मोबाइल नंबर को घर से आधार से जोड़ने की व्यवस्था चालू, करके देखें

नई दिल्ली। अब आप घर से ही मोबाइल नंबर को आधार कार्ड से लिंक कर सकते हैं। मोबाइल फोन उपभोक्ताओं के लिए सरकार ने इस काम को करने की नई व्यवस्था की है, जो एक दिसंबर से प्रभाव में आ चुकी है। ऐसे में स्पष्ट है कि मोबाइल नंबर को आधार से लिंक कराने के लिए अब उपभोक्ताओं को टेलीकॉम स्टोर्स और दुकानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यूनीक इडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आईजीएआई) ने इस बारे में कहा है कि उपभोक्ता टेलीकॉम कंपनियों को अपनी बायोमीट्रिक पहचान दिए बगैर भी मोबाइल नंबर से आधार कार्ड को लिंक करा सकते हैं। यह काम करने के दो तरीके हैं। पहला, जिसमें उपभोक्ताओं को ऑनलाइन प्रक्रिया से गुजरना होगा। जबकि, दूसरे में आधार का वेरिफिकेशन आईवीआर हेल्पलाइन नंबर के जरिए किया जा सकता है। आपको बता दें कि केंद्र सरकार के निर्देशों पर छह जनवरी 2018 तक मोबाइल नंबर को आधार कार्ड से लिंक कराना अनिवार्य है।

यह है लिंकिंग का पहला तरीका
उपभोक्ता को अपनी टेलीकॉम सर्विस कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां मोबाइल से आधार लिंक करने वाले विकल्प में उसे मोबाइल नंबर भरना पड़ेगा। कंपनी इसके बाद उपभोक्ता को वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) भेजेगी, जिसे बाद में उसी जगह भरना होगा। यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद साइट पर मैसेज आएगा, जिसके बाद उपभोक्ता को अपना आधार नंबर की जानकारी देनी होगी। फिर टेलीकॉम कंपनी यूआईडीएआई को ओटीपी रिक्वेस्ट बढ़ाएगी। अगर उस आधार नंबर से कोई मोबाइल नंबर रजिस्टर होगा, तो पर ओटीपी आएगा। उपभोक्ता को यूआईडीएआई की ओर से ई-केवाईसी का मैसेज भी मिलेगा। उपभोक्ता को अब दी गई शर्तों को स्वीकारते हुए ओटीपी भरना होगा। उपभोक्ता की ओर से दी गई जानकारी स्वीकार किए जाने के बाद उसे मैसेज भेजा जाएगा, जिसमें पुष्टि होगी कि उसका मोबाइल नंबर दोबारा से आधार नंबर से वेरीफाई हो गया है।

दूसरे तरीके से ऐसे आधार को करें लिंक
मोबाइल नंबर को आधार से दूसरे तरीके से भी लिंक किया जा सकता है, जो टेलीकॉम कंपनी की आईवीआर हेल्पलाइन के माध्यम से होता है। कंपनी की ओर से इसमें उपभोक्ता को फोन आता है, जिस पर उससे उसका नंबर पूछा जाएगा। फिर एक ओटीपी यूआईडीएआई को भेजा जाएगा, जिसके जरिए उस नंबर से आधार कार्ड को लिंक किया जा सकेगा। आगे ओटीपी उपभोक्ता के नंबर पर आएगा। अब आईवीआर पर दोबारा उसी से जुड़ा एक मैसेज मिलेगा। ऐसे में उपभोक्ता को वहां ओटीपी देना होगा। अगर वह सही हुआ तो उसकी ई-केवाईसी की जानकारियां यूआईडीएआई से जुड़ जाएंगी।

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