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                <title>खेती-बाड़ी - Tarun Mitra</title>
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                            <item>
                <title>सिंघाड़े की खेती मामूली खर्च और बिना किसी झंझट के बंपर रिटर्न</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सिंघाड़े की खेती: अगर आपके पास तालाब या ऐसा खेत है जहां अक्सर पानी भरा रहता है. तो सिंघाड़े की खेती कमाई का शानदार जरिया बन सकती है. जिन जगहों पर सामान्य फसलें उगाना मुश्किल होता है. वहां सिंघाड़ा किसानों को बेहतर कमाई का मौका देता है. इसकी खेती में शुरुआती लागत ज्यादा नहीं आती और एक बार फसल अच्छी तरह तैयार हो जाए.कम लागत वाली सिंघाड़े की खेती आजकल किसानों के लिए लॉटरी साबित हो रही है. महज 10 से 15 हजार के मामूली खर्च में यह फसल चार लाख रुपये तक का छप्परफाड़ मुनाफा दे जाती है.</p>
<p>तो</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/water-chestnut-cultivation-involves-minor-expenses-and-bumper-returns-without/article-149928"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/singhada.jpg" alt=""></a><br /><p>सिंघाड़े की खेती: अगर आपके पास तालाब या ऐसा खेत है जहां अक्सर पानी भरा रहता है. तो सिंघाड़े की खेती कमाई का शानदार जरिया बन सकती है. जिन जगहों पर सामान्य फसलें उगाना मुश्किल होता है. वहां सिंघाड़ा किसानों को बेहतर कमाई का मौका देता है. इसकी खेती में शुरुआती लागत ज्यादा नहीं आती और एक बार फसल अच्छी तरह तैयार हो जाए.कम लागत वाली सिंघाड़े की खेती आजकल किसानों के लिए लॉटरी साबित हो रही है. महज 10 से 15 हजार के मामूली खर्च में यह फसल चार लाख रुपये तक का छप्परफाड़ मुनाफा दे जाती है.</p>
<p>तो बाजार में इसकी मांग भी लगातार बनी रहती है. ताजा फल से लेकर आटा और कई प्रोडक्ट्स तक में सिंघाड़े का इस्तेमाल होता है. यही वजह है कि हर सीजन में इसकी अच्छी कीमत मिल जाती है. पिछले कुछ समय में कई किसान इसकी खेती से मोटा मुनाफा कमा चुके हैं. जान लीजिए इसकी खेती का पूरा तरीका.</p>
<p>सिंघाड़े की खेती कैसे करें?<br />सिंघाड़े की खेती के लिए साफ और ठहरा हुआ पानी सबसे जरूरी माना जाता है. इसे तालाब, पोखर या पानी भरे खेतों में आसानी से उगाया जा सकता है. अच्छी पैदावार के लिए जैविक पदार्थों से भरपूर मिट्टी और समय पर पौधों की देखभाल जरूरी होती है. खेती के दौरान खरपतवार नियंत्रण और पानी का स्तर बनाए रखने पर ध्यान दिया जाए तो उत्पादन बेहतर मिलता है. </p>
<p>ऐसे करें दोहरी कमाई <br />कई किसान सिंघाड़े की खेती को मछली पालन के साथ भी जोड़ रहे हैं. जिससे एक ही जगह से दोहरी कमाई का रास्ता खुल जाता है. सही तरीके से खेती करने पर लागत कम रहती है और उत्पादन अच्छा मिलने की संभावना बढ़ जाती है.</p>
<p>यह भी पढ़ें: रोटावेटर, कल्टीवेटर और हैरो... खेतों की जुताई करने जा रहे हैं तो जान लीजिए तीनों का काम; कौन सा रहेगा सबसे बेहतर?</p>
<p>कितनी आती है लागत?<br />सिंघाड़े की खेती में लागत और कमाई पूरी तरह खेती के क्षेत्र, बीज, मजदूरी और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है. सामान्य तौर पर एक हेक्टेयर में इसकी खेती पर करीब 60 हजार से 75 हजार रुपये तक का खर्च आता है. अच्छी देखभाल के साथ किसान औसतन 35 से 40 क्विंटल तक उत्पादन हासिल कर सकते हैं. </p>
<p>कितने में बिकता है सिंघाड़ा?<br />बाजार में सिंघाड़ा कई जगह 6 हजार से 7 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिक जाता है. ऐसे में कुल आमदनी करीब 2.5 लाख से 2.7 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. जबकि सभी खर्च निकालने के बाद लगभग 1.8 लाख से 2 लाख रुपये तक का मुनाफा मिलने की संभावना रहती है. हालांक यह कमाई स्थानीय बाजार भाव और कितना उत्पादन हुआ इन बातों पर निर्भर करती है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 07:38:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कटहल  की खेती खत्म हो जाएगी सब्जी की टेंशन और मिलेगा मोटा दाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कटहल  की खेती : अगर आपके फार्म हाउस में थोड़ी भी खाली जमीन है. तो कटहल का पौधा लगाना एक शानदार फैसला हो सकता है. यह ऐसा फलदार पेड़ है जो सालों तक उत्पादन देता है और कच्चे फल की सब्जी से लेकर पके फल तक हर तरीके से काम आता है. यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है.</p>
<p>एक बार पेड़ तैयार हो जाए तो परिवार की सब्जी की जरूरत भी काफी हद तक पूरी हो सकती है और एक्सट्रा फल बेचकर अच्छी कमाई भी की जा सकती है. खास बात यह है कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/jackfruit-cultivation-will-end-the-tension-of-the-vegetable-and/article-149757"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/kjnhgy.jpg" alt=""></a><br /><p>कटहल  की खेती : अगर आपके फार्म हाउस में थोड़ी भी खाली जमीन है. तो कटहल का पौधा लगाना एक शानदार फैसला हो सकता है. यह ऐसा फलदार पेड़ है जो सालों तक उत्पादन देता है और कच्चे फल की सब्जी से लेकर पके फल तक हर तरीके से काम आता है. यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है.</p>
