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                <title>खेती-बाड़ी - Tarun Mitra</title>
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                <description>खेती-बाड़ी RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>किचन गार्डन और बालकनी को दें एकदम नया और स्टाइलिश लुक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  किचन गार्डनिंग : बारिश का मौसम आते ही चारों तरफ हरियाली छा जाती है और यह समय  किचन गार्डनिंग का शौक रखने वालों के लिए बहुत ही सही होता है. सावन-भादों की ठंडी फुहारें और हवा में मौजूद नमी पौधों की ग्रोथ के लिए एक कुदरती खाद का काम करती हैं. अगर आप भी अपनी बालकनी, छत या घर के किसी खाली कोने में एक खूबसूरत और हरा-भरा किचन गार्डन तैयार करने की सोच रहे हैं. तो मानसून से बेहतर कोई दूसरा सीजन नहीं हो सकता. </p>
<p>इस मौसम में लगाई गई छोटी सी कलम भी बहुत तेजी से जड़ पकड़</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/give-a-completely-new-and-stylish-look-to-the-kitchen/article-157678"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-08/okijuy.jpg" alt=""></a><br /><p> किचन गार्डनिंग : बारिश का मौसम आते ही चारों तरफ हरियाली छा जाती है और यह समय  किचन गार्डनिंग का शौक रखने वालों के लिए बहुत ही सही होता है. सावन-भादों की ठंडी फुहारें और हवा में मौजूद नमी पौधों की ग्रोथ के लिए एक कुदरती खाद का काम करती हैं. अगर आप भी अपनी बालकनी, छत या घर के किसी खाली कोने में एक खूबसूरत और हरा-भरा किचन गार्डन तैयार करने की सोच रहे हैं. तो मानसून से बेहतर कोई दूसरा सीजन नहीं हो सकता. </p>
<p>इस मौसम में लगाई गई छोटी सी कलम भी बहुत तेजी से जड़ पकड़ लेती है और पौधे दोगुनी रफ्तार से लहलहाने लगते हैं. किचन गार्डन  में आप सिर्फ सब्जियां ही नहीं उगा सकते<br />हैं बल्कि आप इसमें बहुत से अच्छे पत्तेदार, खुशबूदार और रंग-बिरंगे पौधे जोड़ सकते हैं जो आपके घर के लुक को भी एकदम फ्रेश और बढ़िया बना देंगे. तो फिर बिना देर किए आपको बताते हैं मानसून में लगाए जाने वाले कुछ बेहतरीन पौधों के बारे में विस्तार से जानकारी.</p>
<p>पेट्रा क्रोटन और बड़े पत्तों वाला मनी प्लांट<br />अगर आप अपने किचन गार्डन में चटख रंगों का तड़का लगाना चाहते हैं तो फिर आपके लिए पेट्रा क्रोटन सबसे बढ़िया चॉइस है. इसके चौड़े पत्तों पर पीले, लाल, नारंगी और हरे रंग का नेचुरल शेड देखने में बेहद खूबसूरत लगता है. मानसून की हल्की रोशनी और नमी मिलते ही इसकी पत्तियां और ज्यादा चमकदार हो जाती हैं. इसके साथ ही बड़े पत्तों वाला मनी प्लांट यानी जंबो पोथोस गार्डन की हरियाली को एक अलग ही लेवल पर ले जाता है. </p>
<p>इसके बड़े दिल के साइज के और कटिंगदार हरे पत्ते एकदम किसी ट्रॉपिकल जंगल जैसा फील देते हैं. आप इसे किसी मॉस स्टिक के सहारे ऊपर चढ़ा सकते हैं या फिर अपने किचन विंडो के पास हैंगिंग पॉट में लगा सकते हैं. बारिश के मौसम में मनी प्लांट बहुत तेजी से बढ़ता है और इसकी बड़ी पत्तियां घर को एकदम बढ़िया रॉयल लुक देती हैं.</p>
<p>जेली बीन्स और हवॉर्थिया<br />अगर आपके घर के किचन गार्डन में जगह थोड़ी कम है. तो फिर जेली बीन्स प्लांट और हवॉर्थिया जैसे प्लांट्स आपके लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन साबित हो सकते हैं. जेली बीन्स प्लांट यानी सेडम रुब्रोटिंक्टम की पत्तियां छोटी, गोल-मटोल और जेली कैंडीज जैसी दिखती हैं. हल्की धूप और बारिश के मौसम में इसके पत्तों के सिरे हल्के लाल-गुलाबी रंग में बदल जाते हैं जो देखने में बेहद क्यूट और अट्रैक्टिव लगते हैं. </p>
<p>वहीं दूसरी तरफ हवॉर्थिया अपने जेब्रा जैसी सफेद धारियों और स्टार जैसे कॉम्पैक्ट शेप की वजह से बहुत अलग लगता है. यह पौधा बहुत स्लो स्पीड से बढ़ता है और बेहद कम जगह घेरता है. इसे अगर आप छोटी सी शेल्फ पर रखते हैं तो यह दोनों पौधे ही आपकी सजावट में चार चांद लगा देते हैं और इन्हें रोज-रोज की देखभाल की भी जरूरत नहीं होती.</p>
<p>सकुलेंट्स देगा मॉडर्न टच<br />सकुलेंट्स अपनी अनोखी बनावट, मोटी गूदेदार पत्तियों और मॉडर्न लुक के लिए जाने जाते हैं. किचन गार्डन के किसी स्टैंड पर अलग-अलग वैरायटी के सकुलेंट्स को छोटे सेरेमिक पॉट्स में सजाकर रखने से पूरा एरिया एकदम स्टाइलिश दिखता है. हालांकि मानसून के दौरान सकुलेंट्स, हवॉर्थिया और जेली बीन्स जैसे पौधों को लेकर एक सावधानी बरतना बहुत जरूरी है. </p>
<p>इन पौधों की पत्तियों में पहले से काफी पानी स्टोर रहता है, इसलिए इन्हें लगातार तेज बारिश में खुले में न छोड़ें. गमले की मिट्टी ऐसी तैयार करें जिसमें रेत या परलाइट की मात्रा ज्यादा हो जिससे पानी जरा भी न रुके. गमले के नीचे ड्रेनेज होल साफ रखें और जब मिट्टी पूरी तरह सूख जाए तभी हल्का पानी दें. थोड़ी सी समझदारी से यह पौधे पूरे मानसून आपके गार्डन की हरा-भरा फ्रेश रखेंगे.</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 06:40:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बैंगन के कीड़े की दवा  घर पर ही कैसे  बनाएं ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बैंगन के कीड़े: बैंगन के पौधे में कीड़े लगने से फसल खराब हो सकती है. नीम तेल, लहसुन-मिर्च और साबुन के घोल से पौधे को सुरक्षित रखें.<br />बैंगन एक ऐसी सब्जी है जिसे किसान और घर में गार्डनिंग करने वाले लोग दोनों ही उगाना पसंद करते हैं. लेकिन बैंगन के पौधे में अक्सर कीड़े लगने की समस्या देखने को मिलती है, जिससे पौधा कमजोर हो जाता है और फल भी खराब हो जाते हैं. बाजार से महंगी कीटनाशक दवाएं खरीदने के बजाय घर में मौजूद चीजों से भी आसानी से असरदार दवा बनाई जा सकती है. इससे न सिर्फ पैसा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/how-to-make-medicine-for-brinjal-worms-at-home/article-157529"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-08/kjujhg.jpg" alt=""></a><br /><p>बैंगन के कीड़े: बैंगन के पौधे में कीड़े लगने से फसल खराब हो सकती है. नीम तेल, लहसुन-मिर्च और साबुन के घोल से पौधे को सुरक्षित रखें.<br />बैंगन एक ऐसी सब्जी है जिसे किसान और घर में गार्डनिंग करने वाले लोग दोनों ही उगाना पसंद करते हैं. लेकिन बैंगन के पौधे में अक्सर कीड़े लगने की समस्या देखने को मिलती है, जिससे पौधा कमजोर हो जाता है और फल भी खराब हो जाते हैं. बाजार से महंगी कीटनाशक दवाएं खरीदने के बजाय घर में मौजूद चीजों से भी आसानी से असरदार दवा बनाई जा सकती है. इससे न सिर्फ पैसा बचता है बल्कि बिना केमिकल के भी पौधे को सुरक्षित रखा जा सकता है. आइए जानते हैं बैंगन में कीड़े लगने का कारण और इसके घरेलू उपाय. </p>
