भाजपा के साथ आने से रालोद को ही होगा ज्यादा फायदा

 80 का लक्ष्य पूरा करने के लिए एक-एक सीट पर गुणा-गणित लगा रहे भाजपा के पदाधिकारी

भाजपा के साथ आने से रालोद को ही होगा ज्यादा फायदा

लखनऊ। चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न से नवाजे जाने के बाद जयंत चौधरी को दिल तो पिघला ही, पश्चिमी उप्र प्रदेश के किसानों का भी दिल पिघलने की पूरी उम्मीद है। हालांकि इससे सर्वाधिक फायदा विपक्ष के साथ गठबंधन के बावजूद अपनी दो सीटें भी न जीत पाने वाले रालोद को होगा। भाजपा विपक्ष को तोड़ने कामयाब हो जाय तो अल्पसंख्यक समुदाय निराशा में चली जाएगी और भाजपा उप्र में क्लीन स्वीप भी कर सकती है।बात 2019 के लोकसभा चुनाव की करें तो समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल का गठबंधन था।

इस गठबंधन के तहत राष्ट्रीय लोक दल को दो सीटें मिली थीं बागपत और मुजफ्फरनगर, लेकिन रालोद दोनों सीटें नहीं बचा पायी। मुजफ्फरनगर से भाजपा के संजीव बलियान ने रालोद के अजीत सिंह को 6526 वोटों से हरा दिया था। वहीं बागपत से जयंत चौधरी खुद लड़े थे। वहां भाजपा के सत्यपाल सिंह ने जयंत को 23,502 वोटों से मात दे दी थी। इससे पहले 2009 में रालोद का भाजपा के साथ गठबंधन था। उस समय रालोद ने पांच सीटें जीतीं थी। उसके बाद दो चुनावों में उसका खाता भी नहीं खुल सका।भाजपा इस चुनाव में 400 का लक्ष्य लेकर चल रही है।

इसको पूरा करने के लिए उसे एक-एक सीट की गुणा-गणित लगा रही है। अपने कुनबे को बढ़ाने में जुटी हुई है। यदि रालोद के साथ उसका गठबंधन हो जाता है तो कांग्रेस की गतिविधियों से निराश समाजवादी पार्टी को तगड़ा झटका लगेगा। इससे भाजपा मनो वैज्ञानिक रूप से पहले ही पूरे विपक्ष को धाराशायी कर देगी।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा पहले 22 फरवरी से 26 फरवरी तक यूपी में रहनी थी। अब 21 फरवरी तक ही रहेगी।

यह भी उसके साथ समाजवादी की खींचतान का ही नतीजा है। भाजपा की नीतियों के आगे विपक्ष चुनाव से पहले ही एक-एक कर धाराशायी होता जा रहा है, जिससे भाजपा का लक्ष्य आसान होता जा रहा है।भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अवनीश त्यागी का कहना है कि उप्र में विपक्ष इस बार एक भी सीट नहीं जीत पाएगा। 80 सीटें भाजपा जीतने जा रही है। इस समय हर व्यक्ति में राष्ट्रवाद की भावना पनप रही है। हर व्यक्ति जानता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्तर का भारत में दूसरा कोई नेता नहीं है। विश्व स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साख सबसे अच्छी है।

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