR दर्ज कर देती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51(A)(ज) में स्पष्ट रूप से वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद तथा अन्वेषण एवं सुधार की भावना का विकास करने की बात कही गई है। धर्म की आड़ में शिक्षा, विवेक, संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला किया जा रहा है। समाज को शिक्षित करना अपराध नहीं, बल्कि सबसे बड़ा ‘शिक्षक धर्म’ है। </div>
<div> </div>
<div><strong>यह है पूरा मामला </strong></div>
<div>डॉ. रजनीश गंगवार ने कॉलेज की प्रार्थना सभा में छात्रों के सामने एक कविता सुनाई थी। जिसमें उन्होंने कहा कि कांवड़ लेने मत जाना, तुम ज्ञान के दीप जलाना, कांवड़ ले जाकर कोई एसपी-डीएम नहीं बना है मानवता की सेवा करके सच्चे मानव बन जाना, शिक्षा है जग-जग की जननी, उसका दूध पियो तुम, सद् कर्मों का रहस्य बड़ा है, उसका रूप गुनो तुम'.</div>
<div> </div>
<div>शिक्षक के मुताबिक कविता के माध्यम से छात्रों को सत्कर्म, शिक्षा, मानवता और विवेक का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी गई थी। इस कविता के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही कुछ हिंदू संगठनों ने इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया और बहेड़ी थाना क्षेत्र में शिक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>होम </category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Jul 2025 17:40:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nupendra Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने सीएम योगी को लिखा पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश की नगीना सांसद व आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर उनकी टेंशन बढ़ा दी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/uttar-pradesh/nagina-mp-chandrashekhar-azad-wrote-a-letter-to-cm-yogi/article-96864"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2025-07/new-project-(69).jpg" alt=""></a><br /><p>उत्तर प्रदेश की नगीना सांसद व आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर उनकी टेंशन बढ़ा दी है। नगीना सांसद ने उत्तर प्रदेश के पंचायतीराज विभाग के ग्रामीण सफाईकर्मियों की 16 वर्षों से लंबित प्रोन्नति, सेवा नियमावली एवं सम्मानजनक कार्य-स्थितियों की माँग को लेकर सीएम योगी को चिट्ठी लिखी है। </p>
<p><img style="margin-left:auto;margin-right:auto;" alt="D9UzGAWtOjZ+AAAAAElFTkSuQmCC"></img></p>
<p>चंद्रशेखर आजाद ने अपने पत्र में लिखा कि उत्तर प्रदेश के पंचायतीराज विभाग में एक लाख से अधिक ग्रामीण सफाईकर्मी पिछले 16 वर्षों से कार्यरत हैं जो काफी विषम परिस्थितियों से गुजर रहे हैं, सांसद ने अपने पत्र में लिखा कि वर्ष 2008 में स्थायी रूप से तैनात इन कर्मियों को आज तक न तो कोई पदोन्नति मिली है, न ही सेवा से जुड़ी कोई स्पष्ट नियमावली बनाई गई है। यह न केवल एक प्रशासनिक चूक है, बल्कि श्रमिक सम्मान और मानवीय गरिमा के विरुद्ध भी है।</p>
<p>नगीना सांसद चंद्रशेखर ने इन्हीं ग्रामीण सफाईकर्मचारियों की समस्याओं को लेकर अपने पत्र में आवाज उठाई है। अपने पत्र में उन्होंने इन्हीं कर्मचारियों की कुछ प्रमुख समस्याओं को उजागर किया है।</p>
<p>पत्र में नगीना सांसद ने इन कर्मचारियों से संबंधित करीब छह समस्याओं का उल्लेख किया है इनमें:  </p>
<ul>
<li>16 वर्षों में एक भी पदोन्नति नहीं।</li>
<li>ACP (Assured Career Progression) जैसी योजनाओं से वंचित ।</li>
<li> झाडू, चूना, फावड़ा, पंजा जैसे उपकरण तक स्वयं खरीदने को विवश।</li>
<li> साफ-सफाई के बाद साबुन-तौलिया जैसे आवश्यक वस्त्र भी विभाग नहीं देता, जबकि नियम हैं।</li>
<li>आज भी "झाडू वाला" या "कूड़ा उठाने वाला" जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया जाता है।</li>
<li>कोविड महामारी के दौरान जान जोखिम में डालकर कार्य करने वालों को अब तक फ्रंटलाइन वर्कर का दर्जा नहीं मिला।</li>
</ul>
<p>अपने पत्र में उन्होंने यह भी बताया कि पंचायतीराज मंत्री माननीय ओमप्रकाश राजभर द्वारा 20 दिसंबर 2024 को गठित चार सदस्यीय समिति ने पदोन्नति के लिए स्पष्ट सिफारिशें दी थीं जिसमें इंटरमीडिएट पास सफाईकर्मियों को "सफाई पर्यवेक्षक पद पर पदोन्नत किया जाए। उन्होंने बताया कि समिति ने यह भी माना कि इससे न सरकार पर बोझ बढ़ेगा, न व्यवस्था पर असर पड़ेगा बल्कि कार्यकुशलता, मनोबल और सामाजिक सम्मान तीनों बढ़ेंगे। लेकिन सरकार ने इस रिपोर्ट को आज तक लागू नहीं किया।</p>
<p>भीम आर्मी चीफ और आजाद समाज पार्टी के मुखिया ने ग्रामीण सफाई कर्मचारियों की मांगों का भी पत्र में उल्लेख किया है </p>
<ul>
<li>ग्रामीण सफाईकर्मियों के लिए सेवा नियमावली तत्काल बनाई जाए।</li>
<li>इंटरमीडिएट पास सफाईकर्मियों की पदोन्नति प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए।</li>
<li> ACP एवं अन्य सेवा लाभों को शीघ्र प्रभाव से लागू किया जाए।</li>
<li> कोविड काल के कार्य हेतु फ्रंटलाइन वर्कर का दर्जा और सम्मान राशि दी जाए।</li>
