सांसारिक मोह, माया को त्याग कर परमात्मा का स्मरण करना ही वैराग्य होता है:अष्टावक्र महाराज

कलश यात्रा में शामिल महिलाएं

सांसारिक मोह, माया को त्याग कर परमात्मा का स्मरण करना ही वैराग्य होता है:अष्टावक्र महाराज

अयोध्या। ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का अनूठा संगम है श्रीमद् भागवत उक्त बातें विकासखंड पूरा बाजार के सरायरासी में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्वागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य अष्टावक्र जी महाराज ने कहा। कथा व्यास ने कहा कि सांसारिक मोह, माया को त्याग कर परमात्मा का स्मरण करना ही वैराग्य होता है। जिसके जीवन में भक्ति नहीं होती उसका जीवन नीरस एवं सारहीन होता है। भगवान की कथा सुनने से भक्ति तृप्त होती है ज्ञान और वैराग्य हृदय में दृढ़ होते हैं और हमारे जीवन में भक्ति बढ़ती है तो भगवान के चरणों में अनुराग और प्रेम होता है।
 
कथा व्यास ने प्रहलाद चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि प्रहलाद ने नारायण से कहा मुझ पर ऐसी कृपा करें कि के संसार का कोई भी सुख पाने का स विचार भी मेरे मन में न आए। स किसी भी प्रकार की इंद्रिय सुख क की कामना न हो मेरे हृदय में कभी किसी कामना का बीज ही अंकुरित न हो। ऐसा वरदान मुझे दें भजन करने से जीव भगवान के साथ एक हो जाता है। इसलिए भक्ति को बुढ़ापे के लिए नहीं छोड़ना चाहिए बल्कि से कम उम्र में ही शुरू इन कर देना चाहिए जैसा प्रहलाद और ध्रुव ने किया था। इस अवसर पर मुख्य यजमान उषा सिंह, अतुल सिंह, अविचल सिंह, स्वाति सिंह सहित ग्रामीणों ने कथा का रसपान किया।
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