<p>बैंगन की फसल में फल और तना छेदक कीट किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जाता है. यह कीट सबसे पहले पौधे के नरम तने में घुसकर उसे अंदर से खोखला कर देता है, जिससे पौधे की टहनियां मुरझाकर सूखने लगती हैं. इसके बाद यही कीट फूल और फल में भी घुस जाता है. एक बार लार्वा फल के अंदर घुस जाए तो उसे नष्ट करना मुश्किल हो जाता है, इसलिए शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत उपाय करना जरूरी होता है.</p>
<p>बैंगन में लगने वाले कीड़ों को भगाने के लिए नीम का तेल सबसे भरोसेमंद घरेलू उपाय माना जाता है. इसके लिए 5 मिलीलीटर नीम तेल को एक लीटर पानी में मिलाकर पौधे पर छिड़काव करना चाहिए. नीम का तेल पूरी तरह प्राकृतिक होता है और इससे कीड़ों को भगाने के साथ-साथ पौधे को भी कोई नुकसान नहीं होता.  इसे हफ्ते में एक या दो बार छिड़कने से कीड़ों की समस्या धीरे-धीरे कम होने लगती है. इसके अलावा नीम की खली या गोमूत्र का छिड़काव भी कीड़ों को दूर भगाने में कारगर माना जाता है. <br />. <br />घर में आसानी से मिलने वाली चीजों से भी कीड़ों के लिए स्प्रे बनाया जा सकता है. इसके लिए लहसुन और तीखी मिर्च को पीसकर पानी में मिला लें और इस मिश्रण को रातभर के लिए रखा रहने दें. अगले दिन इसे छानकर स्प्रे बोतल में भरकर पौधे पर छिड़काव करें. लहसुन और मिर्च की तेज गंध और तीखापन कीड़ों को पौधे के पास आने से रोकता है. <br />.<br />अगर पौधे में सफेद मक्खी या छोटे रस चूसने वाले कीड़े दिखें, तो साबुन के पानी का स्प्रे बहुत असरदार होता है. इसके लिए हल्के साबुन को पानी में घोलकर पौधे की पत्तियों और तने पर छिड़काव करें. यह घोल कीड़ों के शरीर पर चिपककर उन्हें कमजोर कर देता है, जिससे वे पौधे को नुकसान नहीं पहुंचा पाते.</p>
<p>घरेलू उपायों के साथ-साथ पौधे की नियमित सफाई और निगरानी करना भी बहुत जरूरी है. जो टहनी या फल कीड़े से खराब हो चुके हों, उन्हें तुरंत तोड़कर पौधे से अलग कर देना चाहिए, ताकि कीड़ा आगे न फैले.  पौधे के आसपास सूखे पत्ते साफ रखने चाहिए, क्योंकि इनमें कीड़े छिपकर अंडे देते हैं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 07:40:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोयाबीन की खेती कम समय में देंगी बेहतर मुनाफा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सोयाबीन की खेती: सोयाबीन की खेती के लिए आपको सही किस्में अपनाना जरूरी है. जानिए सोयाबीन की उन बढ़िया वैरायटीज के बारे में जो बीमारियों से बचकर सबसे जल्दी पकती हैं.<br />सोयाबीन की खेती में अच्छी कमाई के लिए सिर्फ खेत तैयार करना काफी नहीं है. सही किस्म का चुनाव भी उतना ही जरूरी है. अगर किस्म इलाके की मिट्टी और मौसम के हिसाब से सही बैठती है तो फसल की ग्रोथ बेहतर रहती है और किसान को उत्पादन के साथ समय की भी बचत मिल सकती है.</p>
<p>जेएस 20-29 सोयाबीन की चर्चित किस्मों में शामिल है. इसकी खेती कई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/soybean-cultivation-will-give-better-profits-in-less-time/article-157202"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-08/soyabin.jpg" alt=""></a><br /><p>सोयाबीन की खेती: सोयाबीन की खेती के लिए आपको सही किस्में अपनाना जरूरी है. जानिए सोयाबीन की उन बढ़िया वैरायटीज के बारे में जो बीमारियों से बचकर सबसे जल्दी पकती हैं.<br />सोयाबीन की खेती में अच्छी कमाई के लिए सिर्फ खेत तैयार करना काफी नहीं है. सही किस्म का चुनाव भी उतना ही जरूरी है. अगर किस्म इलाके की मिट्टी और मौसम के हिसाब से सही बैठती है तो फसल की ग्रोथ बेहतर रहती है और किसान को उत्पादन के साथ समय की भी बचत मिल सकती है.</p>
<p>जेएस 20-29 सोयाबीन की चर्चित किस्मों में शामिल है. इसकी खेती कई इलाकों में की जाती है और कम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों के तौर पर किसान इसे पसंद करते हैं. समय पर बुवाई और सही प्रबंधन मिलने पर पौधों की बढ़वार अच्छी रहती है. इससे किसान अगली फसल की तैयारी भी समय पर कर सकता है.</p>
<p>जेएस 93-05 भी किसानों के बीच काफी लोकप्रिय किस्म है. इसकी खासियत इसकी अच्छी उत्पादन क्षमता मानी जाती है. सही समय पर बुवाई करने पर फसल का विकास बेहतर रहता है. हालांकि किसी भी किस्म को लगाने से पहले अपने क्षेत्र में इसकी उपयुक्तता और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए.</p>
<p>जेएस 95-60 को भी सोयाबीन की बेहतर किस्मों में गिना जाता है. यह कई कृषि क्षेत्रों में किसानों के बीच इस्तेमाल की जाती है. अच्छी जल निकासी वाली जमीन और संतुलित पोषण मिलने पर फसल बेहतर प्रदर्शन कर सकती है. किसान को बुवाई से पहले बीज की गुणवत्ता और खेत की तैयारी पर खास ध्यान देना चाहिए.</p>
<p>एनआरसी 37 सोयाबीन की ऐसी किस्म है जिसे किसान अपने क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार चुन सकते हैं. इसकी खेती में सही समय पर बुवाई और खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी होता है. अगर शुरुआत से फसल का प्रबंधन ठीक रखा जाए तो पौधों की ग्रोथ अच्छी रहती है और उत्पादन बेहतर मिलने की उम्मीद रहती है.</p>
<p>एनआरसी 86 भी सोयाबीन की उपयोगी किस्मों में शामिल है. किसानों के लिए इसका चुनाव स्थानीय मौसम और मिट्टी की स्थिति देखकर करना बेहतर रहता है. बुवाई के समय अच्छी गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज का इस्तेमाल करें. साथ ही खेत में पानी जमा न होने दें, क्योंकि ज्यादा नमी सोयाबीन की फसल के लिए नुकसानदायक हो सकती है.</p>
<p>कम अवधि में तैयार होने वाली सोयाबीन किस्मों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान खेत को अगली फसल के लिए जल्दी खाली कर सकता है. इससे फसल चक्र को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद मिलती है. हालांकि सिर्फ कम अवधि देखकर बीज चुनना सही नहीं है. स्थानीय मौसम, मिट्टी और बाजार की स्थिति भी देखना जरूरी है.</p>
