फंसे गहलोत के मंत्री, कई सीटों पर त्रिकोणीय तो कुछ जगह चतुष्कोणीय मुकाबला

फंसे गहलोत के मंत्री, कई सीटों पर त्रिकोणीय तो कुछ जगह चतुष्कोणीय मुकाबला

जयपुर। राजस्थान विधानसभा चुनाव का परिणाम तीन दिसंबर को आएगा। इससे पहले हर तरफ अब चर्चा बढ़ गई है कि कौन हारेगा-कौन जीतेगा। राजस्थाान विधानसभा के चुनाव में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कई मंत्री चुनावी चक्रव्यूह में फंस गए हैं। इस चुनाव में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मंत्रिमंडल के 26 मंत्री चुनाव मैदान में हैं। गहलोत सरकार के मंत्रिमंडल में सीएम अशोक गहलोत सहित 30 मंत्री बनाए गए थे। इनमें से चार मंत्री चुनाव से बाहर हैं।

चुनाव में झुंझुनूं विधानसभा सीट पर गहलोत कैबिनेट के परिवहन मंत्री बृजेंद्र सिंह ओला त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे हुए हैं। इस बार ओला का मुकबाला भाजपा के बबलू चौधरी से है। वहीं भाजपा से बागी होकर निर्दलीय मैदान में उतरे राजेन्द्र भामूं ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। वे गोसेवा के चलते क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। वरिष्ठ मंत्री डाॅ. बीडी कल्ला का बीकानेर पश्चिम से भाजपा प्रत्याशी से कांटे का मुकाबला है। भाजपा ने यहां से नए चेहरे के रूप में जेठानंद व्यास को उतारा है। वे धर्म यात्रा निकालने की वजह से चर्चा में रहे हैं। हिन्दूवादी चेहरे के रूप में उनकी पहचान है। विहिप और संघ के कार्यकर्ता रहे हैं। एक माह पहले ही भाजपा में आए हैं। लालसोट से स्वास्थ्य मंत्री परसादी लाल मीणा की हालत पतली है। प्रचार के शुरुआती दौर में उन्हें एक गांव में लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ा था। मंत्री परसादीलाल मीणा की भाजपा के रामविलास मीणा से सीधी टक्कर है। भाजपा के रामविलास दूसरी बार मैदान में हैं। पिछला चुनाव मामूली अंतर से हार गए थे।

उम्मीदवार मंत्री प्रमोद जैन भाया अंता विधानसभा सीट पर कड़े मुकाबले में फंसे हैं। भाजपा ने यहां से कंवरलाल मीणा को उतारा है, वे पहले मनोहरथाना से विधायक रहे हैं। सपोटरा विधानसभा सीट से मंत्री रमेश मीणा भाजपा के हंसराज से कड़े मुकाबले में फंसे हैं। रमेश मीणा तीन बार से लगातार चुनाव जीत रहे हैं। क्षेत्र में पकड़ है, लेकिन बोलचाल का तरीका सख्त होने से लोगों में कुछ नाराजगी है। वहीं भाजपा ने हंसराज को पहली बार मैदान में उतारा है। पहले वे बसपा से चुनाव लड़ चुके हैं। मतदाताओं पर भी पकड़ है। बाड़मेर जिले की शिव प्रदेश की हॉट सीटों में से एक है। कांग्रेस के बागी फतेह खान और भाजपा के बागी रविंद्र सिंह भाटी ने मुकाबले को रोचक और चतुष्कोणीय बना दिया हैं, जबकि उदयपुरवाटी में भी मुकाबला चतुष्कोणीय है।

इन पांच के अलावा इस चुनाव में ममता भूपेश, शांति धारीवाल, प्रताप सिंह खाचरियावास, अशोक चांदना, टीकाराम जूली और मुरारीलाल मीणा जैसे कई कद्दावर मंत्रियों की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। 2013 में हुए राजस्थान विधानसभा चुनाव में गहलोत सरकार के 15 से अधिक मंत्री चुनाव हार गए थे। राजस्थान में कुल 200 विधानसभा सीट हैं, जिनमें से 199 सीटों पर चुनाव हुआ है। राजस्थान विधानसभा के चुनाव में मतदाताओं ने अपना फैसला ईवीएम के हवाले कर दिया है। जनता ने किसे सत्ता की कुर्सी सौंपनी चाही है, ये तीन दिसंबर को सामने आ जाएगा, लेकिन इस बीच प्रदेश की दोनों ही प्रमुख पार्टियां (भाजपा और कांग्रेस) अपनी-अपनी जीत और हार वाली सीटों के साथ ही उन सीटों पर भी कड़ी नजर रख रही हैं, जहां बागियों और निर्दलीयों के कारण चुनाव त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय मुकाबले में फंसा है।

राजस्थान की कुल 199 सीटों पर इस बार चुनाव हुए हैं। इनमें से करीब 21 सीटों पर त्रिकोणीय और तीन सीटों पर चतुष्कोणीय संघर्ष देखा जा रहा है। श्रीगंगानगर जिले की करणपुर सीट पर प्रत्याशी गुरमीत सिंह कुन्नर का निधन होने के कारण वहां चुनाव प्रक्रिया स्थगित कर दी गई थी। ऐसे में दोनों ही पार्टियों की नजर में इन सीटों की अहमियत बढ़ गई है, ताकि सत्ता की कुर्सी पर काबिज होने के लिए जोड़-तोड़ की राजनीति करनी पड़े। इसके लिए सियासी समीकरण बनाने की कोशिशें अभी से शुरू हो गई है। अंदरखाने दोनों ही पार्टियों ने इसके लिए कवायद तेज कर दी है। दोनों पार्टियां अपने-अपने बागियों के साथ ही क्षेत्रीय दलों के नेताओं से भी संपर्क साधने में जुटी हैं।

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