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                <title>Gargi Vishwakarma - Tarun Mitra</title>
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                <description>Gargi Vishwakarma RSS Feed</description>
                
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                <title>महिला कर्मचारियों को हटाए जाने के विरोध में बंद हुआ Eiffel Tower, BAPS के दौरे पर फ्रांस में विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस में मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के लिए पहुंचे BAPS के प्रतिनिधिमंडल ने कथित तौर पर ऐसा दौरा आयोजित करने का अनुरोध किया था, जिससे “महिलाओं के साथ बातचीत” सीमित रहे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/international/controversy-in-france-over-the-visit-of-eiffel-tower-baps/article-161804"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-09/untitled-design-(1).png" alt=""></a><br /><p><strong>पेरिस/नई दिल्ली: </strong>फ्रांस की राजधानी Paris में Eiffel Tower को सोमवार, 7 सितंबर को कर्मचारियों की हड़ताल के कारण बंद करना पड़ा। फ्रांसीसी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, कर्मचारियों ने सप्ताहांत में एक हिंदू प्रतिनिधिमंडल के निजी दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को हटाए जाने के विरोध में हड़ताल की।</p>
<p>France24 के अनुसार, Bochasanwasi Akshar Purushottam Swaminarayan Sanstha (BAPS) के प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा फ्रांस में उसके पहले बड़े मंदिर के 6 सितंबर को होने वाले प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के बीच हुआ था।</p>
<h5><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>मोदी और BAPS</strong></span></h5>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर विशेष रूप से रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो संदेश में BAPS को बधाई दी थी। उन्होंने इसे यूरोप में भारत की सांस्कृतिक मौजूदगी के विस्तार और भारत-फ्रांस संबंधों में एक नए अध्याय के रूप में बताया था। मोदी ने कहा था, “BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देशों में मंदिरों का उद्घाटन होता है, तो भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ आगे बढ़ते हैं।” </p>
<p>BAPS हिंदू धर्म के स्वामीनारायण संप्रदाय का एक संगठन है, जिसकी स्थापना 19वीं सदी में गुजरात में हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का BAPS और उसके दिवंगत आध्यात्मिक प्रमुख स्वामी महाराज के साथ लंबे समय से संबंध रहा है, जो उनके चुनावी राजनीति में आने से पहले का है।</p>
<p>दिसंबर 2022 में अहमदाबाद में BAPS के एक कार्यक्रम में मोदी ने बताया था कि उनकी प्रमुख स्वामी महाराज से पहली मुलाकात करीब 1981 में हुई थी। उन्होंने यह भी बताया था कि 1990 के दशक की शुरुआत में BJP की ‘एकता यात्रा’ के दौरान प्रमुख स्वामी महाराज ने उन्हें फोन कर उनका हालचाल पूछा था। मोदी ने यह भी बताया था कि 2002 में जब वह राजकोट से चुनाव लड़ रहे थे, तब BAPS के दो साधुओं ने उन्हें एक कलम दी थी, जिसे प्रमुख स्वामी महाराज ने उनके नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए इस्तेमाल करने को कहा था।</p>
<p>2024 में अबू धाबी में BAPS हिंदू मंदिर के उद्घाटन के दौरान मोदी ने प्रमुख स्वामी महाराज के साथ अपने रिश्ते को “पिता और पुत्र के समान” बताया था। उन्होंने कहा था कि गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में काम करते हुए भी उन्हें प्रमुख स्वामी महाराज का मार्गदर्शन मिलता रहा। मोदी BAPS की मंदिर निर्माण परियोजनाओं, खासकर भारत के बाहर बनने वाले मंदिरों का भी कई बार प्रचार कर चुके हैं।</p>
<p>2018 में उन्होंने अबू धाबी में BAPS हिंदू मंदिर परियोजना की शुरुआत की थी और 2024 में इसके तैयार मंदिर का उद्घाटन किया। उद्घाटन के दौरान उन्होंने कहा था कि UAE का यह मंदिर प्रमुख स्वामी महाराज के सपने की पूर्ति है और दुनिया भर में मंदिर बनाने के लिए BAPS की सराहना की थी। दिसंबर 2024 में उन्होंने कहा था कि BAPS का काम “दुनिया में भारत की क्षमता और प्रभाव” को मजबूत कर रहा है और उसके मंदिरों को “भारत का सांस्कृतिक प्रतिबिंब” बताया था। अब उन्होंने Paris के मंदिर को भी भारत-फ्रांस सांस्कृतिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया है।</p>
<p>डीडी न्यूज़ के अनुसार, सीन-एट-मार्ने के बुस्सी-सेंट-जॉर्जेस में स्थित BAPS स्वामीनारायण हिंदू मंदिर फ्रांस का पहला पारंपरिक तरीके से निर्मित पत्थर का हिंदू मंदिर है और इसे मुख्य भूमि यूरोप में अपनी तरह का सबसे बड़ा मंदिर माना जाता है।</p>
<h5><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>‘महिलाओं के साथ बातचीत सीमित रखने’ का अनुरोध</strong></span></h5>
<p>इस बीच, Eiffel Tower का संचालन करने वाली कंपनी Société d'Exploitation de la Tour Eiffel (SETE) ने फ्रांस के स्थानीय समाचार माध्यमों को बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने दौरे को इस तरह आयोजित करने का अनुरोध किया था, जिससे “महिलाओं के साथ बातचीत” सीमित रहे। SETE के अध्यक्ष एरियल वील ने समाचार एजेंसी AFP से कहा, “हम यह पता लगाएंगे कि क्या हुआ और इसके बाद आवश्यक निष्कर्ष निकालेंगे।”</p>
<p>Euronews के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल में करीब 100 लोग शामिल थे। उसने यूनियन प्रतिनिधि डायने डेवोइन के हवाले से बताया कि BAPS के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को प्रतिनिधिमंडल के गुजरने के समय उनके कार्यस्थलों से दूर कर दिया गया था। Eiffel Tower के कर्मचारियों की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि वे इस स्थिति में डाले जाने से स्तब्ध थे। बयान में कहा गया:</p>
<p>“Eiffel Tower की महिला कर्मचारियों और ठेकेदारों की महिला कर्मचारियों को इस प्रतिनिधिमंडल के स्वागत के लिए खुद को अदृश्य करने के निर्देश दिए गए।”</p>
<p>बयान में आगे कहा गया:  “कुछ कर्मचारियों को अपने पद छोड़कर दूसरे क्षेत्रों में जाने के लिए कहा गया। कुछ पदों पर उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को लगाया गया। सभी महिला कर्मचारियों को निर्देश दिया गया कि जब तक प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहे, वे कुछ क्षेत्रों से होकर न गुजरें या उन्हें पार न करें।”</p>
<p>BAPS ने अपने फ्रांसीसी X अकाउंट @BAPSParis के माध्यम से जारी बयान में कहा कि वह उठाई गई चिंताओं को “गंभीरता से” लेता है और “इस स्थिति से किसी को हुई ठेस या असुविधा के लिए ईमानदारी से माफी मांगना चाहता है।” संगठन ने कहा, “हमारी जानकारी के अनुसार, किसी भी समय किसी को Eiffel Tower में प्रवेश करने से नहीं रोका गया।”</p>
<p>BAPS ने यह भी कहा कि प्रतिनिधिमंडल के आकार को देखते हुए दौरे को Eiffel Tower की टीम के साथ समन्वय कर सामान्य खुलने के समय की शुरुआत में आयोजित किया गया था, ताकि अन्य आगंतुकों को होने वाली किसी भी परेशानी को यथासंभव कम किया जा सके। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि संगठन इस तथ्य को महिला कर्मचारियों को हटाए जाने से जोड़ना चाहता था या नहीं।</p>
<h5><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>‘अस्वीकार्य’: फ्रांस के अलग-अलग राजनीतिक खेमों से विरोध</strong></span></h5>
<p>Paris के Mayor Emmanuel Grégoire उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन किया। उन्होंने इस कदम को “अस्वीकार्य” बताया और कहा कि यह उन “मूल्यों के विपरीत है, जिनका Eiffel Tower प्रतिनिधित्व करता है।” </p>
<p>France की Equality Minister Aurore Bergé ने भी उनका समर्थन किया। उन्होंने X पर लिखा:<br />“फ्रांस में हम महिलाओं से खुद को मिटा देने के लिए नहीं कहते। कोई भी विचारधारा या धर्म गणराज्य के कानूनों से ऊपर नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “फ्रांस में महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता न तो बातचीत का विषय है और न ही परिस्थितियों के अनुसार बदलने वाली चीज। यह एक सिद्धांत है और इसमें कोई अपवाद नहीं है।”</p>