<p>अच्छी किस्म का बीज तभी फायदा देगा जब उसकी गुणवत्ता भी अच्छी हो. इसलिए किसान को भरोसेमंद स्रोत से प्रमाणित बीज खरीदना चाहिए. पैकेट पर किस्म का नाम, लॉट नंबर और दूसरी जरूरी जानकारी जरूर जांचें. बिना जानकारी के सस्ता बीज खरीदना बाद में भारी पड़ सकता है. बुवाई से पहले बीज उपचार करना भी फायदेमंद रहता है.</p>
<p>सोयाबीन में बेहतर उत्पादन के लिए सिर्फ किस्म पर निर्भर रहना ठीक नहीं है. खेत की तैयारी, बुवाई का समय, बीज की मात्रा, पोषण, खरपतवार नियंत्रण और सिंचाई जैसे काम भी सही तरीके से करने होते हैं. किसान अगर इन सभी चीजों का ध्यान रखता है तो चुनी गई किस्म से बेहतर उत्पादन लेने की संभावना बढ़ जाती है.</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 08:00:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>धन को आकर्षित करते हैं ये पानी वाले पौधे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लकी पौधे: वास्तु शास्त्र में तीन ऐसे पौधों के बारे में बताया गया है जिन्हें आप बिना किसी झंझट के आसानी से पानी में उगा सकते हैं। कहते हैं इन पौधों को घर में लगाने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ये पौधे धन को आकर्षित करते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनाए रखते हैं। इन पौधों को आप कांच के बर्तन में आसानी से उगा सकते हैं। चलिए जानते हैं ये कौन से पानी वाले पौधे हैं जिन्हें घर में लगाने से सुखों में बढ़ोतरी होती है।</p>
<p>धन को आकर्षित करते हैं ये पानी वाले पौधे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/these-water-plants-attract-money/article-157035"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-08/olkjnh.jpg" alt=""></a><br /><p>लकी पौधे: वास्तु शास्त्र में तीन ऐसे पौधों के बारे में बताया गया है जिन्हें आप बिना किसी झंझट के आसानी से पानी में उगा सकते हैं। कहते हैं इन पौधों को घर में लगाने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ये पौधे धन को आकर्षित करते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनाए रखते हैं। इन पौधों को आप कांच के बर्तन में आसानी से उगा सकते हैं। चलिए जानते हैं ये कौन से पानी वाले पौधे हैं जिन्हें घर में लगाने से सुखों में बढ़ोतरी होती है।</p>
<p>धन को आकर्षित करते हैं ये पानी वाले पौधे<br />1. मनी प्लांट (Money Plant): धन का कारक<br />वास्तु और फेंगशुई दोनों में मनी प्लांट को धन को आकर्षित करने वाला पौधा माना जाता है। इसे एक कांच की बोतल या जार में थोड़ा सा नी डालकर आसानी से उगा सकते हैं। कहते हैं जैसे-जैसे इस पौधे की बेल ऊपर की ओर बढ़ती है, वैसे-वैसे घर में धन-दौलत के द्वार खुलते हैं। मनी प्लांट लगाने के लिए घर की दक्षिण-पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। यह दिशा धन और समृद्धि का प्रतिनिधित्व करती है। घर में मनी प्लांट लगाने समय इस बात का ध्यान रखें कि इसकी पत्तियां कभी जमीन को नहीं छूनी चाहिए।</p>
<p>2. बैम्बू प्लांट (Lucky Bamboo): सकारात्मक ऊर्जा का कारक<br />वास्तु अनुसार बैम्बू प्लांट घर में सुख-शांति और समृद्धि लेकर आता है। इसे आप एक कांच के बर्तन में थोड़ा सा पानी और उसमें कुछ रंग-बिरंगे पत्थर डालकर आसानी से उगा सकते हैं। कहते हैं लाल रिबन से बंधा ये प्लांट घर में सुख-समृद्धि लाता है। साथ ही वास्तु दोष भी समाप्त करता है। इसे आप घर या ऑफिस के पूर्व या उत्तर-पूर्व कोण में रख सकते हैं। ध्यान रहे कि हर सप्ताह इस प्लांट का पानी बदलता रहे ताकि पौधे की जड़ें सड़े नहीं।</p>
<p>3. पीस लिली (Peace Lily): शांति, पवित्रता और सौहार्द का प्रतीक<br />पीस लिली प्लांट के सुंदर सफेद फूल शांति, पवित्रता और सौहार्द का प्रतीक माने जाते हैं। इसे घर में रखने से मानसिक तनाव दूर होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसे बेडरूम में रखने से नींद भी अच्छी आती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह पौधा घर की नकारात्मक ऊर्जा को खत्म कर धन और सुख को आकर्षित करता है। इसे लगाने के लिए उत्तर दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। इसके अलावा आप इसे पूर्व दिशा में भी रख सकते हैं। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 06:04:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> जान लें घर पर बेलपत्र पौधे को लगाने का तरीका</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बेलपत्र का पौधा :सावन के इस पावन महीने में भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि शिवजी को प्रसन्न करने के लिए किसी बड़े अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं होती, वे तो केवल एक लोटा जल और भाव से चढ़ाए गए बेलपत्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं। यदि आप भी इस सावन शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करना चाहते हैं तो घर आप आसानी से इसका पौधा लगा सकते हैं। यहां हम आपको कुछ आसान ट्रिक्स के बारे में बता रहे हैं जिससे आप आसानी से बेलपत्र का पौधा लगा पाएंगे। </p>
<p><br />1. सही समय और सामग्री</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/%C2%A0%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%98%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%B2%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%8C%E0%A4%A7%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%BE/article-156881"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-08/belptra.jpg" alt=""></a><br /><p>बेलपत्र का पौधा :सावन के इस पावन महीने में भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि शिवजी को प्रसन्न करने के लिए किसी बड़े अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं होती, वे तो केवल एक लोटा जल और भाव से चढ़ाए गए बेलपत्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं। यदि आप भी इस सावन शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करना चाहते हैं तो घर आप आसानी से इसका पौधा लगा सकते हैं। यहां हम आपको कुछ आसान ट्रिक्स के बारे में बता रहे हैं जिससे आप आसानी से बेलपत्र का पौधा लगा पाएंगे। </p>
<p><br />1. सही समय और सामग्री का चुनाव</p>
