‘महात्मा गाँधी’ को भी हुआ था, 55 साल की उम्र में ‘प्रेमरोग’ (Love)

 

दुनिया के महान नेताओं में से एक महात्मा गाँधी की जिंदगी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। भारत की स्वतंत्रता में उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता है। उनकी आत्मकथा ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ भी दुनिया भर में प्रचलित है। इस आत्मकथा में महत्मा गाँधी की जिंदगी की कई महत्वपूर्ण बातें लिखी है। लेकिन कुछ बातें ऐसी भी है जिनके बारे में बहुत ही कम लोग जानते है। और इन बातों का जिक्र किसी किताब में भी नहीं है। जी हाँ आज हम आपको महात्मा गाँधी की जिंदगी के बारे में वो बात बताने जा रहे है जो उन्होंने कभी ‘बहुत ही निजी’ मामला बताकर कही थी।

हम सभी जानते है कि महात्मा गाँधी का विवाह बहुत की कम उम्र में जब वे 13 वर्ष के थे तब कस्तूरबा से हो गया था। लेकिन अपनी शादी के लगभग तीन दशक बाद महात्मा गाँधी को एक अन्य महिला से प्रेम हो गया था। उस समय गांधीजी की उम्र 55 वर्ष थी और जिस महिला से उन्हें प्रेम हुआ था वे 47 वर्ष की थी। उस महिला का नाम सरलादेवी चौधरानी था। ये उस समय की बात है जब गांधीजी कांग्रेस के सर्वप्रमुख नेता नहीं हुए थे। लेकिन उनकी एक विवाहित महिला से भावनात्मक निकटता उस वक्त काफी चर्चा का विषय रही थी।

हालाँकि ऐसा बिलकुल भी नहीं था की गांधीजी ने इस प्रेम को छिपाया हो। उन्होंने खुद सी.गोपालाचारी को एक पत्र लिखकर इस बात का जिक्र किया था कि ‘मुझे प्रेम हो गया है’ गोपालाचारी को गांधीजी की इस बात से धक्का लगा और उन्होंने गांधीजी को कड़े शब्दों में पत्र लिखकर कहा कि ‘कस्तूरबा सुबह का सूरज है और सरलादेवी कैरोसिन लैंप’

सरलादेवी और गांधीजी राजनीतिक आंदोलनों की वजह से करीब आये थे उन्होंने साथ मिलकर पंजाब, बनारस, अहमदाबाद, बॉम्बे, बरेली, झेलम, हैदराबाद, झांसी और कोलकाता जैसे कई शहरों का साथ में दौरा किया था। सरलादेवी रविन्द्र नाथ टैगोर की करीबी रिश्तेदार थी और उनका विवाह रामभुज दत्त चौधरानी से हुआ था। इस तरह का था महात्मा गाँधी को शादीशुदा महिला से प्यार। उस समय गांधीजी ने सरलादेवी के साथ अपने रिश्ते को “आध्यात्मिक विवाह” बताया था।

 

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