<li> सफाई उपकरणों की उपलब्धता विभाग सुनिश्चित करे, अथवा उसकी राशि सीधे खातों में भेजी जाए।</li>
<li> सफाईकर्मियों को सम्मानजनक पदनाम दिया जाए, जिससे उनकी सामाजिक गरिमा बढ़े।</li>
</ul>
<p>इसके साथ ही उन्होंने अपने पत्र में सीएम योगी से कहा कि "स्वच्छ भारत" के असली वाहक यदि स्वयं विभागीय उपेक्षा, असम्मान और अन्याय के शिकार हों, तो यह केवल शासन की विफलता नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की घोर अनदेखी है।     </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>होम </category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Jul 2025 22:30:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nupendra Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रसोई गैस सिलेंडर 100 रुपये हुआ सस्ता</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार के इस फैसले से करोड़ों परिवारों का आर्थिक बोझ कम होगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/delhi/lpg-cylinder-became-cheaper-by-rs-100/article-27846"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2024-03/download18.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>देश के 33 करोड़ कंज्यूमर्स को इसका फायदा मिलेगा : अनुराग ठाकुर<br />गैस सिंलेंडर में छूट पर सीएम योगी ने पीएम का जताया आभार<br />नई दिल्ली।</strong> अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में 100 रुपये की छूट देने का ऐलान किया है। इस कटौती के बाद राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत 903 रुपये से घटकर 803 रुपये हो गई है। भोपाल में अब यह 808.50 रुपये, जयपुर में 806.50 रुपये और पटना में 901 रुपये में मिलेगा।प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को 'एक्स' पर लिखा है कि महिला दिवस के अवसर पर एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 100 रुपये की छूट का बड़ा फैसला किया है। इससे नारी शक्ति का जीवन आसान होने के साथ ही करोड़ों परिवारों का आर्थिक बोझ भी कम होगा।</p>
<p>यह कदम पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार बनेगा, जिससे पूरे परिवार का स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले रक्षाबंधन के मौके पर केंद्र सरकार ने घरेलू रसोई गैस 14.2 किलोग्राम सिलेंडर के दाम में 200 रुपये की कटौती की थी। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा था कि ओनम और रक्षाबंधन के त्योहार पर दाम घटाकर ढट मोदी ने बहनों को बड़ा तोहफा दिया है। देश के 33 करोड़ कंज्यूमर्स को इसका फायदा मिलेगा। दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में 100 रुपए की छूट के निर्णय पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया है।</p>
<p>अपने एक्स अकाउंट पर लिखते हुए मुख्यमंत्री ने इस फैसले को मातृशक्ति का सम्मान और पर्यावरण को संरक्षित करने वाली लोक-कल्याणकारी सौगात बताया है। सीएम ने लिखा कि आज 'महिला दिवस' के अवसर पर एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 100 रुपए की छूट का निर्णय करोड़ों परिवारों को आर्थिक राहत देने के साथ ही मातृशक्ति को धुएं और प्रदूषण से मुक्ति दिलाकर स्वस्थ व खुशहाल जीवन प्रदान करेगा।</p>
<p>मातृशक्ति के सम्मान और पर्यावरण को संरक्षित करने वाली इस लोक-कल्याणकारी सौगात के लिए प्रदेश वासियों की ओर से आपका हार्दिक आभार प्रधानमंत्री। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में 100 रुपए की छूट के निर्णय पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया है। उप मुख्यमंत्री ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि महिला दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति को उपहार स्वरूप 100 रुपये प्रति सिलेंडर की कमी की है। महिला विरोधी कांग्रेस के लिए अंगूर खट्टे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                            <category>होम </category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Mar 2024 19:02:12 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>4.85 करोड़ रुपए जारी कर वन्यजीव संरक्षण समेत तमाम गतिविधियों के संचालन की प्रक्रिया होगी सुचारू</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वन्यजीव आवासों के एकीकृत विकास पर भी योगी सरकार का फोकस</strong></p>
<p><strong>-सीएम योगी के विजन अनुसार केंद्र सरकार की 'इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ वाइल्डलाइफ हैबिटैट्स' योजना को प्रदेश में मिली गति</strong></p>
<p><strong>-परियोजना के तहत होने वाले सभी निर्माण व संरक्षण कार्यों को उत्तर प्रदेश शासन की रूलबुक अनुसार किया जाएगा पूरा</strong></p>
<p><strong>लखनऊ। </strong>उत्तर प्रदेश के समेकित विकास का खाका खींच रही योगी सरकार प्रदेश में वन्यजीवों के संरक्षण व उन्हें आश्रयस्थल मुहैया कराने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इस क्रम में केंद्र सरकार की 'इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ वाइल्डलाइफ हैबिटैट्स' योजना को भी उत्तर प्रदेश में क्रियान्वित करने पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/home/by-releasing-rs-485-crore-the-process-of-conducting-all/article-17702"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2024-01/wildlife-important-for-ecosystem.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वन्यजीव आवासों के एकीकृत विकास पर भी योगी सरकार का फोकस</strong></p>