<p>बेलपत्र लगाने के लिए फरवरी से जुलाई का समय सबसे बेस्ट माना जाता है। इसके लिए बेलपत्र का ताजा फल या एक स्वस्थ टहनी, 8-10 इंच का गमला, और सही मिट्टी का मिश्रण लें। </p>
<p>2. मिट्टी तैयार करने की ट्रिक<br />बेलपत्र के पौधे को ऐसी मिट्टी पसंद होती है जिसमें पानी जमा न हो। इसके लिए 50 फीसदी नॉर्मल बगीचे की मिट्टी + 30 फीसदी गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट + 20 फीसदी रेत लें। गमले के नीचे एक ड्रेनेज होल जरूर रखें ताकि एक्सट्रा पानी आसानी से बाहर निकल सके।</p>
<p>3. पौधा लगाने की आसान ट्रिक<br />बेलपत्र के पके हुए फल से बीज निकालें और उन्हें पानी से अच्छे से धोकर गुदा साफ कर लें। बीजों को 24 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रखें। गमले की मिट्टी में 1 इंच गहराई पर बीज बोएं और ऊपर से हल्की मिट्टी डालकर पानी का छिड़काव करें।</p>
<p>कटिंग से उगाने का आसान तरीका<br />किसी पुराने बेलपत्र के पौधे से पेंसिल जितनी मोटी और 6-8 इंच लंबी टहनी लें। टहनी के निचले हिस्से को थोड़ा छीलें और उस पर थोड़ा एलोवेरा जेल लगा लें। इसे मिट्टी में 2-3 इंच गहरा दबा दें। कटिंग से पौधा बहुत जल्दी तैयार होता है।</p>
<p>4. देखभाल के जरूरी टिप्स<br />बेलपत्र के पौधे को रोजाना कम से कम 4-5 घंटे की सीधी धूप की जरूरत होती है। इसे ऐसी जगह रखें जहां अच्छी धूप आती हो। मिट्टी में नमी बनाए रखें, लेकिन गमले में पानी रुकने न दें। जब मिट्टी की ऊपरी परत सूखी दिखे, तभी पानी दें। पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए महीने में एक बार थोड़ी गोबर की खाद या नीम की खली जरूर डालें। जब पौधा छोटा हो, तो इसे बहुत ज्यादा बारिश या बहुत तेज ठंड से बचाकर रखें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 07:08:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जानिए सफेद हल्दी  को अपने घर के गमलों में कैसे उगाए ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>हल्दी की खेती: क्या आप घर पर सफेद हल्दी उगाने और इससे अच्छी कमाई करने का तरीका ढूंढ रहे हैं? जानिए इसे कैसे आप अपने घर के गमलों में उगा सकते हैं.<br />सफेद हल्दी जिसे कई जगहों पर आमा हल्दी या कर्पूरा हल्दी भी कहा जाता है. सेहत के लिए बेहद औषधीय मानी जाती है. आजकल लोग अपनी सेहत को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं. इसलिए बाजार में इसकी मांग काफी बढ़ रही है. अगर आपके पास घर में थोड़ी सी खाली जगह या गमले हैं तो आप इसे आसानी से उगा सकते हैं.</p>
<p>सफेद हल्दी उगाने के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/know-how-to-grow-white-turmeric-in-pots-at-your/article-156205"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-08/haldi.jpg" alt=""></a><br /><p>हल्दी की खेती: क्या आप घर पर सफेद हल्दी उगाने और इससे अच्छी कमाई करने का तरीका ढूंढ रहे हैं? जानिए इसे कैसे आप अपने घर के गमलों में उगा सकते हैं.<br />सफेद हल्दी जिसे कई जगहों पर आमा हल्दी या कर्पूरा हल्दी भी कहा जाता है. सेहत के लिए बेहद औषधीय मानी जाती है. आजकल लोग अपनी सेहत को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं. इसलिए बाजार में इसकी मांग काफी बढ़ रही है. अगर आपके पास घर में थोड़ी सी खाली जगह या गमले हैं तो आप इसे आसानी से उगा सकते हैं.</p>
<p>सफेद हल्दी उगाने के लिए सबसे सही समय अप्रैल से जून का महीना माना जाता है. इसे उगाने के लिए मिट्टी का सही चुनाव बहुत जरूरी है. हल्की, भुरभुरी और सही जल निकासी वाली दोमट मिट्टी इसके लिए एकदम सही रहती है. मिट्टी तैयार करते समय उसमें गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट मिला दें ताकि पौधों को पोषण मिले.</p>
<p>घर पर खेती करने के लिए आप बाजार या नर्सरी से सफेद हल्दी के स्वस्थ गांठें ले आएं. अगर आप गमले या ग्रो बैग का इस्तेमाल कर रहे हैं. तो कम से कम 12 से 15 इंच का बड़ा गमला चुनें. गमले के तले में एक छोटा सा छेद जरूर रखें ताकि पानी जमा न हो और गांठें गलने से बची रहें.</p>
<p>गांठों को मिट्टी में लगभग 2 से 3 इंच की गहराई में बोएं और ऊपर से मिट्टी से ढक दें. बुवाई के बाद हल्का पानी छिड़कें. ध्यान रखें कि गमले को ऐसी जगह रखें जहां दिन में कम से कम 4 से 5 घंटे की अच्छी धूप आती हो. सही धूप मिलने से पौधों का विकास तेजी से होता है और जड़ें मजबूत बनती हैं.</p>
<p>सफेद हल्दी को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए समय-समय पर हल्का पानी दें. अत्यधिक सिंचाई से कंद सड़ सकते हैं, इसलिए जब ऊपर की मिट्टी सूखी दिखे तभी पानी डालें. पौधों की अच्छी बढ़त के लिए हर 20-25 दिनों में थोड़ी जैविक खाद डालते रहें जिससे फसल सेहतमंद रहे.<br />.<br />यह फसल पकने में लगभग 7 से 8 महीने का समय लेती है. जब पौधे की पत्तियां पीली पड़कर पूरी तरह सूखने लगें, तो समझ जाएं कि हल्दी की फसल तैयार हो चुकी है. इसके बाद सिंचाई बंद कर दें और मिट्टी को आराम से खोदकर सफेद हल्दी की गांठों को बाहर निकाल लें. उन्हें साफ करके सुखा लें.</p>
<p>कमाई के लिहाज से देखें तो सफेद हल्दी सामान्य हल्दी की तुलना में काफी महंगी बिकती है. बाजार में इसकी कीमत 150 रुपये से लेकर 400 रुपये प्रति किलो तक हो सकती है. जो इसकी क्वालिटी और डिमांड पर निर्भर करता है. घर के आंगन या छत पर छोटे पैमाने से शुरुआत करके भी आप बेहतरीन मुनाफा कमा सकते हैं.</p>
