भविष्य की चुनौतियों से निपटने को अन्वेषण की दृष्टि जरूरी : प्रो. भट्ट

गुरु श्री गोरक्षनाथ कॉलेज ऑफ नर्सिंग में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ*

भविष्य की चुनौतियों से निपटने को अन्वेषण की दृष्टि जरूरी : प्रो. भट्ट

नर्सिंग के क्षेत्र में स्किल डेवलपमेंट समय की मांग : प्रो. भट्ट*

×गोरखपुर, । किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय लखनऊ के पूर्व कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने कहा कि नर्सिंग का क्षेत्र भविष्य में और भी व्यापक और समृद्ध होने वाला है। व्यापकता के हिसाब से ही इस क्षेत्र में नई चुनौतियां भी आएंगी। भावी चुनौतियों से निपटने के लिए यह जरूरी है कि हम अभी से अन्वेषण की दृष्टि से काम करते हुए आगे बढ़ें। 

प्रो. भट्ट सोमवार को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के गुरु श्री गोरक्षनाथ कॉलेज ऑफ नर्सिंग में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन के लिए विश्वविद्यालय को साधुवाद देते हुए इसमें बहुव्यापी विषय रखने पर प्रसन्नता व्यक्त की। प्रो. भट्ट ने कहा कि चिकित्सा व नर्सिंग के क्षेत्र में नवप्रवेशी युवाओं के सर्वांगीण व्यक्तित्व और पेशेवर विकास के लिए स्किल डेवलपमेंट अपरिहार्य तत्व है। शोधार्थियों और विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प से यदि किसी कार्य को किया जाए तो किसी भी लक्ष्य को साधा जा सकता है। जरूरी यह भी है कि कार्य से प्रेम के साथ लक्ष्य प्राप्ति की पिपासा आजीवन बनी रही। प्रो. भट्ट ने महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के इंफ्रास्ट्रक्चर को सर्वश्रेष्ठ बताते हुए यहां की शिक्षण प्रविधियों और परिसर के शैक्षणिक वातावरण की मुक्तकंठ से सराहना की। 

*नर्सिंग व चिकित्सा क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने में वरदान साबित होगी संगोष्ठी : कुलपति*
अध्यक्षता करते हुए महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल डॉ. अतुल वाजपेयी ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी नर्सिंग व चिकित्सा क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने में वरदान साबित होगी। भारत की प्राचीन चिकित्सा व नर्सिंग प्रणाली की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय प्रणाली पूरी तरह दोषरहित रही है। सम्पूर्ण विश्व को चिकित्सा पद्धति भारत की ही देन है। प्राचीन काल से ही युद्ध के दौरान परिचारक द्वारा घाव पर कपड़े से मरहम-पट्टी होती थी, पाश्चात्य ने उसे ग्रहण कर बैंडेज का नाम दे दिया। डॉ. वाजपेयी ने कहा कि विश्वविद्यालय से चिकित्सा की तकनीकी शिक्षा ग्रहण कर नर्सेज भविष्य में किसी भी आपातकाल में सहयोग के लिए तैयार रहेंगी क्योंकि उन्हें समयानुकूल और नवीनतम प्रौद्योगिकी से आच्छादित शिक्षण-प्रशिक्षण दिया जाता है। 

*पेशेवर नर्सिंग के सेवार्थ लोगों की है विश्वव्यापी आवश्यकता : डॉ. जीएन सिंह*
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में वर्चुअल माध्यम से जुड़े विशिष्ट अतिथि भारत सरकार के पूर्व औषधि महानियंत्रक व उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. जीएन सिंह ने कहा कि नर्सिंग पवित्र सेवा का क्षेत्र है। पेशेवर नर्सिंग के सेवार्थ लोगों की विश्वव्यापी आवश्यकता है। इसे लेकर नए भाव और विचार इस अंतराष्ट्रीय संगोष्ठी के मंथन से निकलेंगे। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में भी नर्सिंग को समृद्ध करने की तैयारी चल रही है। जिन जगहों पर नर्सिंग की प्रबल संभावना है, वहां नए रूप में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने कहा कि गुरु श्री गोरक्षनाथ कॉलेज ऑफ नर्सिंग नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। यहां नर्सिंग के अनंत विषयों पर चिंतन मनन कर नए रास्ते निकाले जा रहे हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में महायोगी गोरक्षनाथ विश्वविद्यालय विश्व व्यापी स्तर पर शिक्षा के नए अध्याय को लिखेगा। उन्होंने कहा कि जापान के साथ सरकार चिकित्सा सेवा में सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास कर रही है जिससे यहां के विद्यार्थी नर्सिंग में अपनी सेवा दे सकने में सफल होंगे। 

*नर्सिंग के क्षेत्र में नया इतिहास लिखने का समय*
विशिष्ट अतिथि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के डीन (प्रशासन) डॉ. राजेंद्र भारती यह एक महत्वपूर्ण समय है जब हम नर्सिंग के इतिहास में एक नए अध्याय को लिखने जा रहे है। इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार से नए रास्ते खुलेंगे। उन्होंने कहा कि नर्सिंग में नर्सेज को रोगी के प्रति मातृत्व की दृष्टि रखनी चाहिए। इसके पूर्व विषय प्रवर्तन करते हुए एम्स रायबरेली में न्यूरोलॉजी विभाग की अध्यक्ष प्रो. अर्चना वर्मा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद, योग आदि का स्वास्थ्य क्षेत्र में अभूतपूर्ण योगदान है। चिकित्सा के साथ तकनीक पर शोध दृष्टि रखी जाए तो स्वास्थ्य सेवा को और भी प्रतिष्ठत किया जा सकता है। कहा कि नर्सिंग में पुराने रोगों से लड़ने के लिए  भी शीधार्थियो को गहन अध्ययन की तरफ उन्मुख किया जा सकता है। आभार ज्ञापन करते हुए गुरु श्री गोरक्षनाथ कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्राचार्या डॉ. डीएस अजीथा ने बताया कि संगोष्ठी में प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली और नर्सिंग के प्रति इसका योगदान,  स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का योगदान, भारतीय ज्ञान प्रणाली का वैश्वीकरण,  योग्यता आधारित नर्सिंग शिक्षा तथा स्वास्थ्य केंद्रों में नर्सों की भूमिका पर गहन मंथन हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में आगतों का स्वागत जानकारी गुरु श्री गोरक्षनाथ कॉलेज ऑफ नर्सिंग की ट्यूटर श्वेता अल्बर्ट ने किया। संगोष्ठी का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। संगोष्ठी में आए सभी अतिथियों  को कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव और प्राचार्या डॉ. डीएस अजीथा ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

उद्घाटन सत्र के बाद अलग अलग तकनीकी सत्रों में प्रो. एमएलबी भट्ट, डॉ मिनी के, डॉ रेणुका, डॉ. देवीगा टी. आदि ने नर्सिंग के भविष्य और चुनौतियों विषय पर शोधार्थियों के शोध वाचन पर मार्गदर्शन दिया। तकनीकी सत्र का संचालन जेनी डी और अक्षय एडवर्ड ने किया।

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