आजमगढ़ का अबू सलेम: रोटी की डिलेवरी करने वाला कैसे बना माफिया डान

आजमगढ़। देश को दहला देने वाले मुंबई सीरियल बम धमाके के आरोपी अबू सलेम को उम्रकैद की सज़ा सुनाए जाने के बाद मिनी सऊदी कहे जाने वाला सरायमीर कस्बे में उसके घर के आसपास सन्नाटा पसरा है। सलेम को मुंबई बम विस्फोट के मामले में सजा हुई है, लेकिन  सरायमीर कस्बे स्थित उसके घर में ताला लगा है। कस्बे में कोई खास चहल-पहल नहीं दिखी। कस्बे में उसके घर के आसपास सन्नाटा पसरा है। मुंबई बम धमाके के आरोप में गुरुवार को टाडा की विशेष अदालत द्वारा अबू सलेम को उम्र कैद की सज़ा सुनाए जाने के बाद आजमगढ़ एक बार फिर सुर्खियों में है।

दाऊद इब्राहिम के दाहिने हाथ रहे अबू सलेम को सजा सुनाए जाने का कोई असर आज़मगढ़ में नहीं है। आजमगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर सरायमीर में अबू सलेम का पुश्तैनी मकान है। उसके परिवार के लोग सरायमीर में ही रहते हैं। वहां किसी भी तरह का कोई तनाव नहीं है, लेकिन उसके घर के आसपास सन्नाटा पसरा है। कस्बे के लोगों ने भी अदालत के फैसले का स्वागत किया है।

सबने किया कोर्ट के फैसले का सम्मानअबू सलेम के खानदान से ताल्लुक रखने वाले सरायमीर टाउन एरिया के पूर्व चेयरमैन ओबैदुर्रहमान ने कहा कि मैं अदालत के फैसले का सम्मान करता हूं। अदालत ने उसे दोषी पाया इसलिए उसे सजा मिली। कस्बे के ही निवासी सभासद बिलाल अहमद ने कहा कि अदालत के फैसले का सम्मान करना चाहिए। जो भी फैसला है वह उचित है।

भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सहजानंद राय ने कहा कि इस तरह के जघन्य अपराध करने वालो को तो फांसी की सजा होनी चाहिए, लेकिन अदालत ने जो भी सज़ा दी वह पूरी तरह उचित है। इस तरह के लोगों ने आजमगढ़ का नाम बदनाम कर दिया।

किसी ने नहीं खोला मुंह 

मुंबई में 24 वर्ष पूर्व हुए सीरियल बम ब्लास्ट के मामले में न्यायालय ने सरायमीर निवासी अबू सलेम को उम्रकैद और शिवराजपुर के रियाज सिद्दीकी को दस वर्ष कारावास की सजा सुनाई है। आज़मगढ़ के सभी वर्गों की नज़र सुबह से अदालत के फैसले पर थी। एक बजे जैसे ही फैसला आया अबू सलेम से लेकर रियाज के गांव तक सब लोग इसी बात पर चर्चा करते दिखे। परिवार के लोग मौके पर नहीं थे, लेकिन कस्बे और गांव के कुछ लोगो को छोड़ दिया जाए तो कोई बोलने को तैयार नही दिखा।

लोगों की मौत का दोषी गौरतलब है कि मुंबई में 12 मार्च 1993 को हुए सीरियल बम ब्लास्ट में 257 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 713 लोग जख्मी हो गए थे। माफिया डान दाऊद इब्राहिम के इशारे पर हुई इस घटना में के सरायमीर कस्बा निवासी अबू सालिम अंसारी उर्फ अबू सलेम तथा आज़मगढ़ जिले के गंभीरपुर थाना क्षेत्र के शिवराजपुर ग्राम निवासी रियाज सिद्दीकी के नाम सामने आया था। इस घटना के बाद से फरार चल रहे अबू सलेम को पुर्तगाल से प्रत्यर्पण संधि के आधार पर देश में लाया गया जबकि रियाज सिद्दीकी बम ब्लास्ट के कुछ ही समय बाद गिरफ्तार कर लिया गया था।

इस मामले में 16 जून 2017 को टाडा की विशेष अदालत ने अबु सलेम, रियाज समेत छह आरोपियों को दोषी करार दिया था। आज अदालत द्वारा सभी आरोपियों को सजा सुनाई गई। इसमें सलेम को उम्र कैद की सजा हुई जबकि रियाज सिद्दीकी को दस वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई।
सरायमीर कस्बे के पठान टोला स्थित अबू सलेम के आवास पर ताला लटका रहा। हालांकि पहले उनकी मां अजीबुन्निशा और भाई अबू हाकिम, अबू लैश व अबू जैश यहां रहते थे। वर्ष 2007 में उसकी मां का देहांत हो गया था। दोनों भाई भी व्यवसाय को लेकर बाहर रहते हैं।