<p>दक्षिणपंथी नेता Marine Le Pen और पूर्व प्रधानमंत्री Gabriel Attal ने भी X पर इसी तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। राष्ट्रपति पद की दौड़ में प्रमुख दावेदारों में शामिल Le Pen ने लिखा:<br />“फ्रांस में हम कभी स्वीकार नहीं करेंगे कि महिलाओं की मौजूदगी को ‘सीमित’ किया जाए। Eiffel Tower की इस यात्रा के दौरान क्या हुआ, इस पर पूरी रोशनी डाली जानी चाहिए।”</p>
<p>Île-de-France की Regional Council की अध्यक्ष Valérie Pécresse ने कहा कि इस घटना के बारे में जानकर वह “स्तब्ध” हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने फ्रांस में BAPS के प्रतिनिधियों को व्यक्तिगत रूप से बताया है कि ऐसी प्रथाएं गणराज्य के कानूनों के खिलाफ हैं।</p>
<p>पूर्व प्रधानमंत्री और मौजूदा Paris सांसद Michel Barnier ने कहा कि “महिलाओं को इस जगह से गायब करने के उद्देश्य से कोई आदेश जारी किया गया हो, यह पूरी तरह अस्वीकार्य है।” उन्होंने कहा, “फ्रांस में कहीं और की प्रथाएं महिलाओं को यह तय नहीं कर सकतीं कि उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर कैसे कपड़े पहनने हैं या कैसे रहना है। महिलाओं को छिपाया नहीं जाता। उन्हें मिटाया नहीं जाता। उनका सम्मान किया जाता है और उनकी स्वतंत्रता की रक्षा की जाती है।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 11:36:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gargi Vishwakarma]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नए सिम कार्ड नियम आज से लागू, एक व्यक्ति नहीं ले पाएगा 9 से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग की ओर से जारी नए सिम कार्ड नियम सोमवार से लागू हो गए हैं। नए नियमों के तहत कोई यूजर अपने नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रख सकता है। वहीं, जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तर-पूर्व के लिए यह सीमा 6 मोबाइल कनेक्शन तय की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम कंपनियों को ऐसे ग्राहकों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं, जिनके पास पहले से निर्धारित सीमा के करीब मोबाइल कनेक्शन हैं। ऐसे ग्राहकों को नए नियमों के तहत नया कनेक्शन नहीं मिल सकेगा।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>CAF में देनी होगी मौजूदा कनेक्शनों की जानकारी</strong></h6>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/national/new-sim-card-rules-implemented-from-today-one-person-will/article-159546"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2025-11/sim.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग की ओर से जारी नए सिम कार्ड नियम सोमवार से लागू हो गए हैं। नए नियमों के तहत कोई यूजर अपने नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रख सकता है। वहीं, जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तर-पूर्व के लिए यह सीमा 6 मोबाइल कनेक्शन तय की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम कंपनियों को ऐसे ग्राहकों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं, जिनके पास पहले से निर्धारित सीमा के करीब मोबाइल कनेक्शन हैं। ऐसे ग्राहकों को नए नियमों के तहत नया कनेक्शन नहीं मिल सकेगा।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>CAF में देनी होगी मौजूदा कनेक्शनों की जानकारी</strong></h6>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नए निर्देशों के तहत ग्राहकों को कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म (CAF) में यह जानकारी देनी होगी कि अलग-अलग टेलीकॉम ऑपरेटरों और लाइसेंस प्राप्त सर्विस एरिया में उनके नाम पर पहले से कितने मोबाइल कनेक्शन हैं।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>DIP से होगी अधिक कनेक्शन वाले ग्राहकों की पहचान</strong></h6>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूरसंचार विभाग के सर्कुलर के मुताबिक, तय सीमा से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन रखने वाले ग्राहकों की जानकारी विभाग के डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) पर उपलब्ध है। इस सिस्टम को टेलीकॉम ऑपरेटरों की मदद के लिए विकसित किया गया है, ताकि वे ऐसे ग्राहकों की पहचान कर सकें जिनके नाम पर मोबाइल कनेक्शन की निर्धारित सीमा पूरी हो चुकी है।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>फोटो के जरिए भी होगी पहचान</strong></h6>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नए सिस्टम में ग्राहकों की पहचान के लिए फोटोग्राफ का इस्तेमाल किया जाएगा। दूरसंचार विभाग DIP पर उन सब्सक्राइबर्स की फोटो उपलब्ध कराएगा, जो अधिकतम मोबाइल कनेक्शन की सीमा तक पहुंच चुके हैं। टेलीकॉम कंपनियां DIP के जरिए इन सब्सक्राइबर्स की फोटो डाउनलोड कर सकेंगी।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>सीमा से ज्यादा कनेक्शन हुआ तो होगा सस्पेंड</strong></h6>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नए सिस्टम के तहत यदि कोई यूजर निर्धारित सीमा से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन लेता है तो कनेक्शन एक्टिव होने के बाद उसे सस्पेंड रखा जाएगा। यह सस्पेंशन तब तक जारी रहेगा, जब तक तय सीमा से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन रखने से जुड़ा मामला सुलझ नहीं जाता।</p>
<p style="text-align:justify;">दूरसंचार विभाग के सर्कुलर में कहा गया है कि जब तक टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर CAF की शर्तों के आधार पर जरूरी कदम नहीं उठाते, तब तक तय सीमा से ज्यादा एक्टिवेट किए गए किसी भी मोबाइल कनेक्शन को तुरंत सस्पेंड किया जाएगा। यह सस्पेंशन मोबाइल कनेक्शन की निर्धारित सीमा पार करने से जुड़े मामले के समाधान तक जारी रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.tarunmitra.in/national/new-sim-card-rules-implemented-from-today-one-person-will/article-159546</link>
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                <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 13:45:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gargi Vishwakarma]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UP Elections 2027: मुस्लिम प्रभावी सीटों पर ओवैसी का फोकस, गठबंधन नहीं हुआ तो </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ। </strong>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुटे हैं। इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) भी प्रदेश में अपना सियासी खाता खोलने की कोशिश में जुट गई है। पार्टी की पहली प्राथमिकता गठबंधन है, लेकिन सीटों के बंटवारे पर सहमति नहीं बनी तो एआईएमआईएम अकेले चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।</p>
<p>AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश के चुनावी महत्व को समझते हुए उन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, जहां मुस्लिम मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर तराई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/uttar-pradesh/up-elections-2027-owaisis-focus-on-muslim-dominated-seats-if/article-159537"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-04/16_55_280305200owaisi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ। </strong>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुटे हैं। इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) भी प्रदेश में अपना सियासी खाता खोलने की कोशिश में जुट गई है। पार्टी की पहली प्राथमिकता गठबंधन है, लेकिन सीटों के बंटवारे पर सहमति नहीं बनी तो एआईएमआईएम अकेले चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।</p>
