मुख्यमंत्री ने किया ‘हुनर हाट’ प्रदर्शनी का उद्घाटन

ऽ केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा परम्परागत उद्यम को प्रोत्साहित किया जा रहा है : योगी
ऽ एक जनपद एक उत्पाद’ योजना से वर्ष 2018-19 में राज्य के निर्यात में 28 प्रतिशत की वृद्धि
ऽ सदियों पुरानी विरासत को अवसर दिलाने के लिए हुनर हाट का आयोजन : नकवी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा और मार्गदर्शन में केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा परम्परागत उद्यम को प्रोत्साहित किया जा रहा है। हुनर हाट के आयोजन से परम्परागत शिल्पकारों, कलाकारों, कारीगरों को अपने कौशल को प्रदर्शित करने का मंच प्राप्त हुआ है। इससे परम्परागत व्यवसाय में लगे शिल्पकार, कलाकार, कारीगर आदि लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि हुनर हाट का मंच परम्परागत उद्यमियों के लिए अपने उत्पादों के निर्यात का माध्यम भी बनेगा।
मुख्यमंत्री ने यह विचार आज यहां अवध शिल्पग्राम में आयोजित हुनर हाट के उद्घाटन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। कार्यक्रम में सम्मिलित होने से पूर्व मुख्यमंत्री जी ने फीता काटकर हुनर हाट का उद्घाटन किया। कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री जी ने हुनर हाट प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। ज्ञातव्य है कि भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा हुनर हाट प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा अवध शिल्पग्राम का निर्माण परम्परागत उद्यमियों व शिल्पकारों को आगे बढ़ाने के लिए कराया गया है। राज्य सरकार यहां पर निरन्तर रचनात्मक गतिविधियां संचालित करने के लिए कार्य कर रही है। अवध शिल्पग्राम में हुनर हाट का आयोजन किया गया है, जो 10 दिन चलेगा। 24 जनवरी, 2020 को 70वें उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस पर तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर परम्परागत कारीगरों और श्रमिकों के लिए नई योजना का शुभारम्भ किया जाएगा। इस दौरान ‘एक जनपद एक उत्पाद’ योजना, माटी कला बोर्ड, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना तथा खादी व ग्रामोद्योग से सम्बन्धित सेमिनार आयोजित किये जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अवध शिल्पग्राम का तीन प्रकार से उपयोग करना चाहती है। एक, ‘एक जनपद एक उत्पाद’ योजना के सभी 75 जनपदों के पारम्परिक और विशिष्ट उत्पादों की यहां पर वर्ष भर प्रदर्शनी संचालित हो। इसके लिए ‘एक जनपद एक उत्पाद’ योजना के उद्यमियों को यहां पर शोरूम आवंटित करने पर गम्भीरता से विचार किया जा रहा है। दूसरा, देश का प्रत्येक राज्य भी अपने उत्पाद के लिए यहां शोरूम बुक कराये। प्रदेश सरकार उनके उत्पाद की ब्राण्डिंग और मार्केटिंग के लिए तैयार है। तीसरा, दुनिया के अच्छे उद्यमी जो परम्परागत उद्यम को प्रोत्साहित करने के इच्छुक हैं, प्रदेश सरकार उनकी पहल को भी आगे बढ़ा सकती है, क्योंकि अपनी 23 करोड़ जनसंख्या के कारण उत्तर प्रदेश दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश परम्परागत उद्यम में देश और दुनिया में प्रथम स्थान पर था। पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा अपेक्षित ध्यान न दिए जाने के कारण परम्परागत शिल्पकारों, कारीगरों, कलाकारों की कला लुप्त होती जा रही थी। प्रदेश सरकार द्वारा 24 जनवरी, 2018 को राज्य के 68वें स्थापना दिवस, जिसे पहली बार ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ के रूप में मनाया गया, के अवसर पर राज्य के परम्परागत उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए ‘एक जनपद एक उत्पाद योजना’ का शुभारम्भ किया गया। योजना के तहत परम्परागत शिल्पियों, उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए शासन स्तर से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें शिल्पियों व उद्यमियों के विभिन्न प्रदर्शनियों में सम्मिलित होने के लिए सब्सिडी देने, पारम्परिक उत्पादों की मैपिंग, ब्रांडिंग तथा मार्केटिंग के कार्यक्रम सम्मिलित हैं। उत्पादों की मैपिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग आदि एम0एस0एम0ई0 की रीढ़ है। उत्तर प्रदेश में एम0एस0एम0ई0 का क्षेत्र पहले से ही काफी विकसित है। यह राज्य में डिफेन्स इण्डस्ट्रियल मैन्यूफैक्चरिंग कॉरिडोर के विकास में सहायक है।
