डॉक्टरी के गुरुकुल पर ग्रहण, स्टेट मेडिकल फैकल्टी सुस्त

मेडिकल डिप्लोमा कर रहे छात्रों का अधर में लटका भविष्य

डॉक्टरी के गुरुकुल पर ग्रहण, स्टेट मेडिकल फैकल्टी सुस्त

चन्द्र प्रकाश सिंह

  • छात्र ने सीएम हेल्प लाइन पर लगाई मदद की गुहार, आगे दाखिला मुश्किल

लखनऊ। प्रदेश सरकार के लगातार जारी दिशानिर्देशों का असर अब बेअसर होता दिखाई दे रहा है। जहां प्रदेश की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। जिससे डिप्लोमा कर रहे छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकार मय होता प्रतीत हो रहा है। हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश स्टेट मेडिकल फैकल्टी की ढुलमुल कार्यशैली से डिप्लोमा कर रहे छात्रों के अंधकार मय भविष्य की, जिसमें पीड़ित छात्र द्वारा आप बीती सुनाते हुए कहा गया कि 2021 में किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज में डिप्लोमा के लिए दाखिला लिया और पहला वर्ष बीत गया रिजल्ट अभी भी यानी 2024 शुरू हो गया और यूपी स्टेट मेडिकल फैकल्टी द्वारा जारी नहीं किया गया।

जिससे हतास परेशान छात्र ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई हेल्प लाइन पोर्टल पर शिकायत करके मदद करने की गुहार लगाई। वहीं सीएम हेल्प लाइन द्वारा कागजों पर निस्तारण करके मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। जिससे छात्र का दूसरे वर्ष में दाखिला लेने के लिए मुश्किलें बढ गयी और इधर उधर लोगों से मदद मांगता फिर रहा है।

सेके्रटरी बोले नहीं मिली शिकायत, एचओडी ने पल्ला झाड़ा!

बता दें कि जब सोमवार को तरूण मित्र मेडिकल रिपोर्टर ने पीड़ित छात्र से हकीकत जानने की कोशिश की तो दबी जुबां उसने कहा कि मेरा नाम मत छापियेगा नहीं तो मेरा करियर खराब हो जायेगा और मेरे लिए मुशीबत बढ़ जायेगी। जब इस मामले की पड़ताल करने के लिए यूपी स्टेट मेडिकल फैकल्टी मुख्यालय जाकर सेक्रेटरी डॉ.अलोक कुमार से मिलने का समय मांगा तब उन्होंने करीब 30 मिनट इंतजार के बाद बाहर निकलकर यही बताया कि हमारे यहां किसी भी छात्र की शिकायत नहीं मिली है और उन्होंने कहा कि इसकी अधिक जानकारी के लिए आईटी सेल से बात करिये।

ऐसा होने के बाद जब आईटी सेल पहुंचा तो वहां मौजूद एचओडी ने अपना पल्ला झाड़ते हुए यही कहा कि किसी भी छात्र की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने शब्दों को दोहराते हुए कहा कि किसी भी छात्र का रिजल्ट रूकने की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब उसके पंजीकरण में कोेई कमी रह गयी होगी। जिससे रिजल्ट रूक गया होगा।

क्या है स्टेट मेडिकल फैकल्टी की कार्यशैली!

ज्ञात हो यूपी स्टेट मेडिकल फैकल्टी प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में डिप्लोमा करने वाले छात्रों को कोर्स करने की स्वीकृति प्रदान करता है। जिसमें बैचलर ऑफ साइंस नर्सिंग कोर्स,एमसी नर्सिंग,बीएससी नर्सिंस,डिप्लोमा इन फिजियोथेरेपी जैसे करीब 43 डिप्लोमा कोर्स कराने का कार्य कराता है। साथ ही सूत्रों ने यहां तक बताया कि प्रदेश के अधिकांश मेडिकल कॉलेजों में छात्रों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।

छात्रों को दाखिले के लिए जुलाई माह में डिप्लोमा के लिए प्रवेश करने की प्रक्रिया शुरू होती है और यह काउंसलिंग होते-होते आठ से नौ माह बीत जाते हैं। जिससे छात्रों को छात्रवृत्ति मिलने में दिक्कतें बढ जाती है और नतीजा यह होता है कि लेट होने चलते छात्र-छात्राओं के फार्म जमा करने की तारीख निकल जाती है जिससे अधिकांश 30 फीसदी छात्र-छात्राएं छात्रवृत्ति मिलने से वंचित रह जाते हैं और ऐसी स्थिति में छात्र मानसिक उलझनों से जूझने लगते है। इसके लिए यूपी स्टेट मेडिकल फैकल्टी को कार्यशैली में सुधार लाना होगा जिससे असहाय और छात्र भी चिकित्सा शिक्षा का लाभ उठा सके।

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