विधायक अभिजीत सिंह सांगा गैंगस्टर मामले में बरी किये गये

गैंगस्टर मामले में बिठूर विधायक अभिजीत सिंह सांगा कोर्ट से बरी; तीन अन्य सहआरोपी भी दोष मुक्त करार...

विधायक अभिजीत सिंह सांगा गैंगस्टर मामले में बरी किये गये

उन्नाव। गैंगस्टर मामले में कानपुर नगर के बिठूर विधानसभा से विधायक अभिजीत सिंह सांगा समेत चार आरोपियों को शनिवार को अंतिम सुनवाई के बाद एमपी एमएलए की कोर्ट ने दोषमुक्त करार दिया। बता दें, कानपुर नगर के बिठूर विधानसभा से बीजेपी के विधायक अभिजीत सिंह सांगा पुत्र स्व. धीरेंद्र सिंह निवासी कस्बा ओम भवन थाना बिठूर जिला कानपुर, बीनू गिरी पुत्र स्व. रामऔतार गिरी निवासी बिहारी खेड़ा मोहम्मदपुर थाना चौबेपुर जिला कानपुर नगर, हरिओम गिरी पुत्र मुन्नालाल निवासी मोहम्मदपुर थाना चौबेपुर जिला कानपुर नगर, राना गिरी पुत्र स्व.रामऔतार गिरी पर वर्ष 2008 में सफीपुर कोतवाली पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। 
 
इसकी रिपोर्ट तत्कालीन एसएचओ सफीपुर शारदा प्रसाद दीक्षित ने दर्ज कराई थी। आरोप था कि  गिरोह के सक्रिय सदस्य बीनू गिरी, राना गिरी, हरिओम गिरी, अभिजीत सिंह सांगा, रामसजीवन, रामकिशन, हरिओम,रिंकू उर्फ रामनाथ, अंजनी कुमार, दिनेश व मदन राठौर अपने आर्थिक एवं बुनियादी लाभ के लिए सदस्य बदल बदलकर गंगा कटरी उन्नाव व कानपुर नगर क्षेत्र में अपना आंतक एवं भय फैलाकर अपने साथियों के लिए अनुचित धन अर्जित कर समाज विरोधी क्रियाकलाप में लिप्त है।
 
इस गिरोह के विरुद्ध थाना बिठूर, कोतवाली कानपुर एवं थाना सफीपुर में जबरन वसूली, गंगा कटरी में नाजायज कब्जा, जानलेवा हमला, हत्या, लूट, डकैती एवं मारपीट की रिपोर्ट भी दर्ज हो चुकी है। मामले की जांच एसआई जीएस पांडेय ने करते हुए अभिजीत सिंह सांगा, बीनू गिरी, हरिओम गिरी, राना गिरी के विरुद्ध अक्टूबर - 2009 में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। तब से मुकदमा गैंगस्टर कोर्ट में लंबित था। 
 
शनिवार को मुकदमें की अंतिम सुनवाई एमपी एमएलए कोर्ट संख्या-12 में पूरी हुई। न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर ने अपने आदेश में कहा कि मामले में अभियोजन न तो गैंग चार्ट में से दर्शित मुकदमों में एक की भी सत्यता को साबित कर सका और न ही आरोपियों द्वारा कथित अर्जित लाभ या उनके गैंग संचालन के तथ्य को साबित कर सका है। अदालत ने कहा महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि आरोपियों द्वारा विधि विरुद्ध रूप से संग्रहित किसी भी संपत्ति पर कुर्की की कारवाईं नहीं की गई। साथ ही अनुचित भौतिक या आर्थिक लाभ अर्जित करने के मामले में किसी संपत्ति का विवरण नहीं दिया गया। वादी ने भी इस बात का जिक्र अपनी तहरीर में नहीं किया है।
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