राज्य सरकार के प्रोत्साहन तथा ‘एक जनपद एक उत्पाद’ योजना के उद्यमियों के परिश्रम और पुरुषार्थ से वर्ष 2018-19 में राज्य के निर्यात में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि पूरे देश के निर्यात में 08 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। जनपर मुरादाबाद से 6000 करोड़ रुपए के उत्पादां का निर्यात किया गया। जनपद भदोही से 4000 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ। प्रदेश का परम्परागत उद्यमी केन्द्र और राज्य सरकार के प्रोत्साहन से निर्यात बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ‘एक जनपद एक उत्पाद’ योजना के माध्यम से निर्यात बढ़ाने वाले उद्यमियों चिन्हित कर सम्मानित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पारम्परिक शिल्प और उद्यम में उत्तर प्रदेश बहुत समृद्ध है। यहां के सभी 75 जनपदों का किसी न किसी उत्पाद की विशिष्ट पहचान है। लखनऊ की चिकनकारी, मुरादाबाद का पीतल का कार्य, अलीगढ़ का हार्डवेयर, मेरठ का खेल का सामान, पीलीभीत की बांसुरी, अमरोहा की ढोल व तबले, कन्नौज का इत्र, आगरा व कानपुर का चमड़े का उत्पाद, भदोही का कालीन, वाराणसी की साड़ी आदि सम्पूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि विगत 02 वर्षों में उन्होंने महसूस किया है कि प्रदेश के परम्परागत उद्यमियों को मार्केटिंग आदि में थोड़ा सहयोग मिल जाए, तो वे पूरे देश में लोहा मनवा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 69वें स्थापना दिवस पर ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान’ योजना शुरू की गई। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज की संकल्पना गांवों के स्वावलम्बन पर आधारित थी। इसमें गांवों में सभी प्रकार के कार्यों को करने वाले दक्ष कारीगर लुहार, बढ़ई, कुम्हार आदि मिल उपलब्ध थे। बाजारीकरण के कारण यह व्यवस्था संकट में पड़ गई। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना राज्य सरकार द्वारा परम्परागत कारीगरी से जुड़े लोगों के लिए प्रारम्भ की गयी है। इसके तहत उन्हें प्रशिक्षण और प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। प्रशिक्षण अवधि में मानदेय तथा प्रशिक्षण के बाद टूल किट प्रदान की जाती है। अपना व्यवसाय प्रारम्भ करने के इच्छुक लाभार्थियों को मुद्रा योजना, स्टैण्डअप योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना आदि के तहत सब्सिडी के साथ आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पर्यावरण एवं प्रकृति की रक्षा के लिए माटीकला बोर्ड को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे प्लास्टिक और थर्माकोल के इस्तेमाल से प्रकृति को होने वाली क्षति से रोका जा सके। इसके तहत गांव के कुम्हार को अपै्रल से जून माह तक निःशुल्क मिट्टी निकालने के लिए तालाब दे दिया जाता है। इससे बरसात में तालाब जल संरक्षण के लिए तैयार हो जाता है। साथ ही, कुम्हार को बर्तन बनाने के लिए मुफ्त मिट्टी भी मिल जाती है। कुम्हारों को इलेक्ट्रिक व सोलर चाक उपलब्ध कराए। इससे परम्परागत कुम्हारी उद्यम विकसित हुआ, उत्पादन भी बढ़ा तथा मिट्टी के बर्तन सस्ते हुए। इससे प्लास्टिक व थर्माकोल के प्रयोग पर प्रभावी रोक भी लगी है।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए केन्द्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि दस्तकार, शिल्पकार, कारीगरों की सदियों पुरानी विरासत को अवसर दिलाने के लिए हुनर हाट का आयोजन किया गया है। इससे परम्परागत उद्यमियों को रोजगार और रोजगार के मौके मिले हैं। साथ ही, स्वदेशी उत्पादों के निर्माण और विपणन का मौका भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि देश के हर हिस्से में हुनर की मजबूत विरासत है। हुनर हाट के माध्यम से यह विरासत लोगों के सामने आ रही है।
केन्द्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की मंशा है कि हुनरमन्दों को मौका मिले। समाज के सभी वर्गों में यह हुनरमन्द मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने से 23 राज्यों से आये हुनरमन्दों का हौसला बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि लखनऊ के साथ आज हैदराबाद में भी हुनर हाट की शुरुआत हो रही है। हुनर हाट में बहुत से शिल्पकार मौके पर ही हुनर का प्रदर्शन कर उत्पाद बनाते हैं और उनकी मार्केटिंग भी करते हैं। इससे लोगों को उनका परिश्रम और कौशल दिखाई पड़ता है।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री डॉ0 दिनेश शर्मा ने कहा कि हुनर हाट शिल्पियों को अपने उत्पाद की मार्केटिंग का अवसर उपलब्ध कराता है। प्रदेश में मुख्यमंत्री जी ने एक जनपद एक उत्पाद योजना संचालित की है। जिससे गुणवत्तापूर्ण कार्य को प्रोत्साहन तथा रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव ए0के देव बर्मन ने कहा कि हुनर हाट क्राफ्ट, क्यूजीन, कल्चर को एक मंच पर लाता है। अब तक 16 हुनर हाट का आयोजन किया गया है। इसमें 2000 से अधिक कारीगर सम्मिलित हो चुके हैं। हुनर हाट का आयोजन आगे भी जारी रहेगा।
कार्यक्रम के अन्त में मौलाना आजाद एकेडमी फॉर स्किल्स के चेयरमैन श्री आर0 रहमान ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, नगर विकास मंत्री आशुतोष टण्डन, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’, अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री मोहसिन रजा, जल शक्ति राज्य मंत्री बलदेव ओलख, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सैयद गैयूरुल हसन रिजवी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारीगण तथा बड़ी संख्या में उद्यमी उपस्थित थे।

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