<p>एक बार पेड़ तैयार हो जाए तो परिवार की सब्जी की जरूरत भी काफी हद तक पूरी हो सकती है और एक्सट्रा फल बेचकर अच्छी कमाई भी की जा सकती है. खास बात यह है कि कटहल की खेती बहुत ज्यादा देखभाल नहीं मांगती. सही किस्म, सही जगह और कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखा जाए तो यह पेड़ लंबे समय तक बेहतर पैदावार देता रहता है.</p>
<p>सही जगह और पौधा चुनना जरूरी<br />कटहल की अच्छी खेती की शुरुआत सही पौधे और सही जगह के चयन से होती है. इस पेड़ को खुली धूप पसंद है, इसलिए ऐसी जगह चुनें जहां रोज कम से कम 6 से 8 घंटे धूप आती हो. पानी का जमाव बिल्कुल नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे जड़ें खराब हो सकती हैं. दोमट या अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है. अगर जल्दी फल चाहते हैं तो बीज की बजाय ग्राफ्टेड पौधा लगाना ज्यादा फायदेमंद रहता है.</p>
<p>ऐसे करें रोपाई<br />पौधों के बीच करीब 8 से 10 मीटर की दूरी रखें जिससे पेड़ फैलने पर एक-दूसरे से न टकराएं. गड्ढे में सड़ी हुई गोबर की खाद और अच्छी मिट्टी मिलाकर पौधा लगाएं. बारिश का मौसम रोपाई के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है क्योंकि इस समय पौधा तेजी से जड़ पकड़ लेता है और शुरुआती बढ़वार भी बेहतर होती है.</p>
<p>यह भी पढ़ें: गर्मियों में आपके घर के गार्डन को रंगीन बना देंगे ये फूल, बेहद आसान है इन्हें उगाना</p>
<p>इन तरीकों से करें देखभाल <br />कटहल का पौधा शुरुआती वर्षों में थोड़ी देखभाल मांगता है. समय पर सिंचाई, खरपतवार की सफाई और जैविक खाद देने से इसकी बढ़वार अच्छी रहती है. गर्मियों में जरूरत के अनुसार पानी दें लेकिन खेत में पानी खड़ा न रहने दें. समय-समय पर सूखी और कमजोर शाखाओं की छंटाई करने से पेड़ स्वस्थ रहता है और फल भी बेहतर आते हैं. फल तैयार होने पर सही समय पर तुड़ाई करना जरूरी है.जिससे क्वालिटी बनी रहे और बाजार में अच्छा दाम मिले.</p>
<p>इन वजहों से कटहल की डिमांड<br />कटहल का उपयोग सब्जी, अचार, चिप्स, मिठाइयों और कई प्रोसेस्ड उत्पादों में होता है. इसलिए इसकी मांग पूरे साल अलग-अलग रूप में बनी रहती है. यही वजह है कि एक बार तैयार हो चुका कटहल का बाग लंबे समय तक कम लागत में लगातार आमदनी देने वाला ऑप्शन साबित हो सकता है.</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 06:29:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खजूर की खेती के लिए कौन सी मिट्टी सबसे अच्छी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>खजूर की खेती : कम पानी और रेतीली जमीन में भी बंपर मुनाफा देने वाली खजूर की खेती के लिए जल निकास वाली बलुई दोमट मिट्टी सबसे बेस्ट रहती है. जानें इसकी खेती का सही तरीका.<br />आजकल पारंपरिक फसलों के साथ किसान उन चीजों को भी आजमा रहे हैं. जिनमें लागत कम हो और कमाई लंबे समय तक मिलती रहे. खजूर की खेती इसी वजह से काफी किसान करने लगे हैं. सही तरीके के साथ लगाया गया इसका बाग कई सालों तक अच्छा मुनाफा दे सकता है.</p>
<p>खजूर की खेती के लिए रेतीली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है.</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/which-soil-is-best-for-date-cultivation/article-149670"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/asdcxds.jpg" alt=""></a><br /><p>खजूर की खेती : कम पानी और रेतीली जमीन में भी बंपर मुनाफा देने वाली खजूर की खेती के लिए जल निकास वाली बलुई दोमट मिट्टी सबसे बेस्ट रहती है. जानें इसकी खेती का सही तरीका.<br />आजकल पारंपरिक फसलों के साथ किसान उन चीजों को भी आजमा रहे हैं. जिनमें लागत कम हो और कमाई लंबे समय तक मिलती रहे. खजूर की खेती इसी वजह से काफी किसान करने लगे हैं. सही तरीके के साथ लगाया गया इसका बाग कई सालों तक अच्छा मुनाफा दे सकता है.</p>
<p>खजूर की खेती के लिए रेतीली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. ऐसी मिट्टी में पानी आसानी से निकल जाता है और जड़ों का विकास बेहतर होता है. बहुत ज्यादा पानी रोकने वाली या दलदली जमीन में इसकी खेती करने से पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है.</p>
<p>अगर मिट्टी का पीएच 8 तक भी हो तब भी खजूर का पौधा अच्छी तरह बढ़ सकता है. यही वजह है कि कम उपजाऊ और सूखे इलाकों में भी इसकी खेती सफल मानी जाती है. खेत में पानी जमा न हो इसका ध्यान रखना जरूरी होता है.</p>
<p>पौधे लगाने से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करें और तय दूरी पर गड्ढे तैयार करें. इन गड्ढों में सड़ी हुई गोबर की खाद और उपजाऊ मिट्टी मिलाकर भरें. इससे पौधे की शुरुआती बढ़वार मजबूत होती है और जड़ें जल्दी फैलती हैं.</p>
<p>खजूर की खेती में बीज की बजाय अच्छी क्वालिटी वाले पौधों का इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद रहता है. ऐसे पौधे जल्दी फल देना शुरू करते हैं और उनकी क्वालिटी भी बेहतर रहती है. इससे उत्पादन भी काफी स्थिर बना रहता है.</p>
<p>शुरुआती दिनों में पौधों को रेगुलर सिंचाई की जरूरत होती है. लेकिन ज्यादा पानी नुकसान पहुंचा सकता है. पौधों के आसपास खरपतवार दिखे तो हटा दें और समय-समय पर जैविक खाद देते रहें. इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और उनकी बढ़वार तेज होती है.</p>