<p>AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश के चुनावी महत्व को समझते हुए उन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, जहां मुस्लिम मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर तराई क्षेत्र के बहराइच तक ओवैसी खुद दौरा कर पार्टी की संभावनाओं का जायजा ले चुके हैं। पार्टी ने फिलहाल प्रयागराज, बहराइच, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर और अमरोहा की कई विधानसभा सीटों पर अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। इन क्षेत्रों में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।</p>
<h6><strong>गठबंधन पहली पसंद, नहीं बनी बात तो अकेले चुनाव</strong></h6>
<p>पार्टी की कोशिश चुनाव से पहले ऐसे इलाकों में अपना सियासी आधार मजबूत करने की है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। गठबंधन को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है। ऐसे में AIMIM  ने अपने विकल्प खुले रखे हैं। पार्टी नेताओं के मुताबिक, यदि किसी दल के साथ गठबंधन नहीं होता है तो AIMIM अपने दम पर करीब 200 से 250 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर सकती है।</p>
<h6><strong>2023 के निकाय चुनाव से मिली बढ़त</strong></h6>
<p>वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि एआईएमआईएम को उत्तर प्रदेश में वर्ष 2023 के निकाय चुनाव के प्रदर्शन से राजनीतिक आधार मजबूत करने का अवसर मिला। पार्टी के कई प्रत्याशियों ने स्थानीय निकाय चुनाव में जीत हासिल कर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। अब AIMIM इसी स्थानीय चुनावी सफलता को विधानसभा चुनाव तक ले जाने की रणनीति पर काम कर रही है।</p>
<h6><strong>सपा के चुनावी समीकरण पर पड़ सकता है असर</strong></h6>
<p>वीरेंद्र सिंह रावत के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर अवध और पूर्वांचल के कई हिस्सों में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका चुनावी नतीजों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में यदि एआईएमआईएम इन क्षेत्रों में अपना जनाधार बढ़ाने में सफल रहती है तो उसका असर केवल उसके वोट प्रतिशत तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि समाजवादी पार्टी के चुनावी समीकरण पर भी पड़ सकता है। हालांकि, पिछले विधानसभा चुनावों में एआईएमआईएम का प्रदर्शन प्रभावी नहीं रहा है और पार्टी अब तक विधानसभा में अपना खाता नहीं खोल सकी है।</p>
<h6><strong>विपक्षी वोटों के बंटवारे की आशंका</strong></h6>
<p>वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक हुज्जत रजा के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की राजनीति में यदि ओवैसी की एआईएमआईएम गठबंधन से बाहर रहकर चुनाव लड़ती है तो उसका असर मुख्य रूप से विपक्षी मतों के बंटवारे के रूप में सामने आ सकता है, जिसका लाभ भाजपा को मिलने की संभावना रहेगी। वहीं, यदि सपा-कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन AIMIM को साथ लेता है तो चुनावी तस्वीर अलग हो सकती है और विपक्ष को इसका लाभ मिल सकता है।</p>
<h6><strong>‘भीम-मीम’ समीकरण पर भी नजर</strong></h6>
<p>हुज्जत रजा ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद और पल्लवी पटेल जैसे नेताओं और दलों के साथ संभावित तालमेल को भी ‘भीम-मीम’ समीकरण के नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि, अतीक अहमद के परिवार से जुड़े किसी चेहरे को चुनाव मैदान में उतारने की संभावना को लेकर अभी किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।</p>
<h6><strong>सितंबर तक तस्वीर साफ होने का इंतजार</strong></h6>
<p>AIMIM सेंट्रल जोन के अध्यक्ष शेख ताहिर सिद्दीकी ने कहा कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में अपना खाता खोलने के लक्ष्य के साथ पूरी तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा को रोकने के लिए पार्टी सभी विपक्षी दलों के साथ सम्मानजनक हिस्सेदारी वाले गठबंधन के पक्ष में है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बसपा के साथ गठबंधन की संभावना हो या चंद्रशेखर आजाद और अन्य दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का विकल्प, पार्टी का उद्देश्य भाजपा को रोकना है। शेख ताहिर सिद्दीकी के मुताबिक, सितंबर तक गठबंधन को लेकर तस्वीर साफ नहीं हुई तो एआईएमआईएम उत्तर प्रदेश की 200 से 250 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करेगी। पार्टी की बूथ स्तर तक तैयारियां चल रही हैं और पूरे प्रदेश से लगातार चुनाव लड़ने के लिए आवेदन मिल रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.tarunmitra.in/state/uttar-pradesh/up-elections-2027-owaisis-focus-on-muslim-dominated-seats-if/article-159537</link>
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                <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 11:45:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gargi Vishwakarma]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Independence Day 2026 : लालकिले पर पहली बार गूंजा ‘वंदे मातरम’</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को दिल्ली के लालकिले में पहली बार ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन हुआ। इस विशेष आयोजन के जरिए राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150 वर्षों की विरासत को याद किया गया।</p>
<p>सामूहिक गायन के बाद एमआई-17 हेलीकॉप्टर ‘वंदे मातरम’ का झंडा लेकर आसमान में उड़ान भरता नजर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने संबोधन में इस ऐतिहासिक क्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि आजादी के बाद पहली बार लालकिले पर ‘वंदे मातरम’ गूंज रहा है। उन्होंने कहा कि जब देश ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/delhi/independence-day-2026-vande-mataram-echoed-for-the-first-time/article-158023"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-08/untitled-.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को दिल्ली के लालकिले में पहली बार ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन हुआ। इस विशेष आयोजन के जरिए राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150 वर्षों की विरासत को याद किया गया।</p>
<p>सामूहिक गायन के बाद एमआई-17 हेलीकॉप्टर ‘वंदे मातरम’ का झंडा लेकर आसमान में उड़ान भरता नजर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने संबोधन में इस ऐतिहासिक क्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि आजादी के बाद पहली बार लालकिले पर ‘वंदे मातरम’ गूंज रहा है। उन्होंने कहा कि जब देश ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है, तो इससे बड़ा अवसर क्या हो सकता है।</p>
<p>लालकिले की प्राचीर के सामने ज्ञानपथ पर ‘वंदे मातरम’ की आकृति भी बनाई गई। इसमें सेना, नौसेना और वायुसेना के कैडेटों के साथ ‘मेरा भारत’ के स्वयंसेवकों समेत करीब 2,500 लड़के और लड़कियों ने हिस्सा लिया। समारोह की थीम ‘विकसित भारत @2047’ को प्रदर्शित करने के लिए ज्ञानपथ पर विशेष दृश्य अवरोधक भी लगाए गए।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले की प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व किया। लालकिले के प्रांगण में पहुंचने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने उनका स्वागत किया।</p>
<p>इसके बाद रक्षा सचिव ने दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) लेफ्टिनेंट जनरल राजेश सेठी का प्रधानमंत्री से परिचय कराया। दिल्ली क्षेत्र के जीओसी प्रधानमंत्री को सलामी मंच तक लेकर गए, जहां तीनों सेनाओं और दिल्ली पुलिस के संयुक्त दल ने उन्हें ‘जनरल सैल्यूट’ दिया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ का निरीक्षण किया।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने लालकिले की प्राचीर पर तिरंगा फहराया। कैप्टन सोनिया सिंह चौहान ने उन्हें राष्ट्रीय ध्वज फहराने में सहायता की। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ हुई।</p>