<p>अगर आप इसे केवल घर के इस्तेमाल के लिए उगा रहे हैं तो 4-5 गमलों से ही आपकी सालभर की जरूरत पूरी हो जाएगी. वहीं अगर आपके पास खाली जमीन या बड़ा गार्डन है. तो आप 20-30 ग्रो बैग्स लगाकर इसे छोटे स्तर के बिजनेस में बदल सकते हैं. कम मेहनत में यह एक बेहतरीन और टिकाऊ साइड बिजनेस बन सकता है.</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 06:15:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पिस्ता के पौधे लगाने और उनकी देखभाल का सही तरीका</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पिस्ता के पौधे: पिस्ता एक ऐसा मेवा है जो अपने स्वाद और सेहत के गुणों की वजह से हमेशा से लोगों की पसंद रहा है, और खासकर अफगानिस्तान का पिस्ता अपनी क्वालिटी के लिए दुनियाभर में मशहूर है. अगर आप अपने फार्म हाउस में पिस्ता उगाना चाहते हैं, तो सबसे पहले सही जमीन और मौसम का ध्यान रखना जरूरी है. पिस्ता के पेड़ के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है, जिसमें पानी का निकास अच्छे से हो सके, क्योंकि जमीन में पानी रुकने से पौधों में बीमारी लगने का डर रहता है. पिस्ता के पेड़ को गर्म</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/correct-way-to-plant-and-care-for-pistachio-plants/article-156015"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-08/aertyhgy.jpg" alt=""></a><br /><p>पिस्ता के पौधे: पिस्ता एक ऐसा मेवा है जो अपने स्वाद और सेहत के गुणों की वजह से हमेशा से लोगों की पसंद रहा है, और खासकर अफगानिस्तान का पिस्ता अपनी क्वालिटी के लिए दुनियाभर में मशहूर है. अगर आप अपने फार्म हाउस में पिस्ता उगाना चाहते हैं, तो सबसे पहले सही जमीन और मौसम का ध्यान रखना जरूरी है. पिस्ता के पेड़ के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है, जिसमें पानी का निकास अच्छे से हो सके, क्योंकि जमीन में पानी रुकने से पौधों में बीमारी लगने का डर रहता है. पिस्ता के पेड़ को गर्म और सूखी जलवायु पसंद आती है, इसलिए यह उन इलाकों के लिए एकदम सही फसल है जहां बारिश कम होती है और गर्मी ज्यादा पड़ती है.  </p>
<p>पौधे लगाने और उनकी देखभाल का सही तरीका<br />पिस्ता के पौधे लगाने से पहले खेत में बड़े और गहरे गड्ढे तैयार करने चाहिए, ताकि पौधे की जड़ें अच्छे से फैल सकें और मिट्टी से पानी व पोषण आसानी से सोख सकें. पौधे को नर्सरी के गमले से जितना गहरा लगा हो, उससे करीब एक इंच नीचे लगाना चाहिए. अगर आपके फार्म हाउस में सिंचाई की सुविधा है, तो पौधों के बीच 6 मीटर गुणा 6 मीटर की दूरी रखनी चाहिए. एक खास बात यह है कि पिस्ता में फल आने के लिए नर और मादा दोनों तरह के पेड़ लगाने जरूरी होते हैं, साथ ही पानी देने के लिए ड्रिप सिंचाई का तरीका सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इससे पानी की बचत होती है और जड़ों तक सही मात्रा में पहुंचती है. </p>
<p>समय के साथ मिलने वाला मुनाफा और जरूरी सावधानियां<br />पिस्ता के पेड़ को बड़ा होकर फल देने में कुछ साल का समय लगता है, इसलिए इसे उगाने वाले किसानों और फार्म हाउस मालिकों को धैर्य रखना जरूरी है. पेड़ों की नियमित छंटाई करते रहना चाहिए.  बाजार में पिस्ता की कीमत काफी ज्यादा होती है, इसलिए एक बार पेड़ तैयार हो जाने के बाद यह खेती अच्छी कमाई का जरिया बनती है. हालांकि शुरुआत में जमीन, सिंचाई व्यवस्था और सही किस्म के पौधों का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

                <link>https://www.tarunmitra.in/agriculture/correct-way-to-plant-and-care-for-pistachio-plants/article-156015</link>
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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 06:20:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑफ-सीजन में फूलगोभी  की खेती मिलेगी मनचाही कीमत </title>
                                    <description><![CDATA[<p>फूलगोभी की खेती: सब्जी की खेती से किसान कम समय में काफी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. अलग-अलग मौसमों में अलग-अलग सब्जियों की डिमांड रहती है. सर्दियों में फूलगोभी खूब उगाई जाती है.  लेकिन आजकल तकनीकों का इस्तेमाल करके किसान बरसात में भी इसकी अगेती खेती आसानी से कर रहे हैं. मानसून के मौसम में जब बाजार में हरी सब्जियों की आवक कम हो जाती है. उस समय ताजी फूलगोभी के दाम आसमान छू रहे होते हैं. </p>
<p>ऐसे में अगर सही तरीकों से बरसात में फूलगोभी उगाई जाए. तो किसान कम समय में तगड़ा मुनाफा कमा सकते हैं. बारिश के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/cauliflower-cultivation-will-get-desired-price-in-off-season/article-155688"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-08/kjmnhg.jpg" alt=""></a><br /><p>फूलगोभी की खेती: सब्जी की खेती से किसान कम समय में काफी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. अलग-अलग मौसमों में अलग-अलग सब्जियों की डिमांड रहती है. सर्दियों में फूलगोभी खूब उगाई जाती है.  लेकिन आजकल तकनीकों का इस्तेमाल करके किसान बरसात में भी इसकी अगेती खेती आसानी से कर रहे हैं. मानसून के मौसम में जब बाजार में हरी सब्जियों की आवक कम हो जाती है. उस समय ताजी फूलगोभी के दाम आसमान छू रहे होते हैं. </p>
<p>ऐसे में अगर सही तरीकों से बरसात में फूलगोभी उगाई जाए. तो किसान कम समय में तगड़ा मुनाफा कमा सकते हैं. बारिश के सीजन में सबसे बड़ी चुनौती पौधों को गलने से बचाने और ज्यादा पानी से सुरक्षित रखने की होती है. इसके लिए पॉलीहाउस और शेडनेट का इस्तेमाल एक बढ़िया आइडिया साबित होता है. चलिए आपको बताते हैं बरसात में फूलगोभी उगाने का सही तरीका क्या है और कैसे इससे बंपर कमाई की जा सकती है.</p>
<p>पॉलीहाउस में करें नर्सरी की शुरुआत<br />बरसात में सीधे खेत में बीज बोने पर पानी के तेज बहाव और जलभराव से बीजों के बहने या सड़ने का खतरा बना रहता है. इसलिए जून और जुलाई के महीनों में सबसे पहले पॉलीहाउस या शेडनेट के अंदर सुरक्षित नर्सरी तैयार करनी चाहिए. नर्सरी बनाते समय उठी हुई क्यारियों का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है जिससे एक्स्ट्रा पानी आसानी से निकल जाए. </p>
<p>इसके अलावा बीजों की बुवाई से पहले सीड ट्रीटमेंट करना बेहद जरूरी है. कॉपटान या थीराम जैसी दवाइयों से 2 से 3 ग्राम प्रति किलो बीज के हिसाब से ट्रीटमेंट करने से पौधे फंगस और बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं और नर्सरी में पौधों की ग्रोथ बहुत तेजी से होती है. </p>
<p><br />बरसात में उगाएं फूलगोभी, होगी बंपर कमाई</p>
<p>सही किस्मों का चुनाव करें<br />बरसाती मौसम में हर तरह की फूलगोभी की वैरायटी काम नहीं करती. मानसून में अगेती यानी अर्ली वैरायटी वाले बीजों का चयन ही सबसे समझदारी भरा फैसला होता है. ऐसी किस्में जो अधिक तापमान और हल्की से मध्यम नमी को सहन कर सकें वही बारिश में बेहतर रिजल्ट देती हैं. अगर आप गलत किस्म का चुनाव कर लेंगे.</p>
<p>तो पौधे तो बड़े हो जाएंगे लेकिन उनमें सही फूल नहीं बनेंगे या फूल जल्दी खराब हो जाएंगे. इसीलिए बाजार से बीज खरीदते समय यह जरूर कन्फर्म कर लें कि वह बरसात या अगेती खेती के लिए ही रिकमेंड की गई हो. सही बीज लगाने से फसल जल्दी तैयार होती है और मार्केट में रेट भी सबसे ज्यादा मिलता है.</p>
