नक्सलियों के मुंह में बनेगा राजधानी का एक उपकारा

नक्सलियों के मुंह में बनेगा राजधानी का एक उपकारा

>> डीएम ने मालिक गरमजरूआ 10 एकड़ जमीन अतिक्रमण मुक्त कराने का दिया आदेश
>> 61 किसानों का जमीन पर आजतक हैं कब्जा ,दर्जनों का है जमाबंदी कायम
>> अंचलाधिकारी ने दर्जनों किसानों का जमाबंदी निरस्त करने के लिए की कार्रवाई
>> किसानों का हैं कहना ,सरकार मुआवजा दें नहीं तो जाएंगे कोर्ट
>> वकीलों की मांग ,सुरक्षित जगह पर हो कोर्ट एवं जेल

रवीश कुमार मणि

पटना ( अ सं ) । सुशासन का शान कहिये या फिर जानकारी का अभाव । बीते 15 नवंबर 2005 को जहानाबाद जेल ब्रेक कांड में कई पुलिसकर्मी की हत्या एवं दर्जनों जख्मी हुये थे, हथियारों को लूट लिया गया था। इसके बाद भी सरकार सिख लेने को तैयार नहीं हैं और राजधानी का एक उपकारा का निर्माण नक्सलियों के मुंह में कराने का निर्णय लिया गया हैं । 10 एकड़ जमीन में बनने वाले उपकारा पर 61 किसानों का कब्जा हैं ।दर्जनों का जमाबंदी कायम हैं । किसानों का कहना है की सरकार मुआवजा दे तो ठीक नहीं तो कोर्ट के शरण में जाएंगे ।
पटना के पालीगंज क्षेत्रों में नरसंहार और नक्सली गतिविधियों का वर्चस्व को लेकर बीते 1999 में मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की सरकार ने पालीगंज को अंचल से अनुमंडल का दर्जा दे दिया । ऐसा प्रावधान हैं की अनुमंडल स्तर पर अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय रहेगी । 16 वर्षों बाद 22 मई 2015 को पालीगंज अनुमंडल में वैकल्पिक न्यायालय का उद्घाटन हुआ और अल्प संसाधन के बीच काम करना शुरू हुआ ।
प्रावधान के अनुसार कार्यरत अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय में एक उपकारा होना हैं । 15 जून 2017 को मंत्री परिषद (कैबिनेट )की बैठक में, पालींज में उपकारा बनाने का प्रस्ताव ,मद संख्या 14 पारित हुआ । कैबिनेट बैठक के पारित आदेश के आलोक में गृह विभाग व राजस्व विभाग जुट गयी । इस दिशा में जिलाधिकारी ने अपने विभागीय ज्ञापांक -1364 दिनांक -10 /08 /2017 को लिखे पत्र के माध्यम से महानिरीक्षक, कारा एवं सुधार सेवाएं ,गृह विभाग ,बिहार ,पटना को कहां है की पालीगंज अंचल के मौजा रामपुर नहवॉ, थाना नंबर -352 ,खाता संख्या -438 ,प्लॉट संख्या – 208 ,रकवा – 10 एकड़, ( गैरमजरूआ मालिक )पर उपकारा का निर्माण होगा । जिलाधिकारी ने उक्त भूमि को स्थानतरंण करने की स्वीकृति प्रधान करते हुये ,प्रधान सचिव ,राजस्व विभाग ,प्रधान सचिव गृह विभाग ,आयुक्त ,पटना ,अधीक्षक ,केन्द्रीय कारा बेऊर, एसडीओ व डीसीएल आर को सूचित किया हैं वहीं जिलाधिकारी ने अंचलाधिकारी, पालीगंज को आदेश दिया हैं की बनने वाले उपकारा के लिए कारा व सुधार सेवाएं ,गृह विभाग के नाम उक्त भूमि को नि: शुल्क ,स्थायी रूप से स्थानतरंण कर दिया जाएं साथ ही अतिक्रमण भूमि पर दखल कब्जा दिलायें।
जिस भूमि पर उपकारा बनाने की बात चल रहीं हैं वह पालीगंज मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर ,अति संवेदनशील एवं नक्सल प्रभावित हैं और आज भी इन क्षेत्रों में नक्सली संगठन माओवादी का वर्चस्व व्याप्त हैं ।आज भी लोग नक्सलियों के खौफ में जीते हैं । वहीं जिस भूमि को अतिक्रमण मुक्त करा दखल कब्जा दिलाने की बात कहीं गयी हैं उसपर सैकड़ों वर्षों से 61 किसानों का कब्जा हैं । हाल गैर मजरूआ जमीन होने के कारण वर्षों पूर्व से दर्जनों किसानों का जमाबंदी कायम हैं ।
रामपुर नगवां गांव के बधार में बनने वाले उपकारा के लिए पालीगंज अनुमंडल एवं अंचल प्रशासन की ओर से अतिक्रमण भूमि को मुक्त कराने के लिए 61 किसानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गयी हैं एवं दर्जनों किसानों की जमाबंदी रद्द करने की प्रक्रिया भी अंतिम दौर में हैं । उक्त भूमि पर लगें फसल धान के कटनी के बाद प्रशासन डी मार्केसन में जुट जायेगी । इधर किसान भी एकजुट हो गये हैं । किसानों का कहना हैं की भूमी का प्रकार मालिक गरमजरूआ हैं और पूर्व में विधिवत जमाबंदी कायम हैं और दखल कब्जे में हैं । सरकार निर्माण के लिए अधिग्रहण करना चाहती हैं तो मुआवजा देना होगा । जबरदस्ती की गयी तो कोर्ट के शरण में जाएंगे ।इधर व्यवहार न्यायालय में काम कर रहें अधिकांश वकीलों की राय और सरकार से मांग हैं की कोर्ट और जेल का निर्माण सुरक्षित जगह पर हो, इसमें राजनीति नही होनी चाहिए । बहरहाल अब देखना बड़ा ही दिलचस्प होगा की जिला प्रशासन की कार्रवाई ,किसानों की एकजुटता और वकीलों का मांग में उपकारा कहां होगा ।

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