<p>अगर सही मिट्टी में लगाए गए खजूर के पौधों की अच्छे तरीके से देखभाल की जाए. तो खजूर का बाग कई सालों तक लगातार उत्पादन देता है. बढ़ती मांग और अच्छे दाम की वजह से यह खेती किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 14:32:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आम की गुठली से घर में उगाएं आम का पौधा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आम का पौधा कैस उगाएं:इन दिनों बाजार में अलग-अलग तरह के आम आ रहे हैं। लोग बड़े स्वाद से आम खाते हैं और गुठली फेंक देते हैं। लेकिन अगर आप आम के शौकीन हैं तो गुठली को फेंकने की बजाय इससे पौधा उगा सकते हैं। जी हां आप घर में बड़ी आसानी से दशहरी, लंगड़ा, अल्फांसो और दूसरी किस्म के आम के पौधे लगा सकते हैं। आप आम के बीज या गुठली को गमले में, जमीन में या किसी खेत में कहीं भी उगा सकते हैं। बड़ा होने पर पौधे को जमीन में ट्रांसफर कर सकते हैं। वैसे आम की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/grow-mango-plant-at-home-from-mango-seed/article-149266"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/aqwedr.jpg" alt=""></a><br /><p>आम का पौधा कैस उगाएं:इन दिनों बाजार में अलग-अलग तरह के आम आ रहे हैं। लोग बड़े स्वाद से आम खाते हैं और गुठली फेंक देते हैं। लेकिन अगर आप आम के शौकीन हैं तो गुठली को फेंकने की बजाय इससे पौधा उगा सकते हैं। जी हां आप घर में बड़ी आसानी से दशहरी, लंगड़ा, अल्फांसो और दूसरी किस्म के आम के पौधे लगा सकते हैं। आप आम के बीज या गुठली को गमले में, जमीन में या किसी खेत में कहीं भी उगा सकते हैं। बड़ा होने पर पौधे को जमीन में ट्रांसफर कर सकते हैं। वैसे आम की गुठली को मिट्टी में लगाने के करीब 15-20 दिन बाद पौधा उगता है लेकिन हम जिस ट्रिक से पौधा लगाना बता रहे हैं उससे 4-5 दिन में ही आम का पौधा उग जाएगा। आइये जानते हैं गुठली से आम का पौधा उगाने का आसान तरीका क्या है। </p>
<p><br />आम की गुठली से पौधा कैसे उगाएं<br />पहला स्टेप- सबसे पहले आम की गुठली लें और उसे अच्छी तरह से धो लें। अब गुठली के ऊपरी कवर को किनारों से काट लें। गुठली काफी कड़ी होती है इसलिए इसे काटते वक्त सावधानी बरतें क्योंकि इससे आपके हाथ में भी लग सकती है। आप चाहें तो गुठली के ऊपर हिस्से को किसी भारी चीज से हल्का तोड़ भी सकते हैं। ध्यान रखें गुठली के अंदर पाया जाने वाला बीज पूरी तरह से सुरक्षित और सही होना चाहिए। अगर आप पूरी गुठली को ही मिट्टी में गाढ़ते हैं तो इससे पौधा उगने में काफी वक्त लगता है।</p>
<p>दूसरा स्टेप- अब गुठली के ऊपरी कवच को हटाकर अंदर से जो बीच निकला है उसे लें और मिट्टी के अंदर लगा दें। आप जो भी मिट्टी प्लांट लगाने के लिए इस्तेमाल करते हैं उसका ही इस्तेमाल आम का पौधा लगाने के लिए भी करें। मिट्टी को हल्का खोदकर उसके अंदर बीच को खड़ा करके रख दें। बीज में आपको एक तरफ मुंह जैसा दिखाई देगा। आम के बीज का वो हिस्सा ऊपर की ओर होना चाहिए।</p>
<p>तीसरा स्टेप- बीच को बहुत ज्यादा गहरा नहीं दबाना है। मिट्टी में दबाने के बाद बस एक हल्की सी परत मिट्टी की ऊपर से डालनी है। अब गमले में पानी डाल दें और इसे हल्की धूप वाली जगह या घर के अंदर कहीं भी रख सकते हैं। जब पौधा निकल आए और मिट्टी सूखी लगे तभी पानी डालें। करीब 4 दिन में पौधा निकल आएगा और 5-6 दिन में आपको आम के पौधे पर छोटी-छोटी पत्तियां भी दिखने लगेंगी। इस तरह से उगाए हुए आम में काफी दिनों में फल आता है।</p>
<p>अगर आप चाहते हैं कि आम के पौधे में जल्दी फल आए तो इसके लिए किसी दूसरे आम आने वाले पौधे की पत्तियों से इसकी ग्राफ्टिंग कर लें। इससे आम के पौधे पर जल्दी फल आने लगेगा। बाजार में ग्राफ्ट गिए हुए पौधे भी मिल जाते हैं। आप चाहें तो इसे घर में भी कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 04:49:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ककोड़ा की खेती से किसान कमाएंगे तगड़ा मुनाफा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ककोड़ा की खेती : बारिश के मौसम में ककोड़ा की खेती किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला विकल्प बन सकती है. यह फसल 60-70 दिनों में तैयार होती है और बाजार में अच्छे दाम पर बिकती है.<br />मानसून के वक्त हर किसान की यही शिकायत होती है कि वे जो भी सब्जियां उगाएं उसमें कीड़े लग जाते हैं. ऐसे में किसान को समझ नहीं आता कि वे किस सब्जी की खेती करें. किसानों के लिए एक ऐसी सब्जी की खेती शुरू करनी चाहिए, जो बारिश में आसानी से उगाई जा सके और कम लागत में भी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/farmers-will-earn-huge-profits-from-kakoda-cultivation/article-148903"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/kakoda.jpg" alt=""></a><br /><p>ककोड़ा की खेती : बारिश के मौसम में ककोड़ा की खेती किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला विकल्प बन सकती है. यह फसल 60-70 दिनों में तैयार होती है और बाजार में अच्छे दाम पर बिकती है.<br />मानसून के वक्त हर किसान की यही शिकायत होती है कि वे जो भी सब्जियां उगाएं उसमें कीड़े लग जाते हैं. ऐसे में किसान को समझ नहीं आता कि वे किस सब्जी की खेती करें. किसानों के लिए एक ऐसी सब्जी की खेती शुरू करनी चाहिए, जो बारिश में आसानी से उगाई जा सके और कम लागत में भी जबरदस्त कमाई करा सके. ऐसे में ककोड़ा की खेती करना किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है. यह एक कांटेदार और गोल-मटोल हरी सब्जी होती है, जो ज्यादातर जंगलों में अपने आप ही उग जाती है. अगर किसान इसे अपने खेत में सही तरीके से उगाएं, तो यह उनकी आमदनी का एक बड़ा जरिया बन सकती है.