गणतंत्र दिवस का बीटिंग दि रिट्रीट सम्पन्न

गणतंत्र दिवस का बीटिंग दि रिट्रीट सम्पन्न

लखनऊ। परिसमाप्ति समारोह' की प्रथा उस पुरातन काल से चली आ रही है जब सूर्यास्त होने पर युद्ध बंद कर दिया जाता था। बिगुल पर रिट्रीट की धुन सुनते ही योद्धा युद्ध बंद कर देते थे और अपने शस्त्र समेट कर रणस्थल से अपने शिविरों को चले जाते थे। इसी कारण 'रिट्रीट वादन' के समय स्थिर खड़े रहने की प्रथा आज तक चली आ रही है। रिट्रीट के समय सेनाओं के झंडे और निशान उतार कर रख दिये जाते थे। नगाड़ा बजाना (ड्रम बीट्स) उस काल का प्रतीक है जब कस्बों तथा शहरों में रहने वाले सैनिकों को सायंकाल निश्चित समय पर अपने शिविरों में वापस बुला लिया जाता था। इन्हीं प्राचीन प्रथाओं के मेलजोल से वर्तमान 'परिसमाप्ति समारोह' का जन्म हुआ है।

गणतंत्र दिवस के तीसरे दिन सोमवार को सायं पुलिस लाइन लखनऊ में बीटिंग द रिट्रीट (परिसमाप्ति समारोह) सेना के पाइप एवं ड्रम बैण्ड, पीएसी का ब्रास बैण्ड, मिलिट्री के बैण्ड एवं होमगार्ड ब्रास बैण्ड द्वारा संयुक्त मधुर धुन के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यकम के मुख्य अतिथि राज्यपाल आनंदी बेन पटेल रहीं।

राज्यपाल द्वारा गणतंत्र दिवस के अवसर पर मार्चिग के दौरान अच्छा प्रदर्शन करने वाली टोलियों में यूपी एटीएस कमांडो को प्रथम स्थान प्राप्त करने पर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डीजीपी विजय कुमार, मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन, पुलिस कमिश्नर लखनऊ सहित शासन व पुलिस के वरिष्ठ अधिकारीगण तथा सेना, पुलिस के अधिकारी व कर्मचारीगण आदि उपस्थित रहे।

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