जीव के कल्याण का सबसे बड़ा माध्यम है श्रीमद्भागवत कथा

मोहल्ला इस्माइलपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा

जीव के कल्याण  का सबसे बड़ा माध्यम  है श्रीमद्भागवत कथा

सीतापुर

शहर के मोहल्ला इस्माइलपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन वृंदावन से पधारे नारद भक्ति आश्रम के पीठाधीश्वर विमल चैतन्य ने श्रीमद्भागवत कथा महापुराण के लिखे जाने का उद्देश्य बताते हुए इसे जीव के कल्याण का सबसे बड़ा माध्यम बताया। उन्होंने बताया कि वेदव्यास जी ने मानव के कल्याण के लिए जब तक इस महापुराण की रचना नहीं की उनके चित्त को शांति नहीं मिली। कलियुग में मनुष्य के कल्याण का सबसे बड़ा साधन इसका श्रवण ही है जिसे राजा परीक्षित ने मोक्षप्राप्ति के लिए विधिपूर्वक सुना था।

कथाव्यास विमल चैतन्य ने ऋषियों द्वारा किये गए छह प्रश्नों और उनका उत्तर देने के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि धर्म क्या है। धर्म न दूसर सत्य समाना। उन्होंने कहा कि बिहारी जी से ऐसा प्रेम करो जिसमे स्वार्थ न हो, जिसमे कपट न हो। जो व्यक्ति बिहारी जी से निःस्वार्थ और निष्कपट प्रेम करेगा वह उनकी शरण मे रहेगा, उसका उद्धार अवश्य होगा।

कथाव्यास ने गोपियों और ऊधौ जी महाराज के प्रसंग का भी मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि ऊधौ मन भये दस बीस, एक हुतौ तो गयो श्याम संग को अवराधै ईश। इसी के साथ उन्होंने निर्गुण ब्रम्ह की उपासना के बारे में भी चर्चा की। कथाव्यास ने भगवान के 24 अवतारों का वर्णन करते हुए कहा कि जो मनुष्य इन अवतारों का स्मरण करता है वह पूजा के बराबर फल प्राप्त करता है। उन्होंने त्रेतायुग में जन्मे भगवान श्रीराम और द्वापर युग में जन्मे भगवान श्रीकृष्ण के अवतारों के उद्देश्य भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि धर्म की स्थापना, भक्तों की रक्षा और असुरों के संहार के लिए ही भगवान अवतार लेते हैं। राम रूप में भगवान की गम्भीरता है तो कृष्ण रूप में चपलता। 

कथाव्यास ने बताया कि ऋषि पाराशर पुत्र महर्षि वेदव्यास जी ने जब बद्रीनाथ में बैठकर इस लोक में जीव की स्थिति देखी तो उसके कल्याण के लिए श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना की। कथा के दौरान कथाव्यास ने कई भजनों को सुमधुर धुनों पर प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। जय जय राधा रमण हरि बोल, नौकर रख ले सांवरे मुझको भी एक बार, भजन पर श्रोता काफ़ी देर तक झूमते रहे। कथाव्यास ने कल की कथा में श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाने की घोषणा की।

कथा के दौरान महंत राजेन्द्र दास, आशीष शास्त्री,सुरेश तिवारी, आराध्य शुक्ला, राहुल मिश्रा आशीष मिश्रा गीतू, ओम प्रकाश मिश्रा, कुलदीप बाजपेयी, श्रवण बाजपेयी, विजय पाल सिंह, कपिल श्रीवास्तव, सर्वेश जी, रमेश जी आदि लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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