<br />ककोड़ा की खासियत यह है कि इसकी बुवाई जून-जुलाई के महीने में की जाती है, जब मानसून की पहली बारिश शुरू होती है. इसकी खेती के लिए 27 से 32 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे सही माना जाता है, यानी गर्म और हल्की नमी वाला मौसम इसके लिए अच्छा माना जाता है. एक खास बात यह भी है कि ककोड़ा का बीज बाजार में नहीं मिलता और कृषि विभाग के पास भी इसके बीज उपलब्ध नहीं होते, इसलिए किसानों को इसके बीज जंगली इलाकों से ही जुटाने पड़ते हैं.<br />खेत तैयार करने की बात करें तो इसके लिए जैविक पदार्थों से भरी रेतीली मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है, जिसका pH 6 से 7 के बीच होना चाहिए. साथ ही ध्यान रखें कि पौधे लगाते समय कतारों के बीच लगभग 2 से 3 मीटर की दूरी और पंक्तियों के बीच 4 मीटर की दूरी रखी जाती है.</p>
<p>सिंचाई की बात करें तो इस काम में किसानों के लिए ज्यादा झंझट नहीं होती है. इसकी खेती के लिए सामान्य रूप से 1500 से 2500 मिलीमीटर बारिश काफी होती है, और बरसात के मौसम में तो इसे ज्यादा पानी देने की जरूरत भी नहीं पड़ती. ध्यान रखने वाली बात है कि रोपाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करनी होती है, उसके बाद बारिश के मौसम में सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही पानी दें, और खेत में पानी जमा होने पर उसे जल्दी निकाल देना चाहिए, क्योंकि ज्यादा पानी भरने से फसल को नुकसान हो सकता है.</p>
<p>अब अगर बात करें इस खेती से कमाई की तो, बरसात के दौरान अगर ये सब्जी बाजार में आते ही ये हाथों-हाथ बिक जाती है, क्योंकि इसकी डिमांड हमेशा से बनी रहती है. यही कारण है कि किसान इससे अच्छा-खासा मुनाफा भी कमाते हैं. जहां बाजार में इसका सामान्य भाव शुरुआत में 90 से 100 रुपये प्रति किलो रहता है, वहीं ये दाम डिमांड बढ़ने पर 150 रुपये प्रति किलो तक भी पहुंच जाता है.</p>
<p>इस फसल की एक और खासियत है कि इस फसल को तैयार होने में ज्यादा समय भी नहीं लगता है, बुवाई के बाद ही करीब 60 से 70 दिनों में ये फसल तैयार हो जाती है. इसके अलावा यह फसल 8 से 10 साल तक पैदावार देती रहती है. यानी किसान को हर साल नई बुवाई करने की जरूरत नहीं होती.</p>
<p>माना जाता है कि ये फसल उगाने में जितनी आसान है उतने ही इसके शारीरिक फायदे भी होते हैं. ककोड़ा का इस्तेमाल केवल सब्जी बनाने के अलावा, अचार बनाने में भी इस्तेमाल होता है. साथ ही इसका उपयोग कफ, खांसी और वात जैसी समस्याओं में भी किया जाता है. इसके अलावा यह मधुमेह के रोगियों के शरीर में शर्करा को नियंत्रित करने में भी मदद करता है. यही वजह है कि इस सब्जी की बाजार में मांग रहती है और अच्छे दाम पर बिकती है.</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 07:32:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> किचन गार्डन में कैसे उगा सकते हैं सेम?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सेम : घर की छत या बालकनी में अपना छोटा सा किचन गार्डन बनाना आजकल हर किसी का शौक बनता जा रहा है. ताजी और केमिकल फ्री सब्जियां खाने का जो मजा है उसकी बात ही कुछ अलग होती है. अगर आप भी अपने गार्डन के लिए किसी ऐसी सब्जी की तलाश में हैं जो आसानी से उग जाए और लंबे समय तक भरपूर पैदावार दे तो सेम की फली यानी हयासिंथ बीन्स सबसे बेस्ट ऑप्शन है. </p>
<p>सेम एक ऐसी बेल वाली सब्जी है जिसे बहुत ज्यादा तामझाम की जरूरत नहीं होती और यह कम देखभाल में भी तेजी से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/%C2%A0%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%9A%E0%A4%A8-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%89%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%AE/article-148702"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/bij.jpg" alt=""></a><br /><p>सेम : घर की छत या बालकनी में अपना छोटा सा किचन गार्डन बनाना आजकल हर किसी का शौक बनता जा रहा है. ताजी और केमिकल फ्री सब्जियां खाने का जो मजा है उसकी बात ही कुछ अलग होती है. अगर आप भी अपने गार्डन के लिए किसी ऐसी सब्जी की तलाश में हैं जो आसानी से उग जाए और लंबे समय तक भरपूर पैदावार दे तो सेम की फली यानी हयासिंथ बीन्स सबसे बेस्ट ऑप्शन है. </p>
<p>सेम एक ऐसी बेल वाली सब्जी है जिसे बहुत ज्यादा तामझाम की जरूरत नहीं होती और यह कम देखभाल में भी तेजी से फैलती है. एक बार अगर इसकी बेल अच्छी तरह पकड़ बना ले तो आपके घर में हफ्तों तक सब्जी की टेंशन पूरी तरह खत्म हो जाती है. बाजार से महंगी और केमिकल वाली सेम खरीदने के बजाय आप इसे बेहद आसान तरीके से अपने घर के गमलों में उगा सकते हैं.</p>
<p>ऐसे तैयार करें मिट्टी और गमला<br />सेम उगाने के लिए हमेशा सही मिट्टी और अच्छी क्वालिटी के बीजों जरूरी होते हैं. इसके लिए आपको ऐसी मिट्टी तैयार करनी होगी जिसमें पानी जमा न हो. नॉर्मल मिट्टी में थोड़ा सा कोकोपीट और अच्छी मात्रा में गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट मिलाकर एक बढ़िया मिक्सचर तैयार कर लें. सेम की बेल काफी फैलती है इसलिए इसे लगाने के लिए कम से कम 12 से 15 इंच का बड़ा गमला चुनें. </p>
