विश्व में सबसे पहले 1925 में मनाया गया बाल दिवस: डाॅ॰ के.के. वर्मा

शाहजहांपुर। एस.एस. काॅलेज, के वाणिज्य विभाग में चाचा नेहरू का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया। बाद दिवस के अवसर पर शिक्षकों ने छात्रों के लिए कार्यक्रम आयोजित किया। शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने नहरू जी के चित्र पर पुष्पांजलि की। इसके बाद इसके बाद डाॅ॰ के.के. वर्मा ने बाल-दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्व में सबसे पहले 1925 में बाल दिवस मनाया गया था। बहुत से देश 1 जून को बाद दिवस मनाते हैं। भारत में पहले 20 नवम्बर को बाल-दिवस मनाया जाता था किन्तु बाद में बच्चों के प्रति नेहरू जी के लगाव को देखते हुए उनके जन्मदिन 14 नवम्बर को बाल-दिवस मनाया जाने लगा। बाल दिवस का मुख्य उद्देश्य विकलांग, गरीब, असुविधाग्रस्त और पीड़ित बच्चों की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित करना था ताकि लोगों और संस्थाओं को ऐसे बच्चों के प्रति अपने दायित्व का बोध हो सके। डाॅ॰ वर्मा के उद्बोधन के बाद डाॅ॰ देवेन्द्र सिंह ने ‘‘बच्चे मन के सच्चे‘‘ गीत सुनाया। डाॅ॰ अजय वर्मा ने शायरी सुनाकर छात्रों का मनोरंजन किया। डाॅ॰ अभिजीत मिश्रा ने ‘‘मिले हो तुम हमको बड़े नसीबों से‘‘ गीत सुनाया। मयूरी सिंह ने ‘‘चांद ने पूछा तारों से‘‘ गीत पर डाॅन्स करके सभी का मन मोह लिया। डाॅ॰ सचिन खन्ना ने ‘‘ये तो सच है कि भगवान है‘‘ गीत सुनाया। डाॅ॰ संतोष प्रताप सिंह ने ‘‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी‘‘ गीत सुनाकर सभी का मन मोह लिया। कु॰ जागृति ने जगजीत सिंह की गजल ‘‘कागज की कश्ती‘‘ पेश की। डाॅ॰ अनुरूद्ध सिंह ने ‘‘किसी को चाहते रहना खता तो नहीं‘‘ गजल सुनाई। सूर्यांश सिंह ने ‘‘मैं तेरे काबिल हूँ या तेरे काबिल नहीं‘‘ गीत सुनाया। कुु॰ गुलफ्शा खान और कु॰ प्रिया गुप्ता ने ‘‘प्रेम रतन धन पायो‘‘ गाने पर मनमोहक डाॅन्स किया। डाॅ॰ अनुराग अग्रवाल, डाॅ॰ गौरव सक्सेना, डाॅ॰ मनीष कुमार और डाॅ॰ जगदीश कुमार ने चुटकुले सुनाकर बच्चों का मनोरंजन किया। डाॅ॰ सौरभ तिवारी ने हास्य और व्यंग की कविताएं सुनाकर बच्चों को हँसी के फब्बारे में डुबो दिया। कार्यक्रम के बीच में शिक्षकों ने बच्चों को टाॅफियां बाटीं और अन्त में सूक्ष्म जलपान कराया। डाॅ॰ देवेन्द्र सिंह के संचालन में हुए कार्यक्रम में बच्चों की ओर से प्रियंका रस्तोगी ने शिक्षकों का धन्यवाद ज्ञापित किया और शिक्षकों पर गीत भी सुनाया।

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