<p><strong>-सीएम योगी के विजन अनुसार केंद्र सरकार की 'इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ वाइल्डलाइफ हैबिटैट्स' योजना को प्रदेश में मिली गति</strong></p>
<p><strong>-परियोजना के तहत होने वाले सभी निर्माण व संरक्षण कार्यों को उत्तर प्रदेश शासन की रूलबुक अनुसार किया जाएगा पूरा</strong></p>
<p><strong>लखनऊ। </strong>उत्तर प्रदेश के समेकित विकास का खाका खींच रही योगी सरकार प्रदेश में वन्यजीवों के संरक्षण व उन्हें आश्रयस्थल मुहैया कराने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इस क्रम में केंद्र सरकार की 'इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ वाइल्डलाइफ हैबिटैट्स' योजना को भी उत्तर प्रदेश में क्रियान्वित करने पर योगी सरकार का विशेष फोकस है। प्रदेश में वन्यजीवों को संरक्षित वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी व अन्य वन क्षेत्रों में संरक्षण प्रदान हो सके इसके लिए वन्यजीव आवासों के एकीकृत विकास की प्रक्रिया को भी सुचारू रखने के दृष्टिगत योगी सरकार ने प्रबंध किए हैं। इस क्रम में योगी सरकार द्वारा पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन अनुभाग को योजना के कार्यपालन के लिए प्रावधानित 4.85 करोड़ रुपए की धनराशि वित्तीय व प्रशासकीय स्वीकृति के बाद जारी कर दी गई है। इस परियोजना के अंतर्गत होने वाले सभी निर्माण कार्यों को उत्तर प्रदेश शासन की रूलबुक के अनुसार पूर्ण किया जाएगा तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक की देखरेख में सभी निर्धारित कार्यों को पूर्ण किया जाएगा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक इस बात को भी सुनिश्चित करेंगे कि निर्माण कार्यों में किसी प्रकार की कोई गुणवत्ता संबंधी शिकायत की गुंजाइश न रहे।</p>
<p>अंब्रेला योजना बनी वन्य जीवों के संरक्षण का माध्यम<br />केंद्र सरकार की 'इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ वाइल्डलाइफ हैबिटैट्स' अंब्रेला योजना में  प्रोजेक्ट टाइगर (सीएसएस-पीटी), वन्यजीव आवासों का विकास (सीएसएस-डीडब्ल्यूएच) और हाथी परियोजना (सीएसएस-पीई) की केंद्र प्रायोजित योजना शामिल है। इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश के टाइगर रिजर्व्स व संरक्षित वन क्षेत्रों में हो रहा है। योजना के अंतर्गत शामिल गतिविधियों में कर्मचारी विकास और क्षमता निर्माण, वन्यजीव अनुसंधान और मूल्यांकन, अवैध शिकार विरोधी गतिविधियाँ, वन्यजीव पशु चिकित्सा देखभाल, मानव-पशु संघर्ष को संबोधित करना और पर्यावरण-पर्यटन को बढ़ावा देना शामिल है। इसके अतिरिक्त, संरक्षित क्षेत्रों से अन्य क्षेत्रों में समुदायों के स्थानांतरण के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है। इस योजना के तीन घटक हैं जिनमें संरक्षित क्षेत्रों (राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, संरक्षण रिजर्व और सामुदायिक रिजर्व) को सहायता प्रदान करना, संरक्षित क्षेत्रों के बाहर वन्यजीवों का संरक्षण व गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों और आवासों को बचाने के लिए पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम शामिल है। </p>
<p>कई अन्य योजनाएं भी मानव वन्यजीव संघर्ष को रोकने में हो रहीं सहायक<br />उत्तर प्रदेश में योगी सरकार इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ वाइल्डलाइफ हैबिटैट्स के साथ ही कई अन्य योजनाओं का भी संचालन कर रही है जिनके जरिए मानव वन्यजीव संघर्ष को प्रभावी ढंग से रोकने की पहल की जा रही है। इसके अलावा, कोर/क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट से स्वैच्छिक पुनर्वास का विकल्प चुनने वाले समुदायों को प्रोजेक्ट टाइगर (सीएसएस-पीटी) की योजना के तहत और 800 परिवारों को वन्यजीव पर्यावास के विकास की केंद्र प्रायोजित योजना के तहत लाभान्वित किया जाता है। इस योजना से रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप बाघ अभयारण्यों/संरक्षित क्षेत्रों में और उसके आसपास के लोगों का आर्थिक उत्थान हो रहा है और साथ ही स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से प्रतिस्थापन के साथ प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता में भी कमी आ रही है। इससे आसपास रहने वाले लोगों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। </p>