<p>बीज लगाने का आसान तरीका<br />बीजों को लगाने से पहले अगर आप उन्हें रातभर पानी में भिगोकर रख देंगे तो वह जल्दी अंकुरित होते हैं. गमले में करीब एक इंच की गहराई पर बीज दबा दें और हल्का सा पानी छिड़क दें. लगभग एक हफ्ते के अंदर छोटे-छोटे पौधे बाहर आने लगेंगे. जब पौधे थोड़े बड़े हो जाएं तो उन्हें ऊपर चढ़ने के लिए किसी लकड़ी, रस्सी या नेट का सहारा जरूर दें जिससे बेल अच्छे से फैल सके.<br />धूप और पानी का ध्यान रखें <br />सेम के पौधे को अच्छी ग्रोथ और ज्यादा फलियों के लिए भरपूर धूप की जरूरत होती है. अपने गमले को घर की ऐसी जगह पर रखें जहां कम से कम 5 से 6 घंटे की अच्छी धूप आती हो. पानी देते समय इस बात का ध्यान रखें कि मिट्टी में नमी बनी रहे लेकिन वह कीचड़ जैसी न बने क्योंकि ज्यादा पानी से जड़ें सड़ सकती हैं. जब बेल में फूल आने शुरू हों, तो हर 15 से 20 दिन में थोड़ी सी कंपोस्ट खाद या नीम खली डालते रहें इससे फलियां मोटी और ज्यादा संख्या में आएंगी. </p>
<p>कीड़ों से बचाव के टिप्स<br />कई बार सेम के पौधों पर काले कीड़े हमला कर देते हैं. इनसे बचने के लिए आपको किसी केमिकल की जरूरत नहीं है बस पानी में थोड़ा सा नीम का तेल और लिक्विड सोप मिलाकर हफ्ते में एक बार पौधों पर स्प्रे कर दें. लगभग दो से ढाई महीने में आपकी होममेड ताजी सेम तोड़ने के लिए बिल्कुल तैयार हो जाएगी.</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 07:26:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीएम किसान की 23वीं किस्त जारी, बिजनौर के 3 लाख से अधिक किसानों को मिला लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[रामनाथ सिंह
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/uttar-pradesh/23rd-installment-of-pm-kisan-released-more-than-3-lakh/article-148631"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/कगेोल.png" alt=""></a><br /><p><strong>बिजनौर।</strong> प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा पश्चिम बंगाल के तारकेश्वर, हुगली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त जारी की गई। इस अवसर पर जनपद बिजनौर में भी कृषि विभाग द्वारा “पीएम किसान उत्सव दिवस” का आयोजन किया गया, जिसका सीधा प्रसारण वर्चुअल माध्यम से किया गया।</p>
<p>उप कृषि निदेशक डॉ. घनश्याम वर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा देशभर के 9.44 करोड़ किसानों के खातों में 18,880 करोड़ रुपये की धनराशि हस्तांतरित की गई। वहीं जनपद बिजनौर के 3,05,551 किसानों को 61.11 करोड़ रुपये की सहायता राशि उनके खातों में भेजी गई।</p>
<p>जिला स्तरीय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा नगर अध्यक्ष अंकुर गौतम, नगर महामंत्री मन्दीप चौधरी, उप कृषि निदेशक डॉ. घनश्याम वर्मा, जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया सहित कृषि विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण जिले के सभी विकासखंडों एवं ग्राम पंचायतों में भी किया गया, जहां किसानों ने प्रधानमंत्री का संबोधन सुना। </p>
<p>अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने किसानों के हित में संचालित योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, डिजिटल कृषि मिशन और प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना की जानकारी साझा की। कार्यक्रम के अंत में उप कृषि निदेशक ने उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं किसानों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 19:15:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Harshit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एलोवेरा को सुखा देती हैं ये 4 आम गलतियां</title>
                                    <description><![CDATA[<p>एलोवेरा: आज के वक्त में शायद ही कोई ऐसा घर हो जिसमें एलोवेरा का पौधा न पाया जाता हो. यह जितना हमारे स्वास्थ्य और स्किन के लिए फायदेमंद है. इसकी देखभाल करना उतना ही आसान माना जाता है. कई बार लोग इसे लाकर घर के किसी भी कोने में रख देते हैं और सोचते हैं कि यह अपने आप बढ़ता रहेगा. लेकिन असल में ऐसा नहीं है क्योंकि अनजाने में की गई कुछ छोटी-छोटी लापरवाही इस बेहद मजबूत पौधे को भी पूरी तरह सुखा या सड़ा सकती हैं. </p>
<p>अगर आपके घर का एलोवेरा भी पीला पड़ रहा है उसकी पत्तियां</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/these-4-common-mistakes-make-aloe-vera-dry/article-148516"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/aelobera.jpg" alt=""></a><br /><p>एलोवेरा: आज के वक्त में शायद ही कोई ऐसा घर हो जिसमें एलोवेरा का पौधा न पाया जाता हो. यह जितना हमारे स्वास्थ्य और स्किन के लिए फायदेमंद है. इसकी देखभाल करना उतना ही आसान माना जाता है. कई बार लोग इसे लाकर घर के किसी भी कोने में रख देते हैं और सोचते हैं कि यह अपने आप बढ़ता रहेगा. लेकिन असल में ऐसा नहीं है क्योंकि अनजाने में की गई कुछ छोटी-छोटी लापरवाही इस बेहद मजबूत पौधे को भी पूरी तरह सुखा या सड़ा सकती हैं. </p>
<p>अगर आपके घर का एलोवेरा भी पीला पड़ रहा है उसकी पत्तियां ढीली हो रही हैं या वह सूख रहा है. तो समझ जाइए कि उसकी केयर में कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ हो रही है. चलिए आपको बताते हैं वह कौन सी 4 गलतियां हैं जो लोग अक्सर करते हैं और कैसे कुछ आसान टिप्स को अपनाकर आप अपने एलोवेरा को हमेशा हरा-भरा और फ्रेश रख सकते हैं.</p>
