उत्साह से मनाया जा रहा अगहन बृहस्पति व्रत

महिलाओं हर गुरुवार को समूह में की जा रही पूजा

उत्साह से मनाया जा रहा अगहन बृहस्पति व्रत

घर-घर पूजी जा रही धन की देवी महालक्ष्मी
धमतरी। परिवार की सुख समृद्धि की कामना को लेकर प्रत्येक गुरुवार को महिलाओं द्वारा अगहन बृहस्पति व्रत रखा जा रहा है। धन की देवी माता महालक्ष्मी की घर-घर पूजी की जा रही है। माता लक्ष्मी को फूल, फल, बताशे, अक्षत व अन्य सामग्री अर्पित कर पूजा की गई। घरों के सामने दीप जलाए जाते हैं। हिन्दू धर्म में हर मास का अपना अलग- अलग महत्व है। इसमें से एक अगहन मास है। इसमें पड़ने वाले हर गुरुवार को व्रत रखा जाता है। इसे अगहन गुरुवार के अलावा अगहन बृहस्पति के नाम से भी जाना जाता है। ग्राम रुद्री की गोदावरी साहू, देवकी पटेल ने बताया कि अगहन मास में महालक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। इसलिए उन्हें इस महीने मास का इंतजार रहता है। इसकी शुरुआत 28 नवम्बर से हुई है। जबकि अगहन बृहस्पति का शुभारंभ 30 नवम्बर से हुआ। एक दिन पूर्व व्रत रखने वाली महिलाओं द्वारा घरों की साफ सफाई की, साथ ही चावल आटा से घर के आंगन से लेकर माता महालक्ष्मी के आसन तक श्री चिन्ह समेत उनका पदचिन्ह बनाया। इस पूजन में इसी विधि से पूजा का विधान है। साथ ही अन्नपूर्णा भंडारा के लिए रखिया और कुम्हड़ा के साथ नए धान को टोकरी में रखकर भी पूजा की जाती है। अगहन बृहस्पति पर माता महालक्ष्मी के आसन को आम की पत्ती, आंवला पान, धान की बाली से सजी माता महालक्ष्मी की फोटो एवं मूर्ति विराजित की गई। विधिवत व्रत रख विशेष पूजन एवं भोग लगाकर महाआरती की गई। सुख शांति तथा समृद्धि के लिए मंगल कामना की गई।

अगहन में नहीं लगाई जाती है झाडू
अगहन बृहस्पति व्रत रखने वाली मालती सिन्हा, उनकी देवांगन, धनेश्वरी देवांगन ने बताया कि इस व्रत के नियमों का कड़ाई से पालन करना जरूरी होता है, इसके तहत व्रत वाले दिन घर में झाडू नहीं लगाई जाती है। साथ ही सूपा में चांवल साफ करना भी मना रहता है। भोजन में लहसून और प्याज का इस्तेमाल नहीं होता है। सात्विक भोजन एवं फलों का ही भोग माता को लगाया जाता है।

दरिद्रता का होता है नाश : पंडित राजकुमार तिवारी
विप्र विद्वत परिषद के मीडिया प्रभारी पंडित राजकुमार तिवारी ने बताया कि पिछले महीने से अगहन मास शुरू हो गया है। 30 नवंबर को प्रथम अगहन बृहस्पति था। इस प्रकार उक्त मास में कुल चार बृहस्पत पड़ रहे हैं। इस मास में माता लक्ष्मी के व्रत का प्रत्येक गुरुवार को करने का विधान है। विधिवत माता लक्ष्मी का व्रत एवं पूजन करने से दरिद्रता का नाश होता है। साथ ही माता लक्ष्मी की विशेष कृपा भी व्रत रखने वाली भक्तों पर बरसती है। इसलिए इस अनूठे व्रत के प्रति साल दर साल रुझान बढ़ने लगा है।

 

 

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