<p>रोजगार के अवसर भी हो रहे पैदा<br />वन क्षेत्रों में संरक्षण के लिहाज से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के जरिए योगी सरकार स्थानीय जनता को गाइड, ड्राइवर, आतिथ्य कर्मियों और अन्य सहायक नौकरियों में सेवा करने के अवसर भी उपलब्ध करा रही है। ये योजनाएं विभिन्न पर्यावरण-विकास परियोजनाओं के माध्यम से लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में विभिन्न कौशल प्रदान करने को बढ़ावा देती हैं, जिससे वे स्वरोजगार के लिए सक्षम हो सकेंगे। इन योजनाओं के कारण पर्यटक यात्राओं के माध्यम से संसाधन सृजन होगा, जिससे बाघ स्रोत क्षेत्रों और वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण अन्य क्षेत्रों को सुरक्षित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा जीवन समर्थन प्रणालियों को बनाए रखने के साथ-साथ भोजन, पानी और आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी मदद मिलती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>होम </category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jan 2024 06:58:31 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- गणतंत्र दिवस समारोह में भारत-फ्रांस लोकतांत्रिक मूल्यों का जश्न मनाएंगे</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों इस साल 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आमंत्रण पर 75वें गणतंत्र दिवस समारोह में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि इस महान अवसर भारत-फ्रांस लोकतांत्रिक मूल्यों का जश्न मनाएंगे।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रतीक्षारत इन पलों के लिए करीब नौ घंटे पहले एक्स हैंडल पर अपनी उत्सुकता और खुशी साझा की है। उन्होंने लिखा है- ' मैं अपने मित्र फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का 75वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में स्वागत करने के लिए उत्सुक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/delhi/prime-minister-modi-said-india-france-will-celebrate-democratic-values-%E2%80%8B%E2%80%8Bin/article-8561"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2023-12/pmmodi_762.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों इस साल 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आमंत्रण पर 75वें गणतंत्र दिवस समारोह में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि इस महान अवसर भारत-फ्रांस लोकतांत्रिक मूल्यों का जश्न मनाएंगे।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रतीक्षारत इन पलों के लिए करीब नौ घंटे पहले एक्स हैंडल पर अपनी उत्सुकता और खुशी साझा की है। उन्होंने लिखा है- ' मैं अपने मित्र फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का 75वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं। इस दिन भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों में साझा विश्वास का जश्न भी मनाएंगे। '</p>
<p>इससे कुछ घंटे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने एक्स हैंडल पर आमंत्रण के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया। उन्होंने लिखा-' मित्र नरेन्द्र मोदी निमंत्रण के लिए धन्यवाद। मैं भारत के गणतंत्र दिवस समारोह पर जश्न मनाने के लिए समारोह में आपके साथ रहूंगा।'</p>
<p>भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, रणनीतिक साझेदार के रूप में भारत और फ्रांस कई क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर उच्च स्तर की समानता साझा करते हैं। इस वर्ष भारत-फ्रांस अपनी रणनीतिक साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ (सिल्वर जुबली) मना रहे हैं। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी 14 जुलाई को पेरिस में आयोजित बैस्टिल डे परेड में सम्मानित अतिथि थे। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों 8 और 9 सितंबर को जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए भारत के दौरे पर आए थे।</p>
<p>खास बात यह है कि भारत अपने गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने के लिए हर साल वैश्विक नेताओं को आमंत्रित करता है। कोविड-19 महामारी के मद्देनजर 2021 और 2022 में इस समारोह में किसी को भी मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित नहीं किया गया। राष्ट्रपति मैक्रों गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने वाले छठे फ्रांसीसी नेता होंगे। वर्ष 2023 के गणतंत्र दिवस समारोह में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी मुख्य अतिथि थे। वर्ष 2020 में ब्राजील के तत्कालीन राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दिल्ली</category>
                                            <category>होम </category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Dec 2023 09:45:39 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>50 प्रतिशत बढ़ जाएगा भाजपा का वोट प्रतिशत!</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> भाजपा से मुकाबले के लिए विपक्षी गठबंधन जहां अंतर्विरोधों और असमंजस के कुहासे से निकलने का प्रयास कर रहा है, वहीं सत्तारूढ़ पार्टी का दृष्टिकोण कतई स्पष्ट है कि विजय रथ की रणनीतिक राह क्या होगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक में देशभर से जुटे पदाधिकारियों को ‘माइक्रो लेवल’ प्लान का चुनावी मंत्र देते हुए सलाह दी कि राज्यों की जीत से अतिविश्वास में आने के बजाय जमीन पर मुस्तैद रहना होगा। भाजपा राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक शुक्रवार शाम को पार्टी मुख्यालय में करीब साढ़े पांच घंटे चली, जिसमें लगभग डेढ़ घंटे तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/delhi/bjps-vote-percentage-will-increase-by-50-percent/article-8553"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2023-12/pti12_02_2022_000188b-sixteen_nine.