राष्ट्रीय निषाद संघ का आरक्षण व परम्परागत अधिकारों की मांग को लेकर धरना

उन्नाव। राष्ट्रीय निषाद संघ (एनएएफ) जिलाधिकारी उन्नाव की ओर से निषाद/मछुआरा समुदाय के परम्परागत पेशों की बहाली व अनुसूचित जाति आरक्षण की मांग को लेकर स्थानीय निराला पार्क में राष्ट्रीय सचिव चै0 लौटन राम निषाद व जिलाध्यक्ष जुगल किशोर कश्यप के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन किया गया। राष्ट्रीय निषाद संघ ने प्रदेश सरकार पर मत्स्य पालन, बालू मौरंग खनन, नौकाफेरी घाट के मछुआरों के परम्परागत पुश्तैनी पेशों पर माफियाओं का कब्जा कराकर बेदखल करने का आरोप लगाया। वर्तमान में मछुआरा समाज अपने पुश्तैनी पेशें से वंचित हो बेकारी व भुखमरी की स्थिति में पहुंच गया है। जंसार के तालाबों , झीलों पर गैर मछुआ समुदाय के दबंग माफिया का कब्जा स्थानीय अधिकारियों ने मिली भगत कर कर दिया । इसको लेकर मछुआरों में बड़ा असंतोष दिखाई दिया। मछुआरों ने मत्स्य पालन, बालू मौरंग खनन पट्टा शासनादेश 1994-95 के अनुसार करने, 2011 से पूर्व की तरह तालाबों, झीलों, जलाशयों की सिरदारी मछुआ जातियों को बहाल करने, मझवार (मल्लाह, केवट, माझी), गोड (गोडिया, धुरिया, कहार, रायकवार, धीमर) को अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी करने, मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा देने जैसी 23 सूत्रीय मांगो को लेकर धरना दिया तथा जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन सौंपा।

राष्ट्रीय निषाद संघ के राष्ट्रीय सचिव लौटन राम निषाद ने कहा कि चुनाव के समय श्री राम – निषाद राज की मित्रता का हवाला देकर भाजपा निषाद मछुआरा जातियों का वोट लेती रही है और जब-जब प्रदेश में सरकार बनी, मछुआरों को उनके पेशों से वंचित करने का काम किया गया। उन्होंने भाजपा पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव – 2012 के चुनाव घोषणा पत्र में निषाद, मल्लाह, केवट, माझी, धीवर, धीमर ,कहार , रायकवार, तुरहा, बिन्द, कुम्हार, प्रजापति, राजभर, बंजारा, लोनिया, नोनिया आदि अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल कराने तथा निषाद/मछुआ समुदाय का परम्परागत पेशा बहाल करने का वादा किया था। यही नहीं लोकसभा चुनाव से पूर्व अक्टूबर 2013 में भाजपा ने फिशरमेन विजन डाक्यूमेन्ट्स/मछुआरा दृष्टि पत्र जारी करते हुए सरकार बनने पर आरक्षण की विसंगति दूर करने तथा मछुआरा का पेशा बहाल कर आर्थिक विकास करने का संकल्प लिया था। परन्तु मछुआरों के हित में अभी तक एक भी काम नहीं किया गया। उन्होंने प्रदेश सरकार से मल्लाह, केवट, कहार, लोध, बंजारा आदि विमुक्त जातियों को महाराष्ट्र पैटर्न पर आरक्षण कोटा देने की मांग किया है।

जिलाध्यक्ष जुगल किशोर कश्यप ने कहा कि मछुआरें 2008 से मत्स्य जीवी सहकारी समिति बनाने का निवेदन व भागदौड़ मत्स्य विभाग के अधिकारियों के यहां करते रहे परन्तु अधिकारी हीलाहवाली करते रहें और जैसे ही भाजपा की सरकार बनी एक माफिया की समिति का गठन कराकर जंसार व आस-पास के तालाबों झीलों, जलाशयों का पट्टा मत्स्य माफिया की समिति के नाम से मिली भगत कर स्थानीय अधिकारियों ने कर दिया जिससे तालाबों पर आश्रित मछुआरे बेकारी व भुखमरी की स्थिति में पहुंच गये। उन्हेांने सरकार व जिला प्रशासन से जंसार के तालाबों का ठेका पट्टा निरस्त कर स्थानीय मछुआरेा को देने की मांग की है। धरना सभा को राजेश्वरी कश्यप सभासद, लक्ष्मी नारायण प्रधान, संतोष कश्यप, राकेश कश्यप, राजू कश्यप, राम प्रसाद गोड़िया, छेदीलाल कश्यप, राजेश कश्यप, आदि ने सम्बोधित किया।

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