<p><br />बरसात में उगाएं फूलगोभी, होगी बंपर कमाई</p>
<p>खेत की तैयारी <br />नर्सरी में जब पौधे लगभग 20 से 25 दिन में रोपाई के लायक हो जाएं, तब उन्हें मुख्य खेत में शिफ्ट किया जाता है. खेत तैयार करते समय गोबर की खाद और सड़ी हुई वर्मीकंपोस्ट अच्छी मात्रा में मिला लें. सबसे जरूरी बात यह है कि रोपाई हमेशा मेड़ बनाकर ही करें. </p>
<p>ड्रेनेज का रखें खास ध्यान<br />समतल जमीन पर पौध लगाने से बारिश का पानी तने के पास रुक सकता है जिससे पौधे गलने लगते हैं. बेड पर पौधे लगाने से पानी सीधे जड़ों के पास जमा नहीं होता और ड्रेनेज सिस्टम बेहतर रहता है. दो पौधों और दो लाइनों के बीच सही दूरी बनाकर रखें जिससे पौधों को पर्याप्त हवा और रोशनी मिल सके, जिससे उनका साइज बढ़िया बने.  </p>
<p><br />ऑफ-सीजन में मिलेगी मनचाही कीमत <br />बरसात के सीजन में उगाई गई फूलगोभी जब बाजार में पहुंचती है. तो उस समय मंडी में इसकी सप्लाई काफी कम होती है. जहां ठंड के दिनों में गोभी 10 से 15 रुपये किलो बिकती है, वहीं मानसून के सीजन में इसका रेट 50 से 80 रुपये किलो तक आराम से मिल जाता है. </p>
<p>अगर आपने पॉलीहाउस तकनीक और सही ड्रेनेज के साथ फसल को बचा लिया तो प्रति एकड़ बहुत ही कम लागत में लाखों का नेट प्रॉफिट कमाया जा सकता है. यही वजह है कि किसान अब पारंपरिक सीजन का इंतजार करने के बजाय ऑफ-सीजन फार्मिंग पर फोकस कर रहे हैं और कम समय में तगड़ी कमाई कर रहे हैं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

                <link>https://www.tarunmitra.in/agriculture/cauliflower-cultivation-will-get-desired-price-in-off-season/article-155688</link>
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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 06:57:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खेती में तकनीक की नई क्रांति: ड्रोन सेवा शुरू करने वाला देश का पहला जिला बना धमतरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>रायपुर। </strong>कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले ने देश में नई मिसाल कायम की है।</p>
<p style="text-align:justify;">धमतरी देश का पहला ऐसा जिला बन गया है, जहां 10 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को संगठित रूप से ड्रोन सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। इस अभिनव पहल के लिए जिले को राज्यस्तरीय सम्मान से नवाजा गया है।<br /><br />रायपुर में आयोजित सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के 17वें स्थापना दिवस समारोह में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जिला सहकारिता विभाग के उपायुक्त प्रदीप ठाकुर को सम्मान प्रदान किया।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/chhattisgarh/dhamtari-becomes-the-first-district-in-the-country-to-start/article-155679"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/5db45e054759fb9bf5fd2fb7910b3dc0_64202134.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रायपुर। </strong>कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले ने देश में नई मिसाल कायम की है।</p>
<p style="text-align:justify;">धमतरी देश का पहला ऐसा जिला बन गया है, जहां 10 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को संगठित रूप से ड्रोन सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। इस अभिनव पहल के लिए जिले को राज्यस्तरीय सम्मान से नवाजा गया है।<br /><br />रायपुर में आयोजित सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के 17वें स्थापना दिवस समारोह में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जिला सहकारिता विभाग के उपायुक्त प्रदीप ठाकुर को सम्मान प्रदान किया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने की यह पहल कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने वाली साबित होगी और अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।<br /><br />धमतरी कलेक्ट्रेट परिसर में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के कर्मचारियों को ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान कृषि विशेषज्ञों ने ड्रोन से फसल प्रबंधन, नैनो उर्वरक और कीटनाशकों के वैज्ञानिक छिड़काव, कम समय में अधिक क्षेत्र में कार्य, लागत में कमी और पर्यावरण संरक्षण जैसे पहलुओं की जानकारी दी।<br /><br />प्रशिक्षण के बाद लोहरसी, दोनर, खरेंगा, अछोटा, बोड़रा, भोथीडीह, करेली, कुण्डेल, गाड़ाडीह और जुगदेही समितियों ने किसानों को किराये पर ड्रोन सेवा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। इससे किसान कम लागत में आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से खेती कर सकेंगे।<br /><br />इस सेवा का शुभारंभ 23 जुलाई 2026 को प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित लोहरसी से सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने किसानों से नई तकनीकों को अपनाने की अपील करते हुए कहा था कि ड्रोन आधारित कृषि से उत्पादन लागत कम होगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।<br /><br />धमतरी की इस पहल को इससे पहले राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल चुकी है। कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम में जिले को ड्रोन सेवा के सफल संचालन के लिए राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ था।