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> भाजपा से मुकाबले के लिए विपक्षी गठबंधन जहां अंतर्विरोधों और असमंजस के कुहासे से निकलने का प्रयास कर रहा है, वहीं सत्तारूढ़ पार्टी का दृष्टिकोण कतई स्पष्ट है कि विजय रथ की रणनीतिक राह क्या होगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक में देशभर से जुटे पदाधिकारियों को ‘माइक्रो लेवल’ प्लान का चुनावी मंत्र देते हुए सलाह दी कि राज्यों की जीत से अतिविश्वास में आने के बजाय जमीन पर मुस्तैद रहना होगा। भाजपा राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक शुक्रवार शाम को पार्टी मुख्यालय में करीब साढ़े पांच घंटे चली, जिसमें लगभग डेढ़ घंटे तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘पाठशाला’ चली।</p>
<p>बूथ स्तर तक सक्रियता बहुत आवश्यक है।<br />सूत्रों ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता वाली इस बैठक में पीएम मोदी ने चुनाव की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान सहित कुछ राज्यों के पदाधिकारियों से उन्होंने विकसित भारत संकल्प यात्रा के संबंध में फीडबैक लिया। उन्होंने कहा कि बड़ी रैलियां हम सफलता से आयोजित कर लेते हैं, लेकिन भाजपा का वोट प्रतिशत 50 से ऊपर पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर सक्रियता को बढ़ाना होगा। बूथ स्तर तक सक्रियता बहुत आवश्यक है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दिल्ली</category>
                                            <category>होम </category>
                                    

                <link>https://www.tarunmitra.in/state/delhi/bjps-vote-percentage-will-increase-by-50-percent/article-8553</link>
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                <pubDate>Sat, 23 Dec 2023 08:27:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Tarunmitra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तीन राज्यों में जीती प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सियाराम पांडेय'शांत'<br /><br />जीत भले ही किसी राजनीतिक दल की हो लेकिन उस जीत का आधार जनता का उस पर अटूट विश्वास ही होता है। जब किसी नेता की गारंटी राजनीतिक मुद्दों और प्रलोभनों पर भारी पड़ जाए तो समझना चाहिए कि भारत में लोकतंत्र बिल्कुल सही दिशा में जा रहा है। चार राज्यों के चुनाव परिणाम बेहद विस्मयकारी रहे हैं। भाजपा ने राजस्थान और छत्तीसगढ़ जहां कांग्रेस के हाथ से छीन कर अपनी मुट्ठी में कर लिया है, वहीं मध्य प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने की कांग्रेस की हर संभव कोशिशों को पलीता लगा दिया है। तेलंगाना की जीत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/home/prime-minister-modis-guarantee-won-in-three-states/article-3789"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2023-12/siyarampandeyshant111_374.jpg" alt=""></a><br /><p>सियाराम पांडेय'शांत'<br /><br />जीत भले ही किसी राजनीतिक दल की हो लेकिन उस जीत का आधार जनता का उस पर अटूट विश्वास ही होता है। जब किसी नेता की गारंटी राजनीतिक मुद्दों और प्रलोभनों पर भारी पड़ जाए तो समझना चाहिए कि भारत में लोकतंत्र बिल्कुल सही दिशा में जा रहा है। चार राज्यों के चुनाव परिणाम बेहद विस्मयकारी रहे हैं। भाजपा ने राजस्थान और छत्तीसगढ़ जहां कांग्रेस के हाथ से छीन कर अपनी मुट्ठी में कर लिया है, वहीं मध्य प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने की कांग्रेस की हर संभव कोशिशों को पलीता लगा दिया है। तेलंगाना की जीत पर खुश होने का कांग्रेस के पास एक अवसर है और वह यह कह सकती है कि उसने तेलंगाना में भाजपा को पटखनी दी है लेकिन सच तो यह है कि भाजपा तो अभी दक्षिण के इस राज्य में अपना जनाधार ही बढ़ा रही है। उसकी सीटों में कई आठ गुना वृद्धि यह बताने के लिए काफी है कि भाजपा ने तेलंगाना में कुछ खोया नहीं, वरन पाया ही है। तेलंगाना में बीआरएस की हार के पीछे केसीआर और उसके परिवार पर भाजपा के शीर्ष नेताओं के तल्ख हमले भी बहुत हद तक जिम्मेदार हैं। तेलंगाना की सत्ता उसके स्वतंत्र राज्य के गठन के वर्ष 2014 से ही के.चंद्रशेखर राव के हाथ में रही है। ऐसे में उसके हाथ से सत्ता का यूं फिसल जाना अकारण नहीं है।<br /><br />तेलंगाना में के. चंद्रशेखर राव के परिवारवाद और भ्रष्टाचार से तो जनता में नाराजगी थी ही, सत्ता विरोधी लहर भी उसके खिलाफ थी। कांग्रेस को तो बस अवसर मिल गया। भाजपा के शीर्ष नेताओं के चुनावी भाषणों ने भी राज्य में केसीआर की हालत पतली कर दी। 