न पैर में जूते थे, न ही घर में बिजली, क्या कहानी है एशिया कप हॉकी प्लेयर नेहा गोयल की

प्रतिभा छिपाने से नहीं छिपती। इसे तराशने वाला मिल जाए, तो फिर यह किसी के रोकने से रुकती भी नहीं । ऐसी ही दास्तां है हॉकी की सनसनी और एशिया कप जीतने वाली भारतीय टीम की खिलाड़ी नेहा गोयल की। एक समय था, जब नेहा के पास पहनने को जूते और पढ़ने को किताबें नहीं थीं। पारिवारिक हालात बदतर। लेकिन आज उसने अपने घर-परिवार के अंधेरे को रोशनी की नयी किरण से दूर कर दिया है।

सोनीपत के आर्य नगर में रहने वाली नेहा के परिवार की कायापलट हो गई है। इसका श्रेय नेहा को जाता है, जिसने हिम्मत, मेहनत, प्रतिभा के बल पर यह किया। कुछ साल पहले तक उनके घर में बिजली नहीं थी और पूरा परिवार तेल के दीये जलाकर गुजर-बसर करता था। पिता उमेश गोयल एक फैक्टरी मेंं मजदूरी कर घर का खर्च चलाते थे। माता सावित्री घर के काम तक ही सीमित थी। वे 3 बहने हैं। ऐसे में भी नेहा ने खेलों की ओर कदम बढ़ाया। उसकी प्रेरणा बनी उसकी सहेली सीमा। वह भी हॉकी खिलाड़ी है।
नेहा ने हॉकी मैदान में कदम रखा तो कोच प्रीतम सिवाच को उसकी प्रतिभा आंकने में देर नहीं लगी। इसके बाद नेहा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। नेहा कहती हैं कि वह देश के लिए ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना चाहती हैं। इसके लिए कड़ा परिश्रम कर रही हैं।

मां बोली-बेटे की कमी महसूस नहीं होती
नेहा को नौकरी मिलने के बाद उसकी मां सावित्री ने कानों में सुनने की मशीन लगवाई है। सावित्री कहती हैं कि उन्हेंं अब बेटे की कमी महसूस नहीं होती। उन्होंने कहा कि नेहा ही मेरा बेटा है।

ये उपलब्धि नेहा के नाम
अंडर-14 में स्कूल स्टेट मेंं रजत, स्कूल नेशनल में स्वर्ण पदक जीता। 13 वर्ष की उम्र में सीनियर नेशनल हॉकी स्पर्धा में खेलते हुए रजत पदक जीता। वर्ष 2016 में अंडर-18 में एशिया कप के लिए चयन हुआ। कांस्य पदक झटका। वर्ष 2016 नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक जीता। लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हॉकी टूर्नामेंट में अंडर-21 आयु वर्ग में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के खिताब से नवाजा गया। 2013 मेंं स्कॉटलैंड में जूनियर टेस्ट सीरीज में स्वर्णिम प्रदर्शन किया। वर्ष 2014 में जूनियर नेशनल हॉकी स्पर्धा मेंं हरियाणा की कप्तान रहीं और स्वर्ण पदक दिलाया। वर्ष 2015 में जूनियर नेशनल व बाद में नेशनल गेम में स्वर्ण पदक झटके। वर्ष 2015 मेंं रेलवे ने उन्हें क्लर्क के रूप में भर्ती किया। वर्ष 2016 में सीनियर नेशनल हॉकी स्पर्धा में रेलवे की ओर से खेलते हुए नेहा को सर्वश्रेष्ठ डिफेंडर खिलाड़ी का खिताब मिला। एशिया कप में वे सभी 5 मैच में टीम का हिस्सा रहीं।

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