वकील बाप का अपराधी बेटा

घर पर सबसे बड़ा भाई अबू हाकिम उर्फ चुनचुन सपरिवार रहते हैं, लेकिन आज वह भी नजर नहीं आए। परिवार का कोई सदस्य सामने नहीं आया। मोहल्ले में भी पूरी तरह सन्नाटा रहा। कस्बे में चहल पहल रही। वहीं दूसरे आरोपी रियाज सिद्दीकी के गांव शिवराजपुर में भी उसके घर सन्नाटा पसरा रहा। परिवार का कोई सदस्य घर पर नजर नहीं आया। यहां लोगों पर किसी तरह का असर नहीं दिखा। लोग अपने काम में लगे रहे।

अबू सलेम के पिता अब्दुल कयूम पेशे से अधिवक्ता थे। उनका समाज में काफी दबदबा था। सलेम तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर है तो उसकी दो बहनें भी हैं। अबू सलेम काफी छोटा था तभी उसके पिता की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। वह सरायमीर कस्बे में एक मोटर मैकेनिक की दुकान पर नौकरी करने लगा। कुछ दिन बाद वह टैक्सी चलाने के लिए दिल्ली चला गया।

डिलेवरी बॉय से बना डॉन

अबू सलेम वर्ष 1985 में पहली बार मुंबई गया था। उसने 1986 में बांद्रा और अंधेरी के बीच एक रोटी डिलीवरी लड़के के रूप में काम किया। 1988 में पहली बार सलेम और उसके सहयोगी के खिलाफ अंधेरी पुलिस स्टेशन में पहला मामला दर्ज हुआ।

वर्ष 1988 में अबू सलेम की मुलाकात माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम के भाई अनीस इब्राहिम से हुई। पहले अनीस ने उससे चालक के रूप में काम लिया फिर कुछ समय बाद दाऊद से मिलवाया। इसी के बाद वह अपराध की दुनिया में कदम रखा । वर्ष 1989 में सलेम दाऊद के गिरोह में भर्ती हो गया।
दाऊद ने सलेम को फिल्म इंडस्ट्री में पैसा लगाने और वापस लाने की जिम्मेदारी सौंपी। इसके अलावा डी कंपनी में सलेम को उपनाम अबू मिला। उसे मुंबई में डी कंपनी का बादशाह बना दिया गया। फिल्म इंडस्ट्री के साथ ही पूरी मुंबई में सलेम मशहूर हो गया। 1992 कथित तौर पर फिल्म अभिनेता संजय दत्त को हथियार की आपूर्ति के मामले में भी उसका नाम आया।

और भी है सलेम के अपराधों की सूची

मुंबई सीरियल ब्लास्ट के बाद दाऊद अपने भाइयों के साथ दुबई भाग गया, लेकिन सलेम मुंबई में अपना काम करता रहा। 1998 के बाद सलेम दाऊद से अलग हो गया। 2000 में मिल्टन प्लास्टिक मालिक से तीन करोड़ फिरौती, 2001 में सलेम के खास अजीत ने अभिनेत्री मनीषा कोइराला के निजी सचिव को गोली मारी थी। 2001 में सलेम गिरोह के चार सदस्य इनकाउंटर में मारे गए।

18 सितंबर 2002 को सलेम और उसकी दूसरी पत्नी मोनिका बेदी जाली दस्तावेज ले जाने के लिए पुर्तगाल में गिरफ्तार किए गए। वर्ष 2005 में प्रत्यार्पण संधि के तहत सलेम को भारत लाया गया। वह तभी से जेल में बंद है। अबू सलेम पर वर्ष 1995 में विल्डर प्रदीप जैन की हत्या का आरोप है। पुर्तगाल से प्रत्यार्पण के बाद सलेम दो बार अपने पैतृक गांव सरायमीर आया। पहली बार वह अक्टूबर 2007 में अपनी मां का निधन होने पर अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आया था। इसके बाद उनके चालीसवें में शामिल हुआ। सलेम के अपराध की लंबी फेहरिश्त है, लेकिन वह पहली बार मुंबई सीरियल ब्लाट में बीते 16 जून 2017 को टाडा की विशेष अदालत द्वारा दोषी करार दिया गया।

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