महायोगी गोरखनाथ विवि में गठित होगी अंतरराष्ट्रीय सलाहकार समिति : डॉ. जीएन सिंह*:

गुरु श्री गोरक्षनाथ कॉलेज ऑफ नर्सिंग में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का दूसरा*

महायोगी गोरखनाथ विवि में गठित होगी अंतरराष्ट्रीय सलाहकार समिति : डॉ. जीएन सिंह*:

भारतीय ज्ञान प्रणाली में प्रशिक्षित नर्सों की पूरे विश्व में जरूरत : डॉ. ओंकारनाथ सिंह*

×गोरखपुर, । भारत सरकार के पूर्व औषधि महानियंत्रक एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. जीएन सिंह ने कहा कि नर्सिंग व मेडिकल क्षेत्र की वैश्विक आवश्यकताओं के दृष्टिगत महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में जल्द ही एक अंतरराष्ट्रीय सलाहकार समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति में यूएसए, रूस, ओमान, जर्मनी, फ्रांस, श्रीलंका, वियतनाम, थाईलैंड, सिंगापुर समेत कई देशों के विषय विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। 

डॉ. सिंह मंगलवार को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के गुरु श्री गोरक्षनाथ कॉलेज ऑफ नर्सिंग में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन वर्चुअल माध्यम से प्रतिभागियों और व्याख्यान देने वाले अतिथियों से संवाद कर रहे थे। उन्होंने बताया अंतरराष्ट्रीय सलाहकार समिति गठित हो जाने से नर्सिंग व मेडिकल के अन्य क्षेत्रों में न केवल समय के अनुकूल पाठ्यक्रमों को परिमार्जित किया जा सकेगा बल्कि वैश्विक स्तर पर कुशल नर्सिंग व संबद्ध मेडिकल स्टाफ का समुचित समायोजन हो सकेगा। डॉ. सिंह ने कहा कि बहुत कम समय में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय और इससे जुड़े नर्सिंग व अन्य कॉलेजों ने शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं। 

गुरु श्री गोरक्षनाथ कॉलेज ऑफ नर्सिंग में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन प्रथम सत्र में 'भारतीय ज्ञान प्रणाली का वैश्वीकरण' विषय पर ओएस फार्मा यूएसए के संस्थापक डॉ. ओंकारनाथ सिंह का विशिष्ट व्याख्यान हुआ। 
यूएसए से वर्चुअल माध्यम से जुड़े डॉ. ओंकारनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा प्राचीनकाल से ही वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से ओतप्रोत है। ज्ञान, विज्ञान और दर्शन के क्षेत्र में यह समृद्ध विरासत से परिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मेडिकल सेवा एक टीम वर्क है जिसमें डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ सबकी भूमिका एक दूसरे से जुड़ी हुई है। अमेरिका में नर्सिंग व फार्मेसी की सेवा डॉक्टर की सेवा के बराबर ही सम्मानजनक है। डॉ. सिंह ने बताया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली में प्रशिक्षित नर्सों की पूरे विश्व में जरूरत महसूस की जाती है। 

*उपचार के साथ जागरूक भी करती है नर्स : सुबेदी*
संगोष्ठी के दूसरे दिन के एक अन्य विशिष्ट व्याख्यान में फोर्ट वर्थ टेक्सास, यूएसए की नर्स प्रैक्टिशनर पायस सुबेदी भी ऑनलाइन जुड़ीं। उन्होंने अमेरिका में नर्सिंग सेवा के विभिन्न आयामों की विस्तार से जानकारी दी। पायस सुबेदी ने कहा कि नर्स सिर्फ रोगी का उपचार ही नहीं करती है बल्कि आगे स्वास्थ्य की देखभाल के लिए जागरूक भी करती है। नर्सिंग एक एडवोकेसी जॉब है। रोगों को लेकर नर्स की भूमिका रोगी के साथ एडवोकेट के रूप में होती है। 

*ज्ञान व कौशल के आधार पर हो स्वस्थ प्रतिस्पर्धा : गायत्री*
एक दूसरे सत्र में सऊदी अरब से ऑनलाइन माध्यम से जुड़ीं श्रीमती गायत्री जयापुनु राज ने नर्सिंग सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का आह्वान किया। साथ ही समझाया कि यह प्रतिस्पर्धा ज्ञान और कौशल का आधार पर होना चाहिए, व्यक्ति नहीं। गवर्नमेंट नर्सिंग कॉलेज बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में गवर्नमेंट नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. अलका सक्सेना ने शोधार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए नर्सिंग सेवा के टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि नर्सिंग सेवा में जागरूकता और उत्साह का होना अपरिहार्य है। इसमें डिग्री के साथ व्यावहारिक ज्ञान भी जरूरी है।

*एआई से मेडिकल सेवा में हो रहा बदलाव : डॉ. रोहित*
एक तकनीकी सत्र में स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)के महत्व पर चर्चा करते हुए मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर के सहायक आचार्य डॉ रोहित कुमार तिवारी ने कहा कि चिकित्सा प्रदाताओं, अस्पतालों, फार्मास्युटिकल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से काफी बदलाव हो रहा है। स्वास्थ्य सेवा उद्योग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सकारात्मक परिणाम आ रहे है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग में सतर्कता भी आवश्यकता पर भी जोर दिया। जबकि एजुकेशनल गवर्नेंस इन मॉडर्न एरा विषय पर आधारित सत्र में यूपी स्टेट मेडिकल फैकल्टी में नर्सिंग सलाहकार डॉ. नीतू देवी ने नर्सिंग कोर्स व सिलेबस तैयार करने में जरूरी नीति निर्धारक बिंदुओं की जानकारी दी। सभी सत्रों में शोधार्थियों ने अपने शोध पत्रों का वाचन किया। 

संगोष्ठी में आए अतिथियों का स्वागत महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव और गुरु श्री गोरक्षनाथ कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्राचार्या डॉ. डीएस अजीथा ने किया। अलग-अलग सत्रों में गुरु श्री गोरखनाथ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के प्राचार्य डॉ. मंजूनाथ एनएस समेत कई शिक्षकों, प्रशिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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