19 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले इस राज्य में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन की कुछ खास नहीं कर पाई जबकि यहां की 44 सीटों पर मुस्लिम मतदाता अच्छा-खासा असर डालते रहे हैं। अक्टूबर में तेलंगाना में लक्ष्मी बैराज क्या ढहा, केसीआर की मुसीबतें बढ़ती चली गईं। उनकी बेटी का नाम दिल्ली के शराब घोटाले से भी जुड़ा, इन स्थितियों ने टीआरएस का नाम बदलकर बीआरएस करने और क्षेत्रीय राजनीति की बजाय राष्ट्रीय राजनीति में कदम बढ़ाने का खामियाजा भी केसीआर को इस चुनाव में शिकस्त के रूप में झेलना पड़ा है। यह और बात है कि कांग्रेस ने तेलंगाना में जातिगत जनगणना कराने और दलितों, पिछड़ों की आरक्षण सीमा बढ़ाने जैसी छह गारंटियां भी दीं, जिसमें मुफ्त महिला बस पास, 200 यूनिट मुफ्त बिजली, किसानों और बटाईदारों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ देने जैसे वादे भी शामिल थे।<br /><br />जनादेश इस बात का प्रमाण है कि मतदाताओं ने कांग्रेस पर भरोसा जताया और उसकी सरकार बनने में सहायक बने लेकिन राजस्थान,मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में उसकी मुफ्त की रेवड़ी बांटने वाली रणनीति काम नहीं आई। इन तीनों ही राज्यों में मतदाताओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी पर भरोसा जताया और यह समझने में जरा सी भी गलती नहीं कि जब केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार होती है,तभी विकास का पहिया सरपट दौड़ पाता है। केंद्र और राज्य की सत्ता पर आरूढ़ दो राजनीतिक दलों की खींचतान में विकास का जनाजा अकसर उठता ही रहता है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव कांग्रेस से अपनी पार्टी के लिए कुछ सीटें चाहते थे लेकिन कमलनाथ ने अखिलेश-वखिलेश जैसी टिप्पणी कर न केवल अखिलेश यादव के क्रोध का पारा बढ़ा दिया बल्कि अखिलेश यादव को मध्य प्रदेश की 74 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने को भी विवश किया।<br /><br />यह स्थिति भी कांग्रेस की उम्मीदों की राह का बड़ा रोड़ा बनी। 'इंडिया' गठबंधन में अपनी विशेषता बताने-जताने के राहुल गांधी के सपनों पर भी पानी फिर गया है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का अपना कोई आधार नहीं है और यहां लोकसभा की चुनावी वैतरणी पार करने के लिए उसे समाजवादी पार्टी की नौका पर ही सवार होना पड़ेगा और दूध का जला मट्ठा भी फूंक कर पीता है। अखिलेश यादव भले ही मध्य प्रदेश की सियासी जंग हार गए हों लेकिन वैचारिक रूप से वे कांग्रेस को शिकस्त देने में सफल हो गए हैं। अखिलेश मजबूरी में भी कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में उतनी सीटें तो देने से रहे जो राहुल के प्रधानमंत्री बनने की जरूरत पूरी कर सके। ममता बनर्जी का भी कांग्रेस के साथ पश्चिम बंगाल में कुछ ऐसा ही रवैया रहने वाला है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस को कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की अंदरूनी कलह से भी बड़ा नुकसान हुआ है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति दोनों नेताओं के स्तर पर बोले गए अपशब्दों ने भी मध्य प्रदेश में खासकर चंबल परिक्षेत्र में कांग्रेस का बेड़ा गर्क करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है।<br /><br />प्रधानमंत्री मोदी के प्रति अपशब्दों का प्रयोग भी कदाचित मतदाताओं को रास नहीं आया। राजस्थान में भी सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच की राजनीतिक जंग कांग्रेस का पत्ता साफ करने में मील का पत्थर साबित हुई। सचिन पायलट की नाराजगी और बगावत को तो कुछ वर्ष पहले कांग्रेस ने थाम जरूर लिया लेकिन दोनों नेताओं और उनके समर्थकों के मनोमालिन्य को दूर करने की दिशा में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व कुछ खास नहीं कर सका। इसका नुकसान यह हुआ कि कांग्रेस का राज बदल गया लेकिन राजस्थान की हर पांच साल में सरकार बदलने का रिवाज यथावत कायम रही। भाजपा को पता था कि राजस्थान में मुख्यमंत्री को चेहरा घोषित करना उसके लिए भारी पड़ सकता है। इसलिए उसने कमल को ही सीएम चेहरा माना और यह उसके लिए बेहद फायदेमंद रहा। राजस्थान लाल डायरी के झमेले में जो एक बार कांग्रेस उलझी तो उससे उबर नहीं पाई। कई मौके आए जब भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सचिन पायलट और उनके समर्थक समय-समय पर गहलोत सरकार को घेरते रहे। यह भी उनकी पराजय का एक बड़ा कारण रहा। पेपर लीक मामले में वैसे पहले से ही गहलोत सरकार आलोचना के घेरे में थी। रही बात जीत-हार की तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी तो पहले ही कह चुके थे कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सरकार जा रही है। हालांकि यह जीभ के फिसल जाने का मामला था लेकिन कभी-कभी जिह्वा पर सरस्वती का निवास होता है। मौजूदा चुनाव नतीजे तो इसी ओर इशारा करते हैं।