राजनीति का मकसद समाज की सेवा करना होता है, इसे कोई और रूप दिया जाए : शाहिद कुरैशी

( तरूणमित्र ) गाजियाबाद।

राजनीति का मकसद समाज की सेवा करना होता है, इसे कोई और रूप दिया जाए : शाहिद कुरैशी

समाज में फैली कुरीतियों को जड़ से खत्म करने के लिए राजनीति का बड़ा योगदान रहा है, बात राजनीति और समाज सेवा की, गाजियाबाद के भाजपा नेता और प्रमुख समाजसेवियों में गिने जाने वाले शाहिद कुरैशी से जानते हैं कि वह समाज की सेवा किस प्रकार कर रहे हैं, आइये जानते हैं शाहिद कुरैशी से कि उनका राजनीति में आने का ख्याल कैसे और क्यूं आया इस बात को लेकर हम जानने की कोशिश करेंगे कि वह राजनीति में क्यूं आए इसकी कोई खास वजह रही होगी, इस खास मुलाकात में सुलगते सवालों पर होगी बात, राजनीति और समाज सेवा की और राजनीति को किस पहलू से देखना चाहिए इस पर होगी खास चर्चा !! सबालः आपका राजनीति में आने का मेन उद्देश्य क्या है आप राजनीति में क्यूं आए इसकी कोई खास वजह रही होगी और राजनीति को किस पहलू से देखना चाहिए इस पर आपकी अपनी मंशा क्या है!! जबाबः दरअसल मेरा राजनीति में आने का मेन उद्देश्य यह है कि अगर मुझे मौका मिला और कोई जिम्मेदारी पार्टी ने मुझे सौंपी इसी के साथ अगर मैने भविष्य में कोई चुनाव लड़ा तो हकीकत की राजनीति क्या होती है वह मैं आमजन को करके दिखाऊंगा, शाहिद कहते हैं कि एक बात अहम यह है जोकि मेरे मन में घर करे बैठी है वह यह है कि अगर आज नेता जी सुभाष चन्द्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, लाला लाजपत राय जिंदा होते और वह राजनीति कर रहे होते तो जैसी राजनीति वह कर रहे होते ठीक उसी तरह से मैं पूरा करने के लिए राजनीति में आया हूं और जो गलतियां इन पुराने नेताओं ने की थीं उन गलतियों को मैं कभी नहीं करूंगा और भारत माँ के दुश्मनों को किसी भी सूरत में नहीं बख्खूंगा इस तरह की राजनीति का ख्याल मेरे मन में है और इसे मैं पूरा करूंगा!! सबालः बात मुद्दे की और बात पते की है जोकि मैं आपसे पूछ रहा हूं मुझे आप यह बताएं कि समाजसेवा करने के लिए क्या राजनीति करना जरूरी है बगैर राजनीति किए हुए भी तो सेवा की जा सकती है!! जबाबः बिल्कुल सही सबाल किया है आपने, दरअसल सच्चाई यह है कि सेवा हर तरह से की जा सकती है परन्तु यह भी सच है कि राजनीति करने पर हम आमजन को और भी बेहतर सेवा दे सकते हैं लेकिन राजनीति को बिजनेस न बनाया जाए चूंकि राजनीति समाज की सेवा करने का एक बेहतर विकल्प है लेकिन हमारी सोच यही होनी चाहिए कि अगर जनता का भला किसी भी प्रकार से होता है तो उसमें कतई भी संकोच नहीं करना चाहिए और जनता का आशीर्वाद मुझे मिला तो मैं जनता के लिए कितना वफादार और ईमानदार साबित हो सकता हूँ यह ज्यादा जरूरी है चूंकि हम जनता के बीच जाते हैं और बड़े-बड़े दावे और वादे करते हैं लेकिन उन पर कितना खरा उतरते हैं यह बात सबसे अहम है और भविष्य में कभी मौका आया और मुझे अगर जनता ने अपना जनप्रतिनिधि चुना तो अपने किये हुए हर वादे पर खरा उतरने का काम करूंगा बस यही मेरी अपनी सोच में शामिल है!! सबालः दूसरी तरफ अगर सही मायनों में देखा जाए तो आप वरिष्ठ पीढ़ी के हैं और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में आपकी गिनती भी है लोग आपको ठीक तरह से जानते भी हैं इसी के साथ इस बक्त वरिष्ठजन और युवा क्या सोचते हैं साथ ही इस बार कितने प्रतिशत युवा बीजेपी को वोट करेंगे क्या युवा बीजेपी के शासनकाल में खुश है चूंकि सबसे अहम मुद्दा युवाओं के लिए बेरोजगारी का है क्या यह सच नहीं है, चूंकि आप शायद युवाओं के लिए बेहतर समझ रखते होंगे इसलिए जबाब भी आप ही तलाशेंगे!! जबाब: सबसे पहले तो मैं यही कहूंगा कि तरूणमित्र राष्ट्रीय समाचार पत्र है और बड़ा समूह है इस समाचार पत्र के 5 संस्करण हैं और प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में तरूणमित्र की गिनती होती है मैं आपके और तरूणमित्र समाचार पत्र के माध्यम से यही कहना चाहता हूं कि आपने बेहद अच्छा सवाल पूछा चूंकि युवा पीढ़ी को कैसे क्या करना है इस पर हम आपको सटीक जानकारी के साथ बताते हैं, दरअसल मैं तरूणमित्र समाचार पत्र के माध्यम से लाखों करोड़ों पाठकों को यह बताना चाहता हूं कि पहली बार लगभग 73 प्रतिशत युवा अपने मतों का इस बार प्रयोग करने जा रहा है और वह अपने मतों का प्रयोग किस प्रकार करेगा यह बात बेहद महत्वपूर्ण है तो अब इसके लिए हमारे सभी बुजुर्ग नेताओं को युवा वर्ग के लिए किस प्रकार आगे आना है और यह सोचने समझने का विषय है इस पर ध्यान आकर्षित करना होगा, अब युवाओं की बात अगर हम करें तो हमारे तमाम बुद्धिजीवी बुजुर्ग नेताओं को चाहिए कि वह आगे आएं और मार्गदर्शक बनकर युवाओं में जोश भरने का काम करें तब ही युवा पीढ़ी पूरी तरह से वोट करेगा साथ ही वोट किसे करेगा वह बेरोजगारी के मुद्दे पर तय होगा और ये भी सच है कि युवा वर्ग बीजेपी को पूरी तरह से सपोर्ट रहा है। और दूसरी तरफ एक बात और है कि 30-35-40 वर्ष का युवा जब 15-20 वर्षों तक किसी भी पार्टी की सेवा करेगा तो जाहिर तौर पर जो हमारे बुजुर्ग नेता हैं वह उनके लिए मार्गदर्शक बनेंगे तब ही यह सब संभव हो सकता है अन्यथा इस बार लोहे के चने चबाने जैसा प्रतीत होता है यह बात मैं इसलिए कह रहा हूं चूंकि मैं स्वयं ही भारतीय जनता पार्टी का प्रचार प्रसार करने के लिए आमजन मानस में पहुंचता हूं तो बात युवाओं की कहानी वहीं पर आके ठहरती है और बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आ जाता है!!

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