<p>यह 4 गलतियां जो एलोवेरा को कर देती हैं बर्बाद<br />एलोवेरा को खराब करने वाली सबसे पहली और बड़ी गलती है ओवर-वाटरिंग यानी ज़रूरत से ज़्यादा पानी देना. चूंकि यह एक मरुस्थलीय पौधा है. इसकी पत्तियों में पहले से ही बहुत पानी स्टोर रहता है. ऐसे में रोज़-रोज़ पानी देने से इसकी जड़ें बहुत जल्दी सड़ जाती हैं. दूसरी गलती है गलत मिट्टी का चुनाव अगर मिट्टी बहुत सख्त है और उसमें पानी जमा रहता है. तो पौधा कभी ग्रो नहीं कर पाएगा. </p>
<p>तीसरी गलती है धूप का गलत बैलेंस इसे या तो लोग ऐसी जगह रख देते हैं जहां बिल्कुल रोशनी नहीं आती या फिर सीधे चिलचिलाती तेज़ धूप में छोड़ देते हैं जिससे इसकी पत्तियां जलकर भूरी हो जाती हैं. चौथी गलती है बिना छेद वाले छोटे गमले का इस्तेमाल करना. जिससे पानी नीचे से निकल नहीं पाता और जड़ें घुटने लगती हैं.</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

                <link>https://www.tarunmitra.in/agriculture/these-4-common-mistakes-make-aloe-vera-dry/article-148516</link>
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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 06:32:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों के लिए वाइट गोल्ड है यह मखाने की फसल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मखाना की खेती: देश में आजकल किसान पारंपरिक फसलों के मुकाबले नकदी फसलों की तरफ ज्यादा रुझान ले रहे हैं. अगर आप भी कम लागत में किसी ऐसी खेती की तलाश में हैं जो आपके लिए कमाई के दरवाजे खोल दे तो मखाने की खेती आपके लिए सबसे बढ़िया विकल्प है. मखाने को इसके बेमिसाल फायदों और बाजार में मिलने वाली ऊंची कीमतों की वजह से वाइट गोल्ड यानी सफेद सोना भी कहा जाता है. </p>
<p>हेल्थ कॉन्शियस लोगों के बीच इसकी डिमांड देश ही नहीं बल्कि विदेशों में रहती है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी खेती के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/this-makhana-crop-is-white-gold-for-farmers/article-148345"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/mkhana.jpg" alt=""></a><br /><p>मखाना की खेती: देश में आजकल किसान पारंपरिक फसलों के मुकाबले नकदी फसलों की तरफ ज्यादा रुझान ले रहे हैं. अगर आप भी कम लागत में किसी ऐसी खेती की तलाश में हैं जो आपके लिए कमाई के दरवाजे खोल दे तो मखाने की खेती आपके लिए सबसे बढ़िया विकल्प है. मखाने को इसके बेमिसाल फायदों और बाजार में मिलने वाली ऊंची कीमतों की वजह से वाइट गोल्ड यानी सफेद सोना भी कहा जाता है. </p>
<p>हेल्थ कॉन्शियस लोगों के बीच इसकी डिमांड देश ही नहीं बल्कि विदेशों में रहती है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी खेती के लिए आपको बहुत ज्यादा उपजाऊ जमीन की जरूरत नहीं होती. आप अपने इलाके के जलजमाव वाले खेतों, गढ्ढों या तालाबों का इस्तेमाल करके हर सीजन में इससे लाखों रुपये का मोटा मुनाफा बेहद आसानी से कमा सकते हैं. </p>
<p>ऐसे करें नर्सरी की तैयारी<br />मखाने की खेती दो तरीकों से की जाती है एक पारंपरिक तालाब वाली विधि और दूसरी खेतों में जलजमाव करके की जाने वाली तकनीक. इसकी शुरुआत दिसंबर से जनवरी के महीने में नर्सरी तैयार करके की जाती है. नर्सरी में जब पौधे लगभग दो महीने के हो जाते हैं तब अप्रैल के आसपास इन्हें मुख्य खेत या तालाब में शिफ्ट कर दिया जाता है. </p>
<p>मखाने की बुआई का सही तरीका<br />मखाने के पौधों की बेहतर ग्रोथ के लिए खेत में कम से कम दो से तीन फीट पानी हमेशा भरा रहना जरूरी है. बुआई के समय प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सही मात्रा में जैविक खाद और न्यूट्रिएंट्स का इस्तेमाल करने से पौधों की ग्रोथ बहुत तेजी से होती है. </p>
<p><br />इतने समय में फसल तैयार<br />मखाने की फसल को पूरी तरह तैयार होने में लगभग 8 से 9 महीने का समय लगता है. अगस्त से सितंबर के बीच इसके फल पानी की सतह के नीचे बैठने लगते हैं. जिन्हें मजदूरों की मदद से बाहर निकाला जाता है. इसके बाद बीजों की ग्रेडिंग, सुखाने और फिर कड़ाही में भूनकर लावे यानी मखाने निकालने का प्रोसेस शुरू होता है. बाजार में मखाने के बीज और तैयार मखाने दोनों की कीमतें अच्छी मिलती है. एक बार निवेश करने के बाद यह फसल आपकी लागत के मुकाबले कई गुना ज्यादा रिटर्न देती है. </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 08:02:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो तल्ला खेती एक ही बार 3 से 5 गुना मुनाफा कमा सकते हैं किसान भाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दो तल्ला खेती : खेती और किसानी में इन दिनों किसान नए-नए प्रयोग कर रहे हैं. इसी में एक नाम खूब चर्चा में है और वो है दो तल्ला खेती जिसे मल्टी लेयर फार्मिंग भी कहते हैं. इसका मतलब ये है कि जैसे शहरों में कम जगह होने पर लोग बहुमंजिला इमारतें बना लेते हैं. ठीक वैसे ही खेत के एक ही टुकड़े पर एक साथ कई फसलें उगा ली जाती हैं.</p>
<p>इस तकनीक में जमीन के नीचे से लेकर ऊपर हवा तक के पूरे स्पेस का इस्तेमाल होता है. इस तरीके से खेती करने का सबसे बड़ा फायदा यह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/farmers-can-earn-3-to-5-times-profit-by-farming/article-148145"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/ghbgvfd.jpg" alt=""></a><br /><p>दो तल्ला खेती : खेती और किसानी में इन दिनों किसान नए-नए प्रयोग कर रहे हैं. इसी में एक नाम खूब चर्चा में है और वो है दो तल्ला खेती जिसे मल्टी लेयर फार्मिंग भी कहते हैं. इसका मतलब ये है कि जैसे शहरों में कम जगह होने पर लोग बहुमंजिला इमारतें बना लेते हैं. ठीक वैसे ही खेत के एक ही टुकड़े पर एक साथ कई फसलें उगा ली जाती हैं.</p>