<br /><br />इन नतीजों से कांग्रेस के लोग ही विचलित होंगे, ऐसा नहीं है। लालू प्रसाद यादव के कुनबे और नीतीश कुमार की त्योरियों पर भी बल पड़ना स्वाभाविक है। जातिगत जनगणना कराकर राजनीतिक लीड लेने वाले नीतीश और लालू को लगा होगा कि वे पिछड़ों के बेताज बादशाह हो जाएंगे। कांग्रेस और सपा का शीर्ष नेतृत्व भी उनकी बिछाई पिच पर खेलने लगा था। जिसकी जितनी आबादी, उतनी उसकी भागीदारी का राग देश के हर उस राज्य में आलापा जाने लगा था जहां गैर भाजपा सरकारें हैं लेकिन इसकी काट में प्रधानमंत्री मोदी ने गरीब-किसान-महिला और युवा को ही सबसे बड़ी जाति माना और उनके समग्र उत्थान की दिशा में बढ़ते रहे, तीन राज्यों में भाजपा के पक्ष में आए चुनाव नतीजे उसी सोच की परिणिति है।<br /><br />इन चुनावों में जातीय जनगणना का मुद्दा भी कुछ खास असर डालने में विफल साबित हुआ है, ऐसे में नीतीश-लालू और उन जैसी सोच के दूसरे नेताओं को वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कुछ और तरकीब निकालनी होगी। वैसे भी हिंदी बहुल राज्यों में राहुल गांधी की मोहब्बत की दुकान नहीं चल पाई। लोगों ने विकास को तरजीह दी। पीएम मोदी की गारंटी पर यकीन किया। जातिगत आरक्षण के सहारे सामाजिक ताने-बाने को छेड़ने वालों को मुंहतोड़ जवाब दिया। काठ की हांड़ी अग्नि का ताप एक बार झेल ले, इतना ही काफी है। विपक्ष बार-बार एक ही प्रयोग दोहराने की जो भूल कर रहा है, मौजूदा चुनाव परिणाम उसका सटीक जवाब हैं।<br /><br />यह भी उतना ही सच है कि वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में आदिवासी वर्ग भाजपा से छिटक गया था। मध्य प्रदेश में भाजपा अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित 35 सीटों में से 18 पर तो जीत गई थी, लेकिन अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित 47 सीटों में से महज 16 पर जीत हासिल कर सकी थी। छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित 10 सीटों में केवल 2 और अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित 29 सीटों में से महज 3 पर ही जीत हासिल कर पाई थी। वर्ष 2018 का चुनाव गवाह है कि राजस्थान में भी भाजपा एससी के लिए सुरक्षित 34 सीटों में से 22 सीटें हार गई थी जबकि एसटी के लिए सुरक्षित 25 सीटों में 14 पर उसे पराजय का सामना करना पड़ा था। इन तीनों ही राज्यों में भाजपा के सत्ता से बाहर होने की यह भी प्रमुख वजह रही, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने प्रतिद्वंद्वियों की तमाम कोशिशों को न केवल पलीता लगाया बल्कि दलित, आदिवासी मतों के भरोसे मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जीत भी हासिल की। इसके लिए उसने पहले दलित वर्ग के रामनाथ कोविंद को जहां राष्ट्रपति बनाया, वहीं आदिवासी समाज से आने वाली द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाया। यह उसकी सोची-समझी रणनीति थी, जिसका उसे इन चुनावों में लाभ भी मिला है।<br /><br />मोदी सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं और राज्यों की सरकारों की भी विकास योजनाओं ने बड़ी तादाद में भाजपा का समर्थक वर्ग तैयार किया। महिलाओं ने जिस तरह खुलकर भाजपा का साथ दिया, उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि भाजपा जिस तरह सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की नीति पर काम कर रही है, वहीं भारत के अन्य राजनीतिक दल हिंदुओं की आस्था पर प्रहार करने और सनातन धर्म की आलोचना में अपनी शक्ति जाया कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें अपनी रणनीति बदलनी होगी। किस काम को कब करना है, जब तक इस रणनीति पर वे काम नहीं करेंगे, तब तक वे भाजपा का विजय रथ रोकने में कामयाब नहीं हो सकेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 04 Dec 2023 15:17:59 +0530</pubDate>
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                <title>आलोचक वालमार्ट की रिपोर्ट जरूर पढ़ें</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>इंजी. राजेश पाठक</strong><br /><br />किसी भी देश का मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का बड़ा रोचक इतिहास रहा है। एशिया में सबसे पहले जापान के अन्दर दुनिया भर के इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण आकर असेम्बल हुआ करते थे। लोगों को काम मिला, जीवनस्तर सुधरा तो उनकी कंपनियों से अपेक्षा बढ़ने लगी। अब उन्हें कार चाहिए थी, घर चाहिए था और भी सुविधाएं चाहिए थीं। लिहाजा श्रम-लागत महंगी हो चली। इसका तोड़ सोनी जैसी कंपनियों ने साउथ कोरिया में खोजा और इस देश ने अब मैन्युफैक्चरिंग हब का स्थान ले लिया। और वह दुनिया का निर्यातक बन गया।<br /><br />और जब यहां भी मध्यमवर्गीय लोग समृद्ध हुए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/home/critics-must-read-walmarts-report/article-3555"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2023-12/walmart_938.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>इंजी. राजेश पाठक</strong><br /><br />किसी भी देश का मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का बड़ा रोचक इतिहास रहा है। एशिया में सबसे पहले जापान के अन्दर दुनिया भर के इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण आकर असेम्बल हुआ करते थे। लोगों को काम मिला, जीवनस्तर सुधरा तो उनकी कंपनियों से अपेक्षा बढ़ने लगी। अब उन्हें कार चाहिए थी, घर चाहिए था और भी सुविधाएं चाहिए थीं। लिहाजा श्रम-लागत महंगी हो चली। इसका तोड़ सोनी जैसी कंपनियों ने साउथ कोरिया में खोजा और इस देश ने अब मैन्युफैक्चरिंग हब का स्थान ले लिया। और वह दुनिया का निर्यातक बन गया।