भाकपा-माले पार्टी कार्यालय में शोक की लहर

कॉमरेड राजकुमार राम का आकस्मिक निधन अचानक कुआं में गिर जाने के कारण हो गई । वे 54 वर्ष के थे । वे बिक्रमगंज प्रखंड के महराजगंज के मूल निवासी थे । इनके स्वर्गीय पिता कॉमरेड दसई राम भाकपा-माले निर्माण काल से ही जुड़े हुए थे । अपने पिता के इकलौते पुत्र थे । वे अपने पिता की मृत्यु के बाद पिता के संघर्षों की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए पढ़ाई छोड़कर 1993 में भाकपा-माले की सदस्यता ग्रहण कर ली । मृत्युपरांत पूर्णकालिक कम्युनिस्ट योद्धा के बतौर सांप्रदायिक फासीवाद के खिलाफ संघर्ष की अगली कतार में डटे रहे । फिलहाल वे भाकपा-माले रोहतास जिला कमेटी के सदस्य थे । पार्टी की नीतियों को निर्भीकता व साहस के साथ जनता के बीच रखने,उनको संगीत करने का काम कर रहे थे । जिस समय गरीब-गुरबे महंगाई, बेरोजगारी,भ्रष्टाचार तबाह हो उस पर साम्प्रदायिक फासीवाद का हमला तेज हो, बाबासाहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर के संविधान व लोकतंत्र पर साम्प्रदायिक फासीवादी काली ताकतों द्बारा रोज व रोज हमला किया जा रहा हो वैसी स्थिति में कॉमरेड राजकुमार राम का अलविदा कहना भाकपा-माले जनता के संघर्षों की बड़ी क्षति हुई है ।कॉमरेड राजकुमार राम के मृत्यु की खबर सुनते ही भाकपा-माले नेताओं - कार्यकर्ताओं,राजद के नेताओं, समाजिक कार्यकर्ताओं, महिलाओं का हुजूम उमड़ने लगा और उनके अंतिम दाह संस्कार तक डटे रहे । दाह संस्कार के उपरांत नम आंखों से विदाई दी गई । शव यात्रा में भाकपा-माले विधायक अरुण सिंह, राज्य कमेटी सदस्य संजय यादव,जिला सचिव नंदकिशोर पासवान, रविशंकर राम, कृष्णा मेहता, मार्कण्डेय चन्द्रवंशी, चन्द्रधन सिंह, गोपाल राम, राजेन्द्र सिंह, जवाहर लाल सिंह , धनजी पासवान, अनुग्रह सिंह, डॉ नागेन्द्र सिंह,राजद नेता मनोज यादव, स्थानीय मुखिया रामचंद्र नट सहित अन्य लोग मौजूद थे ।
 
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