केंद्र में आरक्षण के लिए आंदोलन तैयारी में लगी जाट संघर्ष समिति

पीले चावल बांटकर समाज को दिया जाएगा निमंत्रण

केंद्र में आरक्षण के लिए आंदोलन तैयारी में लगी जाट संघर्ष समिति

भरतपुर। प्रदेश का जाट समाज भरतपुर और धौलपुर के जाट समाज के लिए केंद्र में आरक्षण के लिए हुंकार भर रहा है। केंद्र में आरक्षण की मांग को लेकर बुधवार को जाट आरक्षण समिति के संयोजक नेम सिंह फौजदार के घर जाट आरक्षण समिति के पदाधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में सरकार को चेतावनी दी गई कि अगर अब उनकी मांग नहीं मानी गई तो, समाज उग्र आंदोलन करने के लिए तैयार है। भरतपुर धौलपुर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक नेम सिंह फौजदार ने बताया कि भरतपुर और धौलपुर जिले के जाटों को केंद्र में आरक्षण की मांग 1998 से चली आ रही है। 2013 में केंद्र की मनमोहन सरकार ने भरतपुर व धौलपुर जिलों के साथ अन्य 9 राज्यों के जाटों को केंद्र में ओबीसी का आरक्षण दिया था। जब 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनी तो सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेकर 10 अगस्त 2015 को भरतपुर- धौलपुर के जाटों का केंद्र और राज्य में ओबीसी आरक्षण खत्म कर दिया गया था। लंबी लड़ाई लड़ने के बाद 23 अगस्त 2017 को राज्य में दोनों जिलों के जाटों को ओबीसी में आरक्षण दिया गया। केंद्र में आरक्षण के लिए हमारी मांग जब ही से जारी है।

सितंबर 2021 में जब जाट समाज ने चक्का जाम का ऐलान किया था। तब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 28 दिसंबर 2021 को दोनों जिलों के जाटों को केंद्र की ओबीसी में आरक्षण देने के लिए केंद्र सरकार को सिफारिश पत्र लिखा था। उसके बाद हम लोग दिल्ली ओबीसी कमीशन से भी मिले और केंद्र सरकार के मंत्रियों से भी मुलाकात की, लेकिन अभी तक दोनों जिलों के जाटों को केंद्र में आरक्षण नहीं दिया गया। अब राजस्थान में बीजेपी की सरकार बन गई है। केंद्र में भी बीजेपी की सरकार है। इसके साथ ही सौभाग्य की बात यह है कि, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भरतपुर के रहने वाले हैं। इसलिए हम उम्मीद करते हैं कि, बिना संघर्ष करे जाट समाज को केंद्र में आरक्षण मिल जाएगा।

भरतपुर धौलपुर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बैठक में निर्णय लिया कि कल से वे समाज में पीले चावल देकर निमंत्रण देना शुरू करेंगे। 25 दिसंबर को महाराजा सूरजमल बलिदान दिवस पर जगह-जगह नुक्कड़ सभाएं आयोजित की जाएंगी। इसके बाद एक बड़ी सभा का आयोजन किया जाएगा। जिसमें आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी। यदि केंद्र सरकार ने समय रहते आरक्षण नहीं दिया तो न केवल लोकसभा में जाट भाजपा के खिलाफ खड़े होंगे बल्कि आंदोलन शुरू करेंगे।

 

 

 

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