<p>ध्वजारोहण के साथ ही 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) के गनर्स ने 21 तोपों की सलामी दी। स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गन से सुसज्जित इस सेरेमोनियल बैटरी की कमान मेजर पवन सिंह शेखावत ने संभाली।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

                <link>https://www.tarunmitra.in/state/delhi/independence-day-2026-vande-mataram-echoed-for-the-first-time/article-158023</link>
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                <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 08:05:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gargi Vishwakarma]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>झारखंड विधानसभा मानसून सत्र : JPSC-JSSC भर्ती विवाद, छात्र आंदोलन पर घिरेगी सरकार </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रांची।</strong> झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार (6 अगस्त) से शुरू हो रहा है। सत्र से पहले बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में सदन की कार्यवाही से ज्यादा चर्चा रांची में जारी छात्र आंदोलन और <strong>JPSC-JSSC भर्ती</strong> परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं पर रही।</p>
<p>सर्वदलीय बैठक में विभिन्न दलों के नेताओं ने सरकार से आंदोलनरत छात्रों के प्रतिनिधियों से जल्द बातचीत कर गतिरोध समाप्त करने की मांग की। माना जा रहा है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा पूरे मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सबसे बड़ा राजनीतिक टकराव</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/jharkhand/monsoon-session-of-jharkhand-assembly-government-will-be-surrounded-by/article-156439"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-08/jharkhand-cm.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची।</strong> झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार (6 अगस्त) से शुरू हो रहा है। सत्र से पहले बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में सदन की कार्यवाही से ज्यादा चर्चा रांची में जारी छात्र आंदोलन और <strong>JPSC-JSSC भर्ती</strong> परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं पर रही।</p>
<p>सर्वदलीय बैठक में विभिन्न दलों के नेताओं ने सरकार से आंदोलनरत छात्रों के प्रतिनिधियों से जल्द बातचीत कर गतिरोध समाप्त करने की मांग की। माना जा रहा है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा पूरे मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सबसे बड़ा राजनीतिक टकराव बनेगा।</p>
<p>जेएलकेएम विधायक जयराम महतो ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे छात्र आंदोलन का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से छात्रों से तत्काल वार्ता करने का आग्रह किया। उन्होंने नियुक्ति घोटाले पर सदन में कम से कम दो घंटे की विशेष चर्चा कराने के साथ राज्य में सूखे की स्थिति पर विस्तृत बहस कराने की भी मांग की।</p>
<p>बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर, कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, जेएलकेएम विधायक जयराम महतो, आजसू विधायक निर्मल महतो और लोजपा विधायक सुरेश पासवान समेत विभिन्न दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी दलों ने लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप सदन चलाने पर सहमति जताई।</p>
<p>बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि विधानसभा जनता की आकांक्षाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों का सर्वोच्च मंच है। सरकार जनहित के हर मुद्दे पर सार्थक चर्चा, जवाबदेही और सकारात्मक संवाद के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी दल राज्यहित को सर्वोपरि रखते हुए सदन की कार्यवाही को सफल बनाएंगे।</p>
<p>6 से 12 अगस्त तक चलने वाले मानसून सत्र में कुल पांच कार्य दिवस होंगे। सरकार 7 अगस्त को वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट सदन में पेश करेगी। इसके अलावा छात्र आंदोलन, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं, कानून-व्यवस्था, सूखे की स्थिति और अन्य जनहित के मुद्दों पर सदन में तीखी बहस होने के पूरे आसार हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:53:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gargi Vishwakarma]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पंजाब SIR: पहले चरण में 20.66 लाख मतदाता ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>चंडीगढ़:</strong> पंजाब में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)-2026 के पहले चरण के पूरा होने के बाद करीब 20.66 लाख मतदाता ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं। यह संख्या राज्य के कुल 2.14 करोड़ मतदाताओं का 9.63% है। चुनाव आयोग के मुताबिक, इन मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट श्रेणी में रखा गया है।</p>
<p>पंजाब की मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) अनिंदिता मित्रा ने बताया कि राज्य के सभी 23 जिलों और 117 विधानसभा क्षेत्रों में घर-घर जाकर सत्यापन का काम पूरा कर लिया गया है। इस दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने मतदाताओं का मिलान 2003</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/punjab/punjab-sir-2066-lakh-voters-out-of-draft-voter-list/article-156398"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-06/sir.png" alt=""></a><br /><p><strong>चंडीगढ़:</strong> पंजाब में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)-2026 के पहले चरण के पूरा होने के बाद करीब 20.66 लाख मतदाता ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं। यह संख्या राज्य के कुल 2.14 करोड़ मतदाताओं का 9.63% है। चुनाव आयोग के मुताबिक, इन मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट श्रेणी में रखा गया है।</p>
<p>पंजाब की मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) अनिंदिता मित्रा ने बताया कि राज्य के सभी 23 जिलों और 117 विधानसभा क्षेत्रों में घर-घर जाकर सत्यापन का काम पूरा कर लिया गया है। इस दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने मतदाताओं का मिलान 2003 में हुई पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की मतदाता सूची से किया।</p>
<h6><strong>किस श्रेणी में कितने मतदाता?</strong></h6>
<p>चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार : </p>
<p><strong>स्थायी रूप से स्थानांतरित:</strong> 9,44,131 (4.40%)<br /><strong>मृत:</strong> 5,74,568 (2.68%)<br /><strong>अनुपस्थित/पता नहीं चला: </strong>4,12,715 (1.92%)<br /><strong>डुप्लीकेट या अन्यत्र पंजीकृत:</strong> 1,19,145 (0.56%)</p>
<h6><strong>1.94 करोड़ मतदाताओं ने जमा किए फॉर्म</strong></h6>
<p>9 जून 2026 तक पंजाब में 2,14,61,043 पंजीकृत मतदाता थे। इनमें से 1,93,94,408 मतदाताओं ने 3 अगस्त तक अपने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा कर दिए। वहीं, करीब 12 लाख मतदाताओं के फॉर्म 2003 की मतदाता सूची से मेल नहीं खा सके। ऐसे मामलों में संबंधित मतदाताओं को नोटिस भेजे जाएंगे और आवश्यक दस्तावेज जमा करने का अवसर दिया जाएगा।</p>
<h6><strong>13 अगस्त से 12 सितंबर तक कर सकेंगे दावा-आपत्ति</strong></h6>
<p>मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि 13 अगस्त से 12 सितंबर के बीच मतदाता अपने नाम जोड़ने, सुधार कराने या किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे। अंतिम मतदाता सूची इसी प्रक्रिया के बाद तैयार की जाएगी।</p>
<h6><strong>बढ़े मतदान केंद्र, चला जागरूकता अभियान</strong></h6>
