जनहित से दूर पूर्ति अधिकारी की चलती है मनमानी

उतरौला,( बलरामपुर)-दो सौ चालीस राशन कार्डों के सरेंडर के बाद भी नगर व ग्रामीण क्षेत्रों के सैकड़ों पात्र लोग अभी भी राशन कार्ड बनवाने से वंचित हैं। सरेंडर किए गए कार्ड के एवज में निर्गत अनाज कहां जा रहा है इसकी जांच करना भी अधिकारी उचित नहीं समझते है। पूर्ति महकमे व कोटेदारों की मिलीभगत से सरेंडर किए कार्ड भी ई पॉस मशीनों में एक अरसे से जीवित हैं। पिछले वर्ष अक्तूबर में क्षेत्र के आयकरदाता, लग्जरी वाहनों के स्वामी व अन्य सरकारी नौकरी कर रहे लोगों ने स्वेच्छा से अपने-अपने राशन कार्ड निरस्त करने के लिए पूर्ति निरीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया था।
 
नगर क्षेत्र मे ऐसे कार्डधारकों की संख्या 240 थी। पूरे तहसील क्षेत्र में इनकी संख्या लगभग आठ सौ थी। आज तक किसी भी कार्ड को निरस्त नहीं किया जा सका है। दूसरी तरफ नगर क्षेत्र मे  सैकड़ों ऐसे निर्धन पात्र व्यक्ति हैं जो राशन कार्ड बनवाने या कार्डों में यूनिट बढ़वाने के लिए सप्लाई आफिस और कोटेदारों का चक्कर लगा रहे हैं। राशन कार्डों में गड़बड़ी का यह खेल अरसे से चल रहा है और पात्र व्यक्ति नि: शुल्क खाद्यान्न योजना का लाभ पाने से वंचित हैं।
 
इस संबंध में पूर्ति निरीक्षक मनमथ नाथ गुप्त का कहना है कि नगर क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्य से 68 कार्ड अधिक बने हुए हैं इसलिए नया राशन कार्ड बनाने या यूनिट बढ़ाने में परेशानी हो रही है। सरेंडर किए गये कार्डों को अब तक पात्रता सूची से क्यों नहीं हटाया गया इस बाबत पूछे जाने पर उनका कहना था कि सभी सरेंडर किए गए कार्डधारकों की सूची को शीघ्र ही ऑनलाइन कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
 
 
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