लोस 2024: राजा भैया की बिसात बनाम बेनी बाबू की राजनीतिक विरासत!

अवध क्षेत्र के गोंडा संसदीय सीट पर बीजेपी-इंडिया गठबंधन प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर

लोस 2024: राजा भैया की बिसात बनाम बेनी बाबू की राजनीतिक विरासत!

रवि गुप्ता

  • मनकापुर राजघराने के कीर्ति वर्धन सिंह तीसरी बार मैदान में, पिता आनंद सिंह भी यहां से रहे सांसद
  • यहां से पूर्व सांसद रहे बेनी प्रसाद वर्मा की पौत्री श्रेया वर्मा सपा प्रत्याशी के तौर पर क्षेत्र में बदलाव को ले चर्चित
  • जातीय समीकरण का हुआ धु्रवीकरण तो बदला सकता है नतीजा, बगल की सीटों का भी पड़ेगा असर
  • क्षेत्र में राजा भैया की इमेज साफ-सुथरी, पर विकास के नाम पर एक दशक में कुछ खास नहीं दे पाये
लखनऊ। 2024 के लोकसभा चुनाव के पांचवे चरण के साथ ही सूबे के अवध क्षेत्र में भी मतदान की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी और अभी तक जो भी यहां की जनता-जनार्दन के मन-मस्तिष्क में चल रहा है, वो आगामी 20 मई को ईवीएम मशीन में उनके मताधिकार के तौर पर फीड हो जायेगी।
 
बहरहाल, यहां के राजनीतिक जानकारों की माने तो अवध क्षेत्र के गोंडा संसदीय सीट पर राजा भैया की एक दशक पुरानी बिसात और दिग्गज नेता रहे बेनी बाबू की राजनीतिक विरासत के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है। बता दें कि कीर्ति वर्धन सिंह उर्फ राजा भैया बीते एक दशक से बीजेपी सिंबल पर यहां से चुनाव जीतते आ रहे हैं, और अब वो तीसरी बार चुनावी दंगल में कूदे हैं। उनके साथ किसी न किसी रूप में जुड़े कुछ वरिष्ठजनों से जब तरूणमित्र टीम ने बातचीत की तो उनका साफ तौर पर यही कहना रहा कि भईया, मनकापुर राजघराने की प्रतिष्ठा सीधे तौर पर इस सीट से जुड़ी है। पहले सपा से खुद राजा भैया यहां से सांसद रहे और उससे पूर्व उनके पिता आनंद सिंह कांग्रेस से सांसद चुने गये और जबकि बाद में सपा सरकार के शासनकाल में यूपी के कैबिनेट कृषि मंत्री पद पर बने रहे।
 
यानी कुल मिलाकर ज्यादातर उन्हीं के राजघराने का राजनीतिक दबदबा किसी न किसी पार्टी के रूप में इस सीट पर बना रहा। बीचे में बाहुबली ब्रजभूषण शरण सिंह और उनकी पत्नी केतकी सिंह ने भी सीट पर फतेह हासिल की। हालांकि बीचे में हुए जबरदस्त उलटफेर के बीच कांग्रेस के सिंबल पर बेनी प्रसाद वर्मा ने गोंडा में शानदार जीत हासिल की और अब इस सीट पर लम्बे अर्से बाद उनकी राजनीतिक विरासत को संभालने के लिये उनकी पौत्री और युवा प्रत्याशी सपा के टिकट पर गोंडा के चुनावी मैदान में डटी हैं।
 
गोंडा क्षेत्र के ही कुछ पुराने राजनीतिक जानकारों से बात की गई किसकी हवा चल रही है, तो उनका दबे जुबां यही कहना रहा कि भईया जी, अगर जातीय समीकरण का धु्रवीकरण हुआ तो उलटफेर हो सकता है, वैसे भी राजा भईया की छवि तो क्षेत्र में साफ-सुथरी वाली है...मगर चाहे शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, सिंचाई की मूलभूत आवश्यकताओं की बात आती है तो वो 10 साल के अपने संसदीय काल में अपनी ही केंद्र सरकार के छत्रछाया में कुछ खास नहीं कर सके।
 
हां, इतना जरूर है कि रेल विकास के दृष्टिगत क्षेत्र के कुछ रेलवे स्टेशनों पर जरूरत के मुताबिक ट्रेनों के ठहराव में जरूर अहम भूमिका निभाई जिससे क्षेत्र वासियों का राजधानी लखनऊ मुख्यालय से लेकर, दिल्ली और गोरखपुर के बीच रेल परिवहन सुविधा सुगम हो सकी। वैसे क्षेत्र में चर्चा तो इसकी भी है चूंकि गोंडा के सभी पांचों विधानसभा सीटों पर इस समय कब्जा तो बीजेपी का है, मगर उसमें भी दो विधायक ऐसे हैं जो मौजूदा इंडिया गठबंधन प्रत्याशी के समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और इतना ही नहीं बगल की संसदीय सीट श्रावस्ती पर भी इसी समुदाय के लोगों का काफी बड़ा प्रभाव माना जाता है, तो ऐसे में 2024 लोकसभा के संसदीय महल तक राजा भैया की शाही इंट्री तीसरी बार लगातार होगी या फिर एक युवा और नये चेहरे के तौर पर परिवर्तन देखने को मिलेगा, यह तो ईवीएम मशीन खुलने के बाद ही पता चलेगा।
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