क्या है छोटी नर्सरी योजना?

Published By Subhash Pandey
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 छोटी नर्सरी : बिहार सरकार ने गांवों में रोजगार बढ़ाने और पर्यावरण को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है. सरकार ने छोटी नर्सरी योजना की शुरुआत की है, जिसके जरिए लोग कम खर्च में अपना काम शुरू कर सकते हैं और अच्छी कमाई भी कर सकते हैं. यह योजना खास तौर पर उन लोगों के लिए है जो खेती से जुड़े हैं या घर बैठे कोई छोटा व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं.

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि लोग अपने घर के आंगन, खेत के छोटे हिस्से या खाली पड़ी जमीन पर पौधों की नर्सरी लगाकर आय का नया जरिया बना सकते हैं. यह योजना एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत चलाई जा रही है, जिसमें सरकार की ओर से अच्छी खासी सब्सिडी भी दी जा रही है.

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क्या है छोटी नर्सरी योजना

छोटी नर्सरी योजना का मुख्य उद्देश्य लोगों को पौध उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना है. इसके तहत फलदार, फूलों वाले, छायादार और औषधीय पौधों की नर्सरी लगाई जा सकती है. सरकार चाहती है कि गांव-गांव में पौधों की उपलब्धता बढ़े और खेती के साथ-साथ बागवानी को भी बढ़ावा मिले.

यह योजना किसानों, महिलाओं, युवाओं, स्वयं सहायता समूहों और छोटे कारोबार शुरू करने वालों के लिए बहुत उपयोगी है. खास बात यह है कि इसमें बहुत ज्यादा जमीन या बड़ी पूंजी की जरूरत नहीं होती.

योजना लाने के पीछे सरकार की सोच

बिहार में आज भी बड़ी संख्या में किसान परंपरागत खेती पर निर्भर हैं, जिससे उनकी आमदनी सीमित रह जाती है. सरकार का मानना है कि अगर खेती के साथ बागवानी और पौध उत्पादन को जोड़ा जाए, तो किसानों की आय बढ़ सकती है. इसी सोच के साथ सरकार ने छोटी नर्सरी योजना की शुरुआत की है. इससे न सिर्फ लोगों को रोजगार मिलेगा, बल्कि गांवों में हरियाली भी बढ़ेगी और पर्यावरण को भी फायदा होगा.

आम लोगों को क्या होंगे फायदे

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे शुरू करने में ज्यादा पैसे नहीं लगते. बहुत कम जमीन में भी नर्सरी लगाई जा सकती है. लोग घर बैठे पौधे तैयार कर सकते हैं और उन्हें बेचकर अच्छी कमाई कर सकते हैं.

सरकार की ओर से सब्सिडी के साथ-साथ तकनीकी जानकारी और कई मामलों में प्रशिक्षण भी दिया जाता है. गांव की महिलाएं, बेरोजगार युवा और छोटे किसान इस योजना से आसानी से जुड़ सकते हैं. पौध उत्पादन से गांवों में हरियाली बढ़ेगी और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी.

कितनी मिलेगी सब्सिडी

सरकार ने छोटी नर्सरी के लिए प्रति हेक्टेयर 20 लाख रुपये की लागत तय की है. इसमें से 50 प्रतिशत यानी 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी.

यह सब्सिडी दो किस्तों में मिलेगी. पहली किस्त में 60 प्रतिशत राशि यानी 6 लाख रुपये और दूसरी किस्त में 40 प्रतिशत राशि यानी 4 लाख रुपये दी जाएगी. यह पैसा सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजा जाएगा.

पौधे कहां से और कैसे लें

नर्सरी के लिए पौधे सरकारी नर्सरी, जिला उद्यान विभाग, वन विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से खरीदे जा सकते हैं. इन जगहों पर अच्छी गुणवत्ता के पौधे उपलब्ध होते हैं. इसके अलावा कई ब्लॉक और पंचायत स्तर पर भी सरकारी सप्लाई की व्यवस्था रहती है, जहां से लोग पौधे ले सकते हैं.

छोटी नर्सरी कैसे शुरू करें

नर्सरी शुरू करने के लिए सबसे पहले सही जगह का चयन जरूरी है. घर का आंगन, खेत का कोना या खाली जमीन इसके लिए उपयुक्त होती है. इसके बाद पौधों का चुनाव करें, जैसे आम, अमरूद, नींबू, पपीता, गुलाब, गेंदा, तुलसी या अन्य औषधीय पौधे.

बीज या पौध को पॉलीबैग या गमले में लगाया जा सकता है. पौधों की नियमित देखभाल, समय पर पानी देना, हल्की खाद और धूप-छांव का सही संतुलन जरूरी होता है. जब पौधे तैयार हो जाएं, तो उन्हें स्थानीय बाजार, किसानों, सरकारी योजनाओं या ठेकेदारों को बेचा जा सकता है.

योजना के लिए आवेदन कैसे करें

छोटी नर्सरी योजना के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है. इच्छुक लोग बिहार उद्यान निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.

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सुभाष पांडेय एक सीनियर और अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 32 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, संपादन और रिपोर्टिंग के विभिन्न आयामों में कार्य करते हुए पत्रकारिता को मजबूत दिशा दी है।

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