<p>SIR-2026 के दौरान राज्य में मतदान केंद्रों की संख्या 24,453 से बढ़कर 25,332 हो गई। इस अभियान में 24,453 BLO, 2,501 सुपरवाइजर, 117 निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और हजारों बूथ लेवल एजेंट शामिल रहे। मतदाताओं को जागरूक करने के लिए SVEEP अभियान के तहत विशेष शिविर, SMS अलर्ट, रेडियो संदेश और अन्य जनजागरूकता कार्यक्रम भी चलाए गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.tarunmitra.in/state/punjab/punjab-sir-2066-lakh-voters-out-of-draft-voter-list/article-156398</link>
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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 10:34:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gargi Vishwakarma]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पप्पू यादव पर कथित हमले पर कांग्रेस भड़की, संसद से सड़क तक उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>संसद के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस ने मंगलवार को केंद्र सरकार को कई मुद्दों पर घेरते हुए संसद में सार्थक चर्चा की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुए कथित हमले की कड़ी निंदा की, प्रस्तावित विधेयकों पर विस्तृत बहस की आवश्यकता जताई और छात्रों पर कथित बल प्रयोग के मामले में गृह मंत्री से संसद में बयान देने की मांग दोहराई।</p>
<p>कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने पप्पू यादव पर हुए कथित हमले को लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/delhi/congress-mps-termed-the-attack-on-pappu-yadav-as-wrong/article-156067"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-08/pic.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>संसद के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस ने मंगलवार को केंद्र सरकार को कई मुद्दों पर घेरते हुए संसद में सार्थक चर्चा की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुए कथित हमले की कड़ी निंदा की, प्रस्तावित विधेयकों पर विस्तृत बहस की आवश्यकता जताई और छात्रों पर कथित बल प्रयोग के मामले में गृह मंत्री से संसद में बयान देने की मांग दोहराई।</p>
<p>कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने पप्पू यादव पर हुए कथित हमले को लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के विचारों से असहमत होने का अर्थ यह नहीं है कि उसके साथ हिंसक या अनुचित व्यवहार किया जाए। लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है और असहमति का जवाब संवाद और लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से इस मामले को गंभीरता से लेने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।</p>
<p>संसद में लाए जाने वाले प्रमुख विधेयकों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुखदेव भगत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने और विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम में संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर व्यापक और सार्थक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने बहुमत के बल पर कई बार विधेयकों को ध्वनि मत से पारित करा देती है, जिससे विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पहले भी कुछ विधेयकों के दौरान विपक्ष के नेता को पूरा समय नहीं मिला और बहस आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह गई। उनका कहना था कि संसद का उद्देश्य केवल विधेयक पारित करना नहीं बल्कि सभी पक्षों की राय सुनना और लोकतांत्रिक विमर्श को मजबूत करना भी है। संख्या बल के आधार पर चर्चा को सीमित करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।</p>
<p>वहीं, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी पप्पू यादव पर हुए कथित हमले की निंदा करते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के विचारों से असहमति होना स्वाभाविक है, लेकिन उसका जवाब हिंसा, गाली-गलौज या किसी भी प्रकार की आक्रामक प्रतिक्रिया से नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि पप्पू यादव ने किसी मंच पर अपनी बात रखी है तो उसका जवाब भी तर्क और शब्दों से ही दिया जाना चाहिए।</p>
<p>प्रमोद तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र में बहस और संवाद ही मतभेदों का समाधान है। उन्होंने कहा कि पप्पू यादव छह बार सांसद रह चुके हैं और उनकी राय को सुनना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की हिंसा लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।</p>
<p>संसद के विधायी एजेंडे पर पूछे गए सवाल के जवाब में प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सदन में चार विधेयक पेश होंगे या नहीं। उन्होंने बताया कि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक दोपहर 1:05 बजे निर्धारित है, जिसमें यह तय होगा कि सदन में कितने विधेयकों पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि बैठक के बाद ही इस विषय पर विस्तृत जानकारी दी जा सकेगी।</p>
<p>पप्पू यादव पर हुए कथित हमले के संबंध में जेबी माथर ने भी इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने के अनेक संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे, चाहे वह राम मंदिर से जुड़ा हो या कोई अन्य संवेदनशील विषय, पर विरोध प्रदर्शन पत्र लिखकर, लेख प्रकाशित कर, प्लेकार्ड और बैनर के साथ प्रदर्शन करके या नारे लगाकर किया जा सकता है, लेकिन हिंसा या डराने-धमकाने की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।</p>
<p>इसी दौरान बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की मतगणना और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की राजनीतिक संभावनाओं पर भी सुखदेव भगत ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने और जनता के बीच अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने प्रशांत किशोर को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अब यह जनता तय करेगी कि उनके वादों और रणनीति पर कितना भरोसा करती है। उन्होंने यह भी कहा कि नई पार्टी के रूप में जन सुराज के लिए यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा होगी।</p>
<p>उधर, कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने छात्रों पर कथित तौर पर एके-47 और पैलेट गन के इस्तेमाल के मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन इस मामले पर अपने रुख पर कायम हैं। उन्होंने मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्री संसद के दोनों सदनों में आकर इस पूरे मामले पर विस्तृत बयान दें। उनके अनुसार यह बेहद गंभीर विषय है और सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।</p>
<p>जेबी माथर ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को लगातार उठाता रहेगा क्योंकि छात्रों से जुड़े मामलों पर सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

                <link>https://www.tarunmitra.in/state/delhi/congress-mps-termed-the-attack-on-pappu-yadav-as-wrong/article-156067</link>
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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 12:33:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gargi Vishwakarma]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोशल मीडिया बना आतंकियों का नया हथियार, जांच में पाकिस्तान-दुबई कनेक्शन के संकेत: दिलीप घोष</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कोलकाता।</strong> पश्चिम बंगाल में एसटीएफ द्वारा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े संदिग्ध आतंकी हमीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि सोशल मीडिया और इंटरनेट ने आतंकी नेटवर्क खड़ा करना आसान बना दिया है। उन्होंने दावा किया कि जांच में दुबई और पाकिस्तान से जुड़े कनेक्शन के संकेत भी मिले हैं।</p>