<br /><br />धमतरी का यह मॉडल सहकारिता, तकनीक और नवाचार के बेहतर समन्वय का उदाहरण बनकर उभरा है। यह पहल डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और सहकार से समृद्धि के लक्ष्य को जमीनी स्तर पर मजबूत करते हुए किसानों को प्रिसिजन फार्मिंग की दिशा में आगे बढ़ा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 23:51:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mahi Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> ब्रोकली और रंग-बिरंगी शिमला मिर्च की करें खेती</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ब्रोकली की खेती: भारत के किसान सालों से पारंपरिक गेहूं की खेती करते आ रहे हैं, लेकिन आज के इस मुश्किल दौर में जहां खेती में लागत काफी बढ़ गई हैं, ऐसे में इन फसलों के भरोसे रहकर बड़ी कमाई करना काफी मुश्किल भरा काम हैं. गातार बढ़ती लागत और बिगड़ते मौसम के कारण किसानों को सही मुनाफा नहीं मिल पाता. ऐसे में देश के किसानों के लिए अपनी कमाई को दोगुना करने का एक अच्छा मौका आया है. किसान अब पारंपरिक फसलों को छोड़कर विदेशी सब्जियों, जैसे कि ब्रोकली और रंग-बिरंगी शिमला मिर्च की खेती कर सकते हैं. इन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/%C2%A0%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9A-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%96%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A5%80/article-155507"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/awesd.jpg" alt=""></a><br /><p>ब्रोकली की खेती: भारत के किसान सालों से पारंपरिक गेहूं की खेती करते आ रहे हैं, लेकिन आज के इस मुश्किल दौर में जहां खेती में लागत काफी बढ़ गई हैं, ऐसे में इन फसलों के भरोसे रहकर बड़ी कमाई करना काफी मुश्किल भरा काम हैं. गातार बढ़ती लागत और बिगड़ते मौसम के कारण किसानों को सही मुनाफा नहीं मिल पाता. ऐसे में देश के किसानों के लिए अपनी कमाई को दोगुना करने का एक अच्छा मौका आया है. किसान अब पारंपरिक फसलों को छोड़कर विदेशी सब्जियों, जैसे कि ब्रोकली और रंग-बिरंगी शिमला मिर्च की खेती कर सकते हैं. इन फसलों की मांग बाजार में बहुत ज्यादा है इसलिए इनसें मुनाफा भी तगड़ा मिलता है. </p>
<p>ब्रोकली से कैसे होगी दोगुनी कमाई<br />ब्रोकली देखने में बिल्कुल फूलगोभी जैसी होती है, लेकिन इसका रंग गहरा हरा होता है. आज के समय में लोग अपनी सेहत को लेकर बहुत जागरूक हो गए हैं. अक्सर जिम जाने वाले लोग और डॉक्टर भी ब्रोकली खाने की सलाह देते हैं यही कारण है कि बाजारों, होटलों और बड़े सुपरमार्केट्स में इसकी मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है.</p>
<p>ब्रोकली की खेती मुख्य रूप से सर्दियों के मौसम में की जाती है. अक्टूबर और नवंबर का महीना इसके पौधे लगाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. इसकी सीधी बुआई करने के बजाय पहले नर्सरी में इसके पौधे तैयार करके खेत में लगाना ज्यादा ठीक रहता है. ब्रोकली की फसल मात्र 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है, और सामान्य फूलगोभी के मुकाबले बाजार में ब्रोकली की कीमत दो से तीन गुना ज्यादा मिलती है. अगर आप एक एकड़ में भी ब्रोकली लगाते हैं, तो बहुत कम लागत में लाखों रुपये का मुनाफा कमा सकते हैं.</p>
<p><br />रंग-बिरंगी शिमला मिर्च से बंपर मुनाफा<br />आप ने बाजारों में हरी शिमला मिर्च तो खूब देखी है, लेकिन अब बाजारों में लाल और पीली शिमला मिर्च की मांग बहुत ज्यादा बढ़ गई है. सबसे अच्छी बात यह है कि यह आम हरी शिमला मिर्च के मुकाबले बहुत महंगे दामों पर बिकती है. लाल और पीली शिमला मिर्च की खेती करने के लिए पॉलीहाउस या शेडनेट का तरीका सबसे बेहतरीन माना जाता है. पॉलीहाउस के अंदर मौसम को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे फसल खराब नहीं होती. साथ ही इसकी खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी और अच्छे जल निकास की जरूरत होती है. रंग-बिरंगी शिमला मिर्च बाजार में ₹100 से लेकर ₹200 प्रति किलोग्राम तक के भाव में आसानी से बिक जाती है. एक बार पौधा लगाने के बाद इससे कई महीनों तक लगातार फल मिलते रहते हैं. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 06:35:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुड़हल के पौधे में फूल कैसे लाएं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गुड़हल के पौधे :अगर आपको गार्डनिंग का शौक है और आपका घर छोटे बड़े पौधों से गुलज़ार है तो यह खबर आपके लिए है। गुड़हल के लाल खिले हुए फूल दिखने में बेहद सुंदर लगते हैं। इन फूलों की खूबसूरती को देखकर ज़्यादातर लोग यह पौधा पाने घर में लगाते हैं। लेकिन कई बार केयर के बाद भी इसमें फूल आने बंद हो जाते हैं या पौधे सूखने लगते हैं। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो निराश होने की ज़रूरत नहीं है।  यू ट्यूब पर loveforgardening85 पेज से वीडियो शेयर करते हुए गार्डनिंग एक्सपर्ट ने बताया है कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/how-to-bring-flowers-to-hibiscus-plant/article-155324"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/gudahal.jpg" alt=""></a><br /><p>गुड़हल के पौधे :अगर आपको गार्डनिंग का शौक है और आपका घर छोटे बड़े पौधों से गुलज़ार है तो यह खबर आपके लिए है। गुड़हल के लाल खिले हुए फूल दिखने में बेहद सुंदर लगते हैं। इन फूलों की खूबसूरती को देखकर ज़्यादातर लोग यह पौधा पाने घर में लगाते हैं। लेकिन कई बार केयर के बाद भी इसमें फूल आने बंद हो जाते हैं या पौधे सूखने लगते हैं। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो निराश होने की ज़रूरत नहीं है।  यू ट्यूब पर loveforgardening85 पेज से वीडियो शेयर करते हुए गार्डनिंग एक्सपर्ट ने बताया है कि कैसे सिर्फ इन कुछ टिप्स को फॉलो कर आप अपने गुड़हल के पौधे को फिर से गुलज़ार कर सकते हैं। चलिए जानते हैं वे टिप्स कौन से हैं?</p>
<p>गुड़हल का पौधा रहेगा फूलों से लदा, बस रोज करें ये काम<br />प्रूनिंग:  अगर आपका पौधा बढ़ नहीं रहा है तो आप उसकी सॉफ्ट प्रूनिंग करें। आप पौधे की पूरी पत्तियां,  सूखी पत्तियों और बेढंगी शाखाओं के सिरों को हल्का-हल्का काटें। इससे पौधे को सुंदर आकार मिलता है और नई शाखाएं तेजी से निकलती हैं। प्रूनिंग से ज़्याद फूल आएंगे और ज़्यादा कलियां आएंगी। लेकिन अगर पौधे में फूल आ रहे हैं तब प्रूनिंग मत करिए।</p>
<p>खाद करें तैयार: खाद बनाने के लिए आप सीवीड, जाइम आधा चम्मच, आधा चम्मच पोटाश, आधा चम्मच एप्सम साल्ट को आपस में मिलाएं। अब इस फर्टिलाइज़र को आप गुड़हल के पौधे में डालें। ये फर्टिलाइज़र पौधे को पोषक तत्व देते हैं।हालांकि, खाद डालने से पहले मिट्टी ज़रूर साफ करें। इस फर्टिलाइज़र को महीने में एक ही बार देना है।एक पौधे को आप तीन से चार चम्मच खाद डालें। मिट्टी हल्की गीली होनी चाहिए। साथ ही यह खाद हमेशा शाम में ही दें। </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