<p>इस तकनीक में जमीन के नीचे से लेकर ऊपर हवा तक के पूरे स्पेस का इस्तेमाल होता है. इस तरीके से खेती करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपकी लागत और मेहनत दोनों बचती है और एक ही बार में मुनाफा सीधे तीन से पांच गुना तक बढ़ जाता है. जान लीजिए दो तल्ला खेती का पूरा तरीका. </p>
<p>कैसे होती है दो तल्ला खेती?<br />इस खेती को शुरू करने के लिए खेत में एक खास तरह का वर्टिकल स्ट्रक्चर तैयार किया जाता है. सबसे पहले जमीन के भीतर उगने वाली फसलें जैसे अदरक, हल्दी या कंद जैसी चीजें बोई जाती हैं. इसके ठीक ऊपर जमीन की सतह पर पत्तेदार सब्जियां या कम ऊंचाई वाली फसलें जैसे धनिया, मेथी या पालक लगाई जाती हैं. </p>
<p>इसके बाद खेत में बांस, लकड़ी और तारों की मदद से एक मजबूत मचान या शेड नेट तैयार किया जाता है. इस मचान के ऊपर बेल वाली सब्जियां जैसे कुंदरू, परवल, करेला या लौकी फैला दी जाती हैं. इस तरह एक ही समय पर एक ही जमीन से तीन अलग-अलग लेयर में फसलें तैयार होती हैं. </p>
<p>होती ही रिस्क फ्री कमाई <br />दो तल्ला खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें किसानों का रिस्क लगभग जीरो हो जाता है. अगर मौसम की मार या किसी वजह से एक फसल खराब भी हो जाए तो बाकी की दो फसलें किसान को नुकसान से बचा लेती हैं. इसमें पानी और खाद की भी भारी बचत होती है. </p>
<p>क्योंकि जो पानी आप ऊपर की बेल वाली फसलों को देते हैं वही रिसकर नीचे की फसलों को भी मिल जाता है.  तो साथ में मचान की वजह से नीचे की फसलें धूप से बची रहती हैं. जिससे नमी लंबे समय तक बनी रहती है. आज के वक्त में दो तल्ला खेती की यह तकनीक किसानों के मुनाफे को बढ़ाने में काफी मददगार साबित हो रही है. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 05:38:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाग में कैसे उगा सकते हैं तोतापरी मैंगो? सीजन में होगा बंपर मुनाफा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>तोतापरी आम की बागवानी : अगर आप अपने फार्म हाउस या खेत से अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो तोतापरी आम की खेती एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है. तोतापरी आम अपनी तोते की चोंच जैसी बनावट की वजह से पहचाना जाता है. इसे कई जगहों पर किली मुक्कू के नाम से भी जाना जाता है.  यह आम की ऐसी किस्म का आम है जो ज्यादा पैदावार देने के लिए मशहूर है और इसकी देखभाल भी आसान होती है. आज के समय में जब पल्प इंडस्ट्री और एक्सपोर्ट की डिमांड बढ़ रही है. ऐसे में तोतापरी उगाकर किसान भाई मोटी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/how-to-grow-parrot-in-the-garden-there-will-be/article-147960"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/kjnhbgfd.jpg" alt=""></a><br /><p>तोतापरी आम की बागवानी : अगर आप अपने फार्म हाउस या खेत से अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो तोतापरी आम की खेती एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है. तोतापरी आम अपनी तोते की चोंच जैसी बनावट की वजह से पहचाना जाता है. इसे कई जगहों पर किली मुक्कू के नाम से भी जाना जाता है.  यह आम की ऐसी किस्म का आम है जो ज्यादा पैदावार देने के लिए मशहूर है और इसकी देखभाल भी आसान होती है. आज के समय में जब पल्प इंडस्ट्री और एक्सपोर्ट की डिमांड बढ़ रही है. ऐसे में तोतापरी उगाकर किसान भाई मोटी कमाई कर सकते हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हर साल फल देता है और बाकी दूसरी वैरायटी के मुकाबले बीमारियों के प्रति ज्यादा रेजिस्टेंट है जिससे किसानों का रिस्क काफी कम हो जाता है. जान लीजिए इसे उगाने का सही तरीका.</p>
<p>तोतापरी आम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हर साल अच्छी मात्रा में फल देता है साथ ही, यह कई बीमारियों का सामना दूसरी किस्मों के मुकाबले बेहतर तरीके से कर लेता है, जिससे किसानों को नुकसान का खतरा कम रहता है.  सही तरीके से इसकी बागवानी करके किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं.  आइए जानते हैं इसे उगाने का सही तरीका. </p>
<p>ऐसे उगाएं तोतापरी आम<br />तोतापरी आम की खेती शुरू करने से पहले सही जमीन और मौसम का चुनाव करना बहुत जरूरी है.  यह आम की किस्म गर्म और हल्के गर्म मौसम वाले इलाकों में अच्छी तरह बढ़ती है. इसके लिए 21 से 27 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है. मिट्टी की बात करें तो अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए सबसे बेहतर रहती है. पौधे लगाने के लिए करीब 1 मीटर गहरा और 1 मीटर चौड़ा गड्ढा तैयार करें. इसके बाद गड्ढे में मिट्टी और सड़ी हुई गोबर की खाद का मिश्रण भर दें. तोतापरी आम के पौधे लगाने का सबसे अच्छा समय मानसून का मौसम होता है.  जून से अगस्त के बीच पौधारोपण करने से पौधों को पर्याप्त नमी मिलती है और उनकी जड़ें अच्छी तरह विकसित हो पाती हैं. </p>