<p>दिलीप घोष ने कहा कि जैश-ए-मोहम्मद का मॉड्यूल कुछ समय से सक्रिय था और इसकी गतिविधियों की जानकारी पहले भी सामने आती रही है। उनके मुताबिक, गिरफ्तारियों के बाद अब जांच से यह स्पष्ट होगा कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/west-bengal/social-media-becomes-the-new-weapon-of-terrorists-investigation-shows/article-155882"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-08/dilip-ghosh.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलकाता।</strong> पश्चिम बंगाल में एसटीएफ द्वारा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े संदिग्ध आतंकी हमीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि सोशल मीडिया और इंटरनेट ने आतंकी नेटवर्क खड़ा करना आसान बना दिया है। उन्होंने दावा किया कि जांच में दुबई और पाकिस्तान से जुड़े कनेक्शन के संकेत भी मिले हैं।</p>
<p>दिलीप घोष ने कहा कि जैश-ए-मोहम्मद का मॉड्यूल कुछ समय से सक्रिय था और इसकी गतिविधियों की जानकारी पहले भी सामने आती रही है। उनके मुताबिक, गिरफ्तारियों के बाद अब जांच से यह स्पष्ट होगा कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है तथा इसकी जड़ें कितनी गहरी हैं। उन्होंने कहा कि इसके तार पाकिस्तान से जुड़े होने की पूरी संभावना है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया और इंटरनेट के जरिए संपर्क बनाना बेहद आसान हो गया है। हालांकि, इन्हीं तकनीकी माध्यमों की मदद से पुलिस ने आरोपियों तक पहुंच बनाई और उन्हें गिरफ्तार किया। दुबई और पाकिस्तान से संपर्क की खबरें जांच का हिस्सा हैं और पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।</p>
<h6><strong>CAA पर क्या बोले?</strong></h6>
<p>दिलीप घोष ने 300 मतुआ परिवारों को नागरिकता प्रमाणपत्र दिए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का उद्देश्य बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न झेलकर आए हिंदू, सिख और अन्य पात्र अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देना है। उन्होंने कहा कि अब पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।</p>
<h6><strong>ममता सरकार पर आरोप</strong></h6>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में लंबे समय तक जनगणना और संबंधित प्रक्रियाओं को लागू नहीं होने दिया गया, ताकि फर्जी वोटरों को मतदाता सूची में बनाए रखा जा सके। उन्होंने दावा किया कि नई सरकार बनने के बाद पहली बैठक में ही इस दिशा में कदम उठाए गए और अब जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।</p>
<h6><strong>जंतर-मंतर प्रदर्शन और विपक्ष पर निशाना</strong></h6>
<p>जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए दिलीप घोष ने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वालों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर युवाओं और छात्रों को भड़काने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ विदेशी ताकतें भी ऐसे आंदोलनों को आर्थिक मदद देती हैं।</p>
<h6><strong>खेलों में भारत की प्रगति की सराहना</strong></h6>
<p>कॉमनवेल्थ खेलों में भारत के प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश ने खेलों में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है। 'खेलो इंडिया' जैसी योजनाओं के जरिए गांवों, स्कूलों और कॉलेजों से प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसका सकारात्मक परिणाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दे रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पश्चिम बंगाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 11:38:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gargi Vishwakarma]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का मौलिक अधिकार : जस्टिस उज्जल भुइयां</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: </strong>सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा कि गंगा नदी के ऊपर चिकन खाने पर रोक लगाने वाला कोई कानून नहीं है। उन्होंने इफ्तार के दौरान नाव पर चिकन बिरयानी खाने के आरोप में युवाओं की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए कहा कि "मुझे पूरा विश्वास है कि चिकन बिरयानी खाना कोई अपराध नहीं है। यह अपराध हो ही नहीं सकता। फिर भी उन्हें इसी वजह से गिरफ्तार किया गया और तीन महीने तक जेल में रहना पड़ा।"</p>
<p>राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय (NLIU), भोपाल में आयोजित चौथे जस्टिस जी.पी. सिंह स्मृति व्याख्यान में जस्टिस भुइयां ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/delhi/space-for-dissent-is-shrinking-in-india-peaceful-demonstration-is/article-154851"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/justice-ujjal-bhuyan.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली: </strong>सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा कि गंगा नदी के ऊपर चिकन खाने पर रोक लगाने वाला कोई कानून नहीं है। उन्होंने इफ्तार के दौरान नाव पर चिकन बिरयानी खाने के आरोप में युवाओं की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए कहा कि "मुझे पूरा विश्वास है कि चिकन बिरयानी खाना कोई अपराध नहीं है। यह अपराध हो ही नहीं सकता। फिर भी उन्हें इसी वजह से गिरफ्तार किया गया और तीन महीने तक जेल में रहना पड़ा।"</p>
<p>राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय (NLIU), भोपाल में आयोजित चौथे जस्टिस जी.पी. सिंह स्मृति व्याख्यान में जस्टिस भुइयां ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और असहमति की अभिव्यक्ति अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन आज सामान्य नागरिक गतिविधियों को भी अपराध की तरह देखा जाने लगा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "अपनी बात रखने का अधिकार और शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने का अधिकार नागरिकों की मौलिक स्वतंत्रताएं हैं। बहस और असहमति लोकतंत्र का सार हैं। दुर्भाग्य से, आज सामान्य गतिविधियों को भी अपराध बनाया जा रहा है।"</p>
<h6><strong>पर्यावरण कार्यकर्ताओं और छात्रों का किया जिक्र</strong></h6>
<p>जस्टिस भुइयां ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की मांग करने वाले लोगों के साथ कई बार अपराधियों जैसा व्यवहार किया जाता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर चिंता जताने वाले लोगों को भी खदेड़ दिया जाता है, मानो वे अपराधी हों।</p>
<p>उन्होंने विश्वविद्यालय परिसरों में विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, कई मामलों में छात्रों को गिरफ्तार कर लिया जाता है और उन्हें 30 से 40 दिनों तक जमानत नहीं मिलती। इतना ही नहीं, कई छात्रों को निलंबित भी कर दिया जाता है, जिसके बाद उन्हें अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू करने के लिए अदालतों का सहारा लेना पड़ता है।</p>
<h6><strong>जमानत की सख्त शर्तों पर उठाए सवाल</strong></h6>
<p>जस्टिस भुइयां ने कहा कि अदालतें अंततः जमानत तो दे देती हैं, लेकिन कई बार इसमें अनावश्यक देरी होती है। उन्होंने कहा कि इससे भी अधिक चिंता की बात जमानत के साथ लगाई जाने वाली कठोर शर्तें हैं। उन्होंने सवाल उठाया, "क्या ऐसी प्रतिबंधात्मक जमानत शर्तों के जरिए अदालतें अप्रत्यक्ष रूप से नागरिकों को अपनी असहमति व्यक्त करने से हतोत्साहित कर रही हैं?"</p>
<p>उन्होंने कहा कि कई मामलों में जमानत पाने वाले लोगों को सार्वजनिक सभाओं में शामिल होने या सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से भी रोका जाता है। उनके अनुसार, ऐसी शर्तें नागरिकों की मौलिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत आजादी को गंभीर रूप से कमजोर करती हैं।</p>
<h6><strong>'बुलडोजर न्याय' पर फैसले का किया जिक्र</strong></h6>
