चाय और चिलम के सहारे कट रही बाबा की जिंदगी

चाय और चिलम के सहारे कट रही बाबा की जिंदगी

प्रयागराज। संगम की रेता पर लगने वाले दुनिया के सबसे बड़े अध्यात्मिक मेले में देश के कोने कोने से पहुंचे साधु संत धर्म और अध्यात्म की अलख जगा रहे है। यहां प्रयागराज में वैसे तो बहुत सारे साधु संत आकर्षण का केंद्र है, लेकिन माघ मेला क्षेत्र में आए चाय वाले बाबा की कहानी कुछ और ही है। तो चलिए जानते हैं कि चाय और चिलम के सहारे बाबा कैसे जीवित है और संगम की रेती पर धूनी जमा रहे है।बता दें कि संगम नगरी में लगने वाले माघ मेले में भारत सहित विदेशों से भी लोग घूमने के लिए आते है। खास तौर पर माघ मेले में लोग साधु संतों के बारे में जानने की जिज्ञासा भी रखते हैं और साधु संतो का प्रवचन भी सुनते हैं।
 
माघ मेले में वैसे तो साधु संतो की भरमार लगी हुई है। मेले में तमाम बाबा अपने धार्मिक अनुष्ठान में लगे हुए हैं। बहुत से संतो की पहचान उनके पहनावे, खानपान की वजह से हैं, तो कुछ बाबा अपने कर्तव्यों को लेकर चर्चा में बने है।लेकिन माघ मेले में एक ऐसे बाबा हैं जिनके बारे में गूगल को भी नहीं पता है। मेला क्षेत्र के खाक चौक में स्थित तपस्वी नगर में साधु संतों की तपस्या देखने काबिल और अचंभित है। कड़ाके की ठंड के बावजूद बाबा साधना में लगे हुए है। अयोध्या आश्रम से आए एक अनूठे बाबा जिन्हें चाय वाले बाबा के नाम भी लोग जानते है।
 
चाय वाले बाबा बचपन में ही घर त्याग दिए थे।खाक चौक में स्थित तपस्वी नगर खालसा में विराजमान बाबा भगवत दास जी खुद को अन्न, फल और फूल से दूर कर लिया है। यह बाबा केवल चाय और चिलम पर जीवित है। भक्त बताते हैं कि जब से इन्होंने सन्यास ग्रहण किया है, तब से इन्होनें अन्न का त्याग कर दिया। अन्न का एक निवाला ग्रहण नहीं किया। बाबा खुद तो पूरे दिन चाय पीते हैं और पास आने वाले लोगों को भी चाय पिलाते है।
 
बाबा की धूनी पर हर वक़्त बड़े बर्तन में चाय उबलती रहती है। सुबह 5 बजे से ही भक्तगणों की लंबी लाइन चाय पीने के लिए लग जाती हैं।खाक चौक में स्थित तपस्वी नगर खालसा में विराजमान बाबा भगवत दास जी महाराज के शिष्य बताते हैं कि महाराज जी चाय वाले के नाम से मेले में मशहूर हैं। मौजूदा समय में बाबा का उम्र लगभग 60 वर्ष है। चाय वाले बाबा मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। हर वक्त बाबा के पास हजारों के संख्या में भीड़ लगी रहती है।
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