<br /><br />और जब यहां भी मध्यमवर्गीय लोग समृद्ध हुए तो जापान की तरह स्थित बदली और उसके स्थान पर चीन आ खड़ा हुआ। एक समय ऐसा आया, जब दुनिया भर की कंपनियां चीन में मौजूद नजर आईं। उनके संपर्क में आने से चीन की अपनी कंपनियां विकसित होने लगीं। लेकिन यहां भी सख्ती से लागू वन चाइल्ड नॉर्म के चलते धीरे–धीरे श्रम शक्ति महंगी होने लगी, और जब बुजुर्ग हो चले कुशल श्रमिकों ने पेंशन आदि सामाजिक-सुरक्षा की मांग करना शुरू की तो कंपनियां धीरे-धीरे इस निष्कर्ष पर पहुंची की कि अब यहां से भी धंधा समेट लेने का वक्त आ गया है ।<br /><br />और अब नए ठिकाने के रूप में भारत सहित वियतनाम आदि देश उनकी नजरों में आ बसे। फिर मोदी सरकार ने पहले से ही उनके लिए तमाम सुविधाओं से युक्त ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के अंतर्गत असेम्बल–इंडिया, मेक इन-इंडिया और 14 पीएलआई स्कीम शुरू कर रखी हैं। इसी का ही परिणाम है कि डेल, एचपी, आईफोन, माइक्रोन और हाल ही में वेदांता से बात न बनने के बाद ताइवान के फोक्सकॉन ने अकेले अपने ही स्तर पर भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को लेकर 1.6 बिलियन डॉलर निवेश करने का फैसला किया है।<br /><br />चीन की कीमत पर होने वाले अर्थ-जगत में यह परिवर्तन स्वयं चीन और देश के अंदर और बाहर सक्रिय उसके हित-पोषक तत्वों को कैसे चैन से रहने दे सकता है। इसलिए अब भारत उनके निशाने पर है और अडानी भी। विश्व-व्यापार को सुगम बनाने वाले आयामों (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) में शिपिंग की अहम् भूमिका होती है। श्रीलंका में चीन के ऋण पर निर्मित हमबनतोता बंदरगाह अब 90 वर्ष के लिए लीज पर चीन के ही पास आ चुका है, क्योंकि श्रीलंका ऋण चुका पाने की स्थिति में नहीं था। इस पूरे घटनाक्रम का असर तमाम देशों पर हुआ पर भारत पर ज्यादा। इसलिए अडानी ने श्रीलंका में एक पोर्ट का निर्माण करना शुरू किया। इसमें अमेरिका भी निवेश करेगा। इस पूरे परिदृश्य ने अडानी को इस उप महाद्वीप का सबसे बड़ा निवेशक बना दिया है।<br /><br />अडानी भारत के लिए इजराइल के हायफा तट पर पोर्ट तैयार कर रहे हैं।शिपिंग में अभी चीन का इस क्षेत्र में दबदबा है। इजराइल में भी उसका अपना पोर्ट है। देश में अब अडानी की कंपनी ने तिरुवंतपुरम के निकट विनझिनझाम इलाके में अति आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक बंदरगाह हाल ही में निर्मित किया है। अब हमारे इस समुद्र तट पर ज्यादा वजन के सामान से लदे जहाज आ सकेंगे, क्योंकि देश के बाकी तटों की तुलना में तिरुवंतपुरम के इस तट की गहराई 20 मीटर से अधिक है। इंटरनेशनल शिपिंग लाइन से मात्र 10 मील स्थित देश के इस पहले ट्रांसशिपमेंट पोर्ट से सीधे सुदूर पूर्व और पश्चिम में स्थित सिंगापुर, श्रीलंका और दुबई में भारी सामान ( मेगा गुड्स) भेजना आसान हो गया है। जबकि पहले काफी लंबा चक्कर लगा कर इन स्थानों पर पहुंचा जाता था।<br /><br />आज अडानी, अंबानी, टाटा जैसे बड़े बिजनेस हाउस के आलोचक उन्हें खलनायकों की तरह प्रस्तुत करने में बड़े तत्पर दिखते हैं, लेकिन 1990-1991 वर्ष का आर्थिक संकट और उससे जन्मे उदारीकारण, निजीकरण, वैश्वीकरण आधारित आर्थिक सुधार (एलपीजी रिफार्म) को लोग भूले नहीं हैं। ईरान-इराक युद्ध और घरेलू कारणों से देश के समक्ष भुगतान संतुलन का गंभीर संकट खड़ा हो गया था। पेट्रोल महंगा हुआ और खाड़ी-देशों से भारत में सर्वाधिक आने वाला फॉरेन रेमिटेंस (विदेश प्रेषित धन) भी बुरी तरह प्रभावित हुआ सो अलग। परिणाम स्वरूप इतनी पूंजी रह गई कि केवल 2-3 हफ्ते का ही आयात किया जा सकता था। जबकि आज हमारे पास लगभग 5.30 अरब डॉलर का फोरेक्स रिजर्व है और 10 माह का आयात हम आराम से कर सकते हैं। इसमें एलपीजी रिफार्म के परिणाम स्वरूप वैश्विक भूमिका में आते हुए इन बिजनेस हाउस का बड़ा योगदान है। सामान्य बुद्धि रखते हुए एक आम आदमी भी इस बात को समझता है।<br /><br />नींद खुलते से ही सिर खुजाते हुए आलोचना के रास्ते निकालने वालों को दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी वालमार्ट की रिपोर्ट जरूर पढ़ लेनी चाहिए। रिपोर्ट कहती है कि इस कंपनी में भारत से होने वाला आयात 12 गुना बढ़कर 2 प्रतिशत से 25 प्रतिशत पर पहुंच गया है। जबकि चीन से होने वाला आयात 80 प्रतिशत से 60 प्रतिशत तक घटाया गया है। बेहतर, सस्ते उत्पाद और बड़ी मात्रा में उत्पादन क्षमता के कारण वालमार्ट की योजना धीरे-धीरे आगे अधिक से अधिक भारत पर अपनी निर्भरता बढ़ाने की है। फिर भारत की आज कुल स्टॉक मार्केट कैपिटलाइजेशन रिकॉर्ड चार ट्रिलियन डॉलर्स पहुंच चुकी है। हालांकि कंपनी की वाइस प्रेसिडेंट एंड्रिया अल्बर्ट का कहना है कि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता से कंपनी बचे रहना चाहती है।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 03 Dec 2023 14:16:15 +0530</pubDate>
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