<p>जस्टिस भुइयां ने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2024 के उस फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें दंडात्मक कार्रवाई के रूप में बुलडोजर चलाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई गई थी। उन्होंने कहा कि यह फैसला स्वागतयोग्य था, लेकिन "यह दो साल देर से आया।"</p>
<h6><strong>फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन पर भी टिप्पणी</strong></h6>
<p>उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया गया था। उन्होंने कहा कि अदालत की यह टिप्पणी उन्हें "काफी अजीब" लगी, जिसमें पूछा गया था कि लोग गाजा की घटनाओं पर प्रदर्शन क्यों करना चाहते हैं, भारत के मुद्दों पर क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से फिलिस्तीन को मान्यता देता रहा है और नई दिल्ली में फिलिस्तीनी दूतावास भी मौजूद है।</p>
<h6><strong>सेवानिवृत्ति के बाद न्यायाधीशों की राजनीतिक भूमिका पर चिंता</strong></h6>
<p>जस्टिस भुइयां ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के राजनीति में जाने के मुद्दे पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जब कोई पूर्व मुख्य न्यायाधीश यह कहता है कि वह न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच की दूरी कम करने के लिए राज्यसभा जा रहा है, तो यह मूल रूप से गलत सोच है। उनके अनुसार, इस तर्क में बुनियादी खामी है।</p>
<h6><strong>कानून के छात्रों से की आलोचनात्मक सोच अपनाने की अपील</strong></h6>
<p>अपने संबोधन के अंत में जस्टिस भुइयां ने कानून के छात्रों से कहा कि वे न्यायपालिका सहित सभी संस्थाओं पर सवाल उठाने का साहस रखें। उन्होंने कहा कि न्यायालय के फैसलों का गंभीरता से अध्ययन होना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर उनकी आलोचना भी की जानी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा, <em>"किसी फैसले की आलोचना करना न्यायाधीश की आलोचना करना नहीं होता।"</em></p>
<p>जस्टिस भुइयां ने यह भी कहा कि न्यायपालिका की विश्वसनीयता स्वयं उसके दावों से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास से तय होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि आज की नई पीढ़ी के वकील और कानून के छात्र संविधान और कानून के शासन के प्रति पहले की पीढ़ियों की तुलना में अधिक प्रतिबद्ध हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

                <link>https://www.tarunmitra.in/state/delhi/space-for-dissent-is-shrinking-in-india-peaceful-demonstration-is/article-154851</link>
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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 12:34:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gargi Vishwakarma]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'कोर्ट 24x7 एंटरटेनमेंट चैनल नहीं बन सकती': सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिना अनुमति पोस्ट, री-पोस्ट, अपलोड, एडिट या मोनेटाइज करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश न्यायिक कार्यवाही की सामान्य समाचार रिपोर्टिंग पर लागू नहीं होगा।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह अंतरिम आदेश पत्रकार हर्षिता ग्रोवर की जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में अदालत की कार्यवाही के वीडियो क्लिप्स की एडिटिंग, प्रसार और व्यावसायिक उपयोग (मोनिटाइजेशन) को लेकर दिशा-निर्देश बनाने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/national/court-cannot-become-a-24x7-entertainment-channel-supreme-court-on/article-154699"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2024-03/supreme-court-new-delhi_401.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिना अनुमति पोस्ट, री-पोस्ट, अपलोड, एडिट या मोनेटाइज करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश न्यायिक कार्यवाही की सामान्य समाचार रिपोर्टिंग पर लागू नहीं होगा।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह अंतरिम आदेश पत्रकार हर्षिता ग्रोवर की जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में अदालत की कार्यवाही के वीडियो क्लिप्स की एडिटिंग, प्रसार और व्यावसायिक उपयोग (मोनिटाइजेशन) को लेकर दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई थी।</p>
<h6><strong>बिना अनुमति नहीं कर सकेंगे पोस्ट</strong></h6>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल या सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल की पूर्व अनुमति के बिना न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को निकालना, संशोधित करना , प्रसारित करना, पोस्ट, री-पोस्ट, अपलोड या मोनेटाइज नहीं किया जा सकेगा।</p>
<h6><strong>कोर्ट बोला- '24x7 एंटरटेनमेंट चैनल नहीं बन सकती अदालत'</strong></h6>
<p>सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि डिजिटल दौर में डेटा का नियमन सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने कहा कि अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग को भी नियंत्रित करने की जरूरत है।</p>
<p>उन्होंने टिप्पणी की,<strong> "कोर्ट 24x7 एंटरटेनमेंट चैनल नहीं बन सकती।"</strong></p>
<h6><strong>हाई कोर्टों से मांगी रिपोर्ट</strong></h6>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाई कोर्टों को इस मामले में पक्षकार बनाया है। साथ ही उनसे पूछा है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की मॉडल लाइव स्ट्रीमिंग गाइडलाइंस को किस हद तक अपनाया है और लगातार लाइव स्ट्रीमिंग का न्यायिक प्रक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ा है।</p>
<h6><strong>AI और भ्रामक क्लिप्स पर जताई चिंता</strong></h6>
<p>सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अदालत की कार्यवाही के वीडियो और आवाज में बदलाव कर गलत संदेश फैलाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी बयान को संदर्भ से अलग दिखाकर भ्रामक नैरेटिव तैयार किया जा सकता है।</p>
<h6><strong>CJI ने मीडिया रिपोर्टिंग पर भी जताई नाराजगी</strong></h6>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि अदालत की कार्यवाही की विकृत रिपोर्टिंग भी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मीडिया में यह गलत खबर चली कि उन्होंने युवा प्रदर्शनकारियों से जुड़े एक मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया, जबकि ऐसी कोई याचिका उनके समक्ष दाखिल ही नहीं हुई थी।</p>
<p>इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने Meta और X (पूर्व में Twitter) को भी नोटिस जारी किया है और उनसे जवाब मांगा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 11:59:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gargi Vishwakarma]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रल्हाद जोशी बने नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री: जानिए उनकी शिक्षा, राजनीतिक सफर और नई जिम्मेदारियां</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उन्होंने यह जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संभाली है। जोशी अपने मौजूदा मंत्रालयों - उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का कार्यभार भी संभालते रहेंगे।</p>
<h6><strong>जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए क्या बोले?</strong></h6>
<p>नई जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रल्हाद जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि वह "कर्तव्य और विनम्रता की भावना" के साथ यह दायित्व स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/state/delhi/pralhad-joshi-becomes-the-new-union-education-minister-know-his/article-154690"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/prahlad-joshi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उन्होंने यह जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संभाली है। जोशी अपने मौजूदा मंत्रालयों - उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का कार्यभार भी संभालते रहेंगे।</p>