<p>यह भी पढ़ेंः मोती की खेती के लिए सरकार की इस स्कीम में मिलती है सब्सिडी, 11 लाख के निवेश से कमा सकते हैं 40 लाख</p>
<p>इस तरीके से लगाएं पेड़<br />आजकल फार्म हाउस में अल्ट्रा हाई डेंसिटी प्लांटिंग का चलन बढ़ा है जिससे कम जगह में ज्यादा पेड़ लगाए जा सकते हैं. पारंपरिक तरीके में जहां पेड़ 10-10 मीटर की दूरी पर लगते थे. वहीं मॉडर्न तकनीक में आप 3x2 मीटर की दूरी पर भी इन्हें लगा सकते हैं. </p>
<p>समय पर करें सिंचाई<br />सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन यानी टपक सिंचाई सबसे बेस्ट है. जो पानी बचाने के साथ-साथ पौधों को जरूरी नमी भी प्रदान करती है. छोटे पौधों को शुरुआत में हर 2-3 दिन में पानी देना चाहिए. जबकि बड़े पेड़ों को फल आने के समय नमी की ज्यादा जरूरत होती है. नियमित कटाई-छंटाई से पेड़ों का शेप सही रहता है और फलों की क्वालिटी सुधरती है.</p>
<p>तोतापरी आम की खेती से कितनी हो सकती है कमाई?<br />तोतापरी आम की खेती किसानों के लिए अच्छी कमाई का जरिया बन सकती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह आम की दूसरी कई किस्मों की तुलना में ज्यादा फल देता है. एक बड़ा और पूरी तरह तैयार पेड़ सालभर में लगभग 150 से 250 किलो तक आम पैदा कर सकता है. साथ ही बाजार में इसकी मांग सिर्फ खाने के लिए ही नहीं होती, बल्कि जूस, मैंगो शेक, जैम और आम का पल्प बनाने वाली कंपनियां भी इसे बड़े पैमाने पर खरीदती हैं. इस आम में गूदा ज्यादा होता है और गुठली छोटी होती है, इसलिए फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में इसकी काफी मांग रहती है. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 06:58:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> गमले में आसानी से ताजी अदरक उगाने का ये तरीका</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अदरक  : बारिश के मौसम में गरमा-गरम अदरक वाली चाय का मजा ही कुछ और होता है. लेकिन बाजार की महंगी अदरक खरीदने के बजाय अगर यह आपको अपने घर पर ही मिल जाए तो बात ही क्या है. मानसून का सीजन शुरू होने से ठीक पहले का समय घर की छत या बालकनी में अदरक का पौधा लगाने के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है.</p>
<p><br />अदरक को गमले में उगाना बहुत मुश्किल काम नहीं है. बस आपको इसकी सही तरकीब मालूम होनी चाहिए. इसे उगाने के लिए सबसे पहले आपको बाजार से ऐसी अदरक लानी होगी जिसमें छोटी-छोटी आंखें</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/%C2%A0%E0%A4%97%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%86%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A4%95-%E0%A4%89%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AF%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%BE/article-147490"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/kijuyg1.jpg" alt=""></a><br /><p>अदरक  : बारिश के मौसम में गरमा-गरम अदरक वाली चाय का मजा ही कुछ और होता है. लेकिन बाजार की महंगी अदरक खरीदने के बजाय अगर यह आपको अपने घर पर ही मिल जाए तो बात ही क्या है. मानसून का सीजन शुरू होने से ठीक पहले का समय घर की छत या बालकनी में अदरक का पौधा लगाने के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है.</p>
<p><br />अदरक को गमले में उगाना बहुत मुश्किल काम नहीं है. बस आपको इसकी सही तरकीब मालूम होनी चाहिए. इसे उगाने के लिए सबसे पहले आपको बाजार से ऐसी अदरक लानी होगी जिसमें छोटी-छोटी आंखें या बड्स निकले हुए हों. यही बड्स आगे चलकर एक शानदार और घने पौधे का रूप ले लेते हैं.</p>
<p>गमले का चुनाव करते समय ध्यान रखें कि अदरक जमीन के अंदर फैलती है. इसलिए कम से कम 12 इंच गहरा और चौड़ा गमला ही लें. गमले के नीचे एक छोटा सा छेद जरूर होना चाहिए जिससे एक्स्ट्रा पानी आसानी से बाहर निकल सके. पानी रुकने से अदरक की गांठें बहुत जल्दी सड़ने लगती हैं.</p>
<p>मिट्टी तैयार करने के लिए नॉर्मल मिट्टी में बराबर मात्रा में कोकोपीट और गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट अच्छे से मिला लें. यह मिक्चर मिट्टी को एकदम भुरभुरी और उपजाऊ बना देता है जिससे अदरक की जड़ों को फैलने के लिए बढ़िया स्पेस मिलता है. इस तैयार मिट्टी को गमले में ऊपर तक भर लें.</p>
<p>अब अंकुरित अदरक के टुकड़ों को मिट्टी में लगभग दो से तीन इंच की गहराई पर दबा दें और ऊपर से हल्की मिट्टी डालकर थोड़ा सा पानी छिड़क दें. गमले को ऐसी जगह पर रखें जहां सुबह की अच्छी धूप आती हो लेकिन दोपहर की कड़क और सीधी धूप से यह सुरक्षित रहे.</p>
<p>शुरुआत में पौधे की ग्रोथ थोड़ी धीमी होती है और लगभग दो से तीन हफ्ते में मिट्टी से हरे-भरे पत्ते बाहर आने लगते हैं. मानसून के दौरान इसमें ज्यादा पानी डालने की गलती बिल्कुल न करें सिर्फ मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखें. समय-समय पर थोड़ी सी जैविक खाद डालते रहने से पैदावार बहुत बढ़िया होती है.<br />.<br />लगभग 7 से 8 महीने की सही देखभाल के बाद जब पौधे की पत्तियां पीली होकर सूखने लगें तो समझ जाएं कि आपकी ताजी ऑर्गेनिक अदरक पूरी तरह तैयार है. अब आप जब चाहें गमले की मिट्टी खोदकर बिल्कुल फ्रेश और खुशबूदार अदरक निकाल सकते हैं जो आपकी चाय का स्वाद दोगुना कर देगी.</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 07:16:17 +0530</pubDate>
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