कंपनियों के शोषण से स्थानीय लोगो ने कांट्रैक्टरों के खिलाफ बैठक कर बनाई योजना 

कंपनियों के शोषण से स्थानीय लोगो ने कांट्रैक्टरों के खिलाफ बैठक कर बनाई योजना 

लालगंज/रायबरेली। आधुनिक रेल कोच कारखाने में लालगंज सहित जनपद व आसपास के एक सैकड़ा से अधिक पेटी ठेकेदार काम कर रहे हैं। पेटी ठेकेदार बड़ी कंपनियां के शोषण से परेशान है जिसके चलते रविवार को बाल्हेश्वर मंदिर परिसर में एक बड़ी बैठक करके जहां पेटी ठेकेदारों ने एक जुटता प्रदर्शित की ।वही नियमबद्ध तरीके से बड़ी कंपनियों के शोषण के खिलाफ आवाज उठाने की भी बात तय हुई। बैठक में एक संगठन बनाकर उसके बैनर तले सामूहिक निर्णय लेने के साथ-साथ बड़ी कंपनियों की गलत नीतियों के खिलाफ रेल मंत्रालय और प्रधानमंत्री के यहां शिकायत करने की योजना भी बनाई गई।
 
बैठक के अगुवाकर अनुज यादव ,मोहित सिंह, दिनेश कुमार ,अशोक कुमार, अमित बाजपेई ,मनीष तिवारी , अमृत बाजपेई ,अमित कुमार ,सौरभ सिंह, विजय, सुरेश कुमार, अनुभव सिंह , रामकुमार सिंह कुशवाहा ,हरी लाल ,राजेंद्र प्रसाद, संदीप , बृजेश मौर्यआदि सैकड़ो पेटी ठेकेदारों ने  समाजसेवी और भाजपा नेता सुशील शुक्ला को संगठन का संरक्षक नियुक्त कर उनके निर्देशन में नियमबद्ध तरीके से काम करने की भी योजना बनाई है।श्रमिकों की बैठक में पहुंचे भाजपा नेता सुशील शुक्ला ने कहा कि मजदूर की मेहनत से अधिकारी और बड़ी कंपनी के मालिकान ऐसी बंगलों में रहते हैं और एसी गाड़ियों में चलते हैं लेकिन मजदूरों का दर्द समझने का प्रयास नहीं करते हैं।
 
वर्तमान में स्थानीय 5 हजार मजदूर डेली वेजेज पर रेल कोच में काम करता है जिनका बड़ी कंपनियों के द्वारा शोषण किया जा रहा है जबकि भारत के यशस्वी और ईमानदार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा लगातार गरीबों के हित में योजनाएं बनाई जा रही हैं और उनके विकास की योजनाएं भी संचालित हैं लेकिन रेल कोच के जिम्मेदार अधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों को भी ताख पर रखकर श्रमिकों का शोषण करने पर जुटे हुए हैं। ऐसे अधिकारियों और कंपनियों के खिलाफ सरकार से पत्राचार कर कार्यवाही कराई जाएगी।
 
बैठक में हिंदुस्तान फाइबर, एकमे इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ,धनलक्ष्मी इंटरप्राइजेज, महादेव इंटरप्राइजेज , किंग कंपनी ,एवी कंपोजिट आदि अन्य कंपनियों के बाबत भी चर्चा हुई जिनके द्वारा लगातार स्थानीय पेटी ठेकेदारों और लेबरों का शोषण किया जा रहा है। 12 से 14 घंटा काम करने के बावजूद स्थानीय श्रमिकों को पेट पालने भर की मजदूरी नहीं मिल पा रही है। साथ ही मजदूरी देर सबेर मिलने से उन सबको साहूकारों के यहां उधार पैसा भी लेना पड़ता है जिसके कारण स्थानीय प्राइवेट श्रमिकों में भारी नाराजगी व्याप्त है ।श्रमिकों ने एक स्वर से मांग करते हुए कहा है कि इस बाबत रेल कोच के महाप्रबंधक को प्राइवेट कंपनियों से वार्ता करके सभी डेली वेजेज श्रमिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए। साथ ही उनका एक निश्चित मानदेय भी हर माह दिलाया जाना सुनिश्चित किया जाए।

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