<h6><strong>जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए क्या बोले?</strong></h6>
<p>नई जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रल्हाद जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि वह "कर्तव्य और विनम्रता की भावना" के साथ यह दायित्व स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) समेत कई महत्वपूर्ण पहलें लागू की गईं और वह इन्हें आगे बढ़ाने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे।</p>
<h6><strong>प्रल्हाद जोशी की शिक्षा</strong></h6>
<p>27 नवंबर 1962 को विजयपुर (पूर्व नाम बीजापुर), कर्नाटक में जन्मे प्रल्हाद जोशी की प्रारंभिक शिक्षा रेलवे स्कूल, हुबली में हुई। इसके बाद उन्होंने न्यू इंग्लिश स्कूल, हुबली से माध्यमिक शिक्षा पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने श्री कदसिद्धेश्वर (के.एस.) आर्ट्स कॉलेज, हुबली से कला संकाय (बीए) में स्नातक की डिग्री प्राप्त की, जो कर्नाटक विश्वविद्यालय से संबद्ध है। सक्रिय राजनीति में आने से पहले वह व्यवसाय से जुड़े रहे।</p>
<h6><strong>राजनीतिक सफर</strong></h6>
<p>प्रल्हाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वह कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से वर्ष 2004 से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके हैं।</p>
<p>उन्होंने पार्टी संगठन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। वर्ष 2019 से 2024 तक वह संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्री रहे। 2024 के बाद उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई।</p>
<p>नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के रूप में उन्होंने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना, पीएम-कुसुम योजना और देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने से जुड़े कई कार्यक्रमों की निगरानी की।</p>
<h6><strong>क्यों अहम है यह नियुक्ति?</strong></h6>
<p>प्रल्हाद जोशी ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय की कमान संभाल रहे हैं जब NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठे हैं। केंद्र सरकार पहले ही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के पुनर्गठन, पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून, और 2027 से NEET को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के रूप में आयोजित करने जैसे सुधारों की घोषणा कर चुकी है।</p>
<p>अब नए शिक्षा मंत्री के रूप में प्रल्हाद जोशी के सामने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और छात्रों का भरोसा बहाल करने की बड़ी चुनौती होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 11:03:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gargi Vishwakarma]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, बोले- 'राष्ट्रविरोधी ताकतों को फायदा नहीं उठाने देना चाहता'</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में राष्ट्रविरोधी ताकतों को लाभ नहीं उठाने देना चाहिए और किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी विवादों में नहीं फंसना चाहिए। उनका इस्तीफा राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर कई सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि छात्रों का समय पढ़ाई और अपने भविष्य के निर्माण में लगना चाहिए, न कि विवादों और कानूनी प्रक्रियाओं में। इसी सोच के साथ उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/national/union-education-minister-dharmendra-pradhan-resigned-said-does-not/article-154575"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2024-06/darmendra-pradhan2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में राष्ट्रविरोधी ताकतों को लाभ नहीं उठाने देना चाहिए और किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी विवादों में नहीं फंसना चाहिए। उनका इस्तीफा राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर कई सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि छात्रों का समय पढ़ाई और अपने भविष्य के निर्माण में लगना चाहिए, न कि विवादों और कानूनी प्रक्रियाओं में। इसी सोच के साथ उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेजने की जानकारी दी।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/dpradhanbjp/status/2080938216505667663?s=20">https://twitter.com/dpradhanbjp/status/2080938216505667663?s=20</a></blockquote>
<p style="text-align:justify;">

</p>
<p>हालांकि, इस्तीफा देने भर से वह प्रभावी नहीं हो जाता। संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार किसी केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा तभी लागू माना जाता है, जब प्रधानमंत्री उसे स्वीकार कर लें। फिलहाल प्रधानमंत्री कार्यालय या केंद्र सरकार की ओर से इस्तीफा मंजूर या नामंजूर किए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।</p>
<p>ऐसे में अब सबकी नजर प्रधानमंत्री के फैसले पर है। सरकार की औपचारिक स्वीकृति के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री पद पर बने रहेंगे या उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाएगा।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>प्रवेश परीक्षाओं को लेकर तेज हुआ था विरोध</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">हाल के सप्ताहों में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कई छात्र संगठनों ने राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के मामलों को लेकर लगातार प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की जवाबदेही तय करने तथा परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग की।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>सोनम वांगचुक के अनशन से आंदोलन को मिली गति</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">लद्दाख के शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर 20 दिन का अनशन किया। 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई, जहां उन्होंने अपना अनशन जारी रखा। इसके बाद आंदोलन को देशभर में व्यापक समर्थन मिला और विभिन्न राज्यों में छात्रों व संगठनों ने प्रदर्शन किए।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>पुलिस कार्रवाई और इंटरनेट बंदी पर भी उठे सवाल</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज किए जाने के आरोप लगे। राजधानी के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद की गईं, जिससे प्रदर्शनकारियों के बीच संपर्क और समन्वय प्रभावित हुआ। इन घटनाओं के बाद आंदोलन और तेज हो गया तथा केंद्र सरकार से जवाबदेही की मांग बढ़ी।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>सरकार का पक्ष</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि जहां-जहां परीक्षा संबंधी अनियमितताएं सामने आई हैं, वहां जांच एजेंसियों के माध्यम से कार्रवाई की जा रही है। मंत्रालय का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक सफर</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">56 वर्षीय धर्मेंद्र प्रधान जुलाई 2021 से केंद्रीय शिक्षा मंत्री थे। इससे पहले वह पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा कौशल विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। ओडिशा से आने वाले भाजपा नेता और पूर्व एबीवीपी कार्यकर्ता प्रधान को जून 2024 में मोदी सरकार के गठन के बाद दोबारा शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.tarunmitra.in/national/union-education-minister-dharmendra-pradhan-resigned-said-does-not/article-154575</link>
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                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 15:39:07 +0530</pubDate>
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