                <link>https://www.tarunmitra.in/agriculture/how-to-bring-flowers-to-hibiscus-plant/article-155324</link>
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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 07:13:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मखाने की खेती पर कितनी सब्सिडी?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मखाने की खेती : अगर आप पारंपरिक खेती के अलावा कुछ और उगाना चाहते हैं तो मखाना आज के दौर में बढ़िया ऑप्शन है. सेहत को लेकर बढ़ती जागरूकता के चलते सुपरफूड्स की मांग भी बहुत तेजी से बढ़ी है. मखाने की मांग न सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में दिन-प्रतिदिन आसमान छू रही है. इसी बढ़ती मांग को देखते हुए उद्यान विभाग और सरकार किसानों को मखाने की पारंपरिक के साथ-साथ वैज्ञानिक खेती की तरफ प्रोत्साहित कर रही है.</p>
<p>अगर आप भी मखाने की खेती शुरू करने की सोच रहे हैं तो यह सही समय है. सरकार बागवानी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/agriculture/how-much-subsidy-on-makhana-cultivation/article-155158"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/asdcx.jpg" alt=""></a><br /><p>मखाने की खेती : अगर आप पारंपरिक खेती के अलावा कुछ और उगाना चाहते हैं तो मखाना आज के दौर में बढ़िया ऑप्शन है. सेहत को लेकर बढ़ती जागरूकता के चलते सुपरफूड्स की मांग भी बहुत तेजी से बढ़ी है. मखाने की मांग न सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में दिन-प्रतिदिन आसमान छू रही है. इसी बढ़ती मांग को देखते हुए उद्यान विभाग और सरकार किसानों को मखाने की पारंपरिक के साथ-साथ वैज्ञानिक खेती की तरफ प्रोत्साहित कर रही है.</p>
<p>अगर आप भी मखाने की खेती शुरू करने की सोच रहे हैं तो यह सही समय है. सरकार बागवानी और उद्यान विकास योजनाओं के तहत मखाने की खेती, उन्नत बीजों, ट्रेनिंग और इसकी प्रोसेसिंग पर बंपर सब्सिडी दे रही है. इस योजना का मकसद किसानों की लागत को कम करना और उनकी इनकम को बढ़ाना है. चलिए आपको बताते हैं कि सरकार इस पर कितनी आर्थिक मदद दे रही है और आवेदन करने का पूरा प्रोसेस क्या है.</p>
<p>मखाने की खेती पर कितनी सब्सिडी?<br />मखाने की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रति हेक्टेयर स्वीकृत लागत पर भारी छूट प्रदान करती है. योजना के तहत मखाने के उन्नत बीजों की रोपाई और खेत तैयार करने के लिए कुल लागत पर 50% से लेकर 75% तक की सब्सिडी दी जाती है.</p>
<p>इसके अलावा मखाने की प्रोसेसिंग लावा बनाने, फोड़ने और ग्रेडिंग करने वाली मशीनों और पारंपरिक मशीनरी किट की खरीदारी पर भी अच्छी सब्सिडी मिलती है. सब्सिडी की यह राशि सीधे किसान के बैंक खाते में डीबीटी के जरिए भेजी जाती है. जिससे छोटे किसानों के लिए भी यह खेती करना बहुत आसान हो जाता है.</p>
<p>यूपी के मऊ जिले में मखाना खेती पर सब्सिडी<br />उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में उद्यान विभाग की ओर से मखाने की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल की जा रही है. योजना के तहत मऊ के किसानों को प्रति हेक्टेयर 80000 रुपये पर 50% तक की सब्सिडी यानी 40000 रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है.</p>
<p>इसके साथ ही जिला उद्यान विभाग किसानों को मखाने की वैज्ञानिक खेती और प्रोसेसिंग के लिए फ्री ट्रेनिंग भी उपलब्ध करा रहा है. मऊ के इच्छुक किसान जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय में जाकर सीधे संपर्क कर सकते हैं और आवेदन फॉर्म भरकर ट्रेनिंग और सब्सिडी दोनों का लाभ उठा सकते हैं.</p>
<p><br />मखाना उगाने पर सरकार दे रही इतनी सब्सिडी, जान लें प्रोसेस</p>
<p>मखाने की खेती से कमाई <br />मखाने की खेती पानी वाले खेतों या तालाबों में आसानी से की जा सकती है. एक बार फसल तैयार हो जाने पर बाजार में इसका बहुत बढ़िया भाव मिलता है. एक एकड़ खेत से किसान आसानी से 10 से 12 क्विंटल तक मखाना निकाल सकते हैं. बाजार में मखाने का थोक और खुदरा रेट हमेशा अच्छा बना रहता है.</p>
<p>जिससे प्रति एकड़ लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा होता है. सरकार की सब्सिडी मिलने से शुरुआती पूंजी का जोखिम बहुत कम हो जाता है. साथ ही, फसल कटने के बाद इसके बचे हुए अवशेषों का उपयोग जैविक खाद बनाने में भी किया जा सकता है.</p>
<p>सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए योग्यताएं?<br />इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक के पास खेती योग्य जमीन या लीज पर लिया गया तालाब या खेत होना जरूरी है. व्यक्तिगत किसानों के साथ-साथ किसान उत्पादक संगठन, स्वयं सहायता समूह और किसानों की समितियां भी इसके लिए पात्र हैं.</p>
<p>जरूरी कागजात की बात करें तो किसान के पास आधार कार्ड, जमीन या तालाब की खसरा-खतौनी के दस्तावेज, बैंक पासबुक की फोटोकॉपी, पासपोर्ट साइज फोटो और एक्टिव मोबाइल नंबर होना जरूरी है. कागजात सही होने पर आवेदन खारिज होने की गुंजाइश नहीं रहती.</p>
<p><br />मखाना उगाने पर सरकार दे रही इतनी सब्सिडी, जान लें प्रोसेस</p>
<p>आवेदन करने के ऑनलाइन प्रोसेस<br />मखाना सब्सिडी का लाभ लेने के लिए किसान को अपने राज्य के उद्यान विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होता है. वेबसाइट पर योजना के ऑप्शन सिलेक्ट करें और अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करें. वहां मांगे गए सभी जरूरी दस्तावेज अपलोड करें.</p>
<p>ऑफलाइन भी कर सकते हैं आवेदन<br />अगर आप ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पा रहे हैं तो मऊ जिले की तर्ज पर अपने जिले के उद्यान कार्यालय में जाकर अधिकारी से सीधे संपर्क करके फॉर्म जमा कर सकते हैं. विभाग की ओर से आपकी जमीन और कागजों का वेरिफिकेशन होने के बाद सब्सिडी जारी कर दी जाती है.</p>
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                                                            <category>